: मनुष्य में सदाचार का गुण ही सर्वश्रेष्ठ गुण है: चिदानन्दमयी
Fri, Mar 1, 2024
श्री लक्षचण्डी महायज्ञ में राष्ट्र हित में पड़ रही आहुतियां
श्रीराम लीला, श्रीकृष्ण लीला का हो रहा अद्भुत मंचन, श्रीराधा सर्वेश्वर रास मण्डली, वृन्दावन के कलाकार कर रहें मंचन
अयोध्या। मां सरयू के पावन गोद में चल रहें श्री लक्षचण्डी महायज्ञ, श्री लक्षगणपति महायज्ञ एवं श्रीराम यज्ञ में भक्तों की भारी भीड़ है। सुबह से लेकर रात्रि तक, नित्य माता भगवती की आराधना एवं ज्ञान गंगा प्रवाहित की जा रही है। 17 सौ वैदिक आचार्य व श्री प्रखर परोपकार मिशन संस्कृत एकेडमी के डॉयरेक्टर डॉ० सज्जन प्रसाद तिवारी की देख-रेख में एक साथ बैठकर दुर्गा सप्तशती एवं गणपत्यथर्व शीर्ष पाठों का वाचन हो रहे, वहीं महायज्ञ की 100 कुण्डीय विराट यज्ञशाला में देश-विदेश से यजमानगण, यज्ञाचार्य वेदमूर्ति पं० लक्ष्मीकान्त दीक्षित आचार्यत्व में पूजन एवं हवन हो रहा हैं। यज्ञस्थल पर ही दो अन्य यज्ञशाला में अग्निहोत्र वैदिकों के द्वारा श्रौत यज्ञ के अन्तर्गत मित्रविन्दा इष्टि एवं चातुर्मास्य इष्टि यज्ञ हो रहा। यह अनुष्ठान
महामण्डलेश्वर स्वामी प्रखर महाराज के पावन सनिध्य एवं श्रीमज्जद्गुरु रामानुजाचार्य डॉ० स्वामी राघवाचार्य महाराज के संयोजकत्व में हो रहा। महायज्ञ के ज्ञान मण्डपम् में प्रातः सन्त सम्मेलन, तदुपरान्त डॉ० स्वामी श्री राघवाचार्य जी महाराज के श्रीमुख से श्रीराम कथा एवं महायज्ञ के लीला मण्डपम् में श्रीराम लीला, श्रीकृष्ण लीला का अद्भुत मंचन श्रीराधा सर्वेश्वर रास मण्डली, वृन्दावन के उच्चकोटि के कलाकारों द्वारा प्रतिदिन किया जा रहा है। सायंकालीन माता सरयू जी की आरती भी नित्यप्रति की जा रही है। सन्त सम्मेलन में उपस्थित वक्ताओं ने सदाचार पर अपने-अपने विचार प्रस्तुत किए। श्री प्रखर परोपकार मिशन ट्रस्ट की संयुक्त सचिव माता चिदानन्दमयी ने 'आचार प्रभवो धर्मः' के माध्यम से श्रद्धालु भक्तों को सम्बोधित करते हुए कहा कि आचार से ही धर्म की उत्पत्ति होती है, न कि धर्म से आचार की उत्पत्ति, इसलिए मनुष्य में सदाचार का गुण ही सर्वश्रेष्ठ गुण है। उन्होंने महाराजश्री द्वारा किए जा रहे श्रीलक्षचण्डी महायज्ञ के माध्यम से समझाने का प्रयास किया कि इस महायज्ञ में दुर्गा सप्तशती एवं गणपत्यथर्वशीर्ष पाठों का वाचन एवं हवन, 1700 आचारवान् ब्राह्मणों के द्वारा ही किया जा रहा है, जिनको डॉ० सज्जन प्रसाद तिवारी के दिशा-निर्देशन में सदाचार एवं योग्यता के परीक्षण के उपरान्त ही चयनित किया गया है। पूज्य महाराजश्री, विद्वानों के चयन में सदैव सदाचार को महत्व देते हैं क्योंकि यदि महायज्ञ में सम्मिलित विद्वान सदाचारी एवं योग्य नहीं होगा तो यज्ञ का पुण्यफल कैसे प्राप्त होगा। माता जी ने कहा कि वर्तमान समय युवा पीढ़ी भ्रमित है क्योंकि वह हिन्दू, मुस्लिम, सिख एवं इसाई को ही धर्म मानती है, बल्कि यह सब पन्थ हैं। हमारा धर्म, सनातन धर्म है एवं हिन्दुस्तान में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति हिन्दू है। उन्होंने कहा कि धर्म-शास्त्रों के अध्ययन के बिना परमात्मा को समझ पाना असम्भव है, अतः धर्म-शास्त्रों का अध्ययन आज की युवा पीढ़ी के लिए नितान्त आवश्यक है। डॉ० सज्जन प्रसाद तिवारी जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि मानव शरीर से परमात्मा तक जुड़ने मार्ग सदाचार ही है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भगवत् गीता जी में शरीर से सम्बन्धित, वाणी से सम्बन्धित एवं मन से सम्बन्धित सदाचार का वर्णन किया गया है, जिनके माध्यम से हम परमपिता परमात्मा को भी पा सकते हैं।सरयू तट हो रहे इन कार्यक्रमों में राजेश अग्रवाल, दर्शन गुप्ता, प्रवीन नेमानी, श्रीमती सुषमा अग्रवाल, विजय कानोडिया, डूंगर सिंह राठौर, रघुनाथ सिंह, विकास मित्तल, आंचल मित्तल, गौरव मित्तल, राजीव गुप्ता, अनिल गर्ग, किरण गर्ग, राजकुमार जिन्दल, अभिषेक गुप्ता, डॉ० जी०सी० पाठक, सुनील नेमानी, राघवेन्द्र मिश्र, सिब्बू मिश्र, शेष नारायण त्रिवेदी 'पप्पू', दिनेश मिश्रा, सीताराम बडोनी, प्रेमाराम चौधरी आदि भक्तजन उपस्थित रहे।
: हमारी संप्रभुता व संस्कृति की पहचान फिर से वापस आ रही है: शंकराचार्य
Thu, Feb 29, 2024
रामनगरी पहुंचे शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद, किये रामलला व हनुमानजी का दर्शन
गोवर्धन मठ पुरी पीठाधीश्वर जगदुरू शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ का संकट मोचन सेना अध्यक्ष महंत संजयदास व वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास ने किया स्वागत
पीएम नरेंद्र मोदी की दृढ़ आस्था और नीतियों व सीएम योगी अथक प्रयास, सार्थकता, दृढ़ निष्ठा कम समय में राममंदिर का निर्माण हुआ और भगवान श्रीरामलला विराजमान हुए
अयोध्या। गोवर्धन मठ पुरी पीठाधीश्वर जगदुरू शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ महाराज बुधवार को प्रयागराज से सीधे रामनगरी अयोध्या पहुंचे। जहां उन्होंने सबसे पहले प्रधानतम पीठ श्री हनुमानगढ़ी में मत्था टेका। उसके बाद श्रीरामजन्मभूमि जाकर भव्य मंदिर में विराजमान श्रीरामलला सरकार का दर्शन किया। फिर सायंकाल सरयू मैया की आरती सम्मिलित हुए। वहां मां सरयू का दर्शन-पूजन, अभिषेक व आरती की। सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी में धर्मसम्राट श्रीमहंत ज्ञानदास महाराज के आश्रम पर मीडिया से मुखातिब होते हुए शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ ने कहा कि एक दशक बाद मैं अयोध्या आया हूं। इससे पहले भी कई बार यहां आकर रामलला का दर्शन किया है। लेकिन इस बार दिव्य दरबार में विराजमान श्रीरामलला का दर्शन कर कुछ अलग ही आनंद की अनुभूति हो रही है। हमारी युवा पीढ़ी का सबसे बड़ा सौभाग्य है कि पांच सौ वर्षों के लंबे संघर्षों बाद श्रीरामलला अपने भव्य मंदिर में विराजमान हुए। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अथक प्रयास, सार्थकता, दृढ़ निष्ठा से ही कम समय में राममंदिर का निर्माण हुआ। तो पीएम नरेंद्र मोदी की दृढ़ आस्था और नीतियों के कारण श्रीरामलला विराजमान हुए। श्रीरामलला के भव्य मंदिर में विराजमान होने से पूरी दुनिया में सनातनियों का सम्मान बढ़ा है। उन्होंने कहा कि हमारी संप्रभुता व संस्कृति की पहचान फिर से वापस आ रही है। हम धर्मगुरू भारत को फिर से विश्व गुरू के पद पर प्रतिष्ठित करने में लगे हैं। भारत देश अखंड क बनने जा रहा है। अखंड भारत के 6 देशों में यात्रा कर चुका हूं। जहां के लोगों में भारत के प्रति दिल और दिमाग में निष्ठा आदर विद्यमान है। जैसे अयोध्याधाम, चित्रकूट, प्रयागराज तीर्थ यहां है। वैसे ही तीर्थ अखंड भारत के उन देशों में विराजमान हुआ करते ए थे। धर्मगुरु धार्मिक एवं सांस्कृतिक तौर पर अखंड भारत के लिए कार्य कर रहे हैं। हनुमानगढ़ी में संकट मोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजयदास व वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास ने गोवर्धन मठ पुरी पीठाधीश्वर जगदुरू शंकराचार्य स्वामी अधोक्षजानंद देवतीर्थ महाराज का जोरदार स्वागत किया। इस मौके पर महंत संजयदास जी महाराज के निजी सचिव शिवम श्रीवास्तव भी मौजूद रहें।
: जैन मंदिर में भगवान पद्मप्रभु का मोक्ष कल्याणक मनाया गया
Thu, Feb 29, 2024
जैन साध्वी ज्ञानमती माताजी के सानिध्य में सम्पन्न हुआ कार्यक्रम
अयोध्या। श्री भगवान ऋषभदेव जन्मभूमि दिगम्बर जैन मंदिर रायगंज में जैनधर्म के पाँचवें तीर्थंकर भगवान पद्मप्रभु का मोक्ष कल्याणक हर्षोल्लासपूर्वक मनाया गया है। जैन समाज की सर्वोच्च साध्वी गणिनीप्रमुख ज्ञानमती माताजी प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका चंदनामती माताजी के पावन ससंघ सानिध्य में सर्वप्रथम श्रीजी का पंचामृत अभिषेक दूध, दही, घी, सर्वोषधि आदि द्रव्यों से किया गया। सारे विश्व में शांति की कामना को करते हुए भगवान के मस्तक पर शांतिधारा संपन्न की गई। इस अवसर पर भगवान पद्मप्रभु की प्रतिमा का महाभिषेक किया गया एवं निर्वाणकाण्ड पढ़ते हुए भगवान के श्री चरणों में पाँच किलो का निर्वाण लाडू समर्पित करने का सौभाग्य श्री विजय कुमार जैन मंत्री अयोध्या तीर्थक्षेत्र कमेटी ने प्राप्त किया।
इस अवसर पर विजय कुमार ने बताया कि पूज्य माताजी के ससंघ सानिध्य में कार्यक्रम सम्पन्न किया गया। माताजी ने भक्तों को आशीर्वाद देते हुए कहा कि फाल्गुन कृष्णा चतुर्थी के दिन भगवान पद्मप्रभु ने शाश्वत तीर्थ सम्मेद शिखर की पावन भूमि से मोहन कूट (मंदिर) से अनेक मुनियों के संघ में निर्वाण को प्राप्त किया एवं पद्मप्रभु भगवान का जन्म कौशाम्बी में करोड़ों वर्ष पूर्व हुआ था। कौशाम्बी तीर्थ भगवान के चार कल्याणकों से पावन तीर्थ है। इस तीर्थ पर विशाल मंदिर बना हुआ है। जैन श्रद्धालू भक्त यहाँ पर प्रतिदिन आते हैं। भगवान को मोक्षकल्याणक सभी के लिए कल्याणकारी हो ऐसा पूज्य माताजी ने अपने प्रचवन में कहा सम्पूर्ण कार्यक्रम जैनमंदिर के पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति जी के सानिध्य में सम्पन्न हुआ शाम को भगवान की 108 दीपकों से आरती सम्पन्न की गई।