: उच्च कोटि के संत थे स्वामी रामबालक दास: टीलाद्वाराचार्य
Mon, Sep 19, 2022
परमपूज्य स्वामी रामबालक दास के 40वीं पुण्यतिथि पर संत धर्माचार्यों ने अर्पित की श्रद्धांजलि
अयोध्या। रामनगरी अयोध्या के महात्यागी कैंप कनक महल मंदिर जानकीघाट में परमपूज्य संत शिरोमणि स्वामी रामबालक दास जी महाराज की 40 वीं पुण्यतिथि टीलाद्वाराचार्य मंगलपीठाधीश्वर यज्ञ सम्राट स्वामी श्री माधवाचार्य जी महाराज के पावन सानिध्य में श्रद्धा पूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर संत सम्मेलन का भी आयोजन किया गया जिसमें रामनगरी समेत पूरे भारत से संत साधकों ने पूज्य श्री को श्रद्धा सुमन अर्पित किये। आये हुए संत धर्माचार्यों का स्वागत परम्परागत रूप दक्षिणा भेट विदायी के साथ मंगलपीठाधीश्वर जी महराज ने किया। कार्यक्रम की जानकारी देते हुये चौदह भाई महात्यागी के श्री महंत सीतारामदास महात्यागी जी ने बताया कि परमपूज्य साकेतवासी अनन्त विभूर्षित संत शिरोमणि स्वामी रामबालक दास जी महाराज को संत-महांत एवं भक्तगण पुष्पांजलि अर्पित किये और वृहद भंडारे का भी आयोजन किया गया। मंगलपीठाधीश्वर माधवाचार्य जी महाराज ने बताया कि रामानंद सम्प्रदाय की पूरे देश में 52 गद्दी है जिसकी सर्वप्रथम गद्दी डाकौर दाऊ जी मंदिर खाकचौक है। जिसके गद्दीपति परमपूज्य श्री रामबालक दास जी थे। अब उस गद्दी पर टीलाद्वाराचार्य मंगलपीठाधीश्वर यज्ञ सम्राट स्वामी श्री माधवाचार्य जी महाराज है। इस मौके पर जगन्नाथ पुरी पापुड़िया मठ बाहर भाई इंडिया के श्री महन्त रामकृष्ण दास, मंहन्त श्री हरिओम दास जी बासवाडा महामंत्री खालसा परिषद,मंहन्त हरिदास जी सिहौर अधिकारी डडिया खालसा, मंहन्त शंकरदास जी बडोदरा, महात्यागी कैम्प के मंहन्त सीताराम दास त्यागी, मंहन्त भक्तिदास नासिक, महंत गरीब दास,महंत पूर्णचंद्र दास,महंत रामचरण दास,महंत नरहरि दास व महाराज जी के शिष्य वीरेंद्र मिश्रा जी व राम भाई शाह ने आये हुए अतिथियों का स्वागत सत्कार किया। इस मौके पर महंत धर्मदास, महंत कमलनयन दास, जगद्गुरू रामदिनेशाचार्य, बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेन्द्र प्रसादाचार्य, महंत जन्मेजय शरण, महंत अवधेश दास, महंत कृपाल रामभूषण दास, महंत बलराम दास, वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास, महंत रामकुमार दास, महंत परशुराम दास, महंत शशिकांत दास, महंत मनीष दास, महंत बालयोगी रामदास, महंत विनोद दास सहित सौकड़ों सन्त महन्त व भक्तगण मौजूद रहे।
: रानोपाली का उदासीन ऋषि संगत आश्रम राम की महिमा और चमत्कार की गाथा सुनाता
Mon, Sep 19, 2022
अयोध्या किंवदंतियों से अटा पड़ा है, यहां श्रीराम से लेकर नवाब के दौर की कहानियां बिखरी पड़ी,17वीं शताब्दी में नवाब आसिफुद्दौला ने देखा था बाबा का चमत्कार
युवा महंत डा भरत दास के नेतृत्व में उदासीन ऋषि आश्रम लिख रहा विकास की नई इबादत
अयोध्या। रामनगरी के पश्चिमी-दक्षिणी कोने पर स्थित रानोपाली में उदासीन ऋषि संगत आश्रम है। कहा जाता है कि वन गमन से पहले श्रीराम जी ने रानोपाली में ही राजसी वस्त्र त्यागकर वनवासी वेश धारण किया था। जहां आज यह आश्रम है वहां महारानी कैकेई का निजी भवन था। त्रेता में श्रीराम इसी महल से पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ वन के लिए रवाना हुए थे।
यहां से जुड़ी एक कहानी और है। कहा जाता है कि 17 वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में रानोपाली में बाबा संगत बख्श जी ने धूनी रमाई थी। जब आश्रम में बाबा के डेरा डालने की खबर तत्कालीन नवाब आसिफुद्दौला तक पहुंची तो उन्होंने अपने सैनिकों को सतर्क कर दिया। नवाब ने सैनिकों को बाबा को वहां से हटाने का आदेश दिया। आदेश के बाद जब-जब नवाब आसिफुद्दौला के सैनिक आश्रम में पहुंचे तो उन्हें बाबा संगत बख्श का सिर और धड़ अलग दिखाई देता। सैनिकों ने यह जानकारी नवाब आसिफुद्दौला को दी।
जब यह घटनाक्रम चल रहा था तब नवाब की बेगम की तबीयत ज्यादा खराब थी। नवाब आसिफुद्दौला इस कारण परेशान रहता था। इसके बाद नवाब आसिफुद्दौला खुद बाबा के आश्रम में पहुंच गया। नवाब के पहुंचते ही बाबा संगत बख्श ने कहा कि तुम्हें मुझसे क्या परेशानी है। अपनी एक समस्या से निपट नहीं पा रहे हो और हमें हटाने के लिए परेशान हो। बाबा की बात को सुनते नवाब नतमस्तक हो गया। इसके बाद बाबा के आशीर्वाद से बेगम स्वस्थ हो गई। इस चमत्कार के बाद नवाब ने एक हजार बीघा जमीन आश्रम को दे दी। इस आदेश को नवाब ने ताम्रपत्र के जरिये भी जारी किया था। यह ताम्रपत्र अभी भी आश्रम के पास है।
बाबा संगत बख्श के बाद बाबा माधवराम और बाबा नारायण राम ने पूरे देश में इस आश्रम की शाखाएं स्थापित कीं। तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की मां भी उनकी शिष्या थीं। सन 1912 में बाबा केशव राम आश्रम के महंत बने और 1923 तक आश्रम के प्रमुख रहे। उन्होंने तत्कालीन जिलाधिकारी के.के. नैयर को 45 सौ बीघा जमीन दे दी थी। मगर बाद में प्रशासन ने जमीन आश्रम को लौटा दी।
सन् 2005 अमरकंटक के प्रसिद्ध संत तपस्वी बाबा कल्याण दास को आश्रम के महंत दामोदरदास ने महंती सौंप दी। बाबा कल्याण दास ने आश्रम का पुनर्निर्माण कराया जो आज भव्यता का गवाह बना हुआ है। 2016 में बाबा कल्याण दास ने सबसे काबिल युवा डॉ. भरत दास को आश्रम का महंत नियुक्त किया। महंत डॉ. भरत दास ने बताया कि बाबा संगत बख्श की समाधि की चौखट में लगे पत्थर में प्रसिद्ध इतिहासकार धनदेव का अभिलेख उकरा हुआ है जो पाली लिपि में है। आश्रम परिसर में ही गुरुसर नामक का तालाब है। मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने वनगमन से पूर्व इस तालाब में स्नान किया था। त्रेता युग से ही भक्तों की श्रद्धा आश्रम से जुड़ी है।
: रामनगरी के यूट्यूबर ने बनाया सीएम योगी का मंदिर
Mon, Sep 19, 2022
तीर-धनुष वाली योगी की मूर्ति की सुबह-शाम होती है पूजा
अयोध्या। रामनगरी अयोध्या के भरतकुंड के पास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मंदिर बनाया गया है। मौर्या का पुरवा गांव के निवासी प्रभाकर मौर्य ने 8.56 लाख रुपए की लागत से यह मन्दिर बनवाया है। इसमें योगी को राम के अवतार में दिखाया गया है। मूर्ति के हाथ में धनुष और तीर भी थमाया गया है, यहां रोज सुबह-शाम पूजा-आरती भी होती है।
शहर से सटे मसौधा ब्लॉक में स्थित कल्याण भदरसा के मौर्या का पुरवा का रहने वाला प्रभाकर मौर्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कामकाज से इतना प्रभावित है कि वह खुद भी सीएम योगी के तरह कपड़े पहनता है, उनकी तारीफ में गाने गाता है और उसने अब सीएम योगी के नाम का मंदिर बनाकर उनकी पूजा-अर्चना भी शुरू कर दी है. प्रभाकर मौर्य का कहना है कि वह भगवान राम के अनन्य भक्त हैं और उन्होंने प्रण किया था कि जो भी व्यक्ति अयोध्या में भगवान राम का मंदिर बनवायेगा वह उसका मंदिर बनवा कर उसकी पूजा करेंगे.जब अयोध्या में राम का मंदिर निर्माण शुरू हो गया तब उन्होंने अपने संकल्प को पूरा करते हुए 5 अगस्त 2020 को इस मंदिर का निर्माण कार्य शुरू कराया और अब इस मंदिर का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद मंदिर में वह रोजाना सीएम योगी आदित्यनाथ की पूजा अर्चना करते हैं इतना ही नहीं प्रभाकर मौर्य ने सीएम योगी आदित्यनाथ के नाम की एक आरती भी बनाई है जिसे बजाकर वह रोजाना उनकी पूजा अर्चना करते हैं. यही नहीं सीएम योगी प्रभाकर मौर्या को सम्मानित भी कर चुके हैं।