Thursday 5th of November 2026

ब्रेकिंग

श्रीराम एवं मां सीता को परमाराध्य एवं उनके दूत हनुमान जी को परमाचार्य के रूप में स्वीकृत- शिरोधार्य

दिगंबर अखाड़ा में हुतात्मा कारसेवक स्मृति सभा का भव्य आयोजन, चंपत राय बोले- 500 वर्षों के संघर्ष और कारसेवकों के बलिदान

भक्ति आंदोलन मंच न्यास का विस्तार, महंत परशुराम दास बने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, बाल योगी रामदास को प्रदेश की कमान

सर्किट हाउस में हुआ स्वागत, बादल बोले- संगठन को मिलेगी नई मजबूती

हनुमानगढ़ी स्थित आश्रम में जुटे संत-महंत और राजनीतिक हस्तियां, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भी कर चुके थे आश्रम

सुचना

Welcome to the DNA Live, for Advertisement call +91-9838302000

: रामलला सदन में रामानुजाचार्य कर रहे पितृसमर्चनम्

बमबम यादव

Fri, Sep 16, 2022

रामलला सदन पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य कहते है कि पूर्वजों का संस्कार कराते हैं मार्गदर्शन

अयोध्या। सनातन धर्म में मान्यता है कि पितृपक्ष के 15 दिनों के दौरान परिवार को आशीर्वाद देने से स्वर्गवासी पितर की आत्मा धरती पर आती है। इसलिए उनके श्राद्ध के दिन आत्मिक शांति के लिए पिंडदान एवं तर्पण किया जाता है। पितरों का स्मरण कर श्रद्धा के साथ श्राद्धकर्म किया जाता है। धर्मगुरु रामलला सदन पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य जी के अनुसार पितृ पक्ष के दौरान पुत्रों को अपने पूर्वजों का पिंडदान, तर्पण एवं श्राद्ध के बाद ब्राह्मण भोज कराना चाहिए। लेकिन यदि पुत्र जीवति न हो तो पौत्र, प्रपौत्र या विधवा पत्नी भी श्राद्ध कर सकती है। पुत्र न होने की स्थिति में पत्नी का श्राद्ध पति करता है। यदि पिता के एक से अधिक पुत्र हैं तो सबसे बड़े पुत्र को ही श्राद्ध करना चाहिए। यदि सभी भाई अलग अलग रहते हैं तो सभी अपने अपने घर में श्राद्ध कर सकते हैं। संयुक्त परिवार के रूप में यदि सभी साथ रहते हैं तो एक ही जगह श्राद्ध करना चाहिए।

पितृपक्ष का समापन आश्विनी मास की अमावस्या को होगा। इस अमावस्या को सर्वपितृ अमावस्या करते हैं। रामलला सदन पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य जी कहते हैं कि पूर्व की तरफ मुख करके देवता, उत्तर की तरफ मुख करके सप्त ऋषियों को नमन करने के बाद दक्षिण की तरफ मुख करके तीन बार आचमन करें। ततपश्चात पित्रों को जल तर्पण करना चाहिए। उंगली में पैंती और धोती पहने रहें। सुविधा एवं नियमानुसार बाल-दाढ़ी और खानपान का ख्याल रखें। अधिकतर लोग पितृपक्ष में रोजाना अपने पितरों के लिए तर्पण करते हैं तो कुछ लोग श्राद्ध की तिथियों पर पितरों के नाम से ब्राह्मणों को भोजन कराकर श्राद्ध करते हैं। श्राद्ध के दिन ब्राह्मणों को आदरपूर्वक घर बुलाते हैं और उन्हें भोजन करवाकर यथासंभव दान-दक्षिण देकर विदा करते हैं।

Tags :

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें