: फूलबंग्ले में विराजेंगे बालक भगवान रामलला व हनुमानजी
Sat, Jun 8, 2024
फूलों से महकेगा रामजन्म भूमि, कनक भवन, हनुमानगढ़ी मंदिर व मां सरयू का पावन घाट
दिव्य फूल बंगला झांकी का आयोजन वृन्दावन के जगतगुरु पीपाद्वाराचार्य बलराम देवाचार्य जी महाराज कर रहे
अयोध्या। वैष्णवनगरी के मंदिरों में ज्येष्ठ मास की तपती गर्मी में भगवान को कूल-कूल रखने के लिए संतों ने फूलबंग्ले की झांकी के आयोजन की परंपरा शुरू की थी। उत्सव के रूप में आयोजित प्राचीन काल की यह परंपरा आधुनिक काल में भी कायम है। वह भी तब जब अधिकांश मंदिरों में पंखे व कूलर की व्यवस्था की जा चुकी है। इसी परंपरा को आज भी बड़ी शिद्दत से निभा रहें वृंदावन से उच्चकोटि के संत जगतगुरु पीपाद्वारचार्य बलराम देवाचार्य महाराज के पावन सानिध्य में 10 जून सोमवार को ज्येष्ठ मास पर रामजन्मभूमि में बालक भगवान रामलला सरकार को कनकभवन में बिहारी सरकार हनुमानगढ़ी में हनुमानजी व मां सरयू के पावन तट को भव्य फूलबंग्ला झांकी सजायी जायेगी।
जगतगुरु पीपाद्वाराचार्य बलराम देवाचार्य महाराज बताते है कि मंदिरों में विराजमान भगवान के विग्रह संत-साधकों के लिए वस्तुतः अर्चावतार की भांति हैं। मंदिरों में प्राण प्रतिष्ठित देव प्रतिमा को सजीव माना जाता है। यही कारण है कि साधक संतों ने उपासना के क्रम में विराजमान भगवान के अष्टयाम सेवा पद्घति अपनाई। इस सेवा पद्घित में भगवान की भी सेवा जीव स्वरूप में ही की जाती है। जिस प्रकार जीव जैसे सोता, जागता है उसी प्रकार भगवान के उत्थापन व दैनिक क्रिया कर्म के बाद उनका श्रृंगार पूजन, आरती भोग-राग का प्रबंध किया जाता है। इसी क्रम में भगवान को गर्मी से बचाने के लिए पुरातन काल में संतों ने फूलबंग्ला झांकी की परंपरा का भी शुभारंभ किया था, जिसका अनुपालन आज भी हम कर रहे है। जगतगुरु पीपाद्वाराचार्य बलराम देवाचार्य जी महाराज ने बताया कि धर्मनगरी वृंदावन व अयोध्या में प्रतिवर्ष दिव्य भव्य फूल बंग्ला झांकी का आयोजन होता है। इस बार यह दिव्य आयोजन 10 जून सोमवार को होगा। उन्होंने बताया कि झांकी कोलकाता के कुशल कारीगरों द्वारा तैयार की जाती है, जिसमें उपयोग किए जाने वाले फूल बनारस, लखनऊ, वृन्दावन, कलकत्ता आदि जगहों से मंगवाए गए जाते है। इसके आलावा कुछ पुष्प विदेशों से भी आयातित किए जाते है। यह आयोजन जगतगुरु पीपाद्वाराचार्य बलराम देवाचार्य महाराज वृंदावन और सभी भक्तो द्वारा किया जाता है।
: विश्व कल्याण हेतु श्रीराम यज्ञ का हुआ भव्य शुभारंभ: जगदीश दास
Fri, May 31, 2024
51 कुण्डीय विराट यज्ञ में सौकड़ों वैदिक आचार्य डालेगे आहुतियां
अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की पावन नगरी अयोध्या में भगवान रामलला के प्राण प्रतिष्ठा होते ही भौगोलिक धरातल राममय हो गई।चारों तरफ भगवान के नाम कीर्तन व भक्तों में गजब का उत्साह देखने को मिल रहा है। आसमान से इन दिनों आग बरस रहा है उसके बावजूद अयोध्या में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी है। रामराज्य और विश्व कल्याण हेतु प्रसिद्ध पीठ श्री हनुमान बाग के राम बाग हाते में विशाल 51 कुण्डीय राम महायज्ञ का दिव्य आयोजन कलश यात्रा के साथ आज से शुभारंभ हो गया। हनुमान बाग पीठाधीश्वर श्रीमहंत जगदीश दास जी महाराज ने कहा कि इस श्री राम महायज्ञ का मुख्य उद्देश्य राम राज्य व विश्व कल्याण है। हवन कुंड में प्रतिदिन सौकड़ों वैदिक आचार्य आहुतियां डालेंगे। यज्ञ के दौरान प्रथम सत्र में श्रीरामकथा तो दूसरे सत्र में रामलीला का दिव्य आयोजन किया गया है। हनुमान बाग प्रतिदिन भंडारा भी चलेगा। महायज्ञ की देखरेख पुजारी योगेंद्र दास, सुनील दास व रोहित शास्त्री कर रहें है।
: राजगोपाल मंदिर में शुरु हुआ रामभक्तों की प्रसाद सेवा
Fri, May 31, 2024
मां सीता राम रसोई फाउंडेशन द्धारा चलाया जा रहा अनवरत प्रसाद सेवा भंडारा
जिसके हृदय में मंगलमय भगवान की स्मृति होती है, उसके जीवन में हर दिन उत्सव ही है: डा सर्वेश्वर दास
अयोध्या। राम ही भारत का धर्म हैं। धर्म की मूर्ति भी राम हैं। महर्षि वाल्मीकि कहते हैं- रामोविग्रहवान धर्मः। राम में ही धर्म है, राम में ही रस है। राम को बार-बार जप लिया, तो आप धर्म से परे नहीं जाएंगे। आप में वैराग्य रहेगा, मर्यादाएं रहेंगी, त्याग रहेगा। आप किसी का अहित नहीं करेंगे। राम धर्म ही हैं। जिसके हृदय में मंगलमय भगवान की स्मृति होती है, उसके जीवन में हर दिन उत्सव ही होता है। बाहर और भीतर की संपदा उसके साथ होती है। उक्त बातें राजगोपाल मंदिर के अधिकारी डा सर्वेश्वर दास शरद जी की है। उन्होंने कहा कि प्राण प्रतिष्ठा के बाद से ही मंदिर में विभिन्न प्रकार के आयामों से रामभक्तों की सेवा की जा रही है। रामभक्तों के लिए इस बार मा सीता राम रसोई फाउंडेशन द्धारा भंडारे की व्यवस्था की गई है जो अनवरत चार माह चलेगा। जिसमें भक्तों के लिए रोटी, सब्जी, दाल व चावल के साथ मीठा भी भंडारे में परोसा जायेगा। प्रतिदिन करीब 40 हजार भक्तों की भोजन सेवा की जायेगी। यह सेवा चार माह के बाद आगे भी किया जा सकता है। आज भंडारे के शुभारंभ में मणिराम छावनी के महंत कमलनयन दास,जानकी घाट बड़ा स्थान के रसिक पीठाधीश्वर महंत जन्मेजय शरण, बावन मंदिर के पीठाधीश्वर महंत वैदेही बल्लभ शरण, हनुमत सदन पीठाधीश्वर महंत अवधकिशोर शरण, एमबीदास, रामनन्दन दास आदि लोग मौजूद रहे। आये हुए अतिथियों का स्वागत श्री राज गोपाल मंदिर के महंत सीता राम शरण ने किया। भंडारे में रामभक्तों को प्रसाद ग्रहण कराते हुए राजगोपाल मंदिर के अधिकारी डा सर्वेश्वर दास शरद जी ने कहा कि जिसने गुरु और भगवान के वचनों को अपने हृदय में धारण किया है, वह चाहे कैसी भी स्थिति में हो, आनंद में रहता है। श्रीराम जैसा दयालु कोई नहीं। उन्होंने दया कर सभी को अपनी छत्रछाया में लिया। उन्होंने सभी को आगे बढ़कर नेतृत्व करने का अधिकार दिया। व्यवस्था की देखरेख में राजगोपाल मंदिर के शिष्य परिकर लगे हुए है।