: महा रुद्राभिषेक : हर-हर महादेव के निनाद से गूंज उठी रामनगरी
Sat, Jul 26, 2025
महा रुद्राभिषेक : हर-हर महादेव के निनाद से गूंज उठी रामनगरी
वशिष्ठ फाउंडेशन ने आयोजित किया सामूहिक रुद्राभिषेक
अनुसूचित वर्ग की एक हजार महिलाओं ने किया शिवपूजन
अयोध्या। प्रभु राम की नगरी अयोध्या शनिवार को हर-हर महादेव की उद्घोष से गूंज उठी। मौका था टेढ़ी बाजार तिराहे पर स्थित अरुंधति मल्टीलेवल पार्किंग परिसर में आयोजित सामूहिक रुद्राभिषेक का, जिसका आयोजन किया था वशिष्ठ फाउंडेशन ने। यहां पिछड़ी-अनुसूचित जाति की महिलाएं रहीं या अगड़ी जाति की, सभी एक साथ इस तरह पंक्तिबद्ध हुईं, जैसे सनातन संस्कृति में भेदभाव को हमेशा के लिए विदा कर रही हों। अद्भुत, अकल्पनीय दृश्य! सनातन संस्कृति की एकता का पर्याय दिख रहा था।
सुबह के 9ः00 बजे अयोध्या के मल्टी स्टोरी पार्किंग में सनातन संस्कृति के उद्भव का नजारा प्रस्तुत हो रहा था। यहां लगभग एक हजार विभिन्न वर्ग की महिलाएं और चुनिंदा पुरुष इकट्ठा थे। सभी का वशिष्ठ फाउंडेशन की महासचिव श्रीमती राजलक्ष्मी तिवारी ने महापौर महंत गिरीश पति त्रिपाठी के साथ स्वागत किया और उन्हें पंक्तिबद्ध बैठाकर पार्थिव रुद्राभिषेक के लिए पूजन सामग्री उपलब्ध कराई।
इस मौके पर महापौर ने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए सनातन संस्कृति को कमजोर करने की साजिश निरंतर रची जा रही है, ऐसे में शिव की आराधना से लोगों में सुख, शांति और समृद्धि आएगी। उन्होंने कहा कि हम सभी लोग राम के हैं। शिव सभी के आराध्य। इसलिए सभी को शिव पूजन कर बच्चों में सदाचार एवं शिक्षा के प्रति ललक पैदा करनी चाहिए। शिव ही सत्य है। सनातन है।
फाउंडेशन की महासचिव राजलक्ष्मी तिवारी ने कहा कि फाउंडेशन के माध्यम से हम ऐसे लोगों को खोज कर उनके घरों में हनुमान चालीसा का पाठ करने की कोशिश कर रहे हैं, जो किन्हीं कारण से हिंदू पूजन पद्धति से विमुख हो रहे हैं। अगर लोग घरों में राम एवं शिव की पूजा करेंगे, बच्चों को सदाचार सिखाएंगे तो उनका बुढ़ापा संवरेगा, क्योंकि केवल हिंदू धर्म में ही माता-पिता को ईश्वर के समान माना गया है और उनकी पूजा करने के लिए प्रेरित किया गया है।
इसके बाद आचार्य शिवेंद्र एवं उनके सहयोगी आचार्य रामजी, आचार्य अमित पांडे, आचार्य हिमांशु, इंद्रजीत शुक्ल आदि की अगुवाई में पूजन की प्रक्रिया शुरू हुई। दो दर्जन बटुक ब्राह्मण उनकी सहायता कर रहे थे। रुद्राभिषेक के दौरान शास्त्रीय संगीत की पताका भी फहरा रही थी। आयोजन में पार्षद रमाशंकर निषाद, दिनेश पांडेय, दीपक चौधरी, आभा सिंह, अनीता दुबे, भीखापुर की वीरमति, कुशमाहा की पुष्पा व अन्नू, आशापुर की इंद्रावती, सहनवा की किस्मता, मीरापुर की सीमा, चांदपुर की श्यामकली, दरगाह बगिया की रुकमा देवी, मक्कापुर की रेनू, पिपरी की मंजू निषाद, चांदपुर की बिट्टू वाल्मीकि, हर्ष निषाद आदि का सहयोग रहा। कार्यक्रम के समापन पर फाउंडेशन की ओर से महिलाओं को साड़ी एवं श्रृंगार सामग्री भेंट की गई एवं सभी को प्रसाद वितरित किया गया।
: संविधान मान स्तंभ स्थापना दिवस जैसे गम्भीर मुद्दे से भटके सपाई
Sat, Jul 26, 2025
संविधान मान स्तंभ स्थापना दिवस जैसे गम्भीर मुद्दे से भटके सपाईपीडीए के नाम पर शक्ति प्रदर्शन तक सीमित रहा सपा का कार्यक्रमअव्यवस्थाओं की भेंट चढ़ा कार्यक्रम, गुटबाजी चरम पर, 2027 साबित होगा सफेद हाथीमंच पर रहा अव्यवस्थाओं का बोलबाला, कार्यकर्ता अफरातफरी की भेंट चढ़ेअयोध्या। एक तरफ समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव लगातार पीडीए का दम भरते हुए 2027 विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की सत्ता में वापसी का संघर्ष कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ खुद उनके नेता ही उनके स्वप्न का पलीता लगाने में जुटे हुए हैं। ऐसा ही कुछ नजारा आज संविधान मान स्तंभ स्थापना दिवस के अवसर पर पीडीए आयोजित जनपद अयोध्या की फारेवर लान का कार्यक्रम था। जहां पर लग रहा था कि आज टिकटों का बंटवारा होने वाला है शक्ति प्रदर्शन की होड़ लगी है थी। ना किसी को संविधान पर चर्चा से लेना देना न आरक्षण पर चर्चा और ना ही पीडीए से लेनादेना है। सिर्फ अपने नेता व अपना जिंदाबाद लगाने मे समर्थकों की होड़ लगी लगी थी। जो कार्यकर्ता आ रहे थे वह इस कदर गुटबाजी में मशगूल थे कि वह अपने ही नेता का जिंदाबाद लगा रहे थे उनको ना अखिलेश यादव से लेना है ना समाजवादी पार्टी से लेना है ऐसे में सफेद हाथी साबित हो रहा है आने वाला 2027 का विधानसभा चुनाव। सपा में जिला नेतृत्व से लेकर सारी कमेटियां सिर्फ जेब की साबित हो रही है। ऐसे में बड़ी कठिन है डगर सत्ता में वापसी की। ये आलम तब है जब सपा मुखिया दिन रात परिश्रम करके पीडीए की धार देने में जुटे है वह लगातार अपने कार्यकर्ताओं का उत्साह वर्धन करने में लगे हुए हैं। उसी का ठीक उल्टा अयोध्या जिले में दिखने को मिल रहा है। समाजवादी पार्टी अयोध्या में गुटबाजी लगातार बढ़ती जा रही है। आज के कार्यक्रम में मंच से ही नेता एकदूसरे को इशारे इशारे में धमका रहें थे। वो भी तक सब चुनावी वर्ष शुरु होने को है। कुछ कट्टर सपा नेता नाम न छापने की शर्त पर बतायें कि कार्यकर्ता अफरातफरी की भेंट चढ़ गयें कोई नेता कार्यकर्ताओं की हालचाल लेने वाला नहीं था।
: श्रद्धा, समर्पण और प्रेम का प्रतीक बना झुनझुनिया बाबा आश्रम
Sat, Jul 26, 2025
श्रद्धा, समर्पण और प्रेम का प्रतीक बना झुनझुनिया बाबा आश्रमपुण्यतिथि विशेष
झुनझनियां बाबा राम नाम के अनन्य उपासक थे, अपनी भक्ति श्रद्धा और भावना से परमात्मा को सखी रूप से करते थे आराधनातीन दशक से आश्रम को सर्वोच्च शिखर पर स्थापित किया श्रीमहंत करूणा निधान शरण जी महाराज नेअयोध्या। मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम की धराधाम को सन्तो की सराह भी कही जाती है। या हम यूं कह ले कि रामनगरी में अनेक भजनानन्दी सन्त हुये उनमें से एक रहे विभूषित जगदगुरू स्वामी श्री जानकी शरण झुनझुनिया बाबा जो रामनाम के सच्चे साधक के रूप में न सिर्फ अयोध्या अपितु पूरे भारत में रामनाम की अलख जगायी।
झुनझुनिया बाबा का नाम अयोध्या के सिद्ध संतों में शामिल है। बाबा को सीता जी की सखी चंद्रकला का अवतार कहा जाता है। यही वजह थी कि बाबा हमेशा स्त्री रूप में रहते थे और राम धुन में लीन रहते थे। रसिक भाव से श्रीराम नाम का प्रचार कर उसे जनमानस के हृदय में प्रतिष्ठित करने वाले स्वामी जानकी शरण महाराज उर्फ झुनझुनिया बाबा की गिनती अयोध्या के सिद्ध संतों की अग्रणी पंक्ति में की जाती है। महाराजश्री को सीता जी की सहेली चंद्रकला का अवतार माना जाता है। उन्होंने सरयू के तट पर जहां तपस्या की थी। वहां सियाराम किला भव्य मंदिर बना हुआ है।
सरयूतट पर सुशोभित श्री सियाराम किला झुनकी घाट के आचार्य श्री की तपोस्थली आज अपने सर्वोच्च शिखर की ओर अग्रसर है। यह आश्रम मां सरयू के पावन तट पर स्थित है। जो चतुर्दिक धर्म की स्थापना, समाज सेवा गौ सेवा अतिथि सेवा विद्यार्थी सेवा संत सेवा व दरिद्र नारायण की सेवा में भी दिन प्रतिदिन निरंतर आगे बढ़ रहा है। जहां पर पूरी निष्ठा व ईमान से सभी सेवा किया जा रहा है। इस आश्रम में भक्तों की एक लम्बी फेरहिस्त है। जिसमें पूरे भारत से लाखों भक्त इस आश्रम से जुड़े हुये है। श्री सियाराम किला को भक्ति श्रद्धा समर्पण और प्रेम का प्रतीक भी माना जाता है। मां सरयू के तट पर भव्य और आकर्षक श्री सियाराम किला झुनकीघाट भक्ति और साधना के दृष्टि से भी सर्वोत्तम स्थान माना जाता है। यहां पहुंचकर सन्त साधक अपने परमाराध्य प्रभु की आराधना कर अपने को कृत्य-कृत्य करते है। मन्दिर के जगमोहन में युगल सरकार की प्रतिमा संगमरमर से बनी दिव्य मूर्ति का दर्शन करते है। मन्दिर में लगातार आज भी सीताराम धुनि कीर्तन संपादित कर महौल को भक्ति मय बना देता है। कहते है सौन्दर्यशाली, शांत वातावरण सरयूतट साकेत लोक का अनुभव सदा सर्वदा शीतल मंद सुगंध समीर अनुपम सूर्यास्त दर्शन भजनानंदीयों के लिए उत्तम शोर से परमशांत गुफा किला से सरयू तक जाने का गुप्त मार्ग झुनकी उद्यान मिथिला वाटिका संत्संग भवन श्री युगल बिहारी जू का अद्भुत दर्शन जैसी भाव-भंगिमा रखे ठाकुर जी वैसा ही बन जाए आदि सियाराम किला का विशिष्ठ गुण है। स्वामी जानकी शरण उर्फ झुनझुनिया बाबा उल्टी खाट पर बैठकर श्री राम नाम सत्य है की धुन लगाते हुए यात्रा करते थे। झुनझुनिया बाबा कानों में बाली हाथों में कंगन पैरों में घुंघरू पहन के सीता जी की सखी चंद्रकला के रूप में ही आजीवन भगवान श्रीराम की आराधना में लीन रहे। उन्होंने सत्यभाव से श्री सीताराम की उपासना की धारा प्रज्वलित की, जो आज भी करोड़ों लोगों को रामनाम रूपी दिव्य रस का अनुभव कराती है। मंदिर के महंत करुणानिधान शरण महाराज कहते हैं की झुनझुनियां बाबा ने कई दशक तक कठोर तपस्या कर भगवान का साक्षात दर्शन प्राप्त किया। किशोरी जी से उन्हें जन कल्याण का आदेश मिला।
सिद्ध संत और श्री राम नाम के अनन्य उपासक अपनी भक्ति श्रद्धा और भावना से परमात्मा को सखी रूप से आराधना कर प्रसन्न करने वाले जगद्गुरु द्वाराचार्य अनंत श्री समलंकृत श्री जानकी शरण जी महाराज झुनझनियां बाबा जी की 30वीं पुण्यतिथि पर रविवार 27 जुलाई को चरण पादुका पूजन एवं अभिषेक के साथ धूमधाम से सिद्ध पीठ श्री सियाराम किला झुनकी घाट में मनाया जायेगा। इस आश्रम को तीन दशक से अपने सर्वोच्चत शिखर पर निरन्तर ले जाने के लिए आज भी वर्तमान महन्त श्री करूणा निधानशरण जी महराज लगे रहते है। आश्रम से जुड़े प्रख्यात कथावाचक जिनका नाम देश विदेश के नामचीन कथावाचकों में लिया जाता है। स्वामीजी प्रंभजनानन्द शरण जी महराज प्रभुवन्दन एवं जनसेवा संस्थान द्वारा निरन्तर दीन-दुखी असहाय की मदद करना चिकित्सालयों की स्थापना कर रोगियों को निःशुल्क उपचार करना वृद्धजनों व वृद्धा आश्रम असहाय व निर्धन कन्याओं का विवाह करना विशाल गौशाला प्राकृतिक प्रकोप यानि बाढ़ भूकप में राहत देना सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार करना जैसी तमाम योजनाएं चला कर निरन्तर लोगों की मदद करते चले आ रहे है। आश्रम में सभी उत्सव बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ मनाया जाता है।