: आज जन्मेंगे राम, अयोध्या में उल्लास
Wed, Apr 17, 2024
मंदिर में गीत, संगीत एवं अध्यात्म की त्रिवेणी बह रही है: महंत रामेश्वरी शरण
रामनगरी के रामजन्मभूमि, हनुमानगढ़ी,कनक भवन, हनुमान बाग, सियारामकिला,श्रावण कुंज समेत हजारों मंदिरों में आज मनाया जायेगा रामजन्मोत्सव
अयोध्या। रामनवमी का महापर्व बुधवार को है, इसको लेकर अयोध्या मानों निहाल सी हो गई है। रामनवमी को लेकर चहुंओर लोगों मेें उल्लास है। योग लगन ग्रहवार तिथि सकल भये अनुकूल चर अरु अचर हर्ष युत राम जनम सुख मूल... राम जन्म का प्रसंग निरूपित करती रामचरितमानस की यह पंक्ति राम जन्मोत्सव की पूर्व संध्या पर साकार प्रतीत हो रही है। राम जन्मोत्सव के लिए मंदिर जहां सजधज गए हैं, वहीं रामनगरी की परिधि में लाखों श्रद्धालु पहुंच चुके हैं और सबके चेहरे पर राम जन्मोत्सव की शुभ घड़ी की प्रतीक्षा का उल्लास झलक रहा है। मंदिरों में गीत, संगीत एवं अध्यात्म की त्रिवेणी बह रही है। मंदिरों में आयोजित हो रहे धार्मिक अनुष्ठान, सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखलाएं पूरे रौ में हैं। समूचा मेला क्षेत्र कथा-प्रवचन व श्रीराम की स्तुतियों से गुंजायमान हो रहा है। प्रशासन ने सुरक्षा सख्त कर दी है। सुरक्षा की कमान एटीएस व आरएएफ ने संभाल रखी है। ड्रोन कैमरे व सीसीटीवी के जरिए मेला क्षेत्र की निगरानी की जा रही है। वहीं अयोध्या में वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया गया है।
रामनगरी के प्रसिद्ध पीठ श्रावण कुंज में रामजन्मोत्सव महंत रामरुप शरण महाराज के पावन सानिध्य व मंदिर की वर्तमान महंत रामेश्वरी शरण के संयोजन में मनाया जाएगा।महंत रामेश्वरी शरण कहती हैं कि जन्मोत्सव की तैयारी पूरी हो गई है। अपराह्न 12 बजते ही जन्मोत्सव का उल्लास छलक उठेगा। अबीर-गुलाल एवं पुष्पों की वर्षा होगी। उन्होंने बताया कि श्रावण कुंज में जन्मोत्सव पर सवा क्विंटल धनिया की पंजीरी प्रसाद रूप में भक्तों को वितरित की जाएगी।
: भगवान श्रीराम ने पूरी दुनिया काे मानवता का पाठ पढ़ाया:प्रभंजनानन्द
Wed, Apr 17, 2024
भगवान की कथा मंगलकारी है,जाे अमंगल का नाश करती है:महंत करुणानिधान शरण
प्रसिद्ध पीठ सियारामकिला झुनकी घाट पीठाधीश्वर महंत करुणानिधान शरण महाराज के सानिध्य में रामजन्मोत्सव का छाया उल्लास,रामकथा का हुआ शुभारंभ
द्धाराचार्य जगतगुरु स्वामी श्री जानकी शरण झुनझुनियां बाबा के जीवन चरित्र पर आधरित श्री झुनकी चरित पुस्तक का हुआ विमोचन
अयाेध्या। रामजन्म महाेत्सव के पावन अवसर पर सियारामकिला झुनकी घाट दुल्हन की तरह सजी है। परे मंदिर को फूलों से सजाया गया है। मंदिर में 51 वैदिक आचार्य नवाह परायण पाठ कर रहे है। मंदिर में आज से भव्य रामकथा का शुभारंभ हुआ। व्यासपीठ से कथा की अमृत वर्षा कर रहें है। महाेत्सव काे पीठ के महंत करुणानिधान शरण महाराज ने सानिध्यता प्रदान करते हुए कहा कि भगवान राम जन्मोत्सव के अवसर पर मंदिर में श्रीरामकथा की शुरूवात हाे गई है। भक्तगण कथा का रसपान कर अपना जीवन कृतार्थ करें। महंतजी ने कि भगवान की कथा मंगलकारी है। जाे अमंगल का नाश करती है। कथा हमें परमात्मा तक पहुंचाने का सबसे सुगम मार्ग है। इसके द्वारा हमें भगवान का सानिध्य मिलता है। अवधधाम में रामकथा का श्रवण करने और कराने से अपार पुण्य की प्राप्ति हाेती है। वह भी जब रामजन्म महाेत्सव चल रहा हाे। ताे उसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है। अमृतमयी श्रीरामकथा के प्रथम दिवस भक्तों काे रसास्वादन कराते हुए प्रख्यात रामकथा मर्मज्ञ कथाव्यास व्यासपीठ से कथा कहते मंदिर के अधिकारी प्रख्यात कथावाचक प्रभंजनानन्द शरण महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम ने पूरी दुनिया काे मानवता का पाठ पढ़ाया। हमें भगवान की मर्यादा का पालन करना चाहिए। आज हम सब राम जन्मोत्सव पर भगवान की अमृतमयी कथा का श्रवण कर रहे हैं। जीव प्रभु राम का अनुसरण करे। उनके बतलाए हुए सच्चाई के मार्ग पर चले। साथ ही उनकी मर्यादा को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करे। आज की कथा में आये हुए अतिथियों ने द्धाराचार्य जगतगुरु स्वामी श्री जानकी शरण झुनझुनियां बाबा के जीवन चरित्र पर आधरित श्री झुनकी चरित पुस्तक का भव्य विमोचन किया गया। झुनझुनियां बाबा की गणना अयोध्या के सिद्ध संतों में की जाती है। श्री झुनकी चरित पुस्तक के लेखक धर्मराज अभय व प्रकाशक निर्भय कुमार है। पुस्तक में विशेष सहयोग प्रीमियम एजेंसी द्धारा हुआ है। कथा के उद्घाटन सत्र में मणिराम दास छावनी के महंत कमलनयन दास, आचार्य पीठ श्री लक्षमणकिला के महंत मैथलीरमण शरण, रंग महल पीठाधीश्वर महंत राम शरण दास,श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट महासचिव चंपत राय सहित बड़ी संख्या में संताें ने अपने विचार व्यक्त किए।
: भगवान श्रीराम से स्वार्थ और परमार्थ दोनो की प्राप्ति होती है: राधेश्याम
Wed, Apr 17, 2024
मणि रामदास जी की छावनी में व्यासपीठ से रामकथा की मीमांसा कर रहें प्रख्यात कथावाचक आचार्य राधेश्याम शास्त्री
अयाेध्या। रामजन्म महाेत्सव के पावन अवसर पर मणिराम दास छावनी फूलों से सजी है। मंदिर में 51 वैदिक आचार्य नवाह परायण पाठ कर रहे है। मंदिर में व्यासपीठ से कथा की अमृत वर्षा प्रख्यात कथावाचक आचार्य राधेश्याम शास्त्री जी कर रहें है।आचार्य राधेश्याम शास्त्री ने कहा कि श्रीराम के गुणों के द्वारा जगत का मंगल होता है। संसार में किसी धनाढ्य ब्यक्ति से सांसारिक स्वार्थ की,तथा किसी बीतराग संत से परमार्थ की प्राप्ति हो सकती है,किन्तु एक भगवान राम के गुण ही ऐसे हैं,जिन से स्वार्थ और परमार्थ दोनो की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि गोस्वामी जी के 12 ग्रंथों में रामचरित मानस और विनय पत्रिका इन दो ग्रंथो को सर्वोपरि कहा जाता है।इन दोनों में सबसे बड़ा अन्तर यह है कि रामायण में भगवान के गुणों की प्रधानता है। विनय पत्रिका में गोस्वामीजी ने अपने दोषों का वर्णन किया है। किसी ने तुलसीदास से पूछा कि दोषों की माला ही रह गयी है,प्रभु को पहनाने के लिए?उन्होंने जबाब दिया कि,इस संदर्भ में आप भरतजी का वाक्य याद कर लीजिये,जो वे रामजी से कहते हैं “कृपा भलाई रावरी नाथ कीन्ह भल मोर।दूषन भे भूषन सरिस। यानी,महाराज अगर हम अपने गुणों को धारण करें तो वे गुण भी दूषण बन जाते हैं, और आप अगर हमारे दोषों को स्वीकार कर लें, तो आपके पास पहुँच कर ए दूषण भी भूषण हो जाते हैं।व्यासपीठ से कथा की मीमांसा करते हुए शास्त्री जी ने कहा कि भरत और सुग्रीव किस दृष्टि में एक समान हैं? यह भगवान की कौन सी दृष्टि है?यह आश्चर्य जनक है। तुलसीदास जी चतुर थे,तुरन्त भगवान से बोले महाराज जब आपको खरे और खोटे की परख ही नहीं है,तो मेरी समझ में आ गया कि तुलसीदास जैसा खोटा सिक्का भी यहीं चल सकता है। शास्त्री जी ने कहा कि भगवान ने प्रश्न किया ,क्या तुम यह खोटेपन का ब्यापार बढ़ाना चाहते हो?गोस्वामी जी ने कहा,प्रभु मुझे आपके सुग्रीव के संबंध में ब्यक्त किये गये बिचार से विश्वास हो गया कि अगर छोटे सिक्के का ब्यापार करना हो तो उसे संसार में करने के स्थान पर आपके पास ही करना श्रेयस्कर होगा।क्योंकि संसार के लोग उसे बाजार में इधर उधर चलाते रहेंगे।