: श्री राम महायज्ञ का भूमि पूजन व ध्वज स्थापना आज
Thu, Aug 7, 2025
श्री राम महायज्ञ का भूमि पूजन व ध्वज स्थापना आजभारत नहीं बल्कि पूरे विश्व में 501 रामार्चा पूजन एक साथ अयोध्या में 5 अक्टूबर से51 कुण्डीय श्री राम महायज्ञ, श्री राम मंत्र जप अनुष्ठान का होगा भव्य अनुष्ठान,लाखों रामभक्तों का होगा अद्वितीय महाकुंभश्रीमद् जगतगुरु रामानंदाचार्य स्वामी वल्लभाचार्य महाराज के संयोजन में श्री रामहर्षण मैथिल सख्य पीठ धर्माथ सेवा ट्रस्ट श्री रामहर्षणम चारुशीला मंदिर में होगा महोत्सवमहोत्सव में सीएम योगी समेत आधा दर्जन मुख्यमंत्री होगें शामिल, पीएम मोदी को भी जायेगा गया आमंत्रितअयोध्या। भारत में ही नहीं बल्कि विश्व में पहली बार एक साथ 501 रामार्चा पूजन साथ 51 कुण्डीय श्री राम महायज्ञ, श्री राम मंत्र जप अनुष्ठान 5 अक्टूबर से 14 अक्टूबर तक अयोध्या में।श्रीमद् जगतगुरु रामानंदाचार्य स्वामी वल्लभाचार्य महाराज के संयोजन में श्री रामहर्षण मैथली सख्य पीठ धर्माथ सेवा ट्रस्ट श्री रामहर्षणम चारुशीला मंदिर जानकी घाट अयोध्या द्वारा भगवान श्री राम की जन्मस्थली अयोध्या में किया जाएगा। जिसमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ मध्य प्रदेश राजस्थान सहित अन्य प्रदेशों के मुख्यमंत्री की आने की संभावना है प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी आमंत्रित किया जाएगा। जिसका भूमि पूजन श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 7 अगस्त को मणिराम दास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास, महंत स्वामी देवेंद्राप्रसादाचार्य, श्री राम वल्लभा कुंज के अधिकारी राजकुमार दास के सानिध्य में होगा। जगतगुरु रामानन्दाचार्य स्वामी वल्लभाचार्य महाराज ने बताया कि सन 2000 से अनंत श्री विभूषित श्रीमद् रामहर्षण देवाचार्य महाराज के द्वारा राम नाम जप का अनुष्ठान चल रहा है करोड़ों लोग प्रतिदिन अनुष्ठान करते हैं उसी का रजत जयंती समारोह मनाया जाना है क्योंकि राम नाम जप से ही हमारे आराध्य प्रभु श्री राम पुनः जन्म स्थान पर भव्य मंदिर में विराजमान हुए हैं। उन्होंने बताया कि मलूकपीठाधीश्वर स्वामी राजेंद्रदास देवाचार्य महाराज की कथा होगी। 5 अक्टूबर की कलश यात्रा में 1100 माताएं बहाने पीली साड़ी में कलश लेकर के सरयू तट से कार्यक्रम स्थल तक आएगी जिसमें हाथी घोड़े दर्जन रथ होंगे महान विभूतियां उसे पर विराजमान होगी और इस कार्यक्रम में लाखों भक्तों सम्मिलित होंगे हवन पूजन दर्शन यज्ञ अनुष्ठान करेंगे। कार्यक्रम की तैयारी में प्रमुख रूप से अध्यक्ष डॉ अभिलाष प्रसाद त्रिपाठी, कार्यकारी अध्यक्ष विजय कुमार मिश्रा सचिन बृजेंद्र तिवारी कोषाध्यक्ष धर्मेंद्र प्रसाद तिवारी महिला मंडल की अध्यक्ष मानवती मिश्रा पूरे मनोयोग से लगी हुई हैं।
: भगवान श्रीरामलला सरकार की सजी फूलबंगला झांकी
Thu, Aug 7, 2025
भगवान श्रीरामलला सरकार की सजी फूलबंगला झांकीपुत्रदा एकादशी पर श्रीराम लला सरकार को फूलों से सजाया और लगा 56 प्रकार के व्यंजनों का भोगरामलला को भोग और फूल बंगले की झांकी श्रीपंच तेरह भाई त्यागी खालसा, खाक चौक व श्री संकट मोचन हनुमान किला महंत परशुराम दास की ओर से रहा समर्पितअयोध्या।गर्मी की ऋतु में भगवान को गर्मी से बचाने के लिए फूल बंगले की झांकी सजाई जाती है। पुत्रदा एकादशी तिथि पर श्रीराम लला सरकार को फूलों से सजाया और 56 प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया गया। श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को चांदी के झूले पर विराजमान श्री रामलला को एकादशी तिथि पर विविध प्रकार। के फूलों से सजाया गया और इस वर्ष प्राण प्रतिष्ठित हुए राजा राम दरबार को भी विविध प्रकार से फूलों से सजाया गया, जिससे कि रामलला को गर्मी से बचाया जा सके। फूल बंगले की झांकी के साथ विशेष पूजन किया गया। रामलला को भोग और फूल बंगले की झांकी श्रीपंच तेरह भाई त्यागी खालसा, खाक चौक व श्री संकट मोचन हनुमान किला महंत परशुराम दास की ओर से समर्पित था। महंत परशुराम दास ने बताया कि राम मंदिर का फैसला आने के लिए श्री रामनवमी पर 10 वर्ष पहले से श्री राम महायज्ञ का अनुष्ठान प्रारंभ हुआ था जो आज भी जारी है और फैसले के बाद जब प्रभु श्री राम लला अस्थाई मंदिर में विराजमान हुए तब से संतो के आशीर्वाद से श्रीराम लला का फूल बंगला श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पुत्रदा एकादशी को किया जा रहा है इस वर्ष भी विविध प्रकार के फूलों से श्री राम लला, राम दरबार और मंदिर परिसर में उपस्थित हनुमानजी महाराज सहित सभी मंदिरों को फूलों से सजा सभी भगवान फूल बंगला भी विराजमान हुए 4 बजे खाक चौक से सैकड़ो की संख्या में संत महंत भक्त पैदल चलकर श्री राम जन्मभूमि पहुंचे दर्शन पूजन किया, ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने सभी संतों का स्वागत किया एक साथ सभी लोगों ने राम दरबार का दर्शन किए ऐसा मनोरम दृश्य प्रभु की कृपा से ही प्राप्त होता है और उनकी इच्छा से आगे भी श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि पर यह आयोजन होता रहेगा। फूल बंगला के साथ ठाकुर जी को छप्पन भोग लगाया गया और सभी में प्रसाद वितरण किया गया। इस अवसर पर सैकड़ो की संख्या में संत महंत मौजूद रहें।
: गलबहियां की नयनाभिराम झांकी देख निहाल हुए संत साधक
Wed, Aug 6, 2025
गलबहियां की नयनाभिराम झांकी देख निहाल हुए संत साधकरंगमहल में प्रवाहित हुई भक्ति-अध्यात्म-संस्कृति की त्रिवेणीरामनगरी के प्रतिनिधि संतों ने इस त्रिवेणी में जमकर लगाई डुबकी झूलनोत्सव के बीच फूल बंगला में विराजे अवधविहारी-विहारिणीहमारी श्वांस-प्रश्वांस आराध्य के साथ धड़कती है: महंत रामशरण दासअयोध्या। मधुर उपासना परंपरा की शीर्ष पीठ श्री रंगमहल में बीती शाम झूलनोत्सव का चरम परिभाषित हुआ। झूले पर विराजे अवधविहारी-विहारिणी को पुष्पों एवं पुष्पलड़ियों से इस कदर आच्छादित किया गया कि फूल-बंगला बन गया। एकादशी के अवसर पर मंदिर में गलबहियां की झांकी का आयोजन किया गया था। भक्ति में पगे संतों के बीच फूल-बंगला में आराध्य को सजाने की परंपरा पुरानी है और रंगमहल में इस परंपरा पर अमल के साथ आराध्य के सम्मुख संगीत की महफिल सजाई गई। प्रस्तुति देने वालों में अनेक स्थापित संगीतज्ञों सहित संत- महंत भी रहे। इस दौरान मंदिर के संस्थापक एवं महान रसिक संत सरयूशरण सहित कुछ अन्य दिग्गज आचार्यों के पदों की प्रस्तुति से भक्ति, अध्यात्म एवं संस्कृति की प्रवाहित त्रिवेणी आकर्षण के केंद्र में रही और इस सलिला में डुबकी लगाने वालों में मणिरामदास जी की छावनी के महंत कमलनयन दास, आचार्य पीठ दशरथ राजमहल बड़ास्थान पीठाधीश्वर बिदुगाद्याचार्य देवेंद्रप्रसादाचार्य, जगद्गुरु रामानुजाचार्य वासुदेवाचार्य विद्याभास्कर,जगद्गुरू रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य, रामवल्लभाकुंज के अधिकारी राजकुमारदास, राम कचेहरी चारों धाम के महंत शशिकांत दास, नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास आदि सहित रामनगरी के प्रतिनिधि अधिकांश संत शामिल रहे। उत्सव का संयोजन रंगमहल के महंत रामशरणदास ने किया। उन्होंने संतों का स्वागत करने के साथ आभारपूर्वक विदाई दी। रात्रि आठ बजे से शुरू संगीत संध्या मध्यरात्रि शयन आरती के साथ समाप्त हुई। यहां सावन की पूर्व संध्या से ही शुरू होता है झूलनोत्सव। रंगमहल में सावन माह की पूर्व संध्या से ही आराध्य का झूला तन गया है। आराध्य के सम्मुख समर्पण के गीतों की महफिल भी सज रही है। मधुर उपासना का पर्याय झूलन महोत्सव रामनगरी के आम मंदिरों में सावन शुक्ल तृतीया से शुरू होता है, पर रंगमहल में यह उत्सव प्रति वर्ष की तरह 19 दिन पूर्व ही शुरू हो गया और पूरे माह चलेगा। इसके पीछे भगवान राम के प्रति अनन्य अनुराग की परंपरा है। रंगमहल में इस विशिष्ट विरासत के सूत्रधार पहुंचे संत स्वामी सरयूशरण थे। वे उस श्रेणी के साधक थे, जिनके लिए आराध्य विग्रह मृण्मय मूर्तियां न होकर चिन्मय-चैतन्य विग्रह थे और वे आराध्य को सतत सहचर के रूप में अनुभूत करते थे। सरयूशरण की यह भाव-भावना उस रंगमहल के रूप में मूर्तिमंत हुई, जिसे उन्होंने तीन सौ वर्ष पूर्व प्रतिष्ठित किया। यह विरासत आज भी पूरी शिद्दत से प्रवाहमान है। आराध्य के साथ धड़कती है श्वास-प्रश्वास
संस्थापक आचार्य के अनुरूप रंगमहल की आला आध्यात्मिक परंपरा आगे बढ़ा रहे महंत रामशरणदास कहते हैं, हमारी श्वांस-प्रश्वांस आराध्य के साथ धड़कती है और हम यह महसूस करते हैं कि वे पूरी चैतन्यता से हमारे साथ हैं। इस भाव की तस्दीक प्रत्येक वर्ष सावन शुक्ल एकादशी के मौके पर यहां सजने वाली गलबहियां की झांकी है। मान्यता है कि सावन के आह्लाद से भरकर भगवान राम और भगवती सीता के विग्रह एक-दूसरे के कंधे में बांह डाल कर सावन की मनोहारी भावधारा में डुबकी लगाते हैं। इस मौके पर आये हुए अतिथियों का स्वागत मंदिर से जुडे संत राहुल जी व पुजारी साकेत जी, रोहित छोटू ने किया।