: रामकथा भगवान के लीला, चरित्र, गुणों की गाथा है: रामानन्दाचार्य
Wed, Jul 3, 2024
हरिधाम गोपाल मंदिर में श्री रामकथा महोत्सव का उल्लास चरम पर
अयोध्या। रामनगरी के हरिधाम गोपाल मंदिर में श्री रामकथा महोत्सव का उल्लास अपने चरम पर है। व्यासपीठ से श्री रामकथा की अमृत वर्षा जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी के श्री मुख से हो रहा है। कथा के द्धितीय दिवस में रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी महाराज ने कहा कि राम कथा तन-मन को पवित्र कर उज्ज्वल करने के साथ-साथ जीवन शैली और आत्मा को नया रूप देती है। श्री रामकथा का महत्व हमेशा से है और आगे भी रहेगा। यह भगवान के लीला चरित्र गुणों की गाथा है। इसके श्रवण और कथन के प्रति हमेशा एक नवीनता का भाव बना रहता है। पूज्य महाराज जी ने कहा कि किसी आम व्यक्ति के जीवन चरित्र को एक दो या चार बार सुनने के बाद उसके प्रति उबन पैदा हो जाता है लेकिन यह भगवान की कथा है सत्य की कथा है इस नाते हमेशा कुछ न कुछ नया लगता है। इसे बार-बार कहने एवं सुनने की इच्छा हमेशा बनी रहती है। भगवान राम लक्ष्मण भरत और शत्रुघन के चरित्र में प्रदर्शित त्याग और तपस्या की बातों को निरंतर श्रवण करते रहने से सुनने वाले के अंदर भी ऐसे ही महान गुणों का समावेश हो जाता है। हमेशा भगवान की कथा सुननी चाहिए हर घर में रामचरित मानस हो तथा नित्यदिन इसको पढ़े व लोगों को श्रवण कराएं। रामदिनेशाचार्य जी ने कहा कि हनुमान जी को रामनाम प्रिय है जहां भी रामकथा होती है वहां वे कथा सुनने आते हैं। हनुमान जी के हृदय में श्रीराम का निवास है। भगवान कभी जन्म नही लेते है हमेशा अवतार होता है। व्यासपीठ का पूजन यजमान ने किया। महोत्सव का संचालन आचार्य रमेश दास शास्त्री व व्यवस्थापक में गौरव दास शास्त्री रहे। इस मौके पर रामनगरी के विशिष्ट संत महंत एवं राम कथा के रसिक गण उपस्थित रहे।
: श्रीमद्भागवत कथा से इह लौकिक व पारलौकिक सुखों की प्राप्ति होती है:विद्याभास्कर
Wed, Jul 3, 2024
नवनिर्मित श्रीसंतगोपाल मंडपम् में कांचीमठ प्रतिवाद भयंकर मूलगादी के स्वामी श्रीनिवासाचार्य महाराज की अध्यक्षता में चल रहा भव्य प्राणप्रतिष्ठा महा महोत्सव
अयोध्या। नवनिर्मित श्रीसंतगोपाल मंडपम् में कांचीमठ प्रतिवाद भयंकर मूलगादी के स्वामी श्रीनिवासाचार्य महाराज की अध्यक्षता में चल रहे भव्य प्राणप्रतिष्ठा महा महोत्सव अंतर्गत मंदिर प्रांगण में नित्य शालिग्राम भगवान का सवा लाख अर्चन और 111 ब्राह्मण आचार्यों द्वारा श्रीमद्भागवत का मूल पारायण किया जा रहा है। वहीं सायंकाल श्रीमद्भागवत कथा में व्यास पीठ पर विराजमान राष्ट्रीय कथाव्यास श्रीमज्जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य विद्याभास्कर महाराज ने भक्तजनों को रसास्वादन कराते हुए कहा कि जब कई जन्मों का संचित पुण्य उदित होता है। तब सप्तपूरियों में प्रतिष्ठित श्रीअवधपुरी में भगवान के जीवन चरित्र को सुनने का सौभाग्य मिलता है। इस कलिकाल में श्रीमद्भागवत भक्ति करने का उत्तम साधन है। साथ ही कथा श्रवण करना, प्रभु के नाम का चिंतन-स्मरण और परोपकार की भावना से कार्य करना है। हम सभी का जीवन धन्य है। जो इस भारत भूमि में हम सबने जन्म लिया और मनुष्य के स्वरूप को पाया है। यह वह पावन पवित्र भूमि है, जिसका गुणगान देवगण स्वर्ग लोक में भी करते हैं। अयोध्यापुरी सप्तपुरियों में सर्वश्रेष्ठ है। जिसे सातों पुरियों में मस्तक के समान कहा गया है। अयोध्या मोक्षदायिनी नगरी है। श्रीमद्भागवत कथा से इह लौकिक व पारलौकिक सुखों की प्राप्ति होती है। परमात्मा शरणागत रक्षक है। भगवान ने मां उत्तरा के गर्भ में भागवत के उत्तम श्रोता महाराज परीक्षित की रक्षा किया। इससे पहले नवनिर्मित श्रीसंतगोपाल मंडपम् के जगदुरु रामानुजाचार्य स्वामी कूरेशाचार्य महाराज ने व्यासपीठ का पूजन-अर्चन कर, दिव्य आरती उतारी। अंत में कथा का प्रसाद वितरित किया गया। साधु संत से लेकर काफी संख्या में भक्तजनों ने श्रीमद्भागवत कथा का रसपान कर अपना जीवन धन्य बनाया। कथा से पूर्व व्यासपीठ का पूजन मुख्य यजमान अयोध्या के प्रमुख उघोगपति समाजसेवी आईपी सिंह ने सपरिवार किया।कथा के अवसर पर सुग्रीवकिला पीठाधीश्वर श्रीमज्जगदुरू रामानुजाचार्य स्वामी विश्वेश प्रपन्नाचार्य, द्वारिकाधीश मंदिर के श्रीमज्जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी सूर्यनारायणाचार्य, श्रीरामकथाकुंज के महंत डॉ. रामानंद दास, जगदुरु रामानुजाचार्य स्वामी रत्नेश प्रपन्नाचार्य, मिथिला बिहारी दास समेत अन्य संत- महंत एवं बड़ी संख्या में विभिन्न प्रांतो के भक्तजन उपस्थित रहे।
: बिना श्रद्धा के कोई राम कथा का आनंद नहीं ले सकता: रामदिनेशाचार्य
Tue, Jul 2, 2024
हरिधाम गोपाल पीठ में भव्य श्रीराम कथा का हुआ शुभारंभ
अयोध्या। श्रद्धा का उदय बहुत ही बिरले लोगों के जीवन में होता है। जिनके जीवन में श्रद्धा नहीं है वह कितना भी बुद्धिमान क्यों न हो राम कथा का आनंद रस ग्रहण नहीं कर सकता। उक्त बातें श्रीराम कथा में जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी महाराज ने कही। जगद्गुरु रामानन्दाचार्य जी के श्रीमुख से हरिधाम गोपाल पीठ में आज से भव्य श्रीराम कथा महोत्सव का समारोह पूर्वक शुभारंभ हुआ। व्यासपीठ से कथा का महात्म्य बताते हुए रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी ने कहा कि सतीजी दक्ष पुत्री हैं। वे भगवान शिव से विवाह होने पर भी रामकथा का आनंद नहीं ले पाती हैं। उन्होंने सुना ही नहीं क्योंकि उनके हृदय में श्रद्धा वृत्ति की जगह संशय या भ्रम था। सती जब अगले जन्म में राजा हिमांचल के घर में जन्म लेती हैं तो दीर्घकाल की तपस्या के पश्चात भगवान शिव को पुन: पति के रूप में प्राप्त करती हैं। तब रामकथा की जो अद्भुत रसधारा संसार के समक्ष बहती है, उससे भगवती उमा स्वयं धन्य हुईं संसार के जीव आज भी धन्य हो रहे हैं। स्वामी रामदिनेशाचार्य जी ने कहा कि परमार्थ की प्राप्ति के लिए सनातन धर्म में अनगिनत मार्ग हैं पर प्रमुख रूप से मानस में ज्ञान भक्ति और कर्म की चर्चा की गई है। सभी मार्गों में श्रद्धा की आवश्यकता है। ज्ञान मार्ग की साधना उत्तर कांड में की गई है। उसमें गाय को श्रद्धा का प्रतीक बताया गया है। कथा व्यास का पूजन यजमान ने किया। महोत्सव का संचालन आचार्य रमेश दास शास्त्री व व्यवस्थापक में गौरव दास शास्त्री रहे।