: शिद्दत से शिरोधार्य हुए राम मंदिर आंदोलन के पुरोधा रामचंद्र दास परमहंस
Sun, Jul 27, 2025
शिद्दत से शिरोधार्य हुए राम मंदिर आंदोलन के पुरोधा रामचंद्र दास परमहंसराम मंदिर आंदोलन की हृदय स्थली रही दिगंबर अखाड़ा में 22वीं पुण्यतिथि पर संत धर्माचार्यों सहित शिष्य परिकरों ने पुष्पांजलि अर्पित कर नमन कियामंदिर में चल रहे पाच दिवसीय महोत्सव का हुआ भव्य समापन, अतिथियों का स्वागत किया उत्तराधिकारी महंत रामलखन दास नेअयोध्या। रामनगरी में प्रतिवाद भयंकर के नाम से मशहूर रहे राम मंदिर आंदोलन के पुरोधा रामचंद्र दास परमहंस की रविवार को 22वीं पुण्यतिथि है। राम मंदिर आंदोलन की हृदय स्थली रही दिगंबर अखाड़ा में आज उनको श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इस दौरान अयोध्या ही नहीं आसपास के जिलों के भी साधु संत मौजूद रहे और नम आंखों से राम मंदिर आंदोलन के पुरोधा रामचंद्र दास परमहंस को श्रद्धांजलि अर्पित की। स्वर्गीय रामचंद्र दास को श्रद्धांजलि अर्पित करने पहुंचे राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के साथ अयोध्या के वरिष्ठ साधु संतों ने पुष्पांजलि अर्पित की। इस दौरान राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा कि राम मंदिर आंदोलन को लेकर के कभी किसी से न डरने वाले प्रतिवाद भयंकर जिसे वाद विवाद में कभी कोई नहीं जीत सकता था, जो शंकराचार्य से भी राम मंदिर आंदोलन पर खुलकर चर्चा करते थे और प्रधानमंत्री से भी आंख में आंख डाल करके राम जन्मभूमि के मुक्ति की बात करते थे। ऐसे थे प्रतिवाद भयंकर स्वर्गीय रामचंद्र दास परमहंस। चंपत राय ने कहा कि राम मंदिर आंदोलन में हमेशा सक्रिय भूमिका निभाने वाले स्वर्गीय रामचंद्र परमहंस की आज पुण्यतिथि है, जिन्हें आज हमने श्रद्धांजलि अर्पित की है। रामचंद्र दास परमहंस को याद करते हुए उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन के साथ जानवरों से उनका विशेष लगाव था। फक्कड़ स्वभाव के कारण उन्हें परमहंस की उपाधि दी गई थी। प्रतिवाद भयंकर और परमहंस यह दोनों उपाधि उनके लिए एकदम परफेक्ट थी। हमेशा जानवरों के प्रति उनका लगाव था। बंदरों के भोजन की व्यवस्था वह प्रतिदिन करते थे। इसके साथ ही वह कभी दूध और फल का सेवन न करके केवल चाय का ही सेवन करते थे। इन तमाम विषयों पर बहुत गंभीरता से चंपत राय ने रामचंद्र दास परमहंस को याद करते हुए मीडिया से बातचीत की।
कैसरगंज के लोकप्रिय नेता पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने परमहंस के जीवन के प्रेरणादायक प्रसंगों और उनके अदम्य साहस को याद किया।
उत्तराधिकारी महंत रामलखन दास ने अपने दादा गुरु को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि पूज्य स्वर्गीय परमहंस राम मंदिर के लिए जीते थे। राम मंदिर के लिए उन्होंने आंदोलन शुरू किया और आंदोलन को ऐसी धार दे गए, जिसे कोई भूला नहीं सकता है।मंदिर के वर्तमान पीठाधीश्वर महंत रामलखन दास ने कहा कि जब-जब आंदोलन में निराशा छाई, तब-तब परमहंस जी की वाणी ने आशा का संचार किया।
परमहंस जी का सानिध्य प्राप्त करने वाले सेवानिवृत्त पीसीएस अधिकारी राजेश नाथ त्रिपाठी ने कहा कि अगर वो न होते तो मंदिर आंदोलन जन-जन का आंदोलन नहीं बन पाता। वे अकेले खड़े होकर हजारों को प्रेरित कर देते थे। महंत रामलखन दास व व्यवस्थापक आशुतोष सिंह ने संत-धर्माचार्यों का अभिनंदन किया। श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में महंत रामशरण दास, जगद्गुरु रामानन्दाचार्य रामदिनेशाचार्य, महंत गौरीशंकर दास, महंत डॉ. भरत दास, महंत विवेक आचारी, जगद्गुरु डॉ. राघवाचार्य, महंत मिथिलेश नंदिनी शरण, महंत जन्मेजय शरण, महंत अवधेश दास, महंत रामकुमार दास, कैसरगंज के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह, वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास,महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी, नगर विधायक वेदप्रकाश गुप्ता, पूर्व महापौर ऋषिकेश उपाध्याय,नीलेश सिंह, महेंद्र त्रिपाठी सहित, वृंदावन, मध्यप्रदेश, गुजरात सहित अन्य कई प्रांतों से संत-धर्माचार्य व भक्त शामिल रहे।
: रामनगरी का सुप्रसिद्ध श्रावण झूला मेला का हुआ आगाज
Sun, Jul 27, 2025
रामनगरी का सुप्रसिद्ध श्रावण झूला मेला का हुआ आगाजसिद्ध पीठ श्री दशरथ जी के राजमहल बड़ा स्थान, श्री हनुमत निवास,बड़ा.भक्त माल आश्रम समेत नगरी के विभिन्न मठ मंदिरों से निकली शोभायात्रा, मंदिर मंदिर झूलनोत्सव शुरुबड़ा भक्त माल आश्रम में झूले पर विराजमान स्वरूप सरकार को झूला झुलाते संत साधक, कजरी गीत गाती सखियांअयोध्या। अयोध्या का प्रसिद्ध मणिपर्वत झूला मेला आज से शुरू हो गया है। आज शाम को प्रसिद्ध पीठ कनक भवन, श्री दशरथ जी के राजमहल बड़ा स्थान व हनुमत निवास सहित एक हजार मंदिरों में झूला उत्सव मनाया जाएगा। अधिकांश मंदिरों में भगवान के अचल विग्रह झूलन पर विराजमान हो गए हैं। जबकि चल अर्थात उत्सव विग्रह को धूमधाम से रथ पर मणिपर्वत ले जाया जाएगा। वहां पेड़ की डाल में झूला डाल कर भगवान को सावन का पहला झूला झुलाया जाएगा।
मणिपर्वत पर झूले पर विराजमान भगवान के विग्रह और स्वरूपों के सामने गायन-वादन और नृत्य करके संत भगवान को प्रसन्न करेंगे। यह रमणीय स्थान सीता जी को बेहद प्रिय माना जाता है। मान्यता है कि आज भी सावन में सीता जी श्रीराम के साथ यहां झूला झूलती हैं। भगवान की इस झांकी का दर्शन भक्तों के सभी मनोरथों को पूरा करने वाला बताया जाता है।
मान्यता है कि राजा जनक द्वारा नेग में दी गई अशर्फी के ढेर को रखने से यह स्थान पर्वत जैसा होकर मणिपर्वत के नाम से प्रसिद्ध हुआ। यहां अत्यन्त प्राचीन मंदिर भी है जिसका कड़ी सुरक्षा के बीच आज लाखों भक्त दर्शन कर रहे हैं। मेला क्षेत्र में पुलिस और प्रशासन के सारे अधिकारी डटे हुए हैं। यात्रा मार्ग की सुरक्षा में पुलिस के साथ पीएसी भी लगाई गई। शोभायात्रा चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ जी का राजमहल के पीठाधीश्वर बिंदुगाद्याचार्य महंत देवेंद्रप्रसादाचार्य जी महाराज के पावन सानिध्य व मंगल भवन पीठाधीश्वर श्रीमद् जगद्गुरू अर्जुनद्वाराचार्य स्वामी श्री महान्त कृपालु रामभूषण देवाचार्य जी महाराज के संयोजन में निकली। हनुमत निवास से रथ पर सवार युगल सरकार के साथ आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला के किलाधीश महंत मैथली रमण शरण व हनुमत निवास के महंत मिथलेश नन्दनी शरण अपने शिष्य परिकरों के साथ शोभायात्रा सहित मणिपर्वत पर युगल सरकार को झूला झुलाया। इसके बाद से ही अयोध्या के मठ मंदिरों में झूलनोत्सव का आगाज हो गया। तो वही नगरी के बड़ा भक्त माल आश्रम में झूले पर विराजमान स्वरूप सरकार को झूला झुला रहें संत साधक। मंदिर में करीब एक दर्जन सखियां कजरी गीत गायन करके नृत्य कर रही है। मंदिर में अध्यात्म, गीत व संगीत की त्रिवेणी बह रही है। झूलनोत्सव को बड़ा भक्त माल पीठाधीश्वर महंत अवधेश दास महाराज अपनी अध्यक्षता प्रदान कर रहें देखरेख कृष्णा दास कर रहें।
: शिद्दत से शिरोधार्य हुए झुनझुनिया बाबा
Sun, Jul 27, 2025
शिद्दत से शिरोधार्य हुए झुनझुनिया बाबासियाराम किला में संस्थापक आचार्य की 31वीं पुण्यतिथि पर संतों ने पुष्पांजलि अर्पित कियाअयोध्या। मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम की धराधाम को सन्तो की सराह भी कही जाती है। या हम यूं कह ले कि रामनगरी में अनेक भजनानन्दी सन्त हुये उनमें से एक रहे विभूषित जगदगुरू स्वामी श्री जानकी शरण झुनझुनिया बाबा जो रामनाम के सच्चे साधक के रूप में न सिर्फ अयोध्या अपितु पूरे भारत में रामनाम की अलख जगायी।
झुनझुनिया बाबा का नाम अयोध्या के सिद्ध संतों में शामिल है। बाबा को सीता जी की सखी चंद्रकला का अवतार कहा जाता है। यही वजह थी कि बाबा हमेशा स्त्री रूप में रहते थे और राम धुन में लीन रहते थे। रसिक भाव से श्रीराम नाम का प्रचार कर उसे जनमानस के हृदय में प्रतिष्ठित करने वाले स्वामी जानकी शरण महाराज उर्फ झुनझुनिया बाबा की गिनती अयोध्या के सिद्ध संतों की अग्रणी पंक्ति में की जाती है। महाराजश्री को सीता जी की सहेली चंद्रकला का अवतार माना जाता है। उन्होंने सरयू के तट पर जहां तपस्या की थी। वहां सियाराम किला भव्य मंदिर बना हुआ है। रविवार को सियारामकिला झुनकी घाट पर 31वीं पुण्यतिथि समारोह पूर्वक मनाई गई। जिसमें रामनगरी के विशिष्ट संत-महंत और धर्माचार्याें ने पूर्वाचार्य की प्रतिमा पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। संताें ने संस्थापक आचार्य के कृतित्व एवं व्यक्तित्व पर प्रकाश भी डाला। सियारामकिला झुनकी घाट के वर्तमान पीठाधीश्वर करुणानिधान शरण महाराज ने कहा कि दादा गुरूदेव अप्रतिम प्रतिभा के धनी संत थे। उनकी गणना सिद्ध संताें में हाेती रही है। उनका व्यक्तित्व बड़ा ही उदार था। रामनगरी के सभी संत-महंत उनका आदरपूर्वक सम्मान करते थे। जीवन पर्यंत मठ के उत्तराेत्तर समृद्धि में लगे रहे। आज उन्हीं की देन है कि आश्रम अयाेघ्यानगरी के प्रमुखतम पीठाें में से एक है। जहां गाै, संत, विद्यार्थी व आगंतुक सेवा सुचार रूप से चल रही है। इस माैके पर मणिराम छावनी के महंत कमलनयन दास, निर्वाणीअनि अखाड़ा के श्रीमहंत मुरली दास, जानकी घाट बड़ा स्थान के रसिक पीठाधीश्वर महंत जन्मेजय शरण,जगद्गुरू रामानन्दाचार्य रामदिनेशाचार्य, जगद्गुरू रामानन्दाचार्य स्वामी बल्लभाचार्य,महंत गौरीशंकर दास, बड़ाभक्तमाल महंत अवधेश दास, खाक चौक के महंत बृजमोहन दास,महंत गिरीश दास, महंत मनीष दास,महंत अवध किशोर शरण, महंत रामकुमार दास, महंत बलराम दास, तुलसी दास जी की छावनी पीठाधीश्वर महंत जनार्दन दास, महंत रामजी शरण,महंत शरद जी, करतलिया बाबा आश्रम पीठाधीश्वर महंत रामदास, पूर्व सांसद लल्लू सिंह,महापौर गिरीश पति त्रिपाठी, उत्तम बंसल,राजू दास,पार्षद पुजारी रमेश दास, प्रियेश दास,आलोक मिश्रा, महेंद्र त्रिपाठी आदि संत-महंत व भक्तगण उपस्थित रहे।