: स्वामी हर्याचार्य जी ने रामानंद सम्प्रदाय की ध्वाजा देशभर में फहराई
Sat, Sep 23, 2023
जीवन के हर में स्वामीजी की स्मृति मार्गदर्शन करती है: रामदिनेशाचार्य
अयोध्या। संतो की सराय कही जाने वाली रामनगरी में अनेक भजनानंदी संत हुए है। ऐसे संत जो अपना संपूर्ण जीवन भगवत भजन में ही समर्पित कर दिया उन संतों में एक के परम पूज्य जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी हर्याचार्य जी महाराज। हरिधाम गोपाल पीठ स्वामीजी की तपोस्थली आज भी अपने वैभव को समेटे हुए आध्यात्मिकता को चार चांद लगा रहा है। रामनगरी का आध्यात्मिक जगत जिन आचार्यों से आलोकित है उनमें जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी हर्याचार्य जी महाराज एक है। विशिष्टताद्वौत के साथ-साथ श्री हनुमत उपासना का अद्भुत संयोग उनके व्यक्तित्व का आभूषण था। उन्होंने जगद्गुरु के रूप में देश में दशकों तक रामानंद संप्रदाय की ध्वजा फहराई। जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी हर्याचार्य जी की 16वीं पुण्यतिथि पर आज रामनगरी के संत धर्माचार्यों ने शिद्दत से पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया।इस अवसर पर स्वामी हर्याचार्य के व्यक्तित्व-कृतित्व पर भी चर्चा हुई। स्वामी हर्याचार्य जी को सन् 1989 के प्रयाग कुंभ में जगद्गुरु रामानंदाचार्य के पद पर विभूषित किया गया। महाराज श्री ने हनुमत कवच व ब्रह्मासूत्र, गीता भक्ति दर्शन का 12वां अध्याय, वेदों में अवतार रहस्य, श्री संप्रदाय दर्शन तथा श्रीरामचरित मानस में वैदिकत्व सहित दो दर्जन पुस्तकों की रचना कर हिंदू धर्म-संस्कृति को समृद्ध किया। सन् 2008 में भाद्र शुक्ल सप्तमी उनका साकेतवास हुआ। उनके उत्तराधिकारी रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी कहते हैं कि महाराज श्री नारियल सदृश थे। यह जीवन धन्य है जिस पर उनकी कृपा बरसी। महाराज के सिद्धांतों का अनुसरण करते जीवन जाय, यही प्रार्थना श्री हनुमान जी से अनवरत होती रहती है। जगद्गुरू रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी महाराज कहते है जीवन के हर में स्वामीजी की स्मृति मार्गदर्शन करती है। समारोह की अध्यक्षता जगद्गुरू रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी महाराज ने किया।आये हुए अतिथियों का स्वागत मंदिर से जुड़े रमेश दास शास्त्री, गौरव दास ने किया। इस मौके पर संकट मोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजय दास,रसिक पीठाधीश्वर महंत जनमेजय शरण, नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास, बड़ा भक्तमाल के महंत महंत अवधेश कुमार दास, रंग महल के महंत रामशरण दास, सियारामकिला के महंत करुणानिधान शरण,बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेन्द्र प्रसादाचार्य के कृपापात्र शिष्य सुंदर सदन व मंगल भवन के महंत कृपालु रामभूषण दास, महंत जनार्दन दास, महंत बलराम दास, वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास,पार्षद रमेश दास, महंत कृष्ण कुमार दास, राजगोपाल मंदिर के शरद जी, कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह, पूर्व महापौर ऋषिकेश उपाध्याय, पूर्व मंत्री तेजनारायण पाण्डेय, विकास सिंह, सहित तमाम गणमान्य लोग मौजूद रहें।
: श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के जमीन हड़पने की नीति के विरोध में हनुमानगढ़ी के संत मैदान में
Sat, Sep 23, 2023
श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट काे हनुमानगढ़ी के अंगद टीला की जमीन लेने देंगे, करेगा बड़ा आंदोलन, ईंट से ईंट बजा देंगे
अंगद टीला की जमीन हनुमानगढ़ी हरिद्वारी पट्टी की, जहां पर मंदिर में हनुमानजी और अंगद की मूर्ति है विराजमान: महंत मुरली दास
अयोध्या। सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी के नागा संताें ने शुक्रवार को श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के खिलाफ माेर्चा खाेल दिया है। सभी नागा संताें ने एक स्वर में कहा है कि वह किसी भी कीमत पर श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट काे हनुमानगढ़ी के अंगद टीला की जमीन लेने देंगे। इसके लिए चाहे उन्हें बड़ा आंदोलन ही क्यों ना करना पड़े? ताे वह करेंगे, ईंट से ईंट बजा देंगे। श्रीनिर्वाणी अनी अखाड़ा के श्रीमहंत व हरिद्वारी पट्टी के महंत मुरली दास महाराज ने कहा कि अंगद टीला की जमीन हनुमानगढ़ी हरिद्वारी पट्टी की जमीन हैै। जहां पर मंदिर में हनुमानजी और अंगद की मूर्ति विराजमान है। उस जमीन पर हमसे बहुत पहले मंदिर बना हुआ। तबसे वहां पर हम सब पूजा-पाठ करते हुए चले आ रहे हैं। लेकिन आज मंदिर की छवि काे समाप्त करने का कुचक्र रचा जा रहा है। हम हरिद्वारी पट्टी के महंत हैं। तबसे अंगद टीला की जमीन काे नजूल में दर्शाया जा रहा है। । इससे पहले महंत नारायण दास, महंत गाेकुल दास, महंत रामनेवाज दास, महंत जयकरन दास हरिद्वारी पट्टी के महंत थे। तब यह जमीन नजूल नही थी। उन्हाेंने आराेप लगाते हुए कहा कि श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ऐसा कुचक्र रचकर इस जमीन काे लेने की काेशिश कर रहा है, जिससे वह यहां पर हाेटल बनाकर ज्यादा रूपया कमा सके। महंत ने कहा कि हम चाहते हैं कि हमारी जमीन सुरक्षित रहे। सड़क चाैड़ीकरण में जिन साधुओं व व्यापारियों का मंदिर, मकान, दुकान गया है। उनकाे हम यहां पर बसाने का काम करेंगे। वहीं धर्मसम्राट श्रीमहंत ज्ञानदास महाराज के कृपापात्र उत्तराधिकारी एवं संकटमोचन सेना राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय दास ने कहा कि हनुमानगढ़ी पंच रामानंदीय निर्वाणी अखाड़ा पट्टी हरिद्वारी महंत मुरली दास महाराज के नाम से यह अंगद टीला की जमीन है। जाे श्रीरामजन्मभूमि व श्रीराम हॉस्पिटल के बीचाे-बीच है, जिसमें 1320 से यह जमीन फसली है। उस समय रामनारायण दास हरिद्वारी पट्टी के महंत थे। यह जमीन नजूल में नही थी। उसके बाद 1330 में गाेकुल दास आए। तब भी यह नजूल में नही रही। फिर 1335 में जयकरन दास महंत हुए। उस दाैरान भी यह नजूल में नही था। खेवटदार उस समय महंत जयकरन दास थे। फिर 1359 में रामनेवाज दास हुए। उस समय भी जमीन नजूल में नही रही। उसके बाद महंत मुरली दास हुए। उन्होंने कहा कि प्रशासन या श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने कुचक्र रचकर इस जमीन काे नजूल में दर्शा दिया। ताकि भविष्य में यह जमीन लेने के लिए यह ठीक रहे। हम लाेगाें का मुकदमा रेवेंयू एवं सदर मुंसफ के यहां चल रहा है। ऐसी स्थिति में इस जमीन पर काेई निर्माण या अन्य कार्य नही हाेना चाहिए। संजय दास ने आराेप लगाते हुए कहा कि कल यहां पर श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने गेट खाेलने का प्रयास किया, जिसकाे हम लाेगाें ने कामयाब नही हाेने दिया। उस जगह पर आज भी ताला लगा हुआ और खुदाई भी कर रहे हैं। इस जमीन के लिए हमें जाे भी आंदोलन करना पड़ेगा। वह हम करेंगे। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ही ऐसा करवा रहा है। ट्रस्ट इस तरह का कार्य करे ताे अच्छा नही है। दूसरे की जमीन हड़पे मैरिज लॉन या हाेटल बनाने के लिए ताे यह गलत बात है। इस जमीन का मुकदमा श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से चल रहा है। शासन-प्रशासन काे भी इसमें इंवाल्व किया है। हमारी जमीनाें काे लेने का किसी काे काेई अधिकार नही है। अगर ट्रस्ट ले रहा है ताे इसके गंभीर परिणाम हाेंगे। चाहे इसके लिए ईंट से ईंट ही क्याें ना बजाना पड़े। इस अवसर पर श्रीपंच रामानंदीय निर्वाणी अनी अखाड़ा के समस्त नागातीत माैजूद रहे।
: रामानंद सम्प्रदाय की ध्वाजा देशभर में फहराई
Thu, Sep 21, 2023
संत,धर्माचार्य का समूह दिवंगत आचार्य को देगे श्रद्धांजलि, स्वामी हर्याचार्य के व्यक्तित्व-कृतित्व पर भी होगी चर्चा
अयोध्या। संतो की सराय कही जाने वाली रामनगरी में अनेक भजनानंदी संत हुए है। ऐसे संत जो अपना संपूर्ण जीवन भगवत भजन में ही समर्पित कर दिया उन संतों में एक के परम पूज्य जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी हर्याचार्य जी महाराज। हरिधाम गोपाल पीठ स्वामीजी की तपोस्थली आज भी अपने वैभव को समेटे हुए आध्यात्मिकता को चार चांद लगा रहा है। रामनगरी का आध्यात्मिक जगत जिन आचार्यों से आलोकित है उनमें जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी हर्याचार्य जी महाराज एक है। विशिष्टताद्वौत के साथ-साथ श्री हनुमत उपासना का अद्भुत संयोग उनके व्यक्तित्व का आभूषण था। उन्होंने जगद्गुरु के रूप में देश में दशकों तक रामानंद संप्रदाय की ध्वजा फहराई। जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी हर्याचार्य जी को शुक्रवार को उनकी 16वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धापूर्वक याद किया जाएगा। श्री हरिधाम गोपालपीठ मंदिर स्थित उनकी तपोस्थली पर पुण्यतिथि के आयोजन की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। संत- धर्माचार्य का समूह दिवंगत आचार्य को अपनी श्रद्धांजलि देगें। इस अवसर पर स्वामी हर्याचार्य के व्यक्तित्व-कृतित्व पर भी चर्चा होगी।
सिद्धार्थनगर जिले में मघा नक्षत्र में जन्मे बालक हरिनाथ त्रिपाठी किशोरावस्था में अयोध्याजी आ गये। उन्होंने हनुमानगढ़ी के गद्दीनशीन महंत रामबालक दास जी महाराज के शिष्य के रूप में वेद, वेदांत एवं व्याकरण में विशिष्टता हासिल की। कर्मकांड, ज्योतिष, वाल्मीकि रामायण, गीता व गोस्वामी तुलसीदास के द्वादश ग्रंथों का वे अध्यापन भी शिक्षार्थियों को कराते रहे।उन्होंने अयोध्या के कई संस्कृत विद्यालयों में प्राचार्य पद को सुशोभित किया। भगवान सीताराम जी की आराधना व हनुमान जी की सेवा उनके चिंतन में सदैव रची-बसी रही। स्वामी हर्याचार्य जी को सन् 1989 के प्रयाग कुंभ में जगद्गुरु रामानंदाचार्य के पद पर विभूषित किया गया।
महाराज श्री ने हनुमत कवच व ब्रह्मासूत्र, गीता भक्ति दर्शन का 12वां अध्याय, वेदों में अवतार रहस्य, श्री संप्रदाय दर्शन तथा श्रीरामचरित मानस में वैदिकत्व सहित दो दर्जन पुस्तकों की रचना कर हिंदू धर्म-संस्कृति को समृद्ध किया। सन् 2008 में भाद्र शुक्ल सप्तमी उनका साकेतवास हुआ। उनके उत्तराधिकारी रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी कहते हैं कि महाराज श्री नारियल सदृश थे। यह जीवन धन्य है जिस पर उनकी कृपा बरसी। महाराज के सिद्धांतों का अनुसरण करते जीवन जाय, यही प्रार्थना श्री हनुमान जी से अनवरत होती रहती है।