: ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना की वीरता और रणनीतिक दक्षता का प्रमाण है: रामानुजाचार्य
Thu, May 8, 2025
ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना की वीरता और रणनीतिक दक्षता का प्रमाण है: रामानुजाचार्यरामलला सदन देवस्थानम में ऑपरेशन सिंदूर की सफलता पर मिठाई बांटी, लगाए भारत माता की जय के नारेअयोध्या। देश की सुरक्षा के लिए भारतीय सेना द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर की सफलता पर रामलला सदन देवस्थानम के पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य जी महाराज ने सोमवार को रामलला सदन देवस्थानम मंदिर में मिठाइयां बाट खुशी का इजहार किया, पूरे मंदिर में उत्सव का माहौल बनाया। रामलला सदन देवस्थानम के पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य जी महाराज मिठाई बांटकर सेना के शौर्य व साहस को सलाम किया तथा पूरे जोश के साथ “भारत माता की जय“, “वंदे मातरम्“ और “जय हिन्द“ के नारे लगाए। उन्होंने कहा कि, “ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना की वीरता और रणनीतिक दक्षता का प्रमाण है। हमारे जवानों ने देश के दुश्मनों को करारा जवाब देकर यह सिद्ध कर दिया कि भारत अपनी सुरक्षा के प्रति एकदम सजग और सक्षम है।“ जगद्गुरु जी ने कहा, “यह अभियान हर भारतवासी के लिए गर्व का क्षण है। हम सभी जवानों के साहस, संयम और समर्पण को नमन करते हैं। इस मौके पर सिब्बू मिश्रा, अप्पू मिश्रा मौजूद रहें।
: लव कुश भवन वाल्मीकि आश्रम में प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का छाया उल्लास
Thu, May 8, 2025
लव कुश भवन वाल्मीकि आश्रम में प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का छाया उल्लासअयोध्या के वाल्मीकि आश्रम में प्राण प्रतिष्ठा उत्सव, पूर्व विधायक खब्बू तिवारी हुए शामिलअयोध्या। पावन नगरी अयोध्या के लव कुश भवन स्थित वाल्मीकि आश्रम में इन दिनों आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत वातावरण देखने को मिल रहा है, जहाँ प्राण प्रतिष्ठा उत्सव पूरे श्रद्धा और भक्ति भाव से आयोजित किया जा रहा है। इस धार्मिक आयोजन में गोसाईगंज के पूर्व विधायक एवं वरिष्ठ भाजपा नेता इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ खब्बू तिवारी ने विशेष रूप से सम्मिलित होकर श्रद्धा अर्पित की। आयोजन के अंतर्गत 108 शिवलिंग, गंगा जल, दक्षिण मुखी हनुमान जी तथा नवदुर्गा की मूर्तियों की स्थापना विधिपूर्वक की जा रही है। इस शुभ कार्य की अगुवाई मंदिर के महंत राम केवल दास जी कर रहे हैं। आयोजन में राजकुमार अग्रवाल, कन्हैयालाल मंदिर के उत्तराधिकारी रामदास ,ओम दास, तथा सैकड़ों की संख्या में संत-महंत एवं मंदिर के शिष्यगण उपस्थित रहे धार्मिक आयोजन के इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है और यह उत्सव आगामी दिनों तक जारी रहेगा। पूरे आश्रम परिसर में भक्ति, आस्था और अध्यात्म की गूंज सुनाई दे रही है।
: आचार्य पीठ श्रीलक्ष्मणकिला में मनाई गई जानकी नवमी
Wed, May 7, 2025
आचार्य पीठ श्रीलक्ष्मणकिला में मनाई गई जानकी नवमीसीता नवमीं करने से समस्त मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं: सूर्यप्रकाश शरण, अधिकारी आचार्य पीठ श्रीलक्ष्मणकिलाअयोध्या। रसिक सम्प्रदाय की आचार्य पीठ श्रीलक्ष्मणकिला में मंगलवार को हर्षोल्लास के साथ श्रीजानकी नवमी मनाया गया। जन्मोत्सव को लक्ष्मणकिला धीश महंत स्वामी मैथिलीरमण शरण महाराज ने अपनी सानिध्यता प्रदान की। लक्ष्मणकिला धीश के कृपापात्र शिष्य अधिकारी सूर्यप्रकाश शरण के संयोजन में श्री रसिकेन्द्र विहारणी-विहारी जू का अभिषेक, श्रृंगार, पूजन पश्चात महाआरती हुआ। रात्रि 8 बजे से नित्य बधाई छठ्ठी तक होगा। महोत्सव से पूरा मंदिर प्रांगण ओत-प्रोत रहा। गर्भगृह से लेकर संपूर्ण मंदिर परिसर को सजाया गया था। मठ की आभा देखते हुए बन रही थी। मध्यांह 12 बजे घंटे, घड़यालों और शंख की करतलध्वनि बीच मां जानकी का प्राकट्य हुआ। संपूर्ण वातावरण किशोरी जी के जय-जयकार से गूंज उठा। भक्तगण भक्तिभाव में सराबोर रहे, जिनका उल्लास देखते हुए बन रहा था। अयोध्या धाम के नामचीन कलाकारों ने मंदिर के पूर्वाचायों द्वारा रचित जन्म बधाई के पद गाकर उत्सव में चार-चांद लगा दिया। इससे भक्तगण मंत्रमुग्ध हो गए। कलाकारों जन्म महा महोत्सव की महफिल सजा दी। इसका सिलसिला देरशाम तक चलता रहा। लक्ष्मणकिला धीश ने कलाकारों को न्यौछावर भी भेंट किया। अंत में जानकी नवमी का प्रसाद वितरित किया गया। सभी ने बड़े ही चाव संग जानकी जन्मोत्सव का प्रसाद ग्रहण किया। नवमी पर जानकी मैया का दर्शन कर भक्तजनों ने अपना जीवन धन्य बनाया। अधिकारी सूर्यप्रकाश शरण ने कहा कि जानकी नवमी का भविष्य पुराण में वर्णन आया है, जिसमें व्रत करने का महत्व बताया गया है। जो लोग जानकी नवमीं का व्रत करते हैं। उन्हें समस्त पृथ्वी के दान तथा सोलह प्रकार के महादान यज्ञों का फल मिलता है। समस्त तीर्थों के दर्शन का फल प्राप्त होता है। सभी जीवों पर परोपकार, दया करने का जो फल है। वही फल सीता नवमीं व्रत करने से ही प्राप्त हो जाता है। इसमे कोई संदेह नहीं है। सीता नवमीं करने से समस्त मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं। फिर भी इस व्रत को करने का उद्देश्य जानकी और रघुनंदन दोनों को प्रसन्न करना है। जन्म महा महोत्सव पर पूरा मंदिर खचाखच श्रद्धालु भक्तों से भरा रहा। जहां मां जानकी की जय-जयकार हो रही थी।