: श्री जानकी महल ट्रस्ट में श्रीराम की चिरसंगिनी का मना भव्य प्राकट्योत्सव
Fri, May 17, 2024
माता जानकी का वैदिक मंत्रोच्चारण संग पंचामृत एवं सुगंधित औषधियों से हुआ अभिषेक-पूजन
अयोध्या। आस्था सच्ची हो, तो पत्थर भी पिघल सकता है। रामनगरी की प्रसिद्ध पीठ श्री जानकी महल ट्रस्ट में मां जानकी का प्राकट्योत्सव धूमधाम से मनाया गया।जानकी महल किशोरी जी का महल है यहा पर माता सीता जी का बेटी के रुप सेवा सत्कार पूजा होती है। सीता जी व भगवान राम जी को दुल्हा सरकार मान अष्टयाम सेवा होती है। गुरुवार को जानकी जन्मोत्सव के परिप्रेक्ष्य में जब रामनगरी श्रीराम की चिरसंगिनी को भक्ति में डूब रही। प्राकट्योत्सव पर सर्वप्रथम मंदिर के गर्भगृह में विराजमान माता जानकी का सुबह वैदिक मंत्रोच्चारण संग पंचामृत एवं सुगंधित औषधियों से अभिषेक-पूजन हुआ। तदुपरांत उन्हें नूतन वस्त्र धारण कराया गया। दूसरी बेला में 12 बजे घंटे, घड़यालों और शंख की करतलध्वनि बीच मां जानकी का प्राकट्य हुआ और भव्य आरती उतारी गई। अंत में मां जानकी के प्राकट्योत्सव का प्रसाद वितरण किया गया। माता के जन्मोत्सव में सम्मिलित होकर भक्तगणों ने अपना जीवन धन्य बनाया। श्री जानकी महल ट्रस्ट के ट्रस्टी समाजसेवी आदित्य सुल्तानिया ने बताया कि प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी महल में वैशाख शुक्ल नवमी तिथि पर मां जानकी का प्राकट्योत्सव हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया। जिसे हम सब जानकी नवमी के नाम से भी जानते हैं। जानकी नवमी पर सुबह से लेकर देररात्रि तक उत्सव का सिलसिला चलता रहा। रामनगरी के कलाकारों ने अपने गायन-वादन से उत्सव की महफिल को सजाया। उन्होंने कहा कि हमारे यहां का मुख्य उत्सव जानकी नवमी, राम नवमी व राम विवाहोत्सव है।उन्होंने कहा कि किशोरी जी के छ्ठोत्सव पर 56 भोग लगेगा। इस अवसर पर पूरा महल उत्सव से पुलकित रहा। भक्तजनों ने जानकी नवमी पर मां सीता का दर्शन कर अपना जीवन कृतार्थ किया।
: सात दिवसीय पुत्रेष्टि यज्ञ का हुआ समापन
Fri, May 17, 2024
12 वर्षों से भव्य मंदिर निर्माण की कामना से राम महायज्ञ होता रहा, भव्य मंदिर में रामलला की स्थापना के बाद अब रामराज्य की कामना से यहां राम महायज्ञ किया गया: बिंदुगाद्याचार्य
बस्ती, अयोध्या। रामनगरी से 20 किलोमीटर यह यज्ञ उसी भूमि पर संपादित हुआ, जहां युगों पूर्व श्रीराम जैसे श्रेष्ठतम पुत्र के लिए राजा पर दशरथ जी ने पुत्रेष्टि यज्ञ किया था। सात दिवसीय यज्ञ में नित्य सवा क्विंटल हवन सामग्री से आहुतियां डाल रहे यज्ञ के संरक्षक एवं मखधाम सहित रामकोट स्थित दशरथ राज महल बड़ा स्थान के पीठाधीश्वर बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य जी महाराज ने ये बताया कि तब भी श्रीराम इष्ट थे और आज भी श्रीराम इष्ट हैं। तब जन पुत्र के रूप में महाराज दशरथ ने उनकी कामना की थी, आज हम राजा के रूप में उन्हें चाहते हैं उन्होंने युगों पूर्व जिस रामराज्य का आदर्श प्रस्तुत किया, वह पुनः फलीभूत होना 140 करोड़ भारतीयों के हित में है। दशरथमहल पीठाधीश्वर ने कहा, इसके लिए जन-जन को रामराज्य के मूल्यों और आदशों से अनुप्राणित होना होगा। इस त्रेतायुगीन यज्ञ भूमि पर बिंदुगाद्याचार्य जी के ही संयोजन में गत 12 वर्षों से भव्य मंदिर निर्माण की कामना से राम महायज्ञ होता रहा। भव्य मंदिर में रामलला की स्थापना के बाद अब रामराज्य की कामना से यहां राम महायज्ञ किया गया।
: शिद्दत से शिरोधार्य हुए फलाहारी बाबा
Mon, May 13, 2024
श्रीराजगोपाल मंदिर में हुआ श्रद्धांजलि सभा, संतो ने पुष्पांजलि अर्पित कर किया नमन
अयोध्या। प्रसिद्ध पीठ श्रीराजगोपाल मंदिर, शास्त्रीनगर के साकेतवासी महंत कौशलकिशोर शरण फलाहारी बाबा को संतों ने भावभीनी श्रद्धांजलि दी। मौका था उनकी प्रथम पुण्यतिथि महोत्सव का था। जो आश्रम में श्रद्धापूर्वक मनाई गई। शनिवार को मंदिर परिसर श्रद्धांजलि सभा आयोजित हुई। सभा में अयोध्याधाम के संत-महंतों ने पूर्वाचार्य महंत के चित्रपट पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया एवं उनके कृतित्व- व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। पुण्यतिथि महोत्सव को श्रीराजगोपाल मंदिर के वर्तमान महंत ने अपना सानिध्य प्रदान किया। इस मौके पर श्रीराजगोपाल मंदिर के अधिकारी सर्वेश्वर दास शरद जी ने कहा कि उनके गुरूदेव गौ और संत सेवी थे। जो अप्रतिम प्रतिभा के धनी संत रहे। वह त्याग, तपस्या और वैराग्य की प्रतिमूर्ति थे। उन्होंने आश्रम का सर्वांगीण विकास किया। मठ में गौ, संत, विद्यार्थी, अतिथि सेवा सुचार रूप से चल रही है। गुरूदेव हम लोगों के बीच में नही हैं, जिनकी कमी बहुत ही अखर रही है। भविष्य में उस रिक्त स्थान की पूर्ति कभी नही की जा सकती । उनकी यश-कीर्ति हमेशा हम सबके साथ रहेगी। उनके बतलाए हुए मार्ग का अनुसरण कर मैं आगे बढ़ रहा और मंदिर के विकास में कृत संकल्पित भी हूं। अधिकारी सर्वेश्वर दास ने पधारे हुए संत-महंतों का स्वागत-सम्मान किया। साकेतवासी महंत को श्रद्धासुमन अर्पित करने वालों में मणिरामदास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास, हनुमत सदन पीठाधीश्वर महंत अवध किशोर शरण, महंत मुरली दास,संकट मोचन सेना अध्यक्ष महंत संजय दास, महंत डा महेश दास, खाकचौक श्रीमहंत बृजमोहन दास, रामहर्षण कुंज महंत अयोध्या दास,राजेश पहलवान, जगदुरु परमहंसाचार्य, दशरथगद्दी महंत बृजमोहन दास, पत्थर मंदिर महंत मनीष दास, डाड़िया महंत गिरीश दास, बड़े हनुमान के उत्तराधिकारी छविराम दास,दंतधावनकुंड महंत विवेक आचारी, महंत अर्जुन दास, महंत शशिकांत दास, नागा रामलखन दास आदि रहे।