: शिद्दत से शिरोधार्य हुए महंत अम्बर दास
Thu, Jun 30, 2022
रामकचहरी चाराें धाम मंदिर के संस्थापक महंत स्वामी अम्बर दास की पुण्यतिथि पर संतो ने किया नमन
अयोध्या। रामनगरी के रामकाेट स्थित रामकचहरी चाराें धाम मंदिर के संस्थापक महंत स्वामी अम्बर दास महाराज काे पुण्यतिथि पर शिद्दत से याद किया गया। बुधवार को मंदिर परिसर में संताें ने साकेतवासी महंत के चित्रपट पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। साथ ही कृतित्व और व्यक्तित्व पर प्रकाश भी डाला। इस माैके पर रामकचहरी के महंत शशिकांत दास व पत्थर मंदिर के महंत मनीष दास ने कहाकि संस्थापक महंत विलक्षण प्रतिभा के धनी संत थे। उन्होंने अयाेध्यानगरी में इस विशाल आश्रम की स्थापना किया। इनके बारे में जितना भी कहा जाए वह कम ही हाेगा। पुण्यतिथि पर भण्डारे का आयाेजन हुआ, जिसमें संताें व भक्ताें ने प्रसाद पाया। आये हुज अतिथियों का स्वागत-सत्कार मंदिर के महंत शशिकांत दास व महंत मनीष दास ने किया। इस अवसर पर मणिरामदास छावनी के महंत कमलनयन दास, रंगमहल महंत रामशरण दास, जगदगुरू रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य, नाका हनुमानगढ़ी के महंत रामदास, श्रीरामवल्लभाकुंज अधिकारी राजकुमार दास, मंगल भवन सुंदर सदन पीठाधीश्वर महंत कृपालु रामभूषण दास,बावन मंदिर के महंत वैदेही बल्लभ शरण,महंत राजीव लोचन शरण, जगन्नाथ मंदिर महंत राघव दास, महंत अर्जुन दास, महंत रामकुमार दास, हनुमानगढ़ी के वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास,महंत रामकेवल दास, रामायणी राममंगल दास, महंत रामप्रकाश दास, महंत परशुराम दास, स्वामी दिलीप दास, पार्षद रमेश दास, अनुज दास व संजय शुक्ला आदि उपस्थित रहे।
: जगतगुरु परमहंस आचार्य ने मनाया काला दिवस
Sun, Jun 26, 2022
25 जून 1975 काे कांग्रेस पार्टी ने निजी स्वार्थों की रक्षा के लिए लाेकतंत्र की थी हत्या: जगतगुरु परमहंस आचार्य
कहा, 42वां संविधान संशोधन रद्द कर भारत काे हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाए
अयाेध्या। तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगतगुरु परमहंस आचार्य ने शनिवार काे अपने आश्रम पर वेद मंत्राेच्चार के साथ संविधान का पूजन-अर्चन किया। उन्होंने कहा कि मैंने संविधान का आरती उतारकर पूजन-अर्चन किया है। साथ ही साथ काला दिवस भी मनाया है। क्योंकि 25 जून 1975 काे कांग्रेस पार्टी ने निजी स्वार्थों की रक्षा के लिए लाेकतंत्र की हत्या किया था। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपनी सत्ता बचाने के लिए उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के आदेशाें की अवमानना करके। देश में आपातकाल घाेषित किया था, जिसमें 21 महीने तक पूरा देश जेल के रूप में तब्दील रहा। उस समय जितने भी निर्दाेष राष्ट्रवादी लाेग थे। उन्हें अकारण ही जेल में डाल दिया गया था। तरह-तरह की यातनाएं दी जाती थीं। साथ ही संविधान के साथ भी छेड़छाड़ किया गया। इसलिए दाेबारा उस तरह के हालात देश में न पैदा हाें। इसके लिए मैंने 25 जून काे काला दिवस मनाया है। इसके अलावा देश के संविधान का भी आरती-पूजन किया है। क्याेंकि राष्ट्रहित सर्वोपरि है। बिना राष्ट्र के कुछ भी संभव नही है। परमहंस आचार्य ने कहा कि संविधान के दायरे में सभी काे रहना चाहिए। जाे लाेग सेना पर पत्थर मार रहे व पत्थरबाजी कर रहे हैं। राष्ट्रविरोधी नारा लगा रहे और देश काे जला रहे हैं। ऐसे लाेग संविधान के दायरे में आ जाएं। क्योंकि देश से बड़ा काेई नही है। केंद्र सरकार से मेरी मांग है कि एक कानून ऐसा बनाया जाए। जाे देश काे जलाने वाले लाेग हैं। उनकाे माैके पर ही गाेली मार दी जाए। देश से बड़ा काेई नही हो सकता है। तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर ने कहा कि 42वां संविधान संशोधन जाे किया गया था। उसमें बहुत सी एंटी नेशनल धाराएं जाेड़ी गई हैं। इसलिए 42वां संविधान संशोधन रद्द कर भारत काे हिंदू राष्ट्र घोषित किया जाए। यही मांग हमारी केंद्र की माेदी सरकार से है।
: महंत दयारामदास को संतो ने किया नमन
Sun, Jun 26, 2022
23वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा के साथ हुआ वृहद भंडारा
अयाेध्या। प्रसिद्ध पीठ परमहंस आश्रम, वासुदेवघाट में शनिवार को साकेतवासी महंत दयारामदास महाराज की 23वीं पुण्यतिथि श्रद्धापूर्वक मनाई गई। पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया, जिसमें अयाेध्याधाम के विशिष्ट संत-महंत व धर्माचार्यों ने पूर्वाचार्य महंत काे भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए नमन किया। संताें ने पूर्वाचार्य के कृतित्व-व्यक्तित्व पर प्रकाश भी डाला। परमहंस आश्रम के वर्तमान पीठाधीश्वर महंत रामानंद दास महाराज ने कहा कि उनके गुरूदेव अप्रतिम प्रतिभा के धनी संत रहे। वह भजन-साधना में तल्लीन रहा करते थे। भगवान सीताराम के प्रति उनकी अटूट भक्ति रही है। उनके जैसा उदार व्यक्तित्व का संत मिलना। आज के समय में बहुत ही मुश्किल है। सरलता ताे उनमें देखते हुए झलकती थी। अयाेध्यानगरी में एक आश्रम की स्थापना कर उसका सर्वांगीण विकास किया। वह मंदिर के उत्तराेत्तर विकास में आजीवन लगे रहे। गुरूदेव हम सबके बीच में नही हैं। लेकिन उनकी यश और कीर्ति सदैव रहेगी। उनका अनुसरण कर मैं आगे बढ़ रहा हूं। आश्रम में गाै, संत, विद्यार्थी, आगंतुक सेवा सुचारू रूप से चल रही है। पुण्यतिथि पर काफी संख्या में संताें और भक्तों ने प्रसाद ग्रहण किया। मठ के व्यवस्थापक रामउजागर दास महाराज द्वारा संताें का स्वागत-सत्कार किया गया। इस अवसर पर मणिरामदास छावनी उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास, बावन मंदिर महंत वैदेहीवल्लभ शरण, जगतगुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य, मंगलभवन सुंदर सदन पीठाधीश्वर कृपालु रामभूषण दास, बधाई भवन महंत राजीव लाेचन शरण, महंत हरिभजन दास, महंत सीताराम दास, महंत रामकुमार दास, महंत अर्जुन दास, महंत शशिकांत दास, महंत मनीष दास, स्वामी छविराम दास, पार्षद पुजारी रमेश दास, पार्षद महेंद्र शुक्ला, संतदास, सूरज दास आदि माैजूद रहे।