: राम और भरत के मधुर मिलन की कथा श्रवण कर संत साधक हुए भावविभोर
Thu, Aug 24, 2023
चंद्रयान तृतीय के सफल परीक्षण हेतु लक्ष्मी नारायण भगवान का विशेष पूजन यज्ञ का हुआ अनुष्ठान
अयोध्या। प्रसिद्ध श्री अशर्फी भवन के पीठाधीश्वर जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री श्री धराचार्य जी महाराज की प्रेरणा से चंद्रयान तृतीय के सफल परीक्षण के लिए अशर्फी भवन के आराध्य प्रभु श्री लक्ष्मी नारायण भगवान का विशेष पूजन यज्ञ का अनुष्ठान मंदिर प्रांगण में संपन्न हुआ। आज पूरे विश्व की निगाह इस अभियान की सफलता के लिए टिकी हुई हैं भगवान भूत भावन भोलेनाथ के शीश पर चंद्रमा शोभा को बढ़ाते हैं चंद्र देव मन के देवता हैं और हम सभी भारतवासी अपने मन को शांत करने लिए चंद्रमा की पूजा करते हैं। श्री वेंकटेश तिरुपति बालाजी दिव्य धाम ट्रस्ट अलवर के पूज्य महंत स्वामी सुदर्शनाचार्य जी महाराज की अध्यक्षता में हवन यज्ञ का अनुष्ठान श्री माधव वेद विद्यालय श्री अनादी संस्कृत उत्तर माध्यमिक विद्यालय के समस्त आचार्य एवं वेद पाठी ब्राह्मण बटुकों के द्वारा चंद्रयान के सफल परीक्षण की कामना की गई। श्री खंडेलवाल वैश्य निष्काम सेवा समिति के भक्तों ने भी पूजा अर्चन कर भारत के वैज्ञानिकों को शुभकामना दी एवं भगवान लक्ष्मी नारायण से चंद्रयान के सफल परीक्षण की प्रार्थना अर्जी लगाई। व्यास पीठ पर विराजमान स्वामी सुदर्शनाचार्य जी महाराज ने श्रीराम कथा का श्रवण कराते हुए कहां 100 करोड़ रामायण में भगवान श्री राम जी के जीवन चरित्र का वर्णन किया गया है मर्यादा पुरुषोत्तम राम के जीवन चरित्र को अपने जीवन में उतार लेने पर जन्म-जन्मांतर के पाप कर्म नष्ट हो जाते हैं। अनेकों जन्मों से भगवान के दर्शन हेतु तपस्या कर रहे ऋषि-मुनियों को प्रभु वन में दर्शन देते हैं भरत जी अयोध्यापुरी से अपनी सेना सहित बड़े भैया राम को मनाने वन में जाते हैं इधर प्रभु भरद्वाज आश्रम पर पर्ण कुटीर में निवास कर रहे हैं वन में कुतूहल को देखकर लक्ष्मण जी पेड़ पर चढ़कर देखते हैं और अयोध्या की ध्वज पताका वाला रथ आते देखकर अत्यधिक क्रोधित हो जाते हैं और भाई राम से कहते हैं प्रभु इस कुटिल भरत के वध करने में रंच मात्र भी संदेह नहीं करना चाहिए मां केकई ने तो 14 वर्ष का वनवास ही दिया किंतु यह भरत निश्चित ही हम लोगों का वध करने के लिए यहां आ रहा है। हे पूज्य भ्राता आप आज्ञा करें मैं लक्ष्मण आज इस दुष्ट भरत को समाप्त कर दूंगा लक्ष्मण जी के वचनों को सुनकर राम जी लक्ष्मण जी को धिक्कार ते हुए कहते हैं कि हे लक्ष्मण मेरे प्राणों से प्रिय भरत को अभी तुमने जाना नहीं है आने दो भाई भरत को मैं उसे समझा कर तुम्हें अयोध्या का राजा बनवा देता हूं और भरत को अपनी सेवा में यहां वन में रख लेता हूं यह सुनकर लक्ष्मण जी रुदन करने लगे और भरत जी जैसे ही प्रभु के समीप आए प्रभु के चरणों में साष्टांग प्रणिपात करते हुए रुदन करने लगे हे। भ्राता यदि मैं कुटिल भरत पैदा ना हुआ होता तो आपको इस निर्जन वन में नहीं आना पड़ता हमारे पिता श्री की मृत्यु नहीं होती हे भ्राता मैं आपके चरणों में बारंबार साष्टांग प्रणिपात करता हूं आप अयोध्या वापस चलें और राज सिंहासन पर विराजमान हो आपके बिना अयोध्या शून्य हो गई है। प्रभु जो दंड आप मुझ दुष्ट भरत को देना चाहते हैं वह मुझे स्वीकार है। राम और भरत के मधुर मिलन की कथा श्रवण करके सभी श्रद्धालु भक्तजन रुदन करने लगे रामजी ने भरत को कई सारे तर्क दिए और अंत में आदेश दिया कि है भरत तुम मेरे इन चरण पादुका ओं को लेकर अयोध्या जाओ और अयोध्या के राज्य का निर्वहन करो 14 वर्ष व्यतीत होने के पश्चात मैं अयोध्या आऊंगा यह मेरा आदेश है। भरत जी आंखों में अश्रु लिए प्रभु की चरण पादुका ओं को अपने मस्तक पर विराजमान करके लौट आते हैं और राज सिंहासन पर प्रभु की चरण पादुका ओं को रखकर 14 वर्ष तक कठोर तप करने नंदीग्राम में वटवृक्ष के समीप अपने केशों को जटा बनाकर तपस्वी वेश धारण करके तप करने बैठ जाते हैं। प्रभु वन में ऋषि-मुनियों को दर्शन देते हुए लक्ष्मण सहित पर्ण कुटीर का निर्माण करते हैं और अपने दिवंगत पिताश्री के लिए पिंडदान करते हैं। इस भयंकर कलयुग में प्रभु राम जैसा भ्रातृत्व प्रेम हम मनुष्यों के अंदर आ जाए निश्चित हम सभी स्वस्थ प्रसन्न आनंदित जीवन व्यतीत कर सकते हैं।
: अशर्फी भवन मंदिर में हो रही रामकथा अमृत वर्षा
Wed, Aug 23, 2023
भरत और राम जी के जैसा भ्रातृत्व प्रेम इस घोर कलयुग में हो जाए तो इस कलयुग में भी रामराज्य आ जाएगा: रामानुजाचार्य
अयोध्या। रामनगरी के अशर्फी भवन मंदिर में इन दिनों श्रीराम कथा की अमृत वर्षा हो रही है। श्री खंडेलवाल वैश्य निष्काम सेवा समिति द्वारा आयोजित श्री राम कथा के पंचम दिवस में जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री धराचार्य जी महाराज श्री राम कथा का विस्तार करते हुए कहां कि भगवान श्री राम के वन जाने के बाद सभी अयोध्या वासियों की स्थिति दयनीय हो गई। सभी अयोध्यावासी प्रभु राम के वियोग में रुदन करने लगे। श्री राम केवट की नाव में बैठकर नदी पार की और वन की ओर प्रस्थान किए सुमंत जी अयोध्या वापस लौट कर आते हैं। महाराज दशरथ को सभी समाचार बताते हैं महाराज दशरथ पुत्र वियोग में रुदन करने लगते हैं। जिस अयोध्या में प्रतिदिन उत्सव का आयोजन होता था आज वही अयोध्या भगवान राम एवं मा सीता जी के जाने से श्री रुग्ण हो गई ना कहीं कोई उत्सव मनाया जा रहा है ना ही पकवान बनाए जा रहे हैं। सभी अयोध्या वासियों के नेत्रों से अश्रु धारा प्रवाहित हो रही है। रामानुजाचार्य जी ने कहा कि प्राणों से प्रिय पुत्र राम के वियोग में महाराज दशरथ तड़प ते हुए कौशल्या जी को बताते हैं देवी मेरे पूर्व पाप के कारण मेरा अंतिम समय सन्निकट है। प्राणों से प्रिय राम के बिना मैं एक क्षण भी अब जीवित नहीं रह सकता। मां कौशल्या रुदन करती है मां कौशल्या के देखते देखते दशरथ जी का परम पद हो गया अयोध्या पर आए इस असहनीय संकट को देखकर गुरु वशिष्ठ जी ने भरत को अयोध्या बुलाया है। भरत जी जैसे ही अयोध्या आए इस असहनीय संकट को देख कर के दुखित हो गए अपनी मां के महल में गए केकई के चरणों में प्रणाम किया। मां केकई की स्वार्थपूर्ण वाणी को सुनकर भरत जी दुखी हो जाते हैं और अपने को धिक्कारने लगते हैं भरत जी कहते हैं यदि मेरा जन्म ना होता तो पिताजी के प्राणों से प्रिय भाई राम को वन नहीं जाना पड़ता और ना पिताजी के प्राण जाते मैं भरत अभागा हूं जो इस अभागिनी केकई के पुत्र के रुप में जन्म लिया हूं। गुरू वशिष्ठ जी भरत को समझाते हैं और अयोध्या के राजसिंहासन पर बैठने की आज्ञा देते हैं। भरत जी रुदन करने लगते हैं और प्राणों से प्रिय भाई श्री राम को मनाने के लिए भरत जी वन में जाते हैं भाई भरत और राम जी के जैसा भ्रातृत्व प्रेम इस घोर कलयुग में हो जाए तो इस कलयुग में भी रामराज्य आ जाएगा।
: सतही लोकप्रियता के लिए भगवा का अपमान न करे राजू दास: बालयोगी रामदास
Wed, Aug 23, 2023
रामनगरी के संतों ने राजू दास के बयान पर भड़के,कहा भगवा पहन लेने से कोई संत नही हो जाता
राजू दास संत का चोला ओढ़ कर भाजपा नेता की हैसियत से अनावश्यक बयान देते है: महंत दिलीप दास
अयोध्या।सपा मुखिया अखिलेश यादव के ऊपर बयान देकर राजू दास की चारों तरफ किरकिरी हो रही है। रामनगरी अयोध्या जहां राजू दास निवास करते है वही पर भी उनके उलजलूल बयान को लेकर संतो में भारी आक्रोश है। खड़ेश्वरी मंदिर से जुड़े महंत दिलीप दास त्यागी ने कहा कि राजू दास के द्वारा अखिलेश यादव पर की गई अभद्रता पूर्ण टिप्पणी अमर्यादित और निंदनीय है। अखिलेश यादव एक राजनैतिक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ साथ उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भी हैं उनके ऊपर ओछी बयानबाजी करके सस्ती लोकप्रियता अर्जित करने का माध्यम बनाना उचित नहीं है।
ऐसे अभद्रता पूर्ण टिप्पणी से राजू दास को बचना चाहिए इससे संतों की मर्यादा भी बची रहेगी। स्वामी प्रसाद मौर्या का विरोध हर संत धर्माचार्य व सनातनधर्मी करता है, लेकिन हम अपनी मर्यादा में रहकर ही विरोध प्रकट करें। हम भी अमर्यादित हो जायेंगे तो स्वामी प्रसाद मौर्या जैसे अज्ञानी और संतों में अंतर ही क्या रह जाएगा।
तो वही समाजवादी पार्टी से जुड़े करतलिया बाबा आश्रम के महंत बालयोगी रामदास महाराज ने कहा राजू दास जैसे लाखों लोग अखिलेश यादव को छू भी नही सकते है अखिलेश यादव जी के चाहने वाले करोड़ों करोड़ लोग है। राजू दास की हैसियत ही क्या है। अखिलेश यादव जी के ऊपर टिप्पणी करने से पहले अपने गिरेबान में झाकना चाहिए। महंत बालयोगी रामदास महाराज ने कहा कि राजू दास अपने हद में रहें अन्यथा परिणाम भयानक होगा। करतलिया बाबा आश्रम में राजू दास को लेकर संतो में बहुत ही ज्यादा गुस्सा देखने को मिला। तो वही हनुमानगढ़ी से जुड़े महंत आनंद दास ने कहा कि राजू दास सतही लोकप्रियता के लिए सपा मुखिया अखिलेश यादव पर अभद्र टिप्पणी कर रहे हैं। राजू दास को अयोध्या के लोग नोटिस में ही नही लेते है।