: आसान नहीं है राहुल गांधी बनना
Mon, Jun 20, 2022
इसलिए चांदी का चम्मच फेंक ज़हर का प्याला पी रहे राहुल
निराशा, पराजय, आलोचना, गालियां और लम्बे संघर्ष के जितने कांटे चुभेंगे भविष्य में उतना लम्बा सत्ता का क़ालीन समय का चक्र बिछा देगा। सियासत का यही क़ायदा है। दूध, सोने और मरहूम ऐथलीट मिल्खा जैसी ख़ासियतें असरदार होती हैं। खूब स्वादिष्ट होने के लिए दूध को खूब खपना पड़ता है। कुंदन बनने के लिए सोने को आग में तपना पड़ता है। मिल्खा बनने के लिए हर सुबह की नींद त्यागनी पड़ती है। दौड़-दौड़ कर टांगों को पंख बना देना पड़ता है। सियासत भी ऐसी ही कुर्बानियां मांगती है। कुछ बड़ा पाने के लिए संघर्ष और पसीने की बली देनी पड़ती है। चांदी का चम्पच लेकर पैदा होना जुर्म नहीं है लेकिन यदि वक्त ने आपको संघर्षों की ट्रेनिंग नहीं दी तो चांदी के चम्मच वाले किसी भी क्षेत्र में टिकाऊ नहीं साबित होते।
सियासत के शिखर पर पंहुचने से पहले नरेन्द्र मोदी का जितना विरोध होता था राहुल गांधी का उनसे ज्यादा विरोध होने लगा है। नरेंद्र मोदी को चाय की भट्टी की तपिश, संघ के अनुशासित संघर्ष के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री की कुर्सी मिली। इस तरह सीढ़िया तय करते हुए वो प्रधानमंत्री बने। लोकप्रियता के चरम पर पंहुचे और दोबार प्रचंड बहुमत से देश ने मोदी को प्रधानमंत्री बनाया।
राहुल गांधी वाकई चांदी का चम्मच लेकर पैदा हुए थे। बल्कि चांदी का चम्मच लेकर पैदा होने वालों के तसव्वुर में राहुल से बड़ा कोई चेहरा ही नहीं है। इस देश में राहुल के परिवार से बड़ा परिवार किसका था ? किसी का नहीं। आजादी की लड़ाई से लेकर भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था मे चुनी गई हुकुमतों के तख्त-ओ-ताज वालों के घराने के चश्मों चिराग हैं राहुल। प्रधानमंत्रियों की फसल देने वाली हिन्दुस्तान की सियासत की खानदानी जमीन में राहुल गांधी ने जन्म लिया। वो गांधी/नेहरू परिवार के वारिस हैं। भारत के प्रधानमंत्रियों की गोद में पला-बढ़ा ये शख्स अपनी जवानी की पहली अंगड़ाई प्रधानमंत्री की कुर्सी पर ले सकता था। तीस से चालीस वर्ष की मुद्दत तक किसी भी युवक का कैरियर तय हो चुका होता है। इस उम्र में वो मंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक बन सकते थे। लेकिन उन्होंने वो मिसाल गलत साबित कर दी कि मछली के बच्चे को तैरने की प्रक्टिस नहीं करनी होती है। उन्होने वक्त से खूब सीखा। दादी इंदिरा गांधी के खून के अक्स में सियासत का सियाह चेहरा देखा। पिता राजीव गांधी के टुकड़े टुकड़े हो चुके जनाजे में देश पर कुर्बान होने का जज्बा देखा। मां सोनिया गांधी के उपदेश को महसूस किया जिसमें उन्होंने कहा था कि सत्ता ज़हर है। राहुल के लिए सत्ता की डोर पकड़ना इतनी आसान थी जितना आसान एक बच्चे के लिए झुनझुना पकड़ना होता है। लेकिन उन्हें मंझना था, तपना था, आलोचनाएं सहनी थी और खूब संघर्ष करने का जुनून था। इसीलिए कांग्रेस की सत्ता में भी वो विपक्षी तेवरों में दिखे। एक अध्यादेश उन्हें जनहित मे नहीं लगा तो किसी विपक्षी नेता की तरह कांग्रेस सरकार का तैयार किया हुआ अध्यादेश उन्होंने फाड़ कर अपना विरोध प्रकट किया था। पिछले आठ-नौ साल से एक दौलतमंद और ताकतवर प्रचारतंत्र उन्हें पप्पू साबित कर के कभी मजाक उड़ाता है, कभी गालियां देता है, कही कटु आलोचना करता है। नकारात्मक छवि तैयार करने वाला ऐसा विष तेज़ाब की सूरत में राहुल गांधी के चांदी के चम्मच की छवि को गला चुका है। चुनावी पराजय ने उन्हें कभी हताश नहीं होने दिया। विपक्ष की सक्रिय भूमिका में वो जमीनी नेता बनते जा रहे हैं। गांधी परिवार का कोई एक भी नेता इतनी लम्बी विपक्षी भूमिका मे नहीं रहा जितना वो रहे। दूध खप रहा है, सोना आग मे तप कर कुंदन बन रहा है। एक कमजोर युवक दौड़-दौड़ कर विश्व विजेता मिल्खा बनने जा रहा है। एक जमाने में नरेंद्र मोदी की छवि को नकारात्मक बनाने, उनकी आलोचना करने वालों ने भी ये नहीं सोचा होगा कि गालियां और कटु आलोचनाएं आर्शीवाद बन जाती हैं। जहर नीलकंठ बना जाता है, अमृत बना देता है।
इसलिए ये भी हो हो सकता है कि संघर्षों, पराजय और आलोचनाओं की पराकाष्ठा सहने वाले राहुल गांधी को समय का चक्र नेहरू,इंदिरा,राजीव,अटल और मोदी से भी अधिक लोकप्रियता नेता बना दे! उनके विरोधियों ने जो उन्हें पप्पू का खिताब दिया है ये खिताब ही रंग ला सकता है। पप्पू नाम भारत की आम जनता का प्रतीक है। एक रिसर्च के मुताबिक ये नाम सबसे ज्यादा उपयोग होने वाला भारतीय नाम है।
कांगेस के युवराज का ताना खाने वाले राहुल गांधी का रविवार को जन्म दिन था। दिन, महीने और साल गुजर रहे हैं। विपक्षी राजनीति में सबसे अधिक सक्रिय और चर्चा मे रहने वाला कांग्रेस का ये नेता थक नहीं रहा, हार नहीं रहा और हताश नहीं हो रहा, बल्कि परिपक्व होता जा रहा है। ताजुब नहीं कि आलोचनाओं का गुबार छंटने के बाद राहुल गांधी भारत की आम जनता के सबसे बड़े लोकप्रिय नेता साबित हों।
: सिख समाज के पथ प्रदर्शक थे गुरु हरगोविंद महाराज:जत्थेदार बाबा महेंद्र सिंह
Mon, Jun 20, 2022
हरगोविंद साहब महाराज के प्रकाश पर्व पर हुए शबद कीर्तन से संगत निहाल हो गई, वाहे गुरु का खालसा वाहे गुरु की जय से वातावरण गूंज उठा
अयोध्या। ऐतिहासिक गुरुनानक गोविंदधाम गुरुद्वारा, नजरबाग में सिख धर्म के छठवें गुरू हरगोविंद सिंह महाराज का प्रकाशोत्सव धूमधाम से मनाया गया।हरगोविंद साहब महाराज के प्रकाश पर्व पर हुए शबद कीर्तन से संगत निहाल हो गई। वाहे गुरु का खालसा वाहे गुरु की जय से वातावरण गूंज उठा। गुरु हरगोविंद साहब को सिख समाज का पुरोधा बतया गया।
गुरु ग्रंथ साहिब के सम्पूर्ण पाठ की समाप्ति उपरांत अरदास और कीर्तन का कार्यक्रम हुआ। इसके बाद भक्तगणों ने लंगर प्रसाद ग्रहण किया।
इस अवसर पर गुरूद्वारा नजरबाग के जत्थेदार बाबा महेंद्र सिंह ने बताया कि सिख धर्म के छठवें गुरु हरगोविंद सिंह महाराज का जन्म बडाली अमृतसर में हुआ था। वह सिक्खों के पांचवें गुरु अर्जुन सिंह के पुत्र थे। उनकी माता का नाम गंगा रहा। उन्होंने अपना ज्यादातर समय युद्ध प्रशिक्षण एवं युद्ध कला में लगाया। बाद में वे कुशल तलवारबाज, कुश्ती व घुड़सवारी में माहिर हो गए। उन्होंने ही सिखों को अस्त्रत्त्-शस्त्रत्त् का प्रशिक्षण लेने के लिए प्रेरित किया। साथ ही सिख पंथ को योद्धा चरित्र प्रदान किया। गुरु हरगोविंद सिंह एक परोपकारी और क्रांतिकारी योद्धा रहे। सेवादार नवनीत सिंह ने बताया कि छठवें गुरूदेव का प्रकाशोत्सव बड़े ही हर्षोल्लास पूर्वक मनाया गया।सेवादार नवनीत सिंह ने बताया कि सिखों के छठवे गुरु, गुरु हरगोविंद सिंह जी का जन्म बडाली (अमृतसर, भारत) में हुआ था। वे सिखों के पांचवें गुरु अर्जुनसिंह के पुत्र थे। उनकी माता का नाम गंगा था। उन्होंने अपना ज्यादातर समय युद्ध प्रशिक्षण एवं युद्ध कला में लगाया तथा बाद में वे कुशल तलवारबाज, कुश्ती व घुड़सवारी में माहिर हो गए। उन्होंने ही सिखों को अस्त्र-शस्त्र का प्रशिक्षण लेने के लिए प्रेरित किया व सिख पंथ को योद्धा चरित्र प्रदान किया। वे स्वयं एक क्रांतिकारी योद्धा थे। गुरु हरगोविंद एक परोपकारी योद्धा थे। उनका जीवन-दर्शन जन-साधारण के कल्याण से जुड़ा हुआ था। समारोह पर बड़ी संख्या में भक्तगणों ने सम्मिलित होकर अपना जीवन कृतार्थ किया।
: महंत के खिलाफ गैंगरेप का झूठा मुकदमा लिखवाने का प्रयास करने वाले पांच लोगों के खिलाफ केस दर्ज, एक गिरफ्तार
Mon, Jun 20, 2022
अयोध्या। अयोध्या के प्रसिद्ध रावत मंदिर की बेशकीमती भूमि पर कब्जे की नियत से महंत राममिलन दास के विरूद्ध गैंगरेप का झूठा मुकदमा लिखाने के प्रयास का पर्दाफाश हुआ है। एक युवती को बहका कर मुकदमा लिखवाने का प्रयास करने वाले पांच लोगों के विरूद्ध केस दर्ज किया गया है।
पुलिस की पूछताछ में इस साजिश का खुलासा उस युवती ने किया जिसे बहका कर महंत पर आरोप लगवाया जा रहा था। पुलिस ने संतोष तिवारी को गिरफ्तार कर लिया है। कोतवाल अयोध्या देवेंद्र पांडेय ने रविवार देर शाम इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मंदिर कब्जेदारी को लेकर शातिर प्रयास कर रहे थे। उन्होंने बताया कि कई दिनों से पुलिस पर दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा था।
इस मामले में अंबेडकर नगर निवासी आदर्श पांडेय, अयोध्या रायगंज गुजराती मंदिर के भरतदास, रामघाट निवासी अवधेश दास, गोंडा के महंगूपुर नवाबगंज निवासी शशिधर पांडे व भीटी अंबेडकर नगर के संतोष तिवारी के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि संतोष तिवारी के विरुद्ध पहले से भी हैं लूट और गैंगस्टर के मुकदमें दर्ज हैं।