: सात दिवसीय पुत्रेष्टि यज्ञ का हुआ समापन
Fri, May 17, 2024
12 वर्षों से भव्य मंदिर निर्माण की कामना से राम महायज्ञ होता रहा, भव्य मंदिर में रामलला की स्थापना के बाद अब रामराज्य की कामना से यहां राम महायज्ञ किया गया: बिंदुगाद्याचार्य
बस्ती, अयोध्या। रामनगरी से 20 किलोमीटर यह यज्ञ उसी भूमि पर संपादित हुआ, जहां युगों पूर्व श्रीराम जैसे श्रेष्ठतम पुत्र के लिए राजा पर दशरथ जी ने पुत्रेष्टि यज्ञ किया था। सात दिवसीय यज्ञ में नित्य सवा क्विंटल हवन सामग्री से आहुतियां डाल रहे यज्ञ के संरक्षक एवं मखधाम सहित रामकोट स्थित दशरथ राज महल बड़ा स्थान के पीठाधीश्वर बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य जी महाराज ने ये बताया कि तब भी श्रीराम इष्ट थे और आज भी श्रीराम इष्ट हैं। तब जन पुत्र के रूप में महाराज दशरथ ने उनकी कामना की थी, आज हम राजा के रूप में उन्हें चाहते हैं उन्होंने युगों पूर्व जिस रामराज्य का आदर्श प्रस्तुत किया, वह पुनः फलीभूत होना 140 करोड़ भारतीयों के हित में है। दशरथमहल पीठाधीश्वर ने कहा, इसके लिए जन-जन को रामराज्य के मूल्यों और आदशों से अनुप्राणित होना होगा। इस त्रेतायुगीन यज्ञ भूमि पर बिंदुगाद्याचार्य जी के ही संयोजन में गत 12 वर्षों से भव्य मंदिर निर्माण की कामना से राम महायज्ञ होता रहा। भव्य मंदिर में रामलला की स्थापना के बाद अब रामराज्य की कामना से यहां राम महायज्ञ किया गया।
: शिद्दत से शिरोधार्य हुए फलाहारी बाबा
Mon, May 13, 2024
श्रीराजगोपाल मंदिर में हुआ श्रद्धांजलि सभा, संतो ने पुष्पांजलि अर्पित कर किया नमन
अयोध्या। प्रसिद्ध पीठ श्रीराजगोपाल मंदिर, शास्त्रीनगर के साकेतवासी महंत कौशलकिशोर शरण फलाहारी बाबा को संतों ने भावभीनी श्रद्धांजलि दी। मौका था उनकी प्रथम पुण्यतिथि महोत्सव का था। जो आश्रम में श्रद्धापूर्वक मनाई गई। शनिवार को मंदिर परिसर श्रद्धांजलि सभा आयोजित हुई। सभा में अयोध्याधाम के संत-महंतों ने पूर्वाचार्य महंत के चित्रपट पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया एवं उनके कृतित्व- व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। पुण्यतिथि महोत्सव को श्रीराजगोपाल मंदिर के वर्तमान महंत ने अपना सानिध्य प्रदान किया। इस मौके पर श्रीराजगोपाल मंदिर के अधिकारी सर्वेश्वर दास शरद जी ने कहा कि उनके गुरूदेव गौ और संत सेवी थे। जो अप्रतिम प्रतिभा के धनी संत रहे। वह त्याग, तपस्या और वैराग्य की प्रतिमूर्ति थे। उन्होंने आश्रम का सर्वांगीण विकास किया। मठ में गौ, संत, विद्यार्थी, अतिथि सेवा सुचार रूप से चल रही है। गुरूदेव हम लोगों के बीच में नही हैं, जिनकी कमी बहुत ही अखर रही है। भविष्य में उस रिक्त स्थान की पूर्ति कभी नही की जा सकती । उनकी यश-कीर्ति हमेशा हम सबके साथ रहेगी। उनके बतलाए हुए मार्ग का अनुसरण कर मैं आगे बढ़ रहा और मंदिर के विकास में कृत संकल्पित भी हूं। अधिकारी सर्वेश्वर दास ने पधारे हुए संत-महंतों का स्वागत-सम्मान किया। साकेतवासी महंत को श्रद्धासुमन अर्पित करने वालों में मणिरामदास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास, हनुमत सदन पीठाधीश्वर महंत अवध किशोर शरण, महंत मुरली दास,संकट मोचन सेना अध्यक्ष महंत संजय दास, महंत डा महेश दास, खाकचौक श्रीमहंत बृजमोहन दास, रामहर्षण कुंज महंत अयोध्या दास,राजेश पहलवान, जगदुरु परमहंसाचार्य, दशरथगद्दी महंत बृजमोहन दास, पत्थर मंदिर महंत मनीष दास, डाड़िया महंत गिरीश दास, बड़े हनुमान के उत्तराधिकारी छविराम दास,दंतधावनकुंड महंत विवेक आचारी, महंत अर्जुन दास, महंत शशिकांत दास, नागा रामलखन दास आदि रहे।
: श्रीराम धर्म की प्रतिमूर्ति है: डा श्री रामप्रसाद
Sun, May 12, 2024
प्रसिद्ध पीठ श्री हनुमान बाग पर महंत जगदीश दास की अध्यक्षता में हो रही श्रीराम कथा की अमृत वर्षा
महंत जगदीश दास महाराज के साथ कथाव्यास रामप्रसाद जी, मामा दास व लवकुश दास
तृतीय दिवस पर कथाव्यास ने कहा, जिस देश में युवा का जीवन धर्म के लिये समर्पित हो जाये वह समाज व राष्ट्र धन्य हो जाता है
मंदिर में धूमधाम से मनाया गया भगवान का जन्मोत्सव, प्रकट भये जगत के पालनहार
अयोध्या। रामनगरी के प्रसिद्ध पीठ श्री हनुमान बाग में श्रीराम कथा के तृतीय दिवस पर कथाव्यास महंत परमहंस डा श्री रामप्रसाद जी महाराज बड़ा रामद्धारा सूरसागर जोधपुर ने कहा कि श्रीलक्ष्मण का चरित्र अर्पण ,समर्पण और विसर्जन का चरित्र है।उन्होंने अपने जीवन को श्रीराम की सेवा में समर्पित कर दिया है।श्रीराम धर्म की प्रतिमूर्ति है।राम धर्म के स्वरूप है।राम सनातन धर्म के प्रतीक है।राम धर्म की आत्मा है। रामप्रसाद जी महाराज बड़ा रामद्धारा ने बताया कि लक्ष्मण का जीवन धर्म के प्रति समर्पित है।देश के हर युवा के प्रतीक है लक्ष्मण।जिस देश में युवा का जीवन धर्म के लिये समर्पित हो जाये वह समाज व राष्ट्र धन्य हो जाता है।श्रीराम राष्ट्र के मंगल के लिये यात्रा करते हैं और लक्ष्मण उनके सहयोगी है।जिस देश के युवा राष्ट्र धर्म और सेवा धर्म के समर्पित होते है वही रामराज्य की स्थापना होती है। उन्होंने कहा कि लक्ष्मण शब्द का अर्थ होता है जिसका मन लक्ष्य में लगा हो।जिस युवा का मन लक्ष्य से भटक जाता है वो कभी लक्ष्मण नहीं बन सकता।लक्ष्य विहीन युवा,समाज और राष्ट्र नष्ट हो जाता है।जीवन का जो लक्ष्य है उसके प्रति हमारा जीवन पूर्ण समर्पित होना चाहिये।
कथा की अध्यक्षता करते हुए हनुमान बाग पीठाधीश्वर महंत जगदीश दास जी ने कहा कि धैर्य और संयम सफलता की कुंजी है। जब मन इन्द्रियों के वशीभूत होता है, तब संयम की लक्ष्मण रेखा लाँघे जाने का खतरा बन जाता है, भावनाएँ अनियंत्रित हो जाती हैं। असंयम से मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है इंसान असंवेदनशील हो जाता है मर्यादाएँ भंग हो जाती हैं। इन सबके लिए मनुष्य की भोगी वृत्ति जिम्मेदार है। काम, क्रोध, लोभ, ईर्ष्या असंयम के जनक हैं व संयम के परम शत्रु हैं। इसी तरह नकारात्मक आग में घी का काम करती है। वास्तव में सारे गुणों की डोर संयम से बँधी हुई होती है। जब यह डोर टूटती है तो सारे गुण पतंग की भाँति हिचकोले खाते हुए व्यक्तित्व से गुम होते प्रतीत होते हैं। कथा में रामनगरी के विशिष्ट संतों का सम्मान किया गया। इस मौके पर हनुमानगढ़ी के संत मामा दास, लवकुश दास, पुजारी योगेंद्र दास, सुनील दास, रोहित शास्त्री, नितेश शास्त्री आदि लोग मौजूद रहें।