: शिद्दत से शिरोधार्य हुए आचार्य रामप्रसादाचार्य
Fri, Aug 1, 2025
शिद्दत से शिरोधार्य हुए आचार्य रामप्रसादाचार्यविंदु संप्रदाय के प्रथम आचार्य विंदुगाद्याचार्य बाबा रामप्रसादाचार्य महाराज की जयंती धूमधाम से मनाई गईआचार्य रामप्रसादाचार्य की गणना नगरी के शीर्ष आचार्यों एवं पहुंचे संतों में होती है, मान्यता है कि स्वामी जी को मां सीता ने साक्षात दर्शन दिया और आशीर्वाद स्वरूप अपने हाथों से स्वयं टीका लगायाहम उनकी परंपरा आगे बढ़ाते हुए स्वयं का जीवन सार्थक समझते हैं: विंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्यअयोध्या। सावन शुक्ल सप्तमी तिथि पर चक्रवर्ती सम्राट महाराजा दशरथ जी का राजमहल बड़ास्थान संस्थापक एवं विंदु संप्रदाय के प्रथम आचार्य विंदुगाद्याचार्य बाबा रामप्रसादाचार्य महाराज की जयंती धूमधाम से मनाई गई। जयंती महोत्सव पर गुरुवार को मठ प्रांगण में कई धार्मिक अनुष्ठान-कार्यक्रम संपन्न हुआ। सुबह सर्वप्रथम मंदिर परिसर में विराजमान स्वामी रामप्रसादाचार्य महाराज की प्रतिमा का पूजन-अर्चन, आरती किया गया। तदुपरांत अयोध्यानगरी के विशिष्ट संत-महंत, धर्माचार्यों उनके कृतित्व-व्यक्तित्व का बखान किया। उसके बाद उपस्थित संत-महंत और भक्तजनों द्वारा जयंती उत्सव पर प्रसाद ग्रहण किया गया।
करीब तीन सौ वर्ष पूर्व रहे आचार्य रामप्रसादाचार्य की गणना नगरी के शीर्ष आचार्यों एवं पहुंचे संतों में होती है। मान्यता है कि स्वामी जी को मां सीता ने साक्षात दर्शन दिया और आशीर्वाद स्वरूप अपने हाथों से स्वयं टीका लगाया। यह चमत्कार तो प्रसंगवश सामने आया। अन्यथा उनका संपूर्ण जीवन किसी चमत्कार से कम नहीं रहा। दशरथ के पुराने महल में उन्होंने धूनी रमाई वह अपनी विरासत के अनुरूप रोशन हुआ ही। उनके शिष्यों एवं अनुयायियों की भी बड़ी संख्या सामने आई। मंदिर के अनेक विशाल प्रखंड और विस्तृत भू-संपदा से यह गौरव संयोजित है। संस्कृत महाविद्यालय, संत सेवा एवं उपासना के गहन केंद्र के रूप में भी रामप्रसादाचार्य के आरम की प्रतिष्ठा शताब्दियों से कायम है। वर्तमान बिदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य हम उनकी परंपरा आगे बढ़ाते हुए स्वयं का जीवन सार्थक समझते हैं। उनके कृपापात्र मंगल भवन पीठाधीश्वर श्रीमद् जगद्गुरू अर्जुनद्वाराचार्य स्वामी श्री महान्त कृपालु रामभूषण देवाचार्य के अनुसार रामप्रसादाचार्य की स्मृति हमें मार्ग दिखाती है। यह भावना मंदिर में विग्रह की तरह प्रतिष्ठित आचार्य प्रतिमा से बखूबी बयां होती है।
इस अवसर पर दशरथ महल के वर्तमान विंदुगाद्याचार्य महंत देवेंद्र प्रसादाचार्य ने कहा कि बाबा स्वामी रामप्रसादाचार्य महाराज अप्रतिम प्रतिभा के धनी संत थे। जो दशरथ महल संस्थापक व प्रथम आचार्य रहे। जिन्हें गोस्वामी तुलसीदास का अवतार माना जाता है। वहीं मंगल भवन पीठाधीश्वर श्रीमद् जगद्गुरू अर्जुनद्वाराचार्य स्वामी श्री महान्त कृपालु रामभूषण देवाचार्य जी महाराज द्वारा पधारे हुए संत-महंत, धर्माचार्यों का अंगवस्त्र ओढ़ा स्वागत-सम्मान कर भेंट, विदाई दिया गया। जयंती महोत्सव पर मणिरामदास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास, महापौर गिरीशपति त्रिपाठी, लक्ष्मणकिला धीश महंत मैथिलीरमण शरण, जगतगुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य, जगतगुरु रामानुजाचार्य राघवाचार्य, रंगमहल पीठाधीश्वर महंत रामशरण दास, अधिकारी राजकुमार दास, रामकथाकुंज के महंत डॉ. रामानंद दास, दिगंबर अखाड़ा के उत्तराधिकारी महंत रामलखन दास, उदासीव आश्रम के महंत डॉ. भरत दास, रसिक पीठाधीश्वर महंत जन्मेजय शरण, बड़ाभक्तमाल के महंत स्वामी अवधेश कुमार दास, बावन मंदिर के महंत वैदेहीवल्लभ शरण, महंत गौरीशंकर दास, हनुमत निवास महंत मिथिलेश नंदनी शरण, सियारामकिला के महंत करूणानिधान शरण, डाड़िया महंत गिरीश दास, सार्वभौम दार्शनिक आश्रम के महंत जनार्दन दास, श्रीरामाश्रम महंत महंत जयराम दास वेदांती, लालसाहेब दरबार के महंत रामनरेश शरण, जानकीकुंज के महंत वीरेंद्र दास, महंत अवधकिशोर शरण, महंत रामलोचन शरण, महंत सीताराम दास, महंत मनीष दास, महंत शशिकांत दास, महंत रामलखन शरण, महंत प्रियाशरण, महंत राजन बाबा, महंत रामनारायण दास, महंत राजीवलोचन शरण, महंत जनार्दन दास, महंत धर्मदास, महंत उद्धव शरण, महंत गणेशानंद दास, नागा रामलखन दास, महंत तुलसीदास, महंत कमलादास, महंत बालयोगी रामदास, महंत प्रशांत दास, भाजपा नेता अभिषेक मिश्रा, नंदकुमार मिश्र आदि संत-महंत
: श्रीरामचरितमानस के जरिए जन-जन में पहुंचे 'राम': महंत नंदराम दास
Thu, Jul 31, 2025
श्रीरामचरितमानस के जरिए जन-जन में पहुंचे 'राम': महंत नंदराम दासप्रसिद्ध पीठ श्रावण कुंज से गोस्वामी तुलसीदास जी का गहरा सरोकार रहा, अगले वर्ष जयंती और भी भव्य रुप से मनाई जायेगी साथ ही गोस्वामी तुलसीदास जी की प्रतिमा की स्थापना होगी: मामा दासअयोध्या। सावन शुक्ल सप्तमी के पर्व पर गुरुवार को मंदिर-मंदिर श्रीरामचरितमानस जैसे कालजयी ग्रंथ की रचना करने वाले गोस्वामी तुलसीदास जी का स्मरण कर संतों ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस अवसर पर वासुदेव घाट स्थित प्रसिद्ध पीठ श्रावण कुंज मंदिर में महंत मामा दास के संयोजन में गोस्वामी तुलसीदास जी का पूजन-अर्चन के साथ सायंकाल गोष्ठी का आयोजन हुआ। इस अवसर पर गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए निर्वाणी अनि अखाड़ा हनुमानगढ़ी के महासचिव महंत नंदराम दास जी महाराज ने गोस्वामी जी के प्रति अपनी भावसुमनाजंलि अर्पित करते हुए कहा कि श्रीरामचरितमानस के माध्यम से उन्होंने भगवान राम को जन- जन में पहुंचाने का महनीय कार्य किया। यही नहीं उन्होंने जीवन मूल्यों की भी समाज में पुनर्प्रतिष्ठा कर सम्पूर्ण विश्व को भारतीय संस्कृति से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि गोस्वामी जी ने अपनी कृति से भारत राष्ट्र की सांस्कृक्तिक एकता को मजबूत किया और एक जन-एक राष्ट्र की अवधारणा को भी बल प्रदान किया। उनके इस सामाजिक अवदान को कभी विस्मृत नहीं किया जा सकता।
हनुमानगढ़ी से जुड़े महंत बलराम दास ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने श्रीरामचरितमानस को सुस्पष्ट स्वरूप दिया है कहीं कोई भ्रम या द्वंद्व नहीं रखा है। उनके मनोमष्तिष्क में कहीं भी धर्म जाति वर्ग पंक्ति भेद लेश मात्र नहीं है। इसी कारण तुलसीदास जी और उनका मानस मानव मात्र के हृदय सिंहासन पर विराजमान हो सका। कार्यक्रम के समापन पर वृहद भंडारे का आयोजन हुआ। कार्यक्रम के संयोजक महंत प्रभुदास मामा दास जी ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने श्रीरामचरितमानस को सुस्पष्ट स्वरूप दिया है कहीं कोई भ्रम या द्वंद्व नहीं रखा है। उनके मनोमष्तिष्क में कहीं भी धर्म जाति वर्ग पंक्ति भेद लेश मात्र नहीं है। इसी कारण तुलसीदास जी और उनका मानस मानव मात्र के हृदय सिंहासन पर विराजमान हो सका। मामा दास ने कहा कि राम की कृपा के प्रति गोस्वामी तुलसीदास जी की यह जो दीनता और शरणागति है, यही उनका चरम पुरुषार्थ है। कृपा के मूल में पुरुषार्थ नहीं होता है, अपितु पुरुषार्थ के मूल में कृपा होती है। रामचरितमानस कृपासाध्य ग्रंथ है, साधन साध्य नहीं। कर्म, उपासना, साधन, अनुष्ठानादि सब ठीक हैं, पर यह सब पाने के साधन हैं। श्रावण कुंज वही स्थान है जहां गोस्वामी तुलसीदास जी ने भगवान का बाल्यकाल गुटका की रचना की थी। इसलिए इस मंदिर से गोस्वामी तुलसीदास जी का गहरा सरोकार रहा है। अगले वर्ष ये कार्यक्रम और भी भव्य रुप से मनाया जाएगा साथ ही गोस्वामी तुलसीदास जी की प्रतिमा की स्थापना होगी। इस मौके निर्वाणी अनि अखाड़ा के महासचिव महंत नंदरामदास, महंत बलराम दास, महंत वैदेही बल्लभ शरण, उपेंद्र दास, अजीत दास, लवकुश दास, सूर्य भान दास, अभय दास,पुजारी नितिन दास,महंत रामेश्वरी शरण सहित अन्य ने भी विचार व्यक्त करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि दी। महंत मामा दास ने अतिथियों का स्वागत किया।
: पौराणिक पीठ रामजानकी मंदिर श्रृंगीऋषि आश्रम के महंत बने हेमंत दास
Thu, Jul 31, 2025
पौराणिक पीठ रामजानकी मंदिर श्रृंगीऋषि आश्रम के महंत बने हेमंत दासपुत्रेष्टि यज्ञ के बाद श्रृंगी ऋषि महाराज यहीं आकर के रुक थे और साधना की थी, महाराज जी की यहां समाधि भी है: हेमंत दास पीठाधीश्वर श्रृंगीऋषि आश्रमधर्म सम्राट श्रीमहंत ज्ञानदास जी महाराज के शिष्य संकट मोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजय दास की अध्यक्षता में संतों महंतों ने रामानन्दी परम्परानुसार दिया कंठी चद्दरअयोध्या। पौराणिक पीठ रामजानकी मंदिर श्रृंगीऋषि आश्रम, शेरवाघाट में कंठी चद्दर तिलक देकर संतों महंतों ने धर्म सम्राट श्रीमहंत ज्ञानदास जी महाराज के शिष्य संकट मोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजय दास की अध्यक्षता में संतों महंतों ने श्रृंगीऋषि आश्रम, शेरवाघाट के महंत पद पर हनुमानगढ़ी वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास महाराज को प्रतिष्ठित किया।साकेतवासी महंत जगदीश दास महाराज के निधन के उपरांत उनकी इच्छा अनुसार उनके तेरहवीं संस्कार पर उनकी इच्छा अनुसार आश्रम की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए संत समाज ने सर्वसम्मति से श्री हेमंत दास को नया महंत घोषित किया। इस अवसर पर रामानन्दी परम्परा के रूप से उन्हें कंठी-चद्दर प्रदान कर गद्दी सौंप दी गई। महंत संजय दास महाराज ने बताया कि गुरुदेव भगवान के आशीर्वाद से हमारे छोटे गुरु भाई को रामजानकी मंदिर श्रृंगीऋषि आश्रम की बड़ी जिम्मेदारी महंत जगदीश दास महाराज के इच्छानुसार संतों महंतों की उपस्थिति में सौपीं गई, जिसका निर्वाहन वह पूरे मनोयोग से करेंगे, हनुमान जी महाराज और अयोध्या के संत महंत उनको आशीर्वाद देकर जो जिम्मेदारी सौंपी है उसको वह पूरे मनोयोग से पूरा करेंगे और आश्रम का चौमुखी विकास करेंगे।
महंत हेमंत दास महाराज ने कहा कि पूज्य गुरुदेव भगवान के आशीर्वाद से संतों महंतों जो जिम्मेदारी दी है उसका पालन करूंगा। महंत जगदीश दास महाराज हनुमानगढ़ी पर आते रहते थे उनकी इच्छा थी कि हनुमानगढ़ी की परंपरा से हमारे साकेत वास के बाद आश्रम की जिम्मेदारी दी जाए, संतों महंतों ने हमें श्रृंगी ऋषि आश्रम की जिम्मेदारी दी है मैं आश्रम की परंपरा का निर्वहन करुंगा इसका विकास करूंगा जिससे महंत जगदीश दास जी महाराज की आत्मा को भी शांति मिले। उन्होंने बताया कि श्रृंगी ऋषि आश्रम 84 कोसी परिक्रमा मार्ग पर है और एक पड़ाव यह भी है जिसे इसका और अधिक महत्व है अभी तक जो भी विकास जगदीश दास जी महाराज ने किया है उसको आगे बढ़ाएंगे यहां के आश्रम से जुड़े लोगों के सहयोग से। उन्होंने बताया कि आश्रम बहुत ही पौराणिक है, पुत्रेष्टि यज्ञ के बाद श्रृंगी ऋषि महाराज यहीं आकर के रुक महाराज जी की समाधि भी यहां है इससे इसकी पौराणिकता और बढ़ जाती है क्योंकि यह स्थान भगवान के राम जन्म और त्रेता युग से जुड़ा हुआ है, इसलिए पूरे मनोयोग के साथ इसका विकास करूंगा। महंती समारोह में प्रमुख रूप से निर्वाणी अनी अखाड़ा के श्रीमहंत मुरली दास,तीनों अनी अखाड़ा के पूरे प्रधानमंत्री महंत माधव दास, महासचिव महंत सत्यदेव दास, महंत नंदराम दास, बसंतिया पट्टी के महंत रामचरण दास, महंत पहलवान राजेश दास, हनुमत संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य गद्दी नसीन श्री महंत प्रेम दास जी महाराज के शिष्य महंत डॉक्टर महेश दास, सियाराम किला पीठाधीश्वर महंत करुणानिधान शरण महाराज, रसिक पीठाधीश्वर महंत जन्मेजय शरण, बड़ा भक्तमाल महंत अवधेश कुमार दास, जगतगुरु रामानंदाचार्य स्वामी वल्लभाचार्य, जगतगुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य, जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य, तुलसीदास छावनी पीठाधीश्वर महंत जनार्दन दास, श्रृंगार कुंज के महंत हरिभजन दास, हनुमानकिला के महंत परशुराम दास, बड़े हनुमान मंदिर के अधिकारी छविराम दास, करतलिया बाबा आश्रम पीठाधीश्वर महंत रामदास, सांसद करण भूषण सिंह, विधायक अभय सिंह, पूर्व विधायक इंद्र प्रताप तिवारी खब्बू, महंत संजय दास के निजी सचिव शिवम श्रीवास्तव सहित सैकड़ो संतों महंतों ने मांस जगदीश दास को श्रद्धांजलि अर्पित की और कंट्री चद्दर तिलक देकर के हनुमानगढ़ी के वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास महाराज को महंत बनाया।