: भक्ति करने का उत्तम साधन है श्रीमद् भागवत कथा श्रवण करना: रामप्रपन्नाचार्य
Thu, May 23, 2024
प्रसिद्ध पीठ श्री हनुमान बाग में शुरु हुआ श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ, मंदिर से निकली शोभायात्रा मां सरयू का हुआ विधिवत पूजन
अयोध्या। प्रसिद्ध पीठ श्री हनुमान बाग में श्रीमद् भागवत कथा ज्ञानयज्ञ का आज वैशाख शुक्ल चतुर्दशी को भव्य शुभारंभ हुआ। जिसका समापन ज्येष्ठ कृष्ण पष्ठी तक होगा। कथा से पूर्व मंदिर से विशाल कलश यात्रा शोभायात्रा के रुप में निकली। यहां शोभायात्रा नगर भ्रमण करते हुए मां सरयू के पावन तट पहुंची, जहां पर मां सरयू का पूजन वैदिक आचार्यों द्धारा किया गया। शोभायात्रा पुनः हनुमान बाग मंदिर वापस पहुंची। व्यास पीठ पर विराजमान स्वामी रामप्रपन्नाचार्य महाराज आचार्य कुटी श्रीधाम वृंदावन ने श्रीमद् भागवत का मंगलाचरण करते हुए कहा कई जन्मों के संचित पुण्य उदित होते हैं तब सप्तपूरियों में प्रतिष्ठित श्री अवधपुरी में भगवान के जीवन चरित्र को सुनने का सौभाग्य प्राप्त होता है। इस कली काल में भक्ति करने का उत्तम साधन है। उन्होंने कहा कि श्रीमद् भागवत कथा श्रवण करना प्रभु के नाम का चिंतन स्मरण करना एवं परोपकार की भावना से कार्य करना हम सभी जीव धन्य हैं जो देव दुर्लभ भारत भूमि में हम सब ने जन्म लिया है। स्वामी रामप्रपन्नाचार्य महाराज ने कहा कि मनुष्य के स्वरूप को पाया है यह वह पवित्र भूमि है जिसका गुणगान देवगण स्वर्ग लोक में भी करते हैं। श्रीमद्भागवत कथा से ईह लौकिक एवं पारलौकिक सुखों की प्राप्ति होती है शरणागत रक्षक है।प्रभु मां उत्तरा के गर्भ में भागवत के उत्तम श्रोता महाराज परीक्षित की प्रभु ने रक्षा की। महोत्सव की अध्यक्षता हनुमान बाग पीठाधीश्वर महंत जगदीश दास महाराज व देखरेख पुजारी योगेंद्र दास, सुनील दास, रोहित शास्त्री कर रहें।कथा में कमलेश सुषमा बसेड़िया, नितिन आरती बसेड़िया, सनत, सनातन बसेड़िया, कटारे परिवार, दीक्षित परिवार, शर्मा परिवार उपाध्याय परिवार, श्रोती परिवार, रेडियेंट परिवार व मारुतिनंदन परिवार विशेष रूप से मौजूद रहें।
: पूर्व राष्ट्रपति ने किये भगवान ऋषभदेव के दर्शन
Sun, May 19, 2024
श्री ज्ञानमती माताजी से आशीर्वाद प्राप्त करके किया आध्यात्मिक चर्चा
अयोध्या। भगवान श्री ऋषभदेव दिगम्बर जैन मंदिर, बड़ी मूर्ति, रायगंज, अयोध्या में भगवान ऋषभदेव के दर्शन एवं पूजन करने के पश्चात् रत्नवृष्टि की एवं जैन संत प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी महाराज के आचार्य पदारोहण शताब्दी वर्ष के अन्तर्गत रथ का प्रवर्तन शुभारंभ पवित्र भूमि अयोध्या से हरी झण्डी दिखाकर किया। गणिनीप्रमुख ज्ञानमती माताजी के समक्ष कोविन्द जी ने आध्यात्मिक चर्चा करते हुए कहा कि अयोध्या पावन एवं पवित्र भूमि है। यहाँ पर आने वाला हर व्यक्ति आत्मिक अनुभूति प्राप्त करता है। ज्ञान और ध्यान की यह पवित्र धरती आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत है। जहाँ पर भगवान ऋषभदेव सहित पाँच जैन तीर्थंकर भगवन्तों ने जन्म लिया एवं प्रभु राम जहाँ के कण-कण के समाए हैं। देश और दुनिया के कोने-कोने से यहाँ पर हर व्यक्ति राम भक्त के रूप में पहुँच रहा है। जहाँ जैन साध्वी ज्ञानमती माताजी का प्रवास चल रहा है। माताजी ने चर्चा के अन्तर्गत अहिंसा एवं शाकाहार पर बल देते हुए कहा कि हर व्यक्ति को अपने जीवन में शाकाहार, सदाचार, व्यसन मुक्त, स्वयं एवं समाज के निर्माण में सहयोग देना चाहिए।
समिति के मंत्री विजय कुमा ने बताया कि रामनाथ जी कोविन्द का सम्मान समिति के पीठाधीश एवं अध्यक्ष कर्मयोगी स्वस्ति रवीन्द्रकीर्ति स्वामीजी ने प्रतीक चिन्ह देकर किया एवं प्रशस्ति पत्र वैलाशचंद जैन सर्राफ-लखनऊ, विजय कुमार जैन, डॉ. जीवन प्रकाश जैन, आदीश कुमार जैन ने प्रदान किया। पूज्य गणिनीप्रमुख ज्ञानमती माताजी ने जैन ग्रंथ प्रदान किया एवं आर्यिका चंदनामती माताजी ने श्रीमती सविता कोविन्द जी को एवं स्वाति कोविन्द को जप माला प्रदान की एवं समिति के द्वारा आये हुए अतिथियों का भाव-भीना सम्मान किया गया, जिसमें राष्ट्रपति भवन के पूर्व एवं वर्तमान उच्च स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे एवं माननीय रामनाथ जी कोविन्द जी के मित्र तथा सगे संंबंधियों के साथ में अयोध्या दर्शन एवं भ्रमण का कार्यक्रम सम्पन्न किया। इस यात्रा के मध्य पूर्व राष्ट्रपति जी की माताजी के चर्चा के मध्य माताजी ने कहा कि दिल्ली से अयोध्या एवं अन्य स्थानों से अयोध्या आने वाली ट्रेनों में मांसाहार बंद होना चाहिए क्योंकि तीर्थयात्रा पर आने वाले यात्रियों के लिए सात्विक भोजन के अलावा अन्य तामसिक एवं मांसाहारी भोजन नहीं देना चाहिए। इस पर सरकार को विचार करना चाहिए। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों के साथ एक ग्रुफ चित्र भी कराया गया।
ज्ञातव्य है कि पूर्व राष्ट्रपति दिनाँक 17 मई को अयोध्या पधारे थे तथा रात्रि विश्राम दिगम्बर जैन मंदिर बड़ी मूर्ति, रायगंज गेस्ट हाउस में किया। 18 मई को प्रात:काल सर्वप्रथम भगवान श्री राम मंदिर, कनक भवन एवं दशरथ महल आदि का भ्रमण करते हुए जैन मंदिर वापस पहुँचे। एवं मध्यान्ह में राजधानी दिल्ली के लिए वंदे भारत ट्रेन से प्रस्थान किया।
इस अवसर पर मुख्य रूप से अमरचंद जैन, ऋषभ जैन-तहसील फतेहपुर, मनोज जैन, पंकज जैन, योगेश जैन, जितेन्द्र जैन, अनिल जैन, अतुल जैन, मुकुल जैन, आदीश जैन, शैंकी जैन आदि महानुभाव उपस्थित थे।
: राम के सद्गुणों का आदर्श प्रस्तुत करना वाल्मीकि रामायण का उद्देश्य: राम प्रसाद
Fri, May 17, 2024
हनुमान बाग में बह रही रामकथा की रसधार,महोत्सव का विश्राम शनिवार को
महंत जगदीश दास के अध्यक्षता में हो रहा महोत्सव, चहुंओर उत्सव का माहौल
अयोध्या। राम के सद्गुणों का उच्चतम आदर्श समाज के सम्मुख प्रस्तुत करना रामकथा का प्रमुख उद्देश्य है। एक आदर्श पुत्र, आदर्श पति, भ्राता एवं आदर्श राजा एक वचन, एक पत्नी, एक बाण जैसे व्रतों का निष्ठापूर्वक पालन करने वाले राम का चरित्र उकेरकर अहिंसा, दया, अध्ययन, सुस्वभाव, इंद्रिय दमन, मनोनिग्रह जैसे षट्गुणों से युक्त आदर्श चरित्र की स्थापना रामकथा का मुख्य प्रयोजन है। उक्त बातें राम सनेही संप्रदाय से बड़ा रामद्वारा सूरसागर जोधपुर (राजस्थान) के गादीपति संत डॉ. श्री राम प्रसाद जी महाराज ने हनुमान बाग मंदिर में आयोजित राम कथा के सातवें दिवस में कही। उन्होंने कहा कि राम परिवार के वैचारिक, भाषिक एवं क्रियात्मक पराक्रम का वर्णन करना ही वाल्मीकि रामायण का प्रधान हेतु रहा है। स्वामीजी ने कहा कि रामचरित्र के महासागर में डूबे, राम जल से आकंठ भीगे, करुणा-प्रेम, भक्ति जैसे सकारात्मक रसों से आप्लावित वाल्मीकि तमसा नदी के तट पर स्नान की इच्छा से आए। उनके हृदय में रामभक्ति का समुद्र लहरा रहा था। सारी सृष्टि ही मानो राममय हो गई थी। राम के दैविक गुण, मानवीय वृत्तियाँ, दया, उदारता, अहिंसा, अक्रोध, परदुःख, कातरता अभी भी उनके मन-मस्तिष्क पर छाई हुई थी कि शांत रस का सामना वीभत्स एवं हिंसा वृत्ति से हुआ। शीतल भूमि पर एकाएक दग्धता का अनुभव हुआ, जब सामने ही एक बहेलिए ने हिंसक भावों को प्रकट करते हुए निरपराध, मूक, प्रेमालाप करते हुये क्रौंच पक्षी को स्वार्थवश बाण से आहत कर दिया। अभी-अभी तो नारद से राम बाण, राम के शर संधान की कथा सुनी थी कि राम ने शौर्य, पराक्रम, दयालुता, उदारता आदि भावों का संरक्षण करते हुए दुष्टों के नाश एवं सज्जनों के परित्राण हेतु शस्त्र उठाए थे। महोत्सव की अध्यक्षता हनुमान बाग पीठाधीश्वर महंत जगदीश दास महाराज कर रहें है।कथा में श्रृंगार कुंज के महंत हरिभजन दास, हनुमानगढ़ी के संत मामा दास, लवकुश दास सहित बड़ी संख्या में रामनगरी के संत धर्माचार्यो ने शिरकत कर अपने अपने विचारों से श्रीरामकथा में भगवान राम के चरित्र का गुणगान किया। आये हुए संतो का विशेष अभिनन्दन हनुमान बाग के सुनील दास व रोहित शास्त्री ने किया। कथा में सैकड़ों संत महंत एवं राम कथा के रसिक गण उपस्थित रहे।