: समाजवादी पार्टी मची है गुटबाजी, भेंट चढ़ रहा 2024 का ख्वाब
Sat, Mar 25, 2023
सपा मुखिया के अरमानों में पलीता लगा रहा महानगर अयोध्या
सोशल साइट्स पर आपस में भिड़ रहे सपाई,भाजपाई ले रहे चुटकी
अयोध्या। एक तरह देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता की जो आधी 2014 में चली थी वो अब समय के साथ और भी मजबूत होती दिख रही है। जहां पूरा विपक्ष भाजपा सरकार के खिलाफ लामबंद हो रहा है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव 2024 के चुनाव को लेकर बेहद संजीदा दिख रहे है। अभी हालही दिनों में राष्ट्रीय कार्य समिति की बैठक कोलकाता करके वापस आये। उस बैठक का मुख्य एजेंडा लोकसभा चुनाव 2024 में समाजवादी पार्टी की सीटों में बढ़ोतरी के साथ पार्टी को बूथ स्तर पर और भी मजबूत करने का रहा। अयोध्या विधानसभा में ठीक उसी का उल्टा खुद सपा नेता व कार्यकर्ता करते दिख रहे हैं। सपा मुखिया अखिलेश यादव के अरमानों में खुद पलीता लगा रहें है। हम यू कहें कि सपा को किसी और दुश्मन की जरूरत नही इनके ये नेता ही काफी है जो दिनभर सिर्फ गुटबाजी करने की गुणा गणित में लगे रहते है। इनके ये योजना को कुछ माननीय हवा भी देने में लगे है।
बता दें विगत 22 मार्च को सपा राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल यादव अयोध्या दौरे पर थे। वह पूर्व विधायक जयशंकर पांडे की पत्नी के निधन पर शोक संवेदना व्यक्त करने जय शंकर पांडे की आवास पहुंचे थे। वहीं पर कुछ सपा युवा नेता वा पूर्व एमएलसी के बीच कहासुनी हो गई। कहासुनी इतनी बढ़ी की हाथापाई भी हो गई। इस कहासुनी पर विराम लग पाता इससे पहले आग में घी देने वाले अपना काम करना शुरू कर दिए। या यूं कहें कि बकायदा सोशल साइट्स पर एकदूसरे के खिलाफ मुहीम छेड़ दिया। समाजवादी पार्टी के नेता आपस में लड़ना शुरू कर दिये। नतीजा यह रहा कि भारतीय जनता पार्टी आप इस पूरे प्रकरण पर मजा ले रही है और ले भी क्यों ना जब खुद के कार्यकर्ता व नेता में आपसी सामंजस नही है तो दूसरा मजा ही लेगा।
सपा मुखिया अखिलेश यादव के ख्वाब पर खुद उनके नेता कार्यकर्ता पलीता लगाने में व्यस्त हैं। आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। जिला व महानगर में नेतृत्व कमजोर होने का जीवंत उदाहरण देखने को मिल रहा है।
: श्रीरामजन्मोत्सव शुरू: जन्मे हैं रघुरैया अवध में बाजे आज बधाइया…
Sat, Mar 25, 2023
आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला में उत्सव के रस में संत साधक सराबोर
पद गायन के मध्य बज रही बधाईयां, पूरे किले पर चहुंओर छायी खुशियां
अयोध्या। जन्मे हैं रघुरैया अवध में बाजे आज बधाइयां, अवध में बाजे आज बधाइयां से मां सरयू के पावन तट पर सुशोभित आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला में प्रभु श्री राम के जन्मोत्सव पर बधाई गायन से गुंजायमान हो रहा है मौका है अपने आराध्य श्रीराम लला की अगवानी का। इसको लेकर पूरे मंदिर को भव्य रुप में सजाया गया है। आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला परिसर के मुख्य मंदिर में रसिकेंद्र बिहारी सरकार के सामने किलाधीश श्रीमहंत मैथली रमण शरण के सानिध्य में संगीतज्ञ संत साधक युगल सरकार को बधाई के पद गायन से रिझा रहें थे। संत साधक आनंद में गोता लगा रहे थे पूरे परिसर में चहुंओर खुशियां छायी है।
आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला के किलाधीश श्रीमहंत मैथली रमण शरण जी महाराज कहते है कि आराध्य के जन्मोत्सव की खुशियां हर किसी को है। मंदिर में सुबह नवाह पारायण का पाठ सस्वर हो रहा है। तो शाम को बधाईयां बाज रही है।
श्रीमहंत मैथली रमण शरण महाराज ने बताया कि भगवान का जन्म चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को दोपहर 12 बजे हुआ था, उस समय सभी देवता अयोध्या में आ गए थे और आज भी नवमी तिथि के दिन सभी देवता सभी तीर्थ अयोध्या में आकर के मां सरयू में स्नान कर भगवान के जन्म उत्सव में शामिल होते हैं, यह कथा नहीं बल्कि प्रत्यक्ष है। उन्होंने बताया कि प्रतिपदा से ही मंदिर परिसर में बधाई गीत नवाह पारायण प्रारंभ हो गया है जो नवमी तक चलेगा दिन में 12 बजे भगवान का भव्य जन्मोत्सव मनाया जाएगा। इस पूरे उत्सव की देखरेख किला के युवा अधिकारी संत सूर्यप्रकाश शरण कर रहें है।
: अखंड भक्ति से साधक के सभी मनोरथ पूर्ण होते है: रामानुजाचार्य
Fri, Mar 24, 2023
अष्टोत्तर शत श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान महायज्ञ में व्यासपीठ से स्वामी श्री धराचार्य जी कर रहे अमृत वर्षा
अयोध्या। चैत्र रामनवमी के पावन अवसर पर अष्टोत्तर शत श्रीमद् भागवत सप्ताह ज्ञान महायज्ञ के तृतीय दिवस में स्वामी श्री धराचार्य जी महाराज ने कथा का श्रवण कराते हुए कहा बाल्यावस्था में भक्ति मार्ग में चलकर परमात्मा को प्राप्त कर लेने पर 5 वर्ष के बालक ध्रुव की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। बालक ध्रुव के जैसी अखंड भक्ति यदि साधक के अंदर व्याप्त हो जाए तो सर्व अंतर्यामी भगवान श्री हरि उसके सभी मनोरथ पूर्ण करते हैं। राजा उत्तानपाद भक्त ध्रुव को सिंहासन पर बैठा कर राजा बना देते हैं ध्रुव जी अपनी प्रजा का पालन करते हैं। यक्षों के आतंक से दुखित हो कर ध्रुव जी ब्रह्मास्त्र से सभी यक्षों का संघार करते हैं। उन्होंने कहा कि आज भी सभी भगवत भक्तो में ध्रुव जी का स्थान उच्च है। भागवत पापी अजामिल की कथा का श्रवण कराते हुए कहा संतो की कृपा भगवत भक्तों की कृपा जब हो जाती है तो जन्म जन्मांतर पाप कर्म करने के बाद भी प्रभु अपना लेते हैं। दुष्ट अजामिल नित्य दुष्ट कर्म किया करता था एक दिन संतो ने अजामिल के घर का अन्न ग्रहण कर लिया परोपकारी संतजन अजामिल के घर से जाते समय उस पर कृपा करते हुए अजामिल की पत्नी गर्भवती थी दक्षिणा के रूप में अजामिल से होने वाले पुत्र का नाम नारायण रखने के लिए कह कर वहां से चले गए अंतिम समय में मृत्यु से भयभीत होकर के अजामिल ने अपने पुत्र नारायण को आवाज लगाई पुत्र ने तो अजामिल की बात नहीं सुनी लेकिन भगवान नारायण के पार्षद आ कर अजामिल को भगवान के धाम वैकुंठ को ले जाते हैं। यमदूतों में और भगवान के पार्षदों में परस्पर विवाद होता है अंत में पराजित हो कर यमदूत यमराज के पास जाकर के रुदन करने लगते हैं यमराज अपने दूतों को समझाते हुए कहते हैं व्यक्ति यदि अंत समय में भगवान श्री नारायण के नाम का स्मरण कर लेता है श्री वैष्णव दीक्षा ग्रहण कर लेता है वह नरक में आने का अधिकारी नहीं है। जगद्गुरु जी ने कहा कि अनेक पाप कर्मों में लिप्त होने पर भी यदि अंत समय में अपना सर्वस्व भगवत चरणों में अर्पित कर दिया जाए शरणागति कर ली जाए तो अंतर्यामी पर ब्रह्म जीव को अपना लेते हैं। हिरण्यकश्यप ने घोर तप किया प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त करके हिरण्य कश्यप अपने को ब्रह्मा मानने लगा और प्रजा में ढिंढोरा पिटवा दिया कोई भी यज्ञ नहीं करेगा मेरे शत्रु नारायण का नाम मेरे राज्य में नहीं लेगा। हिरण्यकश्यप की पत्नी कयाधु के गर्भ से भक्त प्रहलाद की उत्पत्ति होती है प्रह्लाद अपनी मां के गर्भ में देवर्षि नारद से नवधा भक्ति प्राप्त करते हैं हिरण्यकश्यप प्रहलाद जी को राक्षसी विद्या पढ़ने भेजते है बचपन से ही प्रहलाद जी की लगन प्रभु भक्ति में थी सभी दैत्य बालकों को बिठाकर प्रहलाद जी भगवान नारायण की महिमा श्रवण कराते हैं हिरण्यकश्यप प्रह्लाद जी से दुखी होकर प्रहलाद को कठोर यातनाएं देते हैं अपार कष्ट पाकर भी प्रहलाद जी भक्ति मार्ग को नहीं छोड़ते प्रहलाद जी का विश्वास और कठोर हो जाता है भक्त प्रहलाद को बचाने प्रभु नरसिंह रूप धारण करके दुष्ट हिरण्यकशिपु का वध करते हैं। सुखदेव जी महाराज से कथा का श्रवण करके राजेंद्र परीक्षित जी का विश्वास और भी बढ़ गया भगवान अपने भक्तों की रक्षा के लिए बैकुंठ से इस धरा पर आते हैं कथा के मुख्य यजमान बद्रीनारायण बलदवा मुंबई, राधेश्याम खेतान कोलकाता, सुभाष रांदढ नागपुर एवं देश के विभिन्न राज्यों से पधारे भक्तजन कथा का श्रवण करके आनंदित हो रहे हैं।