: मित्रता में त्याग और समर्पण होना चाहिए: डा राघवाचार्य
Wed, Jul 30, 2025
मित्रता में त्याग और समर्पण होना चाहिए: डा राघवाचार्यरामलला सदन देवस्थानम में बह रही भागवत कथा की रसधार,व्यासपीठ से कथा का रसास्वादन करा रहें जगद्गुरू रामानुजाचार्यअयोध्या। रामलला सदन देवस्थानम पर इन दिनों श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव की अमृत वर्षा हो रही है। जिसमें व्यासपीठ से भागवत कथा की अमृत वर्षा प्रख्यात कथावाचक रामलला सदन देवस्थानम पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य महाराज कर रहे है। यह महोत्सव मंदिर में भगवान के पवित्रोत्सव व झूलनोत्सव के पावन अवसर पर हो रहा है। कथा के छटवें दिवस पर कथा में सुदामा व परमात्मा श्री कृष्ण की मित्रता की कथा सुनाते हुए कथा व्यास स्वामीजी ने कहा कि यदि मित्रता करना सीखना है तो हमें सुदामा की त्याग और परमात्मा के समर्पण की कथा अवश्य सुनना चाहिए। मित्रता निस्वार्थ व निष्काम भाव से करना चाहिए। मित्रता में जहां स्वार्थ आता है वहां मित्रता मित्रता नहीं रह जाती। बल्कि एक स्वार्थ से परिपूर्ण संबंध बन करके रह जाता है। उन्होंने कहा कि मित्रता में त्याग और समर्पण अत्यधिक आवश्यक है एक तरफ जहां सुदामा अत्यंत गरीब होते हुए भी परमात्मा श्री कृष्ण से स्वार्थ नहीं रखता है जबकि सुदामा परमात्मा श्री कृष्ण का बालसखा है। वहीं दूसरी ओर परमात्मा श्री कृष्ण जब सुदामा जी को अपने पास आया हुआ देखते हैं तो मित्र को किसी भी प्रकार की ग्लानि न हो यह ध्यान रखते हुए सुदामा के दिए हुए चावल अत्यंत प्रेम के साथ खाते हैं और अपना सर्वस्व सुदामा के लिए समर्पित कर देते हैं। कथाव्यासजी ने कहा कि जहां पर त्याग और समर्पण की भावना है मित्रता वही है और मित्रता का असली स्वरूप भी यही है। कार्यक्रम में रामलला सदन देवस्थानम से जुडे शिष्य परिकर मौजूद रहे।
: जो भगवान श्री कृष्ण की शरणागति प्राप्त करता है वह अभ्युदय हो जाता है: रामानुजाचार्य
Wed, Jul 30, 2025
जो भगवान श्री कृष्ण की शरणागति प्राप्त करता है वह अभ्युदय हो जाता है: रामानुजाचार्यनंद घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल के जयकारे से गुंजायमान हुआ रामलला सदन देवस्थानमअयोध्या। श्रीधाम अयोध्या के रामजन्मभूमि स्थित ऐसा मंदिर जहां भगवान समेत उनके अनुजों का नामकरण संस्कार हुआ था उस प्रसिद्ध पीठ श्री रामलला सदन देवस्थानम में इन दिनों झूलनोत्सव का उल्लाह छाया हुआ है। झूलनोत्सव के पावन अवसर पर मंदिर में श्रीमद् भागवत कथा की अमृत वर्षा हो रही है। व्यासपीठ से कथा की अमृत वर्षा देवस्थानम पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य जी महाराज कर रहें है। कथा के पंचम दिवस पर रामलला सदन नंदगांव बरसाना हो गया मौका था श्रीमद् भागवत कथा का। व्यास पीठ से रामलला सदन देवस्थानम पीठाधीश्वर जगतगुरु रामानुजाचार्य डॉ स्वामी राघवाचार्य महाराज ने जैसे ही भगवान कृष्ण के जन्म के अद्भुत प्रसंग की व्याख्या की और कहां कि इस पावन धराधाम पर भगवान कृष्ण का अवतरण हुआ पूरा परिसर नंद घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल के जयकारे से गुंजायमान हो उठा, भक्तगण मंत्रमुग्ध होकर नाचने लगे। कथा में पंचम दिवस में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया गया।
जगद्गुरु महाराज ने भगवान योग योगेश्वर श्री कृष्ण के जन्म की कथा का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि जो प्राणी अपने आराधना के श्रद्धा पुष्प भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में अर्पित करता है,अर्थात् जो श्रीकृष्ण की शरणागति प्राप्त करता है,वह सदा अभ्युदय पूर्ण जीवन जीकर मुक्ति का अधिकारी बनता है तथा उसके रोग, शोक, दुःख, द्ररिदता एवं विपदाओं का हरण हो जाता है।श्री महाराज जी ने बताया कि श्रीमद्भागवत मे भगवान ने कहा कि जब मनुष्य में अहम आ जाएं उसको मेरा दर्शन नहीं हो सकता, जिसका मन निश्चल होता है निष्पाप होता है सरल होता है और भाव से सब कुछ समर्पित कर देता है उसके लिए मेरी प्रति कठिन नहीं है।
श्री महाराज जी ने बताया कि ईश्वरीय प्रेम के बिना मानवीय जीवन का कल्याण नहीं हो सकता और व्यासपीठ से महाराज जी जैसे ही भगवान पारब्रह्म परमेश्वर श्री कृष्ण भगवान के जन्म की कथा कहने लगे और कहा कि प्रभु कारागार में अवतार ले लिए पूरा रामलला सदन मंदिर भगवान कृष्ण के जयकारे से गुंजायमान हो उठा और चारों ओर हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की जयकारे से गुंजायमान होने लगा उपस्थित सभी लोग भाव विभोर होकर के नाचने लगे ऐसा विहंगम दृश्य देखकर सभी लोग भाव विभोर हो गए और भगवान कृष्ण की आरती गाने लगे।कथा शुभारंभ के पहले व्यासपीठ का पूजन यजमान ओमप्रकाश जी ने सपरिवार किया। कथा के विश्राम बेला में पुनः आरती उतारी गई और प्रसाद वितरण किया गया। कथा में राजेश मिश्रा, रमेश मिश्रा सिब्बू, राघवेंद्र अप्पू, मनोज तिवारी, संगीतकार अवधेश जी सहित बड़ी संख्या में कथा प्रेमी मौजूद रहें।
: अनादिकाल से चल रही,झूलन की परंपरा : रामदास जी
Wed, Jul 30, 2025
अनादिकाल से चल रही,झूलन की परंपरा : रामदास जीप्रसिद्ध पीठ श्री करुणानिधान भवन मंदिर में झूलनोत्सव का छाया उल्लास, मंदिर कलाकारों द्धारा प्रस्तुत किया जा रहा गीत संगीतअयोध्या। प्रतिष्ठित पीठ श्री करुणानिधान भवन मंदिर के पीठाधीश्वर महंत रामदास जी महाराज की अध्यक्षता व अधिकारी रामनारायण दास जी के संयोजन में झूलनोत्सव का उल्लास छाया है। महंत रामदास जी महाराज ने कहा कि सनातन धर्म में अनादिकाल से झूलन की परंपरा चली आ रही है। उस परंपरा का हम सब आज भी निर्वाहन कर रहे हैं। हम संत, महंत अपने-अपने मंदिरों में युगल सरकार को झूलन पर पधराकर झूला झुलाते हैं। साथ ही साथ अनेकानेक झूलन के पद्य गाकर भाव के अंतरंग में आनंदित भी होते हैं।अधिकारी रामनारायण दास ने कहा कि सर्वप्रथम प्रभु श्रीराम व मां जानकी के लिए मणिपर्वत पर झूले का आयोजन किया गया था। तब से प्रतिवर्ष श्रावण शुक्ल तृतीया को मणिपर्वत झूला मेले का आयोजन किया जाता है। इस दिन हम संत-महंत अपने मंदिरों के देव विग्रहों को पालकी पर बिठाकर गाजे-बाजे, हाथी घोड़ा संग मणिपर्वत ले जाते हैं और झूला झुलाते है। हरियाली तीज के दिन मणिपर्वत पर झूला पड़ने के साथ ही ऐतिहासिक झूला मेले का शुभारंभ हो जाता है। इसी दिन अयोध्या के मठ- मंदिरों में भी झूला पड़ जाता है। जो श्रावण शुक्ल पूर्णिमा रक्षाबंधन तक अपने चरमोत्कर्ष पर रहता है। मंदिरों में सायंकाल झूलन झांकी सजती है, जिसका सिलसिला देररात्रि तक चलता है। अनेकानेक नामचीन कलाकार अपने गायन-वादन से झूलनोत्सव में चार-चांद लगाते हैं। संत, महंत अपने-अपने मंदिरों युगल सरकार को झूला झुलाते हैं। साथ ही कलाकारों को नेग- न्यौछावर भी भेंट करते हैं। झूलन महोत्सव का कार्यक्रम पूरे 15 दिनों तक अपने चरम पर रहता है। अधिकारी राम नारायण दास जी ने कहा कि झूलन में विराजमान युगल सरकार का दर्शन करने से अपार पुण्य की प्राप्ति होती है।उन्होंने कहा कि झूलन का समापन रक्षाबंधन के दिन समारोह पूर्वक किया गया। जिसमें रामनगरी के संतों महंतो व कलाकारों का सम्मान किया गया।