: श्री सीतारामीय सेवा मंदिरम में हनुमानजी की हुई प्राण प्रतिष्ठा
Sun, Apr 13, 2025
श्री सीतारामीय सेवा मंदिरम में हनुमानजी की हुई प्राण प्रतिष्ठाश्री सीतारामीय सेवा मंदिरम नजरबाग में तीन दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान का हुआ भव्य समापनअयोध्या। श्री सीतारामीय सेवा मंदिरम नजरबाग में शनिवार को विधि-विधान पूर्वक बजरंगबली की प्राण प्रतिष्ठा की गई। हनुमानजी का प्राण प्रतिष्ठा महाेत्सव ट्रस्ट के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद पांडेय, उपाध्यक्ष महामंडलेश्वर महंत जयराम दास खाकी बापू और प्रधानमंत्री वैद्यजी का मंदिर के महंत राजेंद्र दास वैद्य महाराज के संयोजन में संपन्न हुआ। तीन दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम, अनुष्ठान का आयोजन किया गया था। अंतिम दिन मंदिर के गर्भगृह में वैदिक मंत्राेच्चारण संग विधि-विधान पूर्वक बजरंगबली की प्राण प्रतिष्ठा कर श्रृंगार, भाेग, आरती-पूजन किया। फिर हवन-पूजन का कार्यक्रम संपन्न हुआ। तदुपरांत संत-महंतों का विशाल भंडारा आयाेजित रहा। इस सीतारामीय सेवा मंदिरम ट्रस्ट के प्रधानमंत्री एवं वैद्यजी का मंदिर के महंत राजेंद्र दास वैद्य महाराज ने बताया कि सीतारामीय सेवा मंदिरम नजरबाग में तीन दिवसीय हनुमत प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का आयोजन किया गया था। जिसका शनिवार को पूर्णाहुति व संताें के वृहद भंडारे संग समापन हुआ। मंदिरम में बजरंगबली की विधि विधान पूर्वक प्राण प्रतिष्ठा हुई। महाेत्सव में देश के विभिन्न प्रांतो से भक्तगण सम्मिलित हुए और पुण्य के भागी बने। सीतारामीय सेवा मंदिरम के कार्यालय का भी उद्घाटन वैदिक मंत्राेच्चारण के साथ किया गया। अंत में सीतारामीय सेवा मंदिरम ट्रस्ट के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद पांडेय, प्रधानमंत्री महंत राजेंद्र दास वैद्य महाराज और उपाध्यक्ष महंत जयराम दास खाकी बापू संत-महंताें का स्वागत-सम्मान कर भेंट-विदाई दी। प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव पर महंत कमलनयन दास, महापाैर महंत गिरीशपति त्रिपाठी, महंत रामनरेश दास, महंत जन्मेजय शरण, महंत बालयाेगी रामदास, महंत राममिलन दास, महंत रामकुमार दास, महंत माधवदास, महंत राममंगल दास रामायणी, महंत उद्धव शरण, महंत नवल दास, महंत रामनारायण दास, महंत रामलाेचन शरण, महंत अवधकिशाेर शरण, महंत राजन बाबा, महंत प्रियाशरण, महंत शशिकांत दास, महंत मनीष दास, महंत रामशरण दास, महंत अवनीश दास, महंत रामभद्र शरण, महंत गिरीश दास, महंत बलराम दास, संतदास, अनुपम गुप्ता आदि माैजूद रहे।
: वेदपाठी बटुकों के त्रिपुंड तिलक लगाने पर भड़के बड़ा भक्त पाल पीठाधीश्वर
Fri, Apr 11, 2025
वेदपाठी बटुकों के त्रिपुंड तिलक लगाने पर भड़के बड़ा भक्त पाल पीठाधीश्वरकहा,अयोध्या धाम अयोध्या वैष्णव की नगरी है,हमारी पहचान है ऊर्ध्व पुंड्र तिलकअयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की पावन नगरी अयोध्या वैष्णव नगरी है। हमारी पहचान है ऊर्ध्व पुंड्र तिलक है। हमें अपनी पहचान बनायें रखने की जरूरत है। इससे खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं है। आज एक कार्यक्रम के दौरान सनकादिक आश्रम के वेदपाठी बटुक त्रिपुंड तिलक लगा के पहुंचे तो उन्हें इन तिलक में देखकर बड़ा भक्त माल आश्रम पीठाधीश्वर श्रीमहंत अवधेश दास जी महाराज भड़क उठे।उन्होंने कहा कि वैष्णवों की पहचान ऊर्ध्व पुंड्र तिलक है,त्रिपुंड तिलक शैव की पहचान है। श्रीमहंत अवधेश दास ने कहा कि मुझे शैव सम्प्रदाय से कोई समस्या नही है लेकिन वैष्णव नगरी में शैव तिलक कतई बर्दाश्त नही किया जायेगा। हमारी पहचान ऊर्ध्व पुंड्र तिलक है। इसलिए सभी को यही तिलक लगानी चाहिए। बड़ा भक्त माल पीठाधीश्वर ने सभी से अपील करते हुए कहते है अयोध्या धाम के सभी संत साधक व वेदपाठी बटुक ऊर्ध्व पुंड्र तिलक लगायें और तुलसी जी की माला धारण करें। इससे समझौता न करें। बड़ा भक्त माल पीठाधीश्वर जी ने कहा कि उर्ध्व पुंड्र वैष्णव धर्म के अनुयायियों द्वारा पहना जाने वाला तिलक है, जो यह दर्शाता है कि वह हमारे आराध्य भगवान श्री सीताराम के भक्त हैं। उन्होंने कहा कि आजकल नये लोग मनमाना तिलक लगाकर घूमते है ये गलत है। इसको लेकर वह एक संतों के साथ बैठक करेगें।
: भक्त की श्वास-प्रश्वास आराध्य विग्रह के साथ धड़कती है: किलाधीश
Fri, Apr 11, 2025
भक्त की श्वास-प्रश्वास आराध्य विग्रह के साथ धड़कती है: किलाधीशआचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला में महंत मैथलीरमण शरण जी के अध्यक्षता में छठ्योत्सव की बिखरी रही छटाभगवान को कढ़ी-चावल, दही बड़ा जैसे पारंपरिक व्यंजनों का लगा भोगअयोध्या। चैत्र शुक्ल नवमी यानी 6 अप्रैल को राम जन्मोत्सव मनाए जाने के बाद शुक्रवार को उल्लास के साथ रामनगरी के मंदिरों में छठ्योत्सव मनाया गया। इस अवसर पर न सिर्फ रीति रिवाज के अनुरूप भगवान को कढ़ी-चावल, दही बड़ा जैसे पारंपरिक व्यंजनों का भोग लगाया गया, बल्कि भोज- भंडारा व प्रसाद वितरण हुआ। विशेष आयोजन आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला में हुआ। लक्ष्मणकिला में महंत मैथलीरमण शरण जी की अध्यक्षता,ब्रह्मार्षि देवेन्द्र ब्रह्मचारी मौनी जी महाराज के सानिध्य व किलाधीश जी के शिष्य युवा संत मंदिर के अधिकारी सूर्य प्रकाश शरण के संयोजन में छठ्योत्सव की छटा बिखरी रही। मंदिर में स्थापित आराध्य विग्रह के पूजन-अनुष्ठान का क्रम सुबह से ही शुरू हुआ। पूर्वाह्न की दस्तक के साथ आराध्य से आत्मीयता ज्ञापित करते गीतों ने संतों एवं श्रद्धालुओं को विभोर किया।आचार्य पीठ के महंत मैथलीरमण शरण जी ने कहा कि उत्सव को शिखर का स्पर्श दिया। कहा, यही भक्ति का वैशिष्ट्य है। किसी समीक्षक के लिए भगवान पत्थर के हों तो हों, भक्त के लिए वे चिन्मय - चैतन्य विग्रह हैं। भक्त की श्वास-प्रश्वास आराध्य विग्रह के साथ धड़कती है। वह समर्पित प्रेमी की तरह प्रेमास्पद की चिंता करता है और उनके जीवन के दिव्य दैवी प्रवाह में अपने जीवन की तलाश करता है। श्रीराम का छठ्योत्सव भक्ति की इसी लीनता का परिचायक है। और यही लीनता भक्त को भगवान से अभिन्न बनाती है। आये हुए संगीतकार व कलाकारों का स्वागत मंदिर के अधिकारी सूर्य प्रकाश शरण व प्रिया प्रीतम शरण, पुरुषोत्तम शरण एवं मौनी जी महाराज के समस्त शिष्य परिकरों ने किया। इस मौके पर हनुमत सदन पीठाधीश्वर महंत अवध किशोर शरण, बड़ा भक्त पीठाधीश्वर महंत अवधेश दास, प्रख्यात साहित्यकार चिंतक हनुमत निवास पीठाधीश्वर महंत मिथलेश नन्दनी शरण, महंत बलराम दास, महंत रामकुमार दास,महंत अंजनी शरण, डंडिया पीठाधीश्वर महंत गिरीश दास,महंत अमित कुमार दास,महंत रामजी शरण, महंत शशिकांत दास, महंत मनीष दास, सियाराम किला के व्यवस्थापक प्रहलाद शरण,संत मिथिला बिहारी दास,संजय शुक्ला, संत राम नंदन दास,संत वशिष्ठ दास, प्रियेश दास सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।