: अयोध्या में अंत्येष्टि स्थल पर इलेक्ट्रिक और गैस से संचालित शवदाह की व्यवस्था
Fri, Apr 5, 2024
आदित्य भवन द्धारा सरयू नदी को प्रदूषण से मुक्त कराने के लिए पहल
आदित्य भवन का सजा मुख्य द्वार
समाजसेवी हरिओम राय ने कहा अयोध्या सनातनियों की पवित्र भूमि,विकास को लेकर आदित्य भवन सदैव तत्पर
आदित्य भवन में सेवा भाव के लिए बने कमरें
अयोध्या। पावन सरयू नदी को प्रदूषण से मुक्त कराने के लिए पहल शुरू हो गई है। लंबी प्रतीक्षा के बाद अयोध्या में अंत्येष्टि स्थल पर इलेक्ट्रिक और गैस से संचालित शवदाह की व्यवस्था की गई है। इसके चलते अब सरयू नदी को काफी हद तक प्रदूषण मुक्त किया जा सकेगा। वहीं यहां अंत्येष्टि के लिए शव लेकर आने वालों को भी तमाम दिक्कतों से छुटकारा मिल जाएगा।
आदित्य भवन की ओर से इसकी व्यवस्था सुनिश्चित हो सकी है। बताया गया कि काफी लंबे समय से अयोध्या स्थित अंत्येष्टि स्थल पर इलेक्ट्रिक शव दाह की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इसी के चलते आदित्य भवन द्वारा इसका बीड़ा उठाते हुए गैस और बिजली से चलने वाली अत्याधुनिक मशीन प्रदान की गई है। इसके अलावा उनकी ओर से रितेश मिश्रा को एक एम्बुलेंस भी प्रदान किए जाने की स्वीकृति दी गई है। जो जरूरतमंदों के लिए कार्य करेगी। समाजसेवी हरिओम राय ने बताया कि इलेक्ट्रिक शवदाह शुरू होने से दूरदराज से आने वाले लोगों को लकड़ी और अन्य व्यवस्था के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रिक शव दाह द्वारा किए जाने वाले अंतिम संस्कार में अंत्येष्टि के सभी नियमों का पालन किया जाएगा।
शवदाह स्थल का निर्माण,जिसे आदित्य भवन ने अयोध्या नगर निगम को समर्पित किया है
: यज्ञोपवीत संस्कार सनातन धर्म में 16 संस्कारों में महत्वपूर्ण: किलाधीश
Fri, Apr 5, 2024
आचार्य पीठ श्रीलक्ष्मण किलाधीश महंत जु ने सभी बटुकों के गायत्री मंत्र देकर के वेद अध्ययन के लिए दी अनुमति
यज्ञोपवीत संस्कार का कार्यक्रम श्री लक्ष्मण किला के अधिकारी सूर्यप्रकाश शरण के संयोजन में हुआ
अयोध्या। चैत मास के कृष्णपक्ष की पापमोचनी एकादशी को आचार्य पीठ श्री लक्ष्मण किला में पीठाधीश्वर महंत मैथिलीरमण शरण महाराज के अध्यक्षता में वैदिक बटुकों को वेद अध्ययन के लिए विधि-विधान से दो दर्जन बटुकों का यज्ञोपवीत संस्कार कराया गया। वैदिक सनातन परंपरा के अनुसार यज्ञोपवीत संस्कार के बाद ही कोई भी व्यक्ति अध्ययन कर सकता है। लक्ष्मण किला में ठाकुर राम जानकी के सामने विद्वान आचार्यों ने मंत्रोच्चारण के साथ यज्ञोपवीत संस्कार कराया, आचार्य के रूप में लक्ष्मण किला धीश महंत मैथिलीरमण शरण महाराज ने सभी बटुकों के गायत्री मंत्र देकर के वेद अध्ययन के लिए अनुमति प्रदान की। यज्ञोपवीत संस्कार का कार्यक्रम श्री लक्ष्मण किला के अधिकारी सूर्यप्रकाश शरण महाराज के संयोजन में कराया गया।
किलाधीश श्री महंत मैथिलीरमण शरण महाराज ने बताया कि यज्ञोपवीत संस्कार भारतीय गुरुकुल परंपरा में यज्ञोपवीत संस्कार को बहुत ज्यादा महत्व दिया गया है यज्ञोपवीत होने के बाद ही बालक गुरुकुल में प्रवेश लेता है और गुरुकुल के दिनचर्या का पालन पठन-पाठन अध्ययन गुरुकुल परंपरा के अनुसार सुरु होता है सनातन धर्म में 16 संस्कारों को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। सूर्य प्रकाश शरण महाराज ने बताया कि जनेऊ धारण के समय बालक के हाथ में एक दंड होता है और वह बगैर सिला एक ही वस्त्र पहनता है, उसके गले में पीले रंग का दुपट्टा होता है। मुंडन के बाद शिखा रखी जाती है। पैर में खड़ाऊ होती है। मेखला, कोपीन, दंड : कमर में बांधने योग्य नाड़े जैसे सूत्र को मेखला कहते हैं। मेखला को मुंज और करधनी भी कहते हैं। कपड़े की सिली हुई सूत की डोरी, कलावे के लम्बे टुकड़े से मेखला बनती है। कोपीन लगभग 4 इंच चौड़ी डेढ़ फुट लम्बी लंगोटी होती है। इसे मेखला के साथ टांक कर भी रखा जा सकता है। दंड रूप में लाठी या ब्रह्म दंड जैसा रोल भी रखा जा सकता है। यज्ञोपवीत को पीले रंग में रंगकर वैदिक मंत्रो के साथ धारण कराया जाता है आचार्य मंत्र देते हैं इन्हीं नियमों का पालन करते हुए आज लगभग दो दर्जन बटुकों का आचार्य पीठ श्री लक्ष्मण किला में शास्त्रोक्त विधि विधान से गुरुकुल परंपरा के अनुसार वैदिक सदाशिव तिवारी ने संपन्न कराया। इस मौके पर प्रिया प्रीतम शरण राजेश झा सुशील नारायण झा आचार्य प्रियांश आचार्य संजय शर्मा आदि उपस्थित रहे।
: रोजा रखकर बच्चे भी कर रहे अल्लाह की इबादत
Fri, Apr 5, 2024
कहा, रोजा रखने से सवाब मिलता है, गरीबों की भूख-प्यास का भी एहसास होता है
अयोध्या। रमजान हर किसी को नेकी की तरफ बुलाता है। इतना ही नहीं रमजान के रोजे हर बालिग पर फर्ज हैं। चाहे वह महिला हो या पुरुष । रमजान के रोजे शरई मजबूरी के बिना छोड़ने पर गुनाह होता है। रमजान का पाक महीना शुरू होते ही जहां बड़ों में उत्सुकता देखी जाती है। वहीं बच्चे भी किसी से कम नहीं है। शहर के अलग-अलग स्थानों पर कई बच्चों ने रोजा रखकर अल्लाह की इबादत की। बच्चों के हौसलों की मुहल्लेवासियों समेत रिश्तेदारी में चर्चा रही और सभी ने बच्चों को तरह-तरह के उपहार देकर हौसला अफजाई की।रमजान माह का मकसद है कि रोजा रखकर जहां बुराईयों से बचा जा सके वहीं अल्लाह के करीब पहुंचा जा सके। रमजान के रोजे हर बालिग पर फर्ज किये गये हैं। मसलन वह बीमार न हो और रोजा रखने की हालत में न हो।
धर्म नगरी अयोध्या जो गंगा जमुनी तहजीब की नगरी भी है। हिंदू मुस्लिम एकता में जो हमेशा पुल का काम करते है। या हम यू कहें कि गंगा जमुनी तहजीब की जीवंत मिशाल मोहम्मद इरफान अंसारी नन्हे मिंया का दरवाजा दीन दुखियों के लिए हमेशा खुला रहता है। उनके पुत्र समाजसेवी मोहम्मद इमरान अंसारी व फिल्म प्रड्यूसर समाजसेवी सुल्तान अंसारी खुद तो रोजा रखते हुए लोगों की मदद के लिए अपने पिता के बतायें मार्ग का अनुसरण करते हुए दो कदम आगे रहते हैं और अल्लाह की इबादत पूरे नेक दिल से करते हैं। इमरान व सुल्तान के बेटे और बेटियां भी रोजा रखे हुए हैं।अरहन अंसारी, अलिशफा अंसारी,अलीजबा अंसारी व कश्फिया अंसारी अपने परिवार के सदस्यों को रोजा रखते हुए देखकर मन में भी रोजा रखकर अल्लाह की इबादत का ख्याल आया। सभी ने मां- बाप की इजाजत से अपना रोजा रखा। भीषण गर्मी और शिद्दत के दिनों में रखे गये इस रोजे की अहमियत ही कुछ और है। अल्लाह तआला को जहां गर्मी का रोजा अधिक पसंद हैं वहीं जवानी की इबादत बेहद प्यारी है। सभी बच्चों ने रोजा रखकर पूरा दिन अल्लाह की इबादत की। बच्चों के इस हौसले को देखकर मुहल्ले के साथ- साथ रिश्तेदारों ने उसकी भूरि-भूरि प्रशंसा की। सभी बच्चों ने बताया कि उनकी मां व अन्य घर वाले भी रोजा रखते हैं। उनको देखकर ही उसके मन में भी रोजा रखने की नियत आयी। बताया कि रोजा रखने से सवाब मिलता है और गरीबों की भूख-प्यास का भी एहसास होता है।