: रामलला सदन में रामानुजाचार्य कर रहे पितृसमर्चनम्
Fri, Sep 16, 2022
रामलला सदन पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य कहते है कि पूर्वजों का संस्कार कराते हैं मार्गदर्शन
अयोध्या। सनातन धर्म में मान्यता है कि पितृपक्ष के 15 दिनों के दौरान परिवार को आशीर्वाद देने से स्वर्गवासी पितर की आत्मा धरती पर आती है। इसलिए उनके श्राद्ध के दिन आत्मिक शांति के लिए पिंडदान एवं तर्पण किया जाता है। पितरों का स्मरण कर श्रद्धा के साथ श्राद्धकर्म किया जाता है। धर्मगुरु रामलला सदन पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य जी के अनुसार पितृ पक्ष के दौरान पुत्रों को अपने पूर्वजों का पिंडदान, तर्पण एवं श्राद्ध के बाद ब्राह्मण भोज कराना चाहिए। लेकिन यदि पुत्र जीवति न हो तो पौत्र, प्रपौत्र या विधवा पत्नी भी श्राद्ध कर सकती है। पुत्र न होने की स्थिति में पत्नी का श्राद्ध पति करता है। यदि पिता के एक से अधिक पुत्र हैं तो सबसे बड़े पुत्र को ही श्राद्ध करना चाहिए। यदि सभी भाई अलग अलग रहते हैं तो सभी अपने अपने घर में श्राद्ध कर सकते हैं। संयुक्त परिवार के रूप में यदि सभी साथ रहते हैं तो एक ही जगह श्राद्ध करना चाहिए।
पितृपक्ष का समापन आश्विनी मास की अमावस्या को होगा। इस अमावस्या को सर्वपितृ अमावस्या करते हैं। रामलला सदन पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य जी कहते हैं कि पूर्व की तरफ मुख करके देवता, उत्तर की तरफ मुख करके सप्त ऋषियों को नमन करने के बाद दक्षिण की तरफ मुख करके तीन बार आचमन करें। ततपश्चात पित्रों को जल तर्पण करना चाहिए। उंगली में पैंती और धोती पहने रहें। सुविधा एवं नियमानुसार बाल-दाढ़ी और खानपान का ख्याल रखें। अधिकतर लोग पितृपक्ष में रोजाना अपने पितरों के लिए तर्पण करते हैं तो कुछ लोग श्राद्ध की तिथियों पर पितरों के नाम से ब्राह्मणों को भोजन कराकर श्राद्ध करते हैं। श्राद्ध के दिन ब्राह्मणों को आदरपूर्वक घर बुलाते हैं और उन्हें भोजन करवाकर यथासंभव दान-दक्षिण देकर विदा करते हैं।
: निर्वाणी, निर्मोही व दिगंबर अखाड़ा ने परमहंस आचार्य के समर्थन में भरी हुंकार
Fri, Sep 16, 2022
रामगुलाम दास बलुइया बाबा को संतो ने किया नमन
भारत काे हिंदू राष्ट्र घोषित कराने के लिए आचार्य पीठ तपस्वी जी की छावनी में हुआ विश्व कल्याण सनातन धर्म संसद
अयोध्या। भारत काे हिंदू राष्ट्र घोषित कराने के लिए आचार्य पीठ तपस्वी जी की छावनी रामघाट में विश्व कल्याण सनातन धर्म संसद का आयोजन किया गया। सनातन धर्म संसद की अध्यक्षता करते तपस्वी छावनी पीठाधीश्वर जगद्गुरू परमहंस आचार्य ने कहा कि 2023 के पहले यदि केंद्र सरकार भारत काे हिंदू राष्ट्र नही घाोषित करती है। ताे वह 7 नवंबर 2023 काे हिंदू राष्ट्र घोषित कराने के लिए अन्न-जल का परित्याग कर आमरण-अनशन करेंगे। इसके लिए सभी अखाड़ाें के संत-महंत उनके साथ हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया में ईसाइयों के 157 व मुसलमानों के 57 देश हैं। लेकिन हिंदुओं का एक भी देश नही है। जब देश का बंटवारा धर्म के आधार पर हुआ। पाकिस्तान और बांग्लादेश मुसलमानों को मिल गया। जाे इस्लामिक राष्ट्र भी बन गया। इसलिए हिंदुस्तान काे हिंदू राष्ट्र बनना चाहिए। परमहंसाचार्य ने बताया कि सनातन धर्म में भारत हिंदू राष्ट्र घोषित हो, जनसंख्या नियंत्रण व समान नागरिक संहिता कानून जल्द लागू हाे, गाैहत्या बंद हाे, गाय काे राष्ट्र माता घोषित किया जाए आदि तमाम बिंदुओं पर चर्चा की गई। इस पर सभी संत-महंताें ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया है। कार्यक्रम में हनुमानगढ़ी चाराें पट्टी समेत अन्यान्य प्रदेशों के संत-महंत, धर्माचार्य एवं महामंडलेश्वर सम्मिलित हुए। सनातन धर्म संसद काे महंत हरिवंश दास औलिया बापू गुजरात, संकटमोचन सेना राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय दास, अखाड़े के पूर्व प्रधानमंत्री महंत माधवदास हनुमानगढ़ी, दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास, निर्वाणी अनी के श्रीमहंत धर्मदास, श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी व निर्माेही अखाड़ा महंत दिनेंद्र दास, हनुमान बाग के महंत जगदीश दास, हरिद्वारी पट्टी के महंत मुरली दास, हनुमानगढ़ी से जुड़े महंत बलराम दास, महंत नंदरामदास, महंत रामकुमार दास, महंत इन्द्रदेव दास, महंत सत्यदेव दास,पुजारी पार्षद रमेश दास, पहलवान राजेश दास, महंत अजीत दास, महंत राजूदास,संकट मोचन सेना के कार्यवाहक अध्यक्ष वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास,गद्दीनशीन के शिष्य मामा दास, तेरह भाई त्यागी के महंत रामस्वरूप दास ब्रह्मचारी वृंदावन, महंत एकनाथ महाराज महाराष्ट्र ने भी अपने विचार व्यक्त किए। संचालन सिद्धपीठ हनुमानगढ़ी गद्दीनशीन के शिष्य हनुमत संस्कृत स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. महेश दास ने किया। इस अवसर पर बड़ाभक्तमाल के महंत काैशलकिशाेर दास, महंत रघुवंश दास महात्यागी राजस्थान, महंत लघुराम दास मध्य प्रदेश,श्रीमहंत रामसुमिरन दास, भाेपाल, श्रावण कुंज महंत रामरूप शरण, कनक महल महंत सीताराम दास महात्यागी, श्रीमहंत रामलखन दास काेटा, श्रीमहंत श्याम सुंदर शास्त्री, फर्रुखाबाद, श्रीमहंत रामपदारथ दास शिमला, श्रीमहंत तुलसीदास खाकचाैक, महंत रामेश्वर दास शास्त्री सीकर, विरक्त आश्रम, महंत रामलाेचन शरण, महंत रामकिशाेर दास, राकेश पहलवान, नागा सूरज दास, उपेंद्र दास, कल्लू दास आदि संत-महंत व धर्माचार्य माैजूद रहे।
: हनुमान बाग में हुआ नागा साधुओं का सम्मान
Thu, Sep 15, 2022
सचिन के जन्मदिन पर संतों ने दिया आशीर्वाद
अयोध्या। रामनगरी के प्रसिद्ध पीठों में शुमार श्री हनुमान बाग मंदिर में हनुमानगढ़ी के नागा साधुओं का विशेष सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। विगत दिनों से अयोध्या में चल रहे न्याय व सत्य की लड़ाई में जिस प्रकार से हनुमानगढ़ी के चारो पट्टी समेत पूरा अखाड़ा गद्दीनशीन श्रीमहंत प्रेमदास महाराज के अगुवाई में एकजुट रहा यहां बहुत ही काबिलेतारीफ रहा। नगरी के चारों तरफ इसकी चर्चा है। अयोध्या के सभी मठ मंदिरों में दबी जुबान संत साधक हनुमानगढ़ी के इस फैसले की सराहना करते दिख रहे है। इसी क्रम में हनुमान बाग के महंत जगदीश दास के अध्यक्षता में नागा साधुओं का विशेष सम्मान समारोह मंगलवार की देर शाम हनुमान बाग में आयोजित किया गया। जिसमें अंग वस्त्र व हनुमान जी का स्मृति चिन्ह भेंट कर सभी का विशेष सम्मान हुआ। साथ ही सुनील दास के पुत्र सचिन का 17 वां जन्मदिवस बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया गया। नागा साधुओं ने सचिन को चिरंजीवी भव का आशीर्वाद दिया। आए हुए अतिथियों का स्वागत हनुमान बाग परिवार ने किया।इस मौके पर तपस्वी छावनी के महंत परमहंस दास, हनुमत संस्कृत स्नातकोत्तर महाविद्यालय के प्राचार्य गद्दीनशीन जी के कृपापात्र शिष्य महंत डा महेश दास, महंत नंदरामदास, श्रृंगार कुंज के महंत हरिभजन दास, पहलवान राजेश दास, संकट मोचन सेना के कार्यवाहक अध्यक्ष वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास, मामा दास, सुनील दास, रोहित शास्त्री, पटकापुर नरेश विकास पाठक सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहें।