: पूजित शिला काे राममंदिर के गर्भगृह में लगाया जाए: आचार्य नारायण मिश्र
Sat, Aug 19, 2023
कैंसरगंज के लोकप्रिय सांसद बृजभूषण शरण सिंह व हनुमानगढ़ी के वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास महराज के उपस्थित में स्व. परमहंस काे पुष्पांजलि अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई
अयाेध्या। राम मंदिर आंदोलन के महानायक परमहंस रामचंद्र दास महाराज काे 20 वीं पुण्यतिथि पर नमन किया गया। शुक्रवार पुण्यतिथि को नयाघाट स्थित उनके समाधि स्थल पर पूजन-अर्चन व हवन का कार्यक्रम संपन्न हुआ। उसके बाद संताें और कैंसरगंज के लोकप्रिय सांसद बृजभूषण शरण सिंह व हनुमानगढ़ी के वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास महराज के उपस्थित में स्व. परमहंस काे पुष्पांजलि अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस माैके पर उनके शिष्य आचार्य नारायण मिश्र ने कहा कि गुरूदेव का मुख्य लक्ष्य श्रीरामजन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण व हिंदू राष्ट्र का था। वह रामजन्मभूमि आंदोलन के अगुवा थे। आज उनका सपना साकार हो रहा है। श्रीरामजन्मभूमि पर दिव्य और भव्य मंदिर बन रहा है। राममंदिर सभी के त्याग, तपस्या का प्रतिफल है। जल्द ही काशी-मथुरा भी बनकर रहेगा। भारत देश जल्द हिंदू राष्ट्र घोषित हाेगा।
उन्होंने ने रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से मांग है कि महाराजश्री द्वारा शिलादान के समय जाे शिला पूजित की गई थी। उस शिला काे राममंदिर के गर्भगृह में लगाया जाए। इससे उनकी आत्मा को शांति मिलेगी। संत करपात्री महाराज ने कहा कि स्व. परमहंस रामचंद्र दास रामजन्मभूमि आंदोलन के आधार थे। वह शलाका पुरुष रहे, राममंदिर के प्रवेश द्वार पर उनकी आदमकद विशाल मूर्ति लगनी चाहिए। यही हमारी मांग है और परमहंस काे सच्ची श्रद्धांजलि हाेगी। व्यापारी नेता सुशील जायसवाल ने कहा कि परमहंस रामचंद्र दास की पहचान रामजन्मभूमि आंदोलन में एक अगुवा के रूप में थी। उनके द्वारा पूजित शिला का उचित जगह पर प्रयोग हाे, जिससे उनके आंदोलन को संबल मिल सके। श्रद्धांजलि सभा में हिंदू महासभा राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य मनीष पांडेय, बबलू खान, हिंदू महासभा प्रदेश उपाध्यक्ष महंत रामलाेचन शरण, महंत कृष्ण कुमार दास ने भी अपने विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर हनुमानगढ़ी के वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास, समाजसेवी कविराज दास, सांसद जी के प्रतिनिधि सोनू सिंह,महेंद्र त्रिपाठी, प्रियेश दास आदि ने भी राममंदिर आंदोलन के महानायक काे श्रद्धासुमन अर्पित किया।
: भक्ति, श्रद्धा, समर्पण और प्रेम का प्रतीक बना झुनझुनिया बाबा आश्रम
Sat, Aug 19, 2023
पुण्यतिथि विशेष
झुनझनियां बाबा राम नाम के अनन्य उपासक थे, अपनी भक्ति श्रद्धा और भावना से परमात्मा को सखी रूप से करते थे आराधना
तीन दशक से आश्रम को सर्वोच्च शिखर पर स्थापित किया श्रीमहंत करूणा निधान शरण जी महाराज ने
अयोध्या। मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम की धराधाम को सन्तो की सराह भी कही जाती है। या हम यूं कह ले कि रामनगरी में अनेक भजनानन्दी सन्त हुये उनमें से एक रहे विभूषित जगदगुरू स्वामी श्री जानकी शरण झुनझुनिया बाबा जो रामनाम के सच्चे साधक के रूप में न सिर्फ अयोध्या अपितु पूरे भारत में रामनाम की अलख जगायी।
झुनझुनिया बाबा का नाम अयोध्या के सिद्ध संतों में शामिल है। बाबा को सीता जी की सखी चंद्रकला का अवतार कहा जाता है। यही वजह थी कि बाबा हमेशा स्त्री रूप में रहते थे और राम धुन में लीन रहते थे। रसिक भाव से श्रीराम नाम का प्रचार कर उसे जनमानस के हृदय में प्रतिष्ठित करने वाले स्वामी जानकी शरण महाराज उर्फ झुनझुनिया बाबा की गिनती अयोध्या के सिद्ध संतों की अग्रणी पंक्ति में की जाती है। महाराजश्री को सीता जी की सहेली चंद्रकला का अवतार माना जाता है। उन्होंने सरयू के तट पर जहां तपस्या की थी। वहां सियाराम किला भव्य मंदिर बना हुआ है।
सरयूतट पर सुशोभित श्री सियाराम किला झुनकी घाट के आचार्य श्री की तपोस्थली आज अपने सर्वोच्च शिखर की ओर अ्रग्रसर है। यह आश्रम मां सरयू के पावन तट पर स्थित है। जो चतुर्दिक धर्म की स्थापना, समाज सेवा गौ सेवा अतिथि सेवा विद्यार्थी सेवा संत सेवा व दरिद्र नारायण की सेवा में भी दिन प्रतिदिन निरंतर आगे बढ़ रहा है। जहां पर पूरी निष्ठा व ईमान से सभी सेवा किया जा रहा है। इस आश्रम में भक्तों की एक लम्बी फेरहिस्त है। जिसमें पूरे भारत से लाखों भक्त इस आश्रम से जुड़े हुये है। श्री सियाराम किला को भक्ति श्रद्धा समर्पण और प्रेम का प्रतीक भी माना जाता है। मां सरयू के तट पर भव्य और आकर्षक श्री सियाराम किला झुनकीघाट भक्ति और साधना के दृष्टि से भी सर्वोत्तम स्थान माना जाता है। यहां पहुंचकर सन्त साधक अपने परमाराध्य प्रभु की आराधना कर अपने को कृत्य-कृत्य करते है। मन्दिर के जगमोहन में युगल सरकार की प्रतिमा संगमरमर से बनी दिव्य मूर्ति का दर्शन करते है। मन्दिर में लगातार आज भी सीताराम धुनि कीर्तन संपदितकर महौल को भक्मिय बना देता है। कहते है सौन्दर्यशाली, शांत वातावरण सरयूतट साकेत लोक का अनुभव सदा सर्वदा शीतल मंद सुगंध समीर अनुपम सूर्यास्त दर्शन भजनांदियो के लिए उत्तम शोर से परमशांत गुफा किला से सरयू तक जाने का गुप्त मार्ग झुनकी उद्यान मिथिला वाटिका सत्ंसग भवन श्री युगल बिहारी जू का अद्भुत दर्शन जैसी भाव-भंगिमा रखे ठाकुर जी वैसा ही बन जाए आदि सियाराम किला का विशिष्ठ गुण हे। स्वामी जानकी शरण उर्फ झुनझुनिया बाबा उल्टी खाट पर बैठकर श्री राम नाम सत्य है की धुन लगाते हुए यात्रा करते थे। झुनझुनिया बाबा कानों में बाली हाथों में कंगन पैरों में घुंघरू पहन के सीता जी की सखी चंद्रकला के रूप में ही आजीवन भगवान श्रीराम की आराधना में लीन रहे। उन्होंने सत्यभाव से श्री सीताराम की उपासना की धारा प्रज्वलित की, जो आज भी करोड़ों लोगों को रामनाम रूपी दिव्य रस का अनुभव कराती है। मंदिर के महंत करुणानिधान शरण महाराज कहते हैं की झुनझुनियां बाबा ने कई दशक तक कठोर तपस्या कर भगवान का साक्षात दर्शन प्राप्त किया। किशोरी जी से उन्हें जन कल्याण का आदेश मिला।
सिद्ध संत और श्री राम नाम के अनन्य उपासक अपनी भक्ति श्रद्धा और भावना से परमात्मा को सखी रूप से आराधना कर प्रसन्न करने वाले जगद्गुरु द्वाराचार्य अनंत श्री समलंकृत श्री जानकी शरण जी महाराज झुनझनियां बाबा जी की 28 वीं पुण्यतिथि पर आज चरण पादुका पूजन एवं अभिषेक के साथ धूमधाम से सिद्ध पीठ श्री सियाराम किला झुनकी घाट में मनाया जायेगा। इस आश्रम को तीन दशक से अपने सर्वोच्चत शिखर पर निरन्तर ले जाने के लिए आज भी वर्तमान महन्त श्री करूणा निधान शरण जी महराज लगे रहते हे। आश्रम से जुड़े प्रख्यात कथावाचक जिनका नाम देश विदेश के नामचीन कथावाचकों में लिया जाता है। परमश्रेद्धय स्वामीजी प्रंभजनानन्द शरण जी महराज प्रभुवन्दन एवं जनसेवा संस्थान द्वारा निरन्तर दीन-दुखी असहाय की मदद करना चिकित्सालयों की स्थापना कर रोगियों को निःशुल्क उपचार करना वृद्धजनों व वृद्धा आश्रम असहाय व निर्धन कन्याओं का विवाह करना विशाल गौशाला प्राकृतिक प्रकोप यानि बाढ़ भूकप में राहत देना सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार करना जैसी तमाम योजनाएं चला कर निरन्तर लोगों की मदद करते चले आ रहे है। आश्रम में सभी उत्सव बड़े ही श्रद्धा भाव के साथ मनाया जाता है।
: गुरु कृपा से ही भक्ति मार्ग की प्राप्ति होती है:रामानुजाचार्य
Sat, Aug 19, 2023
नवदिवसीय श्री राम कथा का शुभारंभ कलश यात्रा के साथ हुआ
सरयू पूजन करते रामानुजाचार्य जी महाराज
दिल्ली से आये 500 भक्त शोभायात्रा में हुए सम्मिलित, गणपति पूजन वरुण पूजन के साथ-साथ सभी ने किया मां सरयू जी का पूजन
श्री खंडेलवाल वैश्य निष्काम सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित हुआ महोत्सव
अयोध्या । प्रतिष्ठित पीठ श्री अशर्फी भवन में श्रावण मास के पावन अवसर पर झूलन उत्सव का भव्य शुभारंभ हो गया। महोत्सव पर श्री खंडेलवाल वैश्य निष्काम सेवा समिति के द्वारा आयोजित नवदिवसीय श्री राम कथा का शुभारंभ कलश यात्रा के साथ हुआ। देश के विभिन्न प्रांतो से एवं देश की राजधानी दिल्ली से पधारे हुए 500 भक्त शोभायात्रा में सम्मिलित हुए। गणपति पूजन वरुण पूजन के साथ-साथ मां सरयू जी का पूजन सभी भक्तों ने जगद्गुरु स्वामी श्री धराचार्य जी महाराज के सानिध्य में किया। महाराज श्री ने मां सरयू का दुग्ध अभिषेक किया। श्री राम नाम की धुन का संकीर्तन करते हुए सभी भक्त शोभायात्रा में नृत्य करते हुए झुनकी घाट से कथा स्थल अशर्फी भवन तक पहुंचे। कथा में व्यास पीठ पर विराजित जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री धराचार्य जी महाराज ने कहां जन्म जन्मांतरों का पुण्य जब उदय होता है तब श्री अवध धाम में बैठकर भगवान श्री राम के पावन चरित्रों का श्रवण करने का सौभाग्य प्राप्त होता है। सरयू जी की महिमा का बखान करते हुए महाराज श्री ने बताया सौ वर्षों तक गंगा में स्नान करने से जो पुण्य प्राप्त होता है वह पुण्य फल सरयू दर्शन मात्र से प्राप्त हो जाता है। श्रीमद् वाल्मीकि रामायण के रचयिता वाल्मीकि जी के जन्म की कथा का श्रवण कराते हुए महाराज श्री ने कहा सद्गुरु और संतों की कृपा पाकर वाल्मीकि जी ने श्रीमद् वाल्मीकि रामायण की रचना की।आदि काव्य श्रीमद् वाल्मीकि रामायण सभी पुराणों में अग्रगण्य हैं गुरु कृपा से ही भक्ति मार्ग की प्राप्ति होती है। जगतगुरु रामानुजाचार्य शंकराचार्य वल्लभाचार्य, इन्हीं के मार्गदर्शन से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है। बंदउ गुरु पद पदुम परागा अज्ञान रुपी अंधकार से ज्ञान रुपी प्रकाश की ओर हमें अग्रसर करें वही सद्गुरु है गुरु की महिमा का वर्णन महाराज जी ने किया। गुरु कृपा से सबसे दुर्लभ बैकुंठ पद को भी प्राप्त किया जा सकता है। रघुवंश के राजाओं की कथाओं का श्रवण करते हुए महाराज श्री ने महाराज दिलीप के गो भक्ति की व्याख्यान सुनाते हुए कहा मां नंदिनी की सेवा रूप से किया गौ माता ने प्रसन्न होकर महाराज दिलीप को पुत्र प्राप्ति का वरदान दिया। भयंकर कलिकाल में गौ सेवा ही सर्वोत्तम भक्ति है हम सभी जीवो को गौ माता की सेवा के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए। कथा का समय सायंकाल 3 बजे से शाम 7 बजे तक है।