: राम देश की एकता के प्रतीक हैं: डा रामानंद दास
Wed, Apr 17, 2024
चक्रवर्ती सम्राट दशरथ जी के राज महल बड़ा स्थान में भगवान रामलला का प्रकटोत्सव, कथा का हुआ विश्राम
विंदुगाद्याचार्य जी ने कहा,भारतीय समाज में मर्यादा, आदर्श, विनय, विवेक, लोकतांत्रिक मूल्यों और संयम का नाम राम है
अयोध्या। चक्रवर्ती सम्राट दशरथ जी के राज महल बड़ा स्थान में चल रही राम कथा के विश्राम दिवस में विंदुगाद्याचार्य महान्त श्रीदेवेन्द्रप्रसादाचार्य जी महाराज ने कहा कि राम तो प्रत्येक प्राणी में रमा हुआ है, राम चेतना और सजीवता का प्रमाण है। भारतीय समाज में मर्यादा, आदर्श, विनय, विवेक, लोकतांत्रिक मूल्यों और संयम का नाम राम है। असीम ताकत अहंकार को जन्म देती है। लेकिन अपार शक्ति के बावजूद राम संयमित हैं। व्यासपीठ से डा रामानंद दास जी ने कहा कि वे सामाजिक हैं, लोकतांत्रिक हैं. वे मानवीय करुणा जानते हैं। वे मानते हैं- ‘पर हित सरिस धरम नहीं भाई राम देश की एकता के प्रतीक हैं। रामानंद दास जी ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम समसामयिक है।भारतीय जनमानस के रोम-रोम में बसे श्रीराम की महिमा अपरंपार है। जीवन की धन्यता भौतिक पदार्थों के संग्रहण में नहीं अपितु सुविचारों एवं सद्गुणों के संचयन में निहित है। जिसके पास जितने श्रेष्ठ एवं पारमार्थिक विचार हैं वह उतना ही सम्पन्न प्राणी है। आज समाज में अशांति कोई पशु या जानवर नहीं फैला रहा, बल्कि अपने स्वरूप से अनभिज्ञ भौतिक पदार्थ की दौड़ में लगा मनुष्य ही फैला रहा है। दूसरों को शांत करने से पहले खुद शांत होना होगा। शांति व आनंद का स्रोत केवल ईश्वर है जो भक्ति द्वारा प्राप्त किया जा सकता है।
मनुष्य के अन्तःकरण में जो गुणों के बीज हैं, वे सत्संग और कुसंग के कारण अंकुरित होते हैं. अगर कुसंग के जल की वर्षा हो जाय तो अन्तःकरण में छिपे हुए दुर्गुण सामने आ जाते हैं. व्यक्ति को कुसंग से बचना चाहिए, इसका तात्पर्य यह है कि अगर वर्षा ही नहीं होगी तो अंकुर भीतर से कैसे फूटेगा ? अतएव यदि हम उन सहयोगियों के, जो हमारे दुर्गुणों को, हमारी दुर्बलताओं को बढ़ा दिया करते हैं, सन्निकट नहीं जावेंगे तो भले ही हमारे जीवन में दुर्गुणों के संस्कार विद्यमान हों, वे उभर नहीं पावेंगे।मानवीय जीवन के सद्गुणों के अंकुरित होने के लिए जिस जल की अपेक्षा है, वह है सत्संग का जल।इस अवसर पर कथा श्रवण के लिए पधारे सभी संतो महंतों अतिथियों का श्री महाराज जी के कृपापात्र शिष्य मंगल भवन पीठाधीश्वर महंत कृपालु राम भूषण दास ने स्वागत किया।
: श्रीराम धर्म की प्रतिमूर्ति है: प्रभंजनानन्द शरण
Wed, Apr 17, 2024
झुनझुनियां बाबा जी की तपस्थली ,सियारामकिला झुनकी घाट पर महंत करुणानिधान शरण की अध्यक्षता में हो रही श्रीराम कथा की अमृत वर्षा
द्धितीय दिवस पर कथाव्यास ने कहा, जिस देश में युवा का जीवन धर्म के लिये समर्पित हो जाये वह समाज व राष्ट्र धन्य हो जाता है
मंदिर में धूमधाम से मनाया गया भगवान का जन्मोत्सव, प्रकट भये जगत के पालनहार
अयोध्या। मां सरयू के पावन तट स्थित श्री सियारामकिला झुनकी घाट में श्रीराम जन्मोत्सव के पावन अवसर पर श्रीराम कथा के द्धितीय दिवस पर कथाव्यास सियारामकिला के अधिकारी प्रख्यात कथावाचक प्रभंजनानन्द शरण जी महाराज प्रभुजी ने कहा कि श्रीलक्ष्मण का चरित्र अर्पण ,समर्पण और विसर्जन का चरित्र है।उन्होंने अपने जीवन को श्रीराम की सेवा में समर्पित कर दिया है।श्रीराम धर्म की प्रतिमूर्ति है।राम धर्म के स्वरूप है।राम सनातन धर्म के प्रतीक है।राम धर्म की आत्मा है।प्रभंजनानन्द शरण जी ने बताया कि लक्ष्मण का जीवन धर्म के प्रति समर्पित है।देश के हर युवा के प्रतीक है लक्ष्मण।जिस देश में युवा का जीवन धर्म के लिये समर्पित हो जाये वह समाज व राष्ट्र धन्य हो जाता है।श्रीराम राष्ट्र के मंगल के लिये यात्रा करते हैं और लक्ष्मण उनके सहयोगी है।जिस देश के युवा राष्ट्र धर्म और सेवा धर्म के समर्पित होते है वही रामराज्य की स्थापना होती है। उन्होंने कहा कि लक्ष्मण शब्द का अर्थ होता है जिसका मन लक्ष्य में लगा हो।जिस युवा का मन लक्ष्य से भटक जाता है वो कभी लक्ष्मण नहीं बन सकता।लक्ष्य विहीन युवा,समाज और राष्ट्र नष्ट हो जाता है।जीवन का जो लक्ष्य है उसके प्रति हमारा जीवन पूर्ण समर्पित होना चाहिये।
कथा की अध्यक्षता करते हुए सियारामकिला पीठाधीश्वर महंत करुणानिधान शरण जी ने कहा कि धैर्य और संयम सफलता की कुंजी है। जब मन इन्द्रियों के वशीभूत होता है, तब संयम की लक्ष्मण रेखा लाँघे जाने का खतरा बन जाता है, भावनाएँ अनियंत्रित हो जाती हैं। असंयम से मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है इंसान असंवेदनशील हो जाता है मर्यादाएँ भंग हो जाती हैं। इन सबके लिए मनुष्य की भोगी वृत्ति जिम्मेदार है। काम, क्रोध, लोभ, ईर्ष्या असंयम के जनक हैं व संयम के परम शत्रु हैं। इसी तरह नकारात्मक आग में घी का काम करती है। वास्तव में सारे गुणों की डोर संयम से बँधी हुई होती है। जब यह डोर टूटती है तो सारे गुण पतंग की भाँति हिचकोले खाते हुए व्यक्तित्व से गुम होते प्रतीत होते हैं। कथा में रामनगरी के विशिष्ट संतों का सम्मान किया गया। सियाराम किला में आज बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ भगवान का जन्मोत्सव मनाया गया। इसके बाद भक्तों को प्रसाद वितरण किया गया।
: जन्मोत्सव पर हुआ रामलला का सूर्याभिषेक,50 क्विंटल फूलों से सजा राम मंदिर
Wed, Apr 17, 2024
रामलला सदन देवस्थानम् में जगत नियंता का हुआ प्राकट्योत्सव, डा राघवाचार्य ने लुटायें धन धान्य
हनुमान बाग में धूमधाम से मनाया गया महोत्सव, भगवान को सजाया गया मणि माणिक्य सोने चांदी से
भगवान राम का अवतार लोक कल्याण के लिए हुआ, दर्शन, पूजन और तपस्या का विशेष लाभ मिलता है: जगद्गुरु बल्लाभाचार्य
अयोध्या। रामनगरी में राम जन्मोत्सव बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ मनाया गया। घड़ी की सुई जैसे ही दोपहर 12 बजे पर गयी वैसे मठ मंदिरों में घंट घड़ियाल बजने शुरु हो गये। चहुंओर संत साधक आनंद में नृत्य करने लगे।देश-दुनिया के लाखों लोग अयोध्या पहुंचे। विधि-विधान और मंत्रोच्चार के बीच जन्मोत्सव मनाया गया। इसके पहले भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया। उन्हें आभूषण पहनाए गए। राम जन्मभूमि पर भगवान रामलला का सूर्याभिषेक हुआ। भगवान राम की नगरी अयोध्या में रामनवमी की धूम है। यहां पर देश के कोने-कोने से लाखों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे हैं। तड़के अधिकांश ने सरयू नदी में स्नान किया। इसके बाद सभी ने मंदिरों का रुख किया। मंदिरों में दर्शन-पूजन के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु अयोध्या की गलियों में विचरण कर रहे हैं। पूरी राम नगरी आज तो श्रद्धालुओं से पटी है। यहां पर आज बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आगमन पर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम हैं।
रामकोट के प्रतिष्ठित पीठ रामलला सदन देवस्थानम् में प्रातःकाल भगवान का 108 कलशों से विशेष अभिषेक किया गया। जिसमें विभिन्न फलों का जूस,शहद, इत्र, जल, औषधियों सहित आदि चीजों से भगवान का अभिषेक हुआ। इसके बाद का जन्मोत्सव मनाया गया जिसमें रामलला सदन देवस्थानम् पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य जी महाराज ने भगवान की आरती उतारी। दशरथ की भूमिका में डा राघवाचार्य ने अबीर गुलाल धन्य धान्य व खिलौनों लुटायें।
तो वही प्रसिद्ध पीठ चारुशिला मंदिर में गीत संगीत की त्रिवेणी बह रही है। मंदिर में व्यासपीठ से रामकथा की मीमांसा कर रहे जगद्गुरू रामानन्दाचार्य स्वामी बल्लाभाचार्य जी महाराज तो वही देर शाम मंदिर में बधाई गायन बहुत ही भव्य रुप में हो रहा। बधाई गायन में संत साधक नृत्य करते हुए आनंद की अनुभूति कर रहें। न्यौछावरी खुद रामानन्दाचार्य स्वामी बल्लाभाचार्य जी महाराज लुटा रहें है। जगतगुरु रामानन्दाचार्य स्वामी बल्लाभाचार्य जी महाराज ने कहा कि भगवान राम का अवतार लोक कल्याण के लिए हुआ। यहां दर्शन, पूजन और तपस्या का विशेष लाभ मिलता है। राम की कृपा शीघ्र प्राप्त होती है।
वासुदेव घाट स्थित प्रसिद्ध पीठ हनुमान बाग में धूमधाम से भगवान का जन्मोत्सव मनाया गया। इस अवसर पर भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया जिसमें मणि माणिक्य व सोने चांदी के आभूषणों से भगवान का श्रृंगार किया गया। महंत जगदीश दास महाराज ने राजशी ठाठ बाट से न्यौछावरी लुटाई। व्यवस्था में पुजारी योगेंद्र दास, सुनील दास, रोहित शास्त्री, नितेश शास्त्री आदि लगे रहें।
बुधवार यानी 17 अप्रैल को रामनवमी पर दोपहर 12 बजे से रामलला का सूर्य तिलक हुआ। प्राण प्रतिष्ठा के बाद रामलला का यह पहला सूर्य तिलक है। दोपहर 12 बजे अभिजीत मुहूर्त में रामलला का सूर्य तिलक किया गया और मस्तक पर 3 मिनट तक नीली किरणें पड़ीं। सूर्य तिलक के साथ ही रामलला का जन्म हो गया। मंदिर में आरती की गई। सूर्य तिलक के बाद कुछ देर के लिए रामलला का पट बंद कर दिया गया। सूर्य तिलक के लिए अष्टधातु के 20 पाइप से 65 फीट लंबा सिस्टम बनाया गया। इसमें 4 लेंस और 4 मिरर के जरिए गर्भ गृह तक रामलला के मस्तक पर किरणें पहुंचाई गईं।