: भक्ति ज्ञान वैराग्य में होकर परमात्मा की प्राप्ति: श्री धराचार्य जी
Tue, Mar 28, 2023
अशर्फी भवन मे चल रहे 151 ब्राह्मणों द्वारा स्वर श्रीमद् भागवत पाठ का हुआ विश्राम
अशर्फी भवन मे श्री राम नवमी के पावन उपलक्ष में चल रही अष्टोत्तर शत श्रीमद् भागवत कथा को श्रवण करते भक्त
अयोध्या। प्रसिद्ध पीठ अशर्फी भवन मे श्री राम नवमी के पावन उपलक्ष में चल रही अष्टोत्तर शत श्रीमद् भागवत कथा के सातवें दिन प्रातः काल 151 ब्राह्मणों द्वारा स्वर श्रीमद् भागवत पाठ का विश्राम हुआ। महाराज श्री ने सभी भू देवों को अंग वस्त्र भेंट किया। व्यास पीठ पर विराजित जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री धराचार्य जी महाराज भागवत कथा का विस्तार करते हुए कहते हैं कि मां भगवती जगतजननी लक्ष्मी स्वरूपा रुकमणी जी के द्वारिका आ जाने पर द्वारिका नगरी की शोभा और बढ़ जाती है।प्रभु श्री कृष्ण द्वारिका में अनेकों लीलाएं करते हैं।भगवान के बचपन का मित्र सुदामा अपनी पत्नी सुशीला के बार बार कहने पर प्रभु श्री कृष्ण द्वारिकाधीश से मिलने के लिए जाते हैं। सुदामा के आगमन की सूचना पाकर अकारण निधि करुणा वरुणालय द्वारिकाधीश भगवान श्री कृष्ण नंगे पैरों भागकर द्वार पर आकर बचपन के मित्र सुदामा को अपने हृदय से लगा लेते हैं। रुकमणी आदि सभी पटरानियों को अचंभा होता है कि राजाधिराज द्वारिकाधीश प्रभु इस दीन हीन व्यक्ति को हृदय से लगाए हैं। महाराज जी ने कहा कि श्री कृष्ण सुदामा को दिव्य आसन पर बिठाते हैं चरण वंदन करते हैं। सुदामा के द्वारा लाए हुए चावल को प्रभु प्रसाद रूप में पाते हैं अपनी जैसी संपत्ति ब्राह्मण सुदामा को प्रभु देते हैं। सुदामा चरित्र से प्रेरणा मिलती है प्रभु चरणों में जब भी जीव जाए सुदामा जी की तरह बिना फल प्राप्ति की इच्छा के जाए। दीनबंधु दयासिंधु भगवान शरणागत जीव को अपना लेते है।भागवत कथा के रसास्वादन को करके जो जीव भक्ति ज्ञान वैराग्य में होकर परमात्मा के मार्ग को अपना लेते हैं उन्हें इन 84 लाख योनियों में नहीं भटकना पड़ता। परमपिता परमात्मा अपने चरणो में उन्हें स्थान देते हैं भागवत कथा के सभी चरित्र प्रेरणास्पद है। हमें भागवत कथा को सुनकर भक्ति मार्ग को अपनाते हुए परोपकार की भावना से जीवन यापन करना।
: भगवान श्रीराम ने पूरी दुनिया काे मानवता का पाठ पढ़ाया:प्रभंजनानन्द
Tue, Mar 28, 2023
भगवान की कथा मंगलकारी है,जाे अमंगल का नाश करती है:महंत करुणानिधान शरण
व्यासपीठ का पूजन करते महंत करुणानिधान शरण
प्रसिद्ध पीठ सियारामकिला झुनकी घाट पीठाधीश्वर महंत करुणानिधान शरण महाराज के सानिध्य में रामजन्मोत्सव का छाया उल्लास,रामकथा का हुआ शुभारंभ
अयाेध्या। रामजन्म महाेत्सव के पावन अवसर पर सियारामकिला झुनकी घाट दुल्हन की तरह सजी है। परे मंदिर को फूलों से सजाया गया है। मंदिर में 51 वैदिक आचार्य नवाह परायण पाठ कर रहे है। मंदिर में आज से भव्य रामकथा का शुभारंभ हुआ। व्यासपीठ से कथा की अमृत वर्षा कर रहें है। महाेत्सव काे पीठ के महंत करुणानिधान शरण महाराज ने सानिध्यता प्रदान करते हुए कहा कि भगवान राम जन्मोत्सव के अवसर पर मंदिर में श्रीरामकथा की शुरूवात हाे गई है। भक्तगण कथा का रसपान कर अपना जीवन कृतार्थ करें। महंतजी ने कि भगवान की कथा मंगलकारी है। जाे अमंगल का नाश करती है। कथा हमें परमात्मा तक पहुंचाने का सबसे सुगम मार्ग है। इसके द्वारा हमें भगवान का सानिध्य मिलता है। अवधधाम में रामकथा का श्रवण करने और कराने से अपार पुण्य की प्राप्ति हाेती है। वह भी जब रामजन्म महाेत्सव चल रहा हाे। ताे उसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है। अमृतमयी श्रीरामकथा के प्रथम दिवस भक्तों काे रसास्वादन कराते हुए प्रख्यात रामकथा मर्मज्ञ कथाव्यास व्यासपीठ से कथा कहते मंदिर के अधिकारी प्रख्यात कथावाचक प्रभंजनानन्द शरण महाराज ने कहा कि भगवान श्रीराम ने पूरी दुनिया काे मानवता का पाठ पढ़ाया। हमें भगवान की मर्यादा का पालन करना चाहिए। आज हम सब राम जन्मोत्सव पर भगवान की अमृतमयी कथा का श्रवण कर रहे हैं। जीव प्रभु राम का अनुसरण करे। उनके बतलाए हुए सच्चाई के मार्ग पर चले। साथ ही उनकी मर्यादा को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करे।कथा के उद्घाटन सत्र में करुणानिधान भवन के महंत रामजी दास महाराज, भागवत विद्यापीठ के तुलसीदास जी, हनुमान किला के महंत रामभजन दास, संत राम नारायण सहित बड़ी संख्या में संताें ने अपने विचार व्यक्त किए।
व्यासपीठ से कथा कहते प्रख्यात कथावाचक पूज्य प्रभंजनानन्द शरण
: अम्माजी मंदिर में पंच दिवसीय ब्रह्मोत्सव का उल्लास चरम पर
Tue, Mar 28, 2023
कोशलेस सदन के जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य "विद्याभाष्कर" का अम्मा जी मंदिर के ट्रस्टियों ने किया अभिनन्दन
अयोध्या। दक्षिण भारतीय परम्परा के अम्माजी मंदिर में पंच दिवसीय ब्रह्मोत्सव के अवसर पर सोमवार को सांयकाल वाहन से भगवान की शोभायात्रा बाजे-गाजे के साथ निकाली गई। इस रथयात्रा में तमिलनाडु से आए पारम्परिक वाद्ययंत्रों को भी शामिल किया गया। रथारूढ़ भगवान की सवारी को चेन्नई व अन्य क्षेत्रों से आए तमिल भाषी श्रद्धालु रस्से के सहारे खींच रहे थे।
परम्परागत रूप से निकाली जाने वाली यह रथयात्रा गोलाबाजार, तुलसी उद्यान होकर मुख्य मार्ग से सब्जी मंडी होकर तोताद्रि मठ, अशर्फी भवन होते हुए पुनः पहुंची।
इसके पहले अम्माजी मंदिर में दिव्य ग्रंथो का पारायण एवं विराजमान भगवान का अभिषेक कर विधिपूर्वक पूजन किया गया।
अम्माजी मंदिर दिव्य देश में
कोशलेस सदन के जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी वासुदेवाचार्य "विद्याभाष्कर" का दिव्य प्रवचन सत्र चला। इसके बाद अम्माजी मंदिर ट्रस्टियों ने विद्याभाष्कर का अभिनन्दन किया। मंदिर में रामजन्मोत्सव बहुत ही धूमधाम से मनाया जा रहा है। पूरा कार्यक्रम दक्षिण परम्परा के अनुसार मनाया जा रहा है। प्रवचन सत्र में आज यानी मंगलवार को रामलला सदन देवस्थान् पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य जी महाराज का प्रवचन चलेगा तो बुधवार को अशर्फी भवन की महानता जगद्गुरू श्री धराचार्य महाराज का प्रवचन होगा।