: युग तुलसी पंडित रामकिंकर महाराज की शत जन्मजयंती का छाया उल्लास
Wed, Oct 30, 2024
युग तुलसी पंडित रामकिंकर महाराज की शत जन्मजयंती का छाया उल्लासआकाशगंगा की गैलेक्सी में रामायण और रामचरितमानस की चर्चा होगी, तो उसमें से युगतुलसी पंडित रामकिंकर महाराज एक होंगे: मुरारी बापूट्रस्ट कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरी व अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त राम कथा के मर्मज्ञ मुरारी बापू को रामकिंकर सम्मान से सम्मानित किया गयाअयोध्या। आकाशगंगा की गैलेक्सी में रामायण और रामचरितमानस की चर्चा होगी। तो उसमें से युगतुलसी पंडित रामकिंकर महाराज एक होंगे। दीदी मां को मानस पुत्री मानकर उन्होंने बहुत दुलार दिया। उक्त वक्तव्य श्रीरामकथा के अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथाकार देव मुरारी बापू ने युग तुलसी पंडित रामकिंकर महाराज की शत जन्मजयंती महोत्सव पर आयोजित समारोह में कही। वह परिक्रमा मार्ग स्थित श्रीरामायणम आश्रम ट्रस्ट परिक्रमा मार्ग जानकीघाट, अयाेध्याधाम में अपना वक्तव्य दे रहे थे। उन्होंने कहा कि जो प्रेम नियम न तुड़वा दे वह प्रेम नहीं होता। एक घटना को याद करते हुए कहा कि चतुर्मास में मेरा मौन रहता है। लेकिन युग तुलसी ने एक कार्यक्रम में बोलने के लिए कहा। मैं उनके आदेश को टाल नहीं सका। पंडित रामकिंकर महाराज का शत जन्मजयंती महोत्सव श्रीरामायणम आश्रम की अध्यक्षा पंडित रामकिंकर महाराज की मानस पुत्री उत्तराधिकारी दीदी मां मन्दाकिनी श्रीरामकिंकर के संयोजन में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। कार्यक्रम के तीसरे दिन बुधवार को ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरी महाराज को दीदी मां मंदाकिनी रामकिंकर और अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त राम कथा के मर्मज्ञ मुरारी बापू को रामकिंकर सम्मान से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरी महाराज ने कहा की पंडित रामकिंकर उपाध्याय को युग तुलसी कहा जाता है। क्योंकि तुलसीदास के बाद कोई भी महापुरुष इतनी सरलता से भगवान श्रीराम के चरित्र को जन-जन तक नहीं पहुंचाया। कभी-कभी समाज में ऐसा लगता है। या यूं कहें तो भगवान राम के अस्तित्व पर भी प्रश्न चिन्ह खड़ा हो जाता है। लेकिन पंडित जैसे महापुरुष बार-बार यह सिद्ध कर दिए हैं कि प्रभु श्रीराम का अस्तित्व था है और हमेशा रहेगा। दीदी मां ने संत सम्मेलन और रामकिंकर उपाध्याय सम्मान समारोह में उपस्थित सभी संत-महंतों एवं अतिथियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि गुरुदेव के शताब्दी समारोह आप सब आए मैं सदा आभारी रहूंगी। मेरा जीवन गुरुदेव के विचारों के प्रचार हेतु समर्पित है। जीवन पर्यंत समर्पित रहेगा। इस अवसर पर जगतगुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य, श्रीराम वल्लभाकुंज के अधिकारी राजकुमार दास, महामंडलेश्वर गिरीश दास, बड़े हनुमान के उत्तराधिकारी छविरामदास, खाकचौक के महंत अयोध्या दास, हनुमत निवास के महंत मिथिलेशनंदनी शरण, महंत सर्वेश दास, संत मिथिला बिहारी शरण, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि रोहित सिंह सहित सैकड़ो लोग उपस्थित रहे। शाम के सत्र में मंदिर परिसर में हनुमान जयंती मनाई गई। चौथे दिन श्रीराम नाम मंत्र का अनुष्ठान होगा। समारोह के अंतिम दिन 1 नवंबर को पंडित रामकिंकर महाराज की जयंती मनाई जाएगी।
: सनातन धर्म के सद्ग्रन्थों को अध्यात्मदीप कहा गया: रत्नेशप्रपन्नाचार्य
Wed, Oct 30, 2024
सनातन धर्म के सद्ग्रन्थों को अध्यात्मदीप कहा गया: रत्नेशप्रपन्नाचार्यसरायराशी पूरा बाजार में हनुमान जयंती के पावन अवसर पर व्यासपीठ से हनुमत कथा की अमृत वर्षा हो रहीअयोध्या। श्रीराम नाम को भी दीप कहा गया है ,सनातन धर्म के सद्ग्रन्थों को अध्यात्मदीप कहा गया है ।दीपावली पर हम दीप जलाकर बाहर -भीतर दोनों तरफ़ उजियारा कर लें।उक्त बातें जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी रत्नेशप्रपन्नाचार्य जी ने हनुमत कथा के पंचम दिवस कही। सरायराशी पूरा बाजार में हनुमान जयंती के पावन अवसर पर व्यासपीठ से हनुमत कथा की अमृत वर्षा कर रहें आचार्य रत्नेशप्रपन्नाचार्य जी ने कहा कि दीपावली का पर्व ज्योति का पर्व है। यह अपने भीतर सुषुप्त चेतना को जगाने का अनुपम पर्व है। यह हमारे आभामंडल को विशुद्ध और पर्यावरण की स्वच्छता के प्रति जागरूकता का संदेश देने का पर्व है। भगवान महावीर ने दीपावली की रात जो उपदेश दिया उसे हम 'प्रकाश पर्व' का श्रेष्ठ संदेश मान सकते हैं। भगवान महावीर की यह शिक्षा मानव मात्र के आंतरिक जगत को आलोकित करने वाली है। तथागत बुद्ध की अमृतवाणी 'अप्प दीवो भव। आचार्य श्री ने कहा कि अर्थात्, 'आत्मा के लिए दीपक बनो' वह भी इसी भावना को पुष्ट कर रही है। इतिहासकार कहते हैं कि जिस दिन ज्ञान की ज्योति लेकर नचिकेता यमलोक से मृत्युलोक में अवतरित हुए वह दिन भी दीपावली का ही दिन था। यद्यपि लोकमानस में दीपावली एक सांस्कृतिक पर्व के रूप में अपनी व्यापकता सिद्ध कर चुका है। रामानुजाचार्य जी ने कहा कि यह बात सच है कि मनुष्य का रुझान हमेशा प्रकाश की ओर रहा है। अंधकार को उसने कभी न चाहा, न कभी मांगा। 'तमसो मा ज्योतिर्गमय। भक्त की अंतर भावना अथवा प्रार्थना का यह स्वर भी इसका पुष्ट प्रमाण है। 'अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलें। इस प्रशस्त कामना की पूर्णता हेतु मनुष्य ने खोज शुरू की। उसने सोचा कि वह कौन-सा दीप है, जो मंजिल तक जाने वाले पथ को आलोकित कर सकता है। अंधकार से घिरा हुआ आदमी दिशाहीन होकर चाहे जितनी गति करे, सार्थक नहीं हुआ करती। प्रकाश ऊर्जा का एक रुप होता है जिसकी उपस्थिति द्वारा हम वस्तुओं को देखते है। वेद में यह स्पष्ट उल्लेख है कि हमारी माँग उस परमात्मा तक पहुँचे इसके लिए एक प्रकाश का सहारा लिया जाना आवश्यक है, एक ज्योति को माध्यम बनाना जरूरी है, क्योंकि प्रकृति से, ईश्वर से कोई भी याचना तब तक स्वीकार नहीं होती जब तक याचक अपना संबंध पहले प्रकाश से नहीं जोड़ लेता। प्रकाश मनुष्य और ईश्वर के बीच का संदेशवाहक है। इस मौके पर शिव प्रताप सिंह,प्रमोद कुमार सिंह “आशु” ,गोपाल सिंह,नन्दन सिंह, उदय प्रताप सिंह ,गोविंद सिंह सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।
: रामचरितमानस पर आधारित झांकियों ने मोहा मन
Wed, Oct 30, 2024
रामचरितमानस पर आधारित झांकियों ने मोहा मनदीपोत्सव पर साकेत महाविद्यालय से रामकथा पार्क तक के लिए निकली 18 मनमोहक झांकियांपुत्रेष्टि यज्ञ से लेकर प्रभु के राजतिलक तक की कथाओं का हुआ प्रदर्शनअयोध्या। प्रभु श्रीराम की नगरी में आठवें दीपोत्सव का भव्य आयोजन हर साल की तरह इस बार भी सजीव और रंगीन झांकियों के साथ मनाया जा गया। साकेत महाविद्यालय से राम कथा पार्क तक निकाली गई 18 विशेष झांकियां इस दीपोत्सव का मुख्य आकर्षण बनी रहीं। झांकियों को झंडी दिखाते हुए योगी सरकार में संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह के साथ विधायक वेद प्रकाश गुप्ता, मेयर गिरीश पति त्रिपाठी व अन्य मौजूद रहे। इन झांकियों में रामचरितमानस के विभिन्न प्रसंगों को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया , जिससे लाखों श्रद्धालु भावविभोररहे। झांकियों के दृश्य को हर कोई अपने मोबाइल में कैद करता दिखा। इस दौरान रामपथ पर रंग गुलाल उड़ने के साथ जमकर आतिशबाजी भी हुई।इस भव्य शोभायात्रा में साकेत महाविद्यालय के छात्रों ने पुत्रेष्टि यज्ञ से लेकर श्रीराम के राजतिलक तक के विभिन्न प्रसंगों को बड़े ही सुंदर ढंग से झांकियों के रूप में प्रस्तुत किया। इन झांकियों में न केवल श्रीराम के जीवन के महत्वपूर्ण अध्यायों का दर्शन कराया, बल्कि इनमें शामिल कलाकारों के अभिनय ने दृश्य को और भी जीवंत बना दिया। झांकियों के बीच-बीच में लोक कलाकार अपने अभिनय से कथा को दर्शकों के सामने पेश कर रहे हैं, जिससे दर्शकों का अनुभव और भी खास हो रहा है। झांकियों का यह सफर साकेत महाविद्यालय से शुरू होकर अयोध्या के प्रमुख चौराहों से गुजरते हुए राम कथा पार्क तक पहुंचा जहांहां, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं इन झांकियों का स्वागत किया और प्रभु श्रीराम, माता सीता और भइया लक्ष्मण के स्वरूपों का अयोध्या आगमन पर उनका वंदन-अभिनंदन किया। इस महोत्सव में साकेत महाविद्यालय की 18 झांकियों में से 11 झांकियां सूचना विभाग की ओर से और 7 झांकियां पर्यटन विभाग द्वारा तैयार की गई थी। पर्यटन विभाग द्वारा सजाई गई झांकियों में तुलसीदास रचित रामचरितमानस के सात अध्यायों- बालकांड, अयोध्या कांड, अरण्य कांड, किष्किंधा कांड, सुंदर कांड, लंका कांड और उत्तर कांड पर आधारित सुंदर दृश्य प्रस्तुत किए गए हैं, जो श्रद्धालुओं को रामायण के विभिन्न प्रसंगों का सार समझाने में सहायक हैं। इस आठवें दीपोत्सव में श्रीराम की शिक्षा, सीता-राम विवाह, वन गमन, भरत मिलाप, शबरी प्रसंग, अशोक वाटिका, हनुमान का लंका गमन, शक्तिबाण लगने से लक्ष्मण का मूर्छित होना, रावण वध, अयोध्या आगमन और दीपोत्सव पर आधारित झांकियों का विशेष प्रदर्शन किया गया।