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: यज्ञोपवीत संस्कार सनातन धर्म में 16 संस्कारों में महत्वपूर्ण: किलाधीश

बमबम यादव

Fri, Apr 5, 2024

आचार्य पीठ श्रीलक्ष्मण किलाधीश महंत जु ने सभी बटुकों के गायत्री मंत्र देकर के वेद अध्ययन के लिए दी अनुमति

यज्ञोपवीत संस्कार का कार्यक्रम श्री लक्ष्मण किला के अधिकारी सूर्यप्रकाश शरण के संयोजन में हुआ

अयोध्या। चैत मास के कृष्णपक्ष की पापमोचनी एकादशी को आचार्य पीठ श्री लक्ष्मण किला में पीठाधीश्वर महंत मैथिलीरमण शरण महाराज के अध्यक्षता में वैदिक बटुकों को वेद अध्ययन के लिए विधि-विधान से दो दर्जन बटुकों का यज्ञोपवीत संस्कार कराया गया। वैदिक सनातन परंपरा के अनुसार यज्ञोपवीत संस्कार के बाद ही कोई भी व्यक्ति अध्ययन कर सकता है। लक्ष्मण किला में ठाकुर राम जानकी के सामने विद्वान आचार्यों ने मंत्रोच्चारण के साथ यज्ञोपवीत संस्कार कराया, आचार्य के रूप में लक्ष्मण किला धीश महंत मैथिलीरमण शरण महाराज ने सभी बटुकों के गायत्री मंत्र देकर के वेद अध्ययन के लिए अनुमति प्रदान की। यज्ञोपवीत संस्कार का कार्यक्रम श्री लक्ष्मण किला के अधिकारी सूर्यप्रकाश शरण महाराज के संयोजन में कराया गया।
किलाधीश श्री महंत मैथिलीरमण शरण महाराज ने बताया कि यज्ञोपवीत संस्कार भारतीय गुरुकुल परंपरा में यज्ञोपवीत संस्कार को बहुत ज्यादा महत्व दिया गया है यज्ञोपवीत होने के बाद ही बालक गुरुकुल में प्रवेश लेता है और गुरुकुल के दिनचर्या का पालन पठन-पाठन अध्ययन गुरुकुल परंपरा के अनुसार सुरु होता है सनातन धर्म में 16 संस्कारों को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। सूर्य प्रकाश शरण महाराज ने बताया कि जनेऊ धारण के समय बालक के हाथ में एक दंड होता है और वह बगैर सिला एक ही वस्त्र पहनता है, उसके गले में पीले रंग का दुपट्टा होता है। मुंडन के बाद शिखा रखी जाती है। पैर में खड़ाऊ होती है। मेखला, कोपीन, दंड : कमर में बांधने योग्य नाड़े जैसे सूत्र को मेखला कहते हैं। मेखला को मुंज और करधनी भी कहते हैं। कपड़े की सिली हुई सूत की डोरी, कलावे के लम्बे टुकड़े से मेखला बनती है। कोपीन लगभग 4 इंच चौड़ी डेढ़ फुट लम्बी लंगोटी होती है। इसे मेखला के साथ टांक कर भी रखा जा सकता है। दंड रूप में लाठी या ब्रह्म दंड जैसा रोल भी रखा जा सकता है। यज्ञोपवीत को पीले रंग में रंगकर वैदिक मंत्रो के साथ धारण कराया जाता है आचार्य मंत्र देते हैं इन्हीं नियमों का पालन करते हुए आज लगभग दो दर्जन बटुकों का आचार्य पीठ श्री लक्ष्मण किला में शास्त्रोक्त विधि विधान से गुरुकुल परंपरा के अनुसार वैदिक सदाशिव तिवारी ने संपन्न कराया। इस मौके पर प्रिया प्रीतम शरण राजेश झा सुशील नारायण झा आचार्य प्रियांश आचार्य संजय शर्मा आदि उपस्थित रहे।

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