: शिद्दत से शिरोधार्य हुए रामानुजाचार्य स्वामी पुरूषाेत्तमाचार्य
Tue, Mar 12, 2024
मंदिर आंदोलन में उनकी गणना अग्रणी पंक्ति के याेद्धाओं में हाेती थी, रामजन्मभूमि के लिए अपना सर्वस्व न्याैछावर कर दिया: विश्वेश प्रपन्नाचार्य
अयाेध्या। श्रीरामजन्मभूमि मुक्ति आंदोलन के महानायक, शलाका पुरुष एवं ऐतिहासिक पीठ सुग्रीवकिला पूर्वाचार्य श्रीमज्जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी पुरूषाेत्तमाचार्य महाराज काे संताें ने पांचवी पुण्यतिथि पर शिद्दत से याद किया। पुण्यतिथि पर संत-महंताें द्वारा मंदिर में स्थापित उनकी प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित कर नमन किया गया। संताें ने साकेतवासी महंत के कृतित्व और व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। इस माैके पर सुग्रीवकिला के वर्तमान पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी विश्वेश प्रपन्नाचार्य महाराज ने कहा कि उनके गुरूदेव विद्वान संत रहे। विद्वता में उन्हें महारथ हासिल था। उनकी गणना विद्वान संताें में हाेती थी। वह विलक्षण प्रतिभा के धनी संत हाेने के साथ-साथ गाै और संत सेवी रहे। उन्होंने आश्रम का सर्वांगीण विकास किया। गुरूदेव का सपना था, श्रीरामजन्मभूमि पर भव्य मंदिर का। जाे श्रीरामजन्मभूमि मुक्ति आंदोलन से जुड़े रहे। उस आंदोलन में उन्होंने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। मंदिर आंदोलन में उनकी गणना अग्रणी पंक्ति के याेद्धाओं में हाेती थी। रामजन्मभूमि के लिए उन्होंने अपना सर्वस्व न्याैछावर कर दिया। उनका सपना पूरा हुआ। श्रीरामजन्मभूमि पर दिव्य, भव्य, नूतन मंदिर बनकर तैयार हो गया, जिसमें श्रीरामलला सरकार विराजमान हुए। भव्य राममंदिर निर्माण ही गुरूदेव काे सच्ची श्रद्धांजलि है। इस अवसर पर काफी संख्या में संत-महंत, भक्तगणों ने प्रसाद ग्रहण किया। सुग्रीवकिला के उत्तराधिकारी स्वामी अनंत पद्मनाभाचार्य महाराज द्वारा आए हुए संत-महंत तथा भक्तगणों का स्वागत-सत्कार किया गया। पुण्यतिथि पर महंत रामकुमार दास, महंत अवधकिशाेर शरण, महंत गणेशानंद दास, महंत उद्धव शरण, महंत जयराम दास, महंत राममिलन शरण, महंत प्रियाशरण, महंत प्रियाप्रीतम शरण, महंत गंगादास, महंत सच्चिदानंद दास, महंत प्रेमनारायण दास, नागा कृष्णकुमार दास, रामायणी गाेवर्धन दास, संतदास, सूरज दास, विवेक दास, रामायणी रामशरण दास आदि संत-महंत, भक्तगण उपस्थित रहे।
: लोकसभा अध्यक्ष व राजस्थान के सीएम ने मंत्रिमण्डल के साथ किया रामलला का दर्शन,पूजन
Tue, Mar 12, 2024
सेवा भाव के लिए अखिल भारतीय माहेश्वरी धर्मशाला की रखी गई नींव
अभा. माहेश्वरी सेवा सदन पुष्कर के अध्यक्ष रामकुमार भूतड़ा ने अतिथियों का किया स्वागत
अयोध्या । लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा अपने मंत्रिमंडल-विधायकों संग सोमवार को अयोध्या पहुंचे। उन्होंने भव्य मंदिर में विराजमान श्रीरामलला का दर्शन किया। फिर वहां से अखिल भारतीय माहेश्वरी सेवा सदन पुष्कर द्वारा आयोजित सरस्वती देवी शिवकिशन दम्मानी भवन के भूमि पूजन-शिलान्यास कार्यक्रम में पहुंचे। लोकसभा अध्यक्ष एवं राजस्थान सीएम ने दशरथ कुंड पर सौ करोड़ से बनने वाली माहेश्वरी समाज के धर्मशाला की नींव रखी। सीएम भजनलाल शर्मा ने कहा कि यहां का कण-कण आज जिस तरह से सुहावना है, इसके लिए मैं पीएम मोदी का अभिवादन करता हूं। 500 साल से रामलला टेंट में विराजमान थे। 22 जनवरी को भव्य मंदिर में विराजमान हुए। आने वाले समय में आप देखोगे देश-दुनिया से आने वालों की कतार लगेगी। उन्होंने कहा कि माहेश्वरी समाज लोगों के उत्थान का काम करता है। ये धर्मशाला श्रद्धालुओं की सेवा के लिए बहुत उपयोगी होगा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में रामलला के दर्शन का सौभाग्य मिला है। भगवान राम का जीवन, उनके आदर्श आज हमें लोकतंत्र में उन आदर्शों पर चलने की प्रेरणा देते हैं। सीएम के साथ स्पीकर वासुदेव ददलानी, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सोपी जोशी, 57 विधायक, 8 सांसद, निर्दलीय विधायकों में चंद्रभान सिंह आक्या, प्रियंका चौधरी आदि अयोध्या पहुंचे थे। भूमि पूजन एवं शिलान्यास कार्यक्रम में श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट महासचिव चंपत व कोषाध्यक्ष गोविंददेव गिरि, राजा विमलेंद्र मोहन मिश्र, महापौर गिरीशपति त्रिपाठी, राधाकिशन दम्मानी, आनंद राठी, वंशीलाल राठी, संदीप काबरा, पानी बंशीलाल राठी, अभा. माहेश्वरी सेवा सदन पुष्कर के अध्यक्ष रामकुमार भूतड़ा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष कैलाश सोनी, महामंत्री रमेशचंद्र छापरवाल, कोषाध्यक्ष मनोहरलाल पुंगालिया, उपाध्यक्ष प्रहलाद शाह, अनिल कुमार बांगड़, जयकिशन बल्दुवा, शंकरलाल बाहेती, विजयशंकर मूंदड़ा, मंत्री सोहनलाल मूंदड़ा, मुरलीधर झंवर, श्रीभगवान बंग, संजय कुमार जैथालिया, किशन गोपाल बंग, प्रचार मंत्री भागीरथ भूतड़ा, मधुसूदन मालू, रामावतार जाजू, कमलकिशोर चांडक, सत्यनारायण काबरा, अवधकिशोर बहेती, केशरीचंद तापड्या आदि मौजूद रहे।
: रामनगरी के प्रसिद्ध किले में आज भी होती है महाराजा सुग्रीव की पूजा
Tue, Mar 12, 2024
पौराणिक कथानक के अनुसार इस स्थान पर दर्शन मात्र से दर्शन करने वाले व्यक्ति के शत्रुओं का होता है नाश
पौराणिक सिद्ध पीठ को अपने शिखर पे जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ले गए उनकी परम्पराओं का निर्वहन सुग्रीव किला के वर्तमान पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी विश्वेशप्रपन्नाचार्य व उनके शिष्य पुजारी अन्नत पदनाभाचार्य कर रहे
अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की पावन जन्मस्थली अयोध्या में मौजूद लगभग हर मंदिर से जुड़ी कोई न कोई कथा और कहानी ज़रूर है। यह वो पावन भूमि है जहां स्वयं भगवान श्री विष्णु ने मनुष्य रूप में अवतार लिया और अपनी लीलाएं की। इस पौराणिक नगरी का इतिहास बेहद पावन है। इसी पवित्र नगरी में राम जन्मभूमि परिसर के पास स्थित सुग्रीव किला अपने आप में एक ऐसा ऐतिहासिक और पौराणिक स्थान है जिसके दर्शन मात्र से सभी शत्रु समाप्त हो जाते है। इस प्राचीन किले का निर्माण त्रेतायुग में महाराजा भरत ने भगवान श्री राम के लंका पर विजय प्राप्त कर अयोध्या वापस लौटने के समय भगवान श्री राम के स्वागत के लिए माणियो से बनवाया था।जिसके बाद अयोध्या के राजा भगवान श्री राम ने इस स्थान को महाराजा सुग्रीव को अयोध्या में रहने के लिए के लिए दे दिया था। तभी से यह प्रसिद्ध स्थान सुग्रीव किला के नाम से जाना जाता है आज भी इस स्थान की पौराणिकता पुरातत्व विभाग में दर्ज है। इस पौराणिक सिद्ध पीठ को अपने शिखर पे जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज ले गए उनकी परम्पराओं का निर्वहन सुग्रीव किला के वर्तमान पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी विश्वेशप्रपन्नाचार्य व उनके शिष्य पुजारी अन्नत पदनाभाचार्य जी कर रहे है।
किला के संस्थापक आचार्य जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज की पंचम पुण्यतिथि पर मंगलवार को रामनगरी के संत धर्माचार्य आचार्य श्री को अपनी भावमयी पुष्पांजलि अर्पित करेंगे।
अयोध्या में श्री राम जन्म भूमि परिसर के बेहद करीब स्थित अत्यंत पौराणिक स्थल सुग्रीव किला को अयोध्या की पुनः स्थापना के दौरान महाराजा विक्रमादित्य ने इस किले का भी जीर्णोद्धार कराया था। इस मंदिर में आज भी भगवान श्री राम माता सीता तथा लक्ष्मण भरत शत्रुहन के साथ राजा सुग्रीव की भी पूजा होती है। इस स्थान के इतिहास का वर्णन करते हुए जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी विश्वेशप्रपन्नाचार्य जी महाराज बताते हैं कि भगवान श्री राम ने वनवास जाने से पहले महाराजा भरत को इस स्थान पर रखे आभूषण हीरे जवाहरात और माणिक्य की रक्षा करने के लिए कहा था। 14 वर्षो के उपरान्त जब राजा राम वापस अयोध्या लौटे तो भरत महाराज ने इस स्थान पर मौजूद मणियों से एक किला भगवान श्री राम के स्वागत के लिए बनवा दिया था।जब 14 वर्ष बाद श्री राम अयोध्या को लौटे तो सुग्रीव महाराज भी उनके साथ थे। भगवान श्री राम ने अयोध्या पहुचते चमचमाते महलों को देख कर भरत से पूछा कि यह महल पहले तो नहीं था तो भरत ने आप के स्वागत में बनाये जाने की बात कही इसके बाद भगवान राम ने कहा कि लंका पर विजय प्राप्त करने में मेरे अलावा महाराजा सुग्रीव का भी योगदान था जिसके बाद भगवान श्री राम ने यह किला महाराजा सुग्रीव को दे दिया।तब से यह स्थान सुग्रीव किला के नाम से प्रसिद्ध है। जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी विश्वेशप्रपन्नाचार्य जी महाराज कहते है कि हमारे पूज्य गुरुदेव भगवान जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी पुरुषोत्तमाचार्य जी महाराज के आशीर्वाद से आश्रम का विकास निरन्तर हो रहा है। उन्होंने कहा पंचम पुण्यतिथि मंदिर में श्रद्धांजलि सभा का भव्य आयोजन मंगलवार 12 मार्च को है,जिसमें गुरुदेव भगवान के श्री चरणों में संत धर्माचार्य भावमयी पुष्पांजलि अर्पित करेंगे।आये हुए अतिथियों का स्वागत पुजारी अन्नत पदनाभाचार्य करेंगे।