: विवाह ऐसा संस्कार है जिसे प्रभु श्रीराम और कृष्ण ने भी अपनाया: रत्नेशप्रपन्नाचार्य
Thu, May 26, 2022
अयोध्या। विवाह ऐसा संस्कार है जिसे प्रभु श्रीराम और कृष्ण ने भी अपनाया। भगवान राम ने अहंकार के प्रतीक धनुष को तोड़ा। यह इस बात का प्रतीक है कि जब दो लोग एक बंधन में बंधते हैं तो सबसे पहले उन्हें अहंकार को तोड़ना चाहिए और फिर प्रेम रूपी बंधन में बंधना चाहिए। यह प्रसंग इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों परिवारों और पति-पत्नी के बीच कभी अहंकार नहीं टकराना चाहिए क्योंकि अहंकार ही आपसी मनमुटाव का कारण बनता है। उक्त बातें जगद्गुरू रामानुजाचार्य रत्नेशप्रपन्नाचार्य जी
नंदीग्राम,भरतकुंड में श्रीमद्वाल्मीकीयरामायण कथा के पंचम दिवस में कही।रामानुजाचार्य जी ने कहा कि विवाह दो आत्माओं का पवित्र बन्धन है। दो प्राणी अपने अलग- अलग अस्तित्वों को समाप्त कर एक सम्मिलित इकाई का निर्माण करते हैं। स्त्री और पुरुष दोनों में परमात्मा ने कुछ विशेषताएँ और कुछ अपूर्णताएँ दे रखी हैं। विवाह सम्मिलन से एक- दूसरे की अपूर्णताओं को अपनी विशेषताओं से पूर्ण करते हैं, इससे समग्र व्यक्तित्व का निर्माण होता है। इसलिए विवाह को सामान्यतया मानव जीवन की एक आवश्यकता माना गया है। उन्होंने कहा कि एक- दूसरे को अपनी योग्यताओं और भावनाओं का लाभ पहुँचाते हुए गाड़ी में लगे हुए दो पहियों की तरह प्रगति- पथ पर अग्रसर होते जाना विवाह का उद्देश्य है। वासना का दाम्पत्य- जीवन में अत्यन्त तुच्छ और गौण स्थान है, प्रधानतः दो आत्माओं के मिलने से उत्पन्न होने वाली उस महती शक्ति का निर्माण करना है, जो दोनों के लौकिक एवं आध्यात्मिक जीवन के विकास में सहायक सिद्ध हो सके। रत्नेशप्रपन्नाचार्य जी ने कहा कि विवाह केवल स्त्री और पुरुष के गृहस्थ जीवन में प्रवेश का ही प्रसंग नहीं है बल्कि यह जीवन को संपूर्णता देने का अवसर है।श्रीराम के विवाह के जरिए हम विवाह की महत्ता और उसके गहन अर्थों से परिचित हो सकते हैं।भारतीय संस्कृति में श्रीराम-सीता आदर्श दंपति हैं। श्रीराम ने जहां मर्यादा का पालन करके आदर्श पति और पुरुषोत्तम पद प्राप्त किया वहीं माता सीता ने सारे संसार के समक्ष अपने पतिव्रता धर्म के पालन का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत किया। कथा में आये हुए अतिथियों का अभिनन्दन परमात्मा दास जी ने किया।
: सड़क छाप शब्दावली का प्रयोग सपा मुखिया की हताशा का प्रतीक: अनिल सिंह
Thu, May 26, 2022
अखिलेश यादव ने डिप्टी सीएम केशव पर की ओछी टिप्पणी तो भाजपा नेता ने की तीखी आलोचना
अयोध्या। यूपी विधानसभा में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की टिप्पणी पर भाजपाइयों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। कहा कि सपा मुखिया का आचरण अशोभनीय और सदन की गरिमा के विपरीत है। इंटरनेट मीडिया पर भी इसे लेकर नाराजगी जताई गई।रामनगरी अयोध्या के वरिष्ठ भाजपा नेता समाजसेवी डा अनिल सिंह ने कहा
कि अखिलेश यादव ने कभी भी संवैधानिक पद का सम्मान नहीं किया। विधानसभा में उनके विधायकों द्वारा भी यही दर्शाया गया। इससे पूर्व राज्यपाल के अभिभाषण को बाधित किया गया जो राज्य के संवैधानिक प्रमुख का अपमान है। नेता प्रतिपक्ष पूर्व मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। जिस तरह उप मुख्यमंत्री के ऊपर उन्होंने टिप्पणी की वह शोभा नहीं देती। इसकी जितनी निंदा की जाए कम है। उनके व्यवहार से यह भी पता चलता है कि पिछड़े वर्ग के लोगों से भी प्रेम नहीं है। अनिल सिंह ने कहा कि विधानसभा में सड़कछाप शब्दावली का प्रयोग हताशा को प्रकट करता है। अखिलेश चार चुनाव हार चुके हैं, आगे भी जीत की उम्मीद नहीं है। वैसे भी इस तरह की भाषा उनके पुराने संस्कार का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि विधानसभा में दिख गया कि सिर्फ विदेश में पढ़ने से तमीज नहीं आती। खुद को ओबीसी समाज का नेता बताने वाले अखिलेश यादव को अपने ही वर्ग के वरिष्ठ नेता से बात करने का सलीका नहीं पता। तू तड़ाक वाली भाषा का प्रयोग कर सब को शिवपाल चाचा समझ रखे हैं।
: पूर्व मंत्री पवन ने बजट पर दी तीखी प्रतिक्रिया
Thu, May 26, 2022
कहा,यह बजट किसान मजदूर गरीब छात्र नौजवान युवाओं के लिए निराशाजनक
अयोध्या। पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडे पवन ने भाजपा सरकार के बजट पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त किया श्री पांडे ने कहा यह बजट किसान मजदूर गरीब छात्र नौजवान युवाओं के लिए निराशाजनक है श्री पांडे ने कहा भाजपा सरकार मैं महंगाई इस कदर बढ़ गई है की गरीबों को दो वक्त का रोटी भी मिलना मुश्किल है नौजवान पढ़ लिख कर नौकरी के लिए आस लगाए बैठे लेकिन उन्हें नौकरी नहीं मिल पा रही किसान को उनके फसल का उचित मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है प्रदेश में व्याप्त महंगाई और भ्रष्टाचार से आम जनता त्रस्त है इस भीषण गर्मी में बिजली की आपूर्ति भी सही ढंग से नहीं हो पा रही है श्री पांडे ने कहा यह बजट देखकर ऐसा लग रहा है इसमें आम जनता खासकर गरीबों के लिए कुछ भी नहीं है l