: भक्त की श्वास-प्रश्वास आराध्य विग्रह के साथ धड़कती है: किलाधीश
बमबम यादव
Wed, Apr 24, 2024
आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला में महंत मैथलीरमण शरण जी के अध्यक्षता में छठ्योत्सव की बिखरी रही छटा

भगवान को कढ़ी-चावल, दही बड़ा जैसे पारंपरिक व्यंजनों का लगा भोग
अयोध्या। चैत्र शुक्ल नवमी यानी 17 अप्रैल को राम जन्मोत्सव मनाए जाने के बाद मंगलवार को उल्लास के साथ रामनगरी के मंदिरों में छठ्योत्सव मनाया गया। इस अवसर पर न सिर्फ रीति रिवाज के अनुरूप भगवान को कढ़ी-चावल, दही बड़ा जैसे पारंपरिक व्यंजनों का भोग लगाया गया, बल्कि भोज- भंडारा व प्रसाद वितरण हुआ। विशेष आयोजन आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला में हुआ। लक्ष्मणकिला में महंत मैथलीरमण शरण जी की अध्यक्षता व उनके शिष्य युवा संत मंदिर के अधिकारी सूर्य प्रकाश शरण के संयोजन में छठ्योत्सव की छटा बिखरी रही। मंदिर में स्थापित आराध्य विग्रह के पूजन-अनुष्ठान का क्रम सुबह से ही शुरू हुआ। पूर्वाह्न की दस्तक के साथ आराध्य से आत्मीयता ज्ञापित करते गीतों ने संतों एवं श्रद्धालुओं को विभोर किया।
आचार्य पीठ के महंत मैथलीरमण शरण जी ने कहा कि उत्सव को शिखर का स्पर्श दिया। कहा, यही भक्ति का वैशिष्ट्य है। किसी समीक्षक के लिए भगवान पत्थर के हों तो हों, भक्त के लिए वे चिन्मय - चैतन्य विग्रह हैं। भक्त की श्वास-प्रश्वास आराध्य विग्रह के साथ धड़कती है। वह समर्पित प्रेमी की तरह प्रेमास्पद की चिंता करता है और उनके जीवन के दिव्य दैवी प्रवाह में अपने जीवन की तलाश करता है। श्रीराम का छठ्योत्सव भक्ति की इसी लीनता का परिचायक है। और यही लीनता भक्त को भगवान से अभिन्न बनाती है। आये हुए संगीतकार व कलाकारों का स्वागत मंदिर के अधिकारी सूर्य प्रकाश शरण ने किया। इस मौके पर बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।
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