: ज्येष्ठ के पहले मंगल पर श्रद्धालुओं से पटी रामनगरी, संकट मोचन सेना ने किया प्रसाद वितरण
Wed, May 10, 2023
प्रसिद्ध पीठ हनुमानगढ़ी में भक्तों का लगा ताता, हुआ विशेष अनुष्ठान
श्रद्धालुओं के साथ हर किसी आमजन को हनुमानजी महाराज का दिव्य प्रसाद भोजन के रुप मे उपलब्ध करा रहा श्री ज्ञान अन्न क्षेत्र: महंत संजयदास
अयोध्या। ज्येष्ठ का पहला मंगलवार है। जिसको लेकर सुबह से ही लाखों की संख्या में अयोध्या पहुंचे श्रद्धालुओं ने सरयू में स्नान कर हनुमानगढ़ी पर दर्शन पूजन कर रहे है। तो वही इस दौरान हनुमानगढ़ी परिसर में पहुंचे श्रद्धालु हर तरफ बैठे और हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे हैं तो परिक्रमा करते हुए हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे हैं। और पर्व को लेकर अयोध्या की सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दिया गया है। हनुमान गढ़ी मंदिर परिसर में भी बड़ी संख्या पुलिस बल के जवान तैनात हैं। तो वही अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए रूट डायवर्जन भी लागू किया गया है। हनुमानगढ़ी के निकास द्धार पर अनवरत चल रहे संकट मोचन सेना द्धारा श्री ज्ञान अन्न क्षेत्र में आज विशाल प्रसाद वितरण किया गया। ये अन्नक्षेत्र पिछले कुछ वर्षों से लगातार संचालित हो रहा है। अन्न क्षेत्र में आज दिव्य प्रसाद वितरण कर पुण्य कमाया गया। ज्येष्ठ के बड़े मंगल होने के कारण लाखों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।श्री ज्ञान अन्न क्षेत्र श्री हनुमानगढ़ी के शीर्ष श्रीमहंतज्ञानदास जी महाराज के उत्तराधिकारी संकट मोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजयदास चला रहे हैं। महंत संजयदास ने बताया कि हमारे पूज्य गुरुदेव के आशीर्वाद से हम सब ये भंडारा अन्न क्षेत्र प्रतिदिन चला रहे है। सुबह से लेकर दोपहर 1 बजे तक चलने वाले इस भंडारे में तीर्थयात्रियों और गरीबों को बैठा कर प्रसाद ग्रहण कराया जाता है। इस मौके पर संकट मोचन सेना के कार्यवाहक अध्यक्ष पुजारी हेमंत दास, अकिंत दास समाजसेवी शिवम श्रीवास्तव सहित तमाम नागा साधु मौजूद रहे।
हनुमानगढ़ी के गद्दीनशीन श्रीमहंत प्रेमदास जी महाराज के कृपापात्र शिष्य हनुमत संस्कृत स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य महंत डा महेश दास कहते है कि आज हनुमान जी की आराधना के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। वहीं ज्येष्ठ मास में पड़ने वाले प्रत्येक मंगलवार को बड़ा मंगल कहा जाता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार, ज्येष्ठ माह में पड़ने वाले बड़े मंगल पर विधि विधान से पवन पुत्र हनुमान की पूजा करने से व्यक्ति को प्रत्येक कष्ट और बाधा से मुक्ति मिलती है। ज्येष्ठ मास में पड़ने वाले ये मंगलवार काफी खास माने जाते हैं।
पुजारी हेमंत दास कहते है कि ज्येष्ठ मास के बड़े मंगल को हनुमानजी की पूजा का विशेष फल मिलता है। उन्होंने कहा कि इस बार ज्येष्ठ महीने में कुल 4 मंगलवार पड़ रहा है। वहीं इस महीने का पहला बड़ा मंगलवार आज 9 मई को पड़ा। पुजारी हेमंत दास कहते हैं जो भक्त सच्चे मन से इस दौरान भगवान हनुमान की पूजा-अर्चना करता है उसके जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। इसके अलावा हनुमान जी के कुछ मंत्रों के जाप से भी भक्तों के दुख दर्द दूर होते हैं।
: भगवान के मस्तकाभिषेक के साथ महोत्सव का समापन
Sat, May 6, 2023
मोक्ष कल्याणक व हवन पूजन के साथ
पंचकल्याणक महोत्सव का हुआ समापन
अयोध्या। रामनगरी के रायगंज स्थित जैन मंदिर में चल रहे पंचकल्याणक महोत्सव के छठे दिन भगवान के मोक्ष कल्याणक व हवन पूजन के साथ समापन हो गया।वही भगवान भरत की 31 फुट ऊंची प्रतिमा के तीन दिवसीय महामहोत्सव का शुभारंभ हुआ।
सहितासुर प्रतिष्ठाचार्य पंडित विजय कुमार जैन ने भगवान के मोक्ष कल्पनाक की पूजन व क्रियाएं विधिविधान पूर्वक सम्पन्न हुई। गणनी प्रमुख आर्यिका ज्ञानमती माता जी ने प्रवचन करते हुए कहा कि आज भगवान कैलाश पर्वत से मोक्ष को प्राप्त हो गये।आज हम सभी ने पंचकल्याणक प्रतिष्ठा सम्पन्न की इससे आज पाषाण की प्रतिमा भगवान बन गई।आज उन्ही भगवान का मस्तकाभिषेक हो रहा है।भगवान भरत की 31 फुट ऊंची प्रतिमा के मस्तक पर जैसे ही पहली जल की धारा प्रवाहित हुई जैन मंदिर का पूरा प्रांगण भगवान के जयकारों से गुंजायमान हो गया।प्रथम,दुतीय व तिर्तीय कलश क्रमशः धर्मेंद्र कुमार दिल्ली,शीतल राजाभाऊ नासिक महाराष्ट्र,हंसमुख जैन इंदौर मध्यप्रदेश को करने का शौभाग्य प्राप्त हुआ।अयोध्या जैन मंदिर के अध्यक्ष स्वामी रविन्द्र कीर्ति स्वामी ने कहा कि सभी के सहयोग से पंचकल्याणक प्रतिष्ठा निविघ्न सम्पन्न हुई।वही ईश्वर ने भी हम सभी पर कृपा करके मौसम को हम सभी के अनकूल किया।मंदिर समिति के मंत्री डॉ जीवन प्रकाश ने सभी सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया।महामंत्री अमर चन्द्र जैन,कोषाध्यक्ष रिषभ जैन,प्रबन्धक मनोज जैन,अंशुल जैन,भरत गुप्ता,नमन जैन सहित लखनऊ की ज्ञानमती महिला मंडल,सिद्धार्थ जैन सहित कई प्रान्तों व नगरों के लोग मौजूद रहे।
: प्रभावनापूर्वक सम्पन्न हुई भगवान की आहारचर्या
Fri, May 5, 2023
राजा श्रेयांश ने दिया प्रथम आहार
अयोध्या। अयोध्या रायगंज दिगम्बर जैन मंदिर स्थित प्रांगण में चल रहे तीस चौबीसी तीर्थंकर पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के अन्तर्गत पंचम दिवस केवलज्ञान कल्याणक के अन्तर्गत महामुनि भगवान ऋषभदेव की आहारचर्या प्रभावनापूर्वक सम्पन्न हुई, जिसमें महामुनि एक वर्ष 39 दिन तक भ्रमण करते रहे। किसी को भी जैन पद्धति से जैन साधु को आहार कराने की चर्या का ज्ञान न होने के कारण भगवान को आहार नहीं मिल सका। इसी क्रम में राजा श्रेयांस को पूर्व भव का स्मरण हो आया भगवान के दर्शन करते ही और उन्होंने नवधाभक्तिपूर्वक भगवान का पड़गाहन करके भगवान को इक्षुरस (गन्ने का रस) का आहार दिया। राजा श्रेयांस बने श्री अमरचंद, हेमचंद, नेमचंद जैन-टिकैतनगर परिवार ने भगवन को सर्वप्रथम आहार दिया। तत्पश्चात् लगभग 3000 लोगों ने भगवान को क्रम-क्रम से भगवान को आहारदान दिया। इस अवसर पर पंचाश्चर्य की वृष्टि देवों के द्वारा अयोध्या नगरी में की गई।
संहितासूरि प्रतिष्ठाचार्य श्री विजय कुमार जी ने बताया कि मध्यान्ह में भगवान ऋषभदेव को केवलज्ञान प्रगट हो गया, जिसके अन्तर्गत तीनों लोकों की समस्त वस्तुएं भगवान के ज्ञान में एक साथ झलकती हैं। भूत, भविष्य और वर्तमान दर्पण के समान दिखाई देता है। भगवान को केवलज्ञान होते ही सभी ऋतुओं के फल-फूल एक साथ वृक्षों पर आ जाते हैं। यह अतिशय है भगवान के केवलज्ञान का एवं जातविरोधी जीव एक साथ बैठकर खाते-पीते हैं, एक साथ खेलते हैं। परमपूज्य आचार्य श्री विपुलसागर जी महाराज के संघस्थ आचार्य श्री भद्रबाहु महाराज ने भगवान की दिव्यध्वनि के रूप में सभी को अिंहसा परमोधर्मः का उपदेश दिया। इसी क्रम में आचार्य श्री विशदसागर जी महाराज ने दिव्यध्वनि स्वरूप तत्त्वों का विवेचन किया एवं महोत्सव की सम्प्रेरिका गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी ने बताया कि भगवान के समवसरण में 12 सभाएं होती हैं, 8 भूमियां होती हैं एवं भगवान की दिव्यध्वनि 718 भाषाओं में खिरती है। 700 लघु भाषा एवं 18 महाभाषाओं में भगवान की दिव्यध्वनि खिरती है, जिसे सभी प्राणी अपनी-अपनी भाषाओं में समझ लेते हैं। इसी क्रम में प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती माताजी ने आये हुए भक्तों को सम्बोधन दिया। कार्यक्रम के अध्यक्ष एवं पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामीजी के कुशल निर्देशन में सम्पन्न हो रहे हैं। भगवान के मुख्य श्रोता बनने का सौभाग्य श्री जितेन्द्र सपना लुहाड़िया-खण्डवा को प्राप्त हुआ। भरत चक्रवर्ती बनने का चि. सम्यक जैन पुत्र अध्यात्म जैन-लखनऊ को प्राप्त हुआ एवं सौधर्म इन्द्र श्री अध्यात्म-अर्पिता जैन ने इस अवसर पर भगवान के समवसरण की भक्तिपूर्वक पूजा सम्पन्न की। समवसरण का अर्थ है कि यहां पर सभी जीवों को समान रूप से शरण प्राप्त हो, उसे समवसरण कहते हैं। अंत में 1008 दीपकों से भगवान के समवसरण की आरती सम्पन्न की गई। सायं के सांस्कृतिक कार्यक्रम में श्रीमती अनामिका, अंतिमा जैन-प्रीतविहार-दिल्ली के द्वारा सुंदर नृत्य नाटिका प्रस्तुत की। कार्यक्रम में महामंत्री श्री अमरचंद जैन, कोषाध्यक्ष श्री ऋषभ जैन, मीडिया प्रभारी पंकज जैन आदि सहित हजारों श्रद्धालुभक्त सम्मिलित हुए।