: रामलीला में भगवान राम का प्राकट्य, लगे जयजयकार के नारे
Sun, Oct 15, 2023
अंतर्राष्ट्रीय आदर्श रामलीला मंडल पत्थर मंदिर की रामलीला देख दर्शक हुए भाव विभोर
अयोध्या। भगवान श्री राम की जन्मस्थली अयोध्या जी की सबसे प्राचीन रामलीला स्थल श्री भगवदाचार्य स्मारक सदन में संत श्री तुलसीदास रामलीला समिति द्वारा अंतर्राष्ट्रीय आदर्श रामलीला मंडल पत्थर मंदिर द्वारा भगवान के जन्म का अद्भुत मंचन किया गया जिसको देखकर उपस्थित सभी लोग मंत्र मुक्त हो गए। सर्वप्रथम रामलीला समिति के कोषाध्यक्ष बड़ा भक्त माल पीठाधीश्वर श्रीमहंत अवधेश दास जी महाराज, हनुमत सदन पीठाधीश्वर महंत अवध किशोर शरण,सार्वभैम मंदिर के महंत जनार्दन दास, महंत पवन कुमार दास, तुलसीदास छावनी पीठाधीश्वर महंत जनार्दन दास, महंत शशिकांत दास समिति के महामंत्री संकट मोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजय दास महाराज के साथ स्वरूप के रूप में विराजमान भगवान की आरती उतारी और लीला का मंचन प्रारंभ हुआ।
पृथ्वी पर निरंतर राक्षसों का अत्याचार बढ़ रहा था जिससे वह दुखी होकर के गौ माता का रूप धारण करके सभी देवताओं से आग्रह करने पहुंची श्री ब्रह्मा जी आदि देव महादेव शंकर जी महाराज सहित सभी देवताओं ने भगवान विष्णु की प्रार्थना की और तब आकाशवाणी हुई की ही देवताओं में पृथ्वी से अत्याचार समाप्त करने के लिए अपने अंशो के साथ अयोध्या में राजा दशरथ के यहां राम के रूप में अवतार लूंगा और पृथ्वी से राक्षसों का विनाश करूंगा। यह सुनकर सभी देवताओं ने अपने-अपने अंश से वानर भालू को उत्पन्न किया। एक दिन राजा दशरथ बहुत दुखी थे वह गुरु वशिष्ट के पास पहुंचे गुरु वशिष्ठ ने श्रृंगी ऋषि को बुलाया और श्रृंगी ऋषि ने मख क्षेत्र मखौड़ा में पुत्रेष्टि यज्ञ कराई अग्नि देवता प्रगट हुए और राजा दशरथ को खीर का प्रसाद दिया उन्होंने सभी रानियां में वितरित किए और समय बीतने के बाद राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न का अयोध्या में जन्म हुआ। अयोध्या में चारों ओर खुशियां छा गई राजा दशरथ ने सभी को दान दिए। बालकों की बाल लीला देखकर राजा दशरथ माता कौशल्या सहित सभी रानियां खुश हो रही थी इसी बीच महल में विश्वामित्र जी का आगमन हुआ उन्होंने राजा दशरथ से यज्ञ रक्षा के लिए श्री राम लक्ष्मण को मांगा राजा दशरथ बहुत दुखी हुए लेकिन विश्वामित्र जी के समझाने के बाद उन्होंने राम लक्ष्मण को यज्ञ रक्षा के लिए ऋषि विश्वामित्र को सौंप दिया। सभी अतिथियों का स्वागत संकट मोचन सेवा के कार्यवाहक अध्यक्ष वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास महाराज, मृदंग वादक राजीव रंजन व शिवम श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर लोग राम लखन दास सहित सैकड़ो संत महंत भक्तजन उपस्थित होकर लीला देखी।
: भगवदाचार्य स्मारक सदन की ऐतिहासिक रामलीला का हुआ भव्य शुभारंभ
Sat, Oct 14, 2023
अयोध्या उपासना का गढ़ है, यह उपासना की लीला है: महंत अवधेश दास
रामलीला समिति के महासचिव संकटमोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजय दास महाराज ने संत-महंत समेत अन्य अतिथियों का माल्यार्पण और अंगवस्त्र ओढ़ाकर स्वागत-सम्मान किया
अंतर्राष्ट्रीय अवध आदर्श रामलीला मंडल पत्थर मंदिर द्वारा लीला के प्रथम दिन नारद माेह और रावण जन्म का बहुत ही सुंदर मंचन किया
अयोध्या। रामनगरी की सुप्रसिद्ध रामलीला का भव्यता दिव्यता के साथ शुभारंभ गुरुवार को विशिष्ट संतों द्धारा किया गया। संत श्रीतुलसीदास रामलीला समिति के तत्वाधान में भगवदाचार्य स्मारक सदन की ऐतिहासिक रामलीला का भव्य शुभारंभ किया गया। रामलीला समिति कार्यवाहक अध्यक्ष दशरथ राजमहल विंदुगाद्याचार्य महंत देवेंद्र प्रसादाचार्य महाराज समेत विशिष्ट संताें, सांसद लल्लू सिंह ने भगवान श्रीराम-सीता के स्वरूप का तिलक, पूजन-वंदन कर दिव्य आरती उतारी। रामलीला समिति के महासचिव संकटमोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय दास महाराज ने संत-महंत समेत अन्य अतिथियों का माल्यार्पण और अंगवस्त्र ओढ़ाकर स्वागत-सम्मान किया। अंतर्राष्ट्रीय अवध आदर्श रामलीला मंडल पत्थर मंदिर द्वारा लीला के प्रथम दिन नारद माेह और रावण जन्म का बहुत ही सुंदर मंचन किया गया। संजय दास महाराज ने कहा कि भगवदाचार्य स्मारक सदन में नारद माेह के साथ पंद्रह दिवसीय रामलीला का शुभारंभ हाे चुका है, जिसका समापन 26 अक्टूबर काे श्रीराम राज्याभिषेक से हाेगा। यह रामलीला अयोध्या की प्राचीन व परंपरागत लीला है। जाे सन् 1964 से चली आ रही है। रामलीला समिति के उपाध्यक्ष रसिक पीठाधीश्वर महंत जन्मेजय शरण महाराज ने कहा कि यह मंगल अवसर हम लाेगाें काे पुनः प्राप्त हुआ और रामलीला शुरु हुई। इस रामलीला में सबकी सहभागिता हाे। समिति के काेषाध्यक्ष बड़ाभक्तमाल महंत स्वामी अवधेश कुमार दास महाराज ने कहा कि अयोध्या उपासना का गढ़ है और यह उपासना की लीला। इसके माध्यम से पूरी दुनिया को एक अच्छा संदेश जायेगा। इस कीर्ति को हम और आगे बढ़ाना चाहते हैं। तुलसी जयंती भी भव्यता से मनाएंगे। रामानंद संप्रदाय की मर्यादा का सदैव पालन किया जायेगा। अतिथियों के स्वागत में वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास, मृदंग वादक राजीव जी व शिवम श्रीवास्तव ने किया। इस अवसर पर महंत बाबा माधवदास, महंत डॉ. रामानंद दास, महंत रामशरण दास, महंत डॉ. स्वामी भरत दास, महंत वैदेहीवल्लभ शरण, महापाैर महंत गिरीशपति त्रिपाठी, विधायक वेदप्रकाश गुप्ता, महंत बलराम दास, महंत जनार्दन दास, वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास, महंत आशुतोष दास, नागा रामलखन दास, महंत शशिकांत दास, महंत उमेश दास, महंत हरिभजन दास, आचार्य वरूण दास, दिवाकराचार्य, आचार्य नारायण मिश्र, मनीराम दास, महंत बालयाेगी रामदास, महंत राजीवलाेचन शरण, धनुषधारी शुक्ला, पंकज गुप्ता, शिवम श्रीवास्तव, डॉ. प्रभाकर मिश्रा, मुकेश तिवारी फाैजी, श्रीनिवास शास्त्री, रमेश राना आदि माैजूद थे।
: श्रीरामाश्रम के संस्थापक महंत काे संतो ने दी श्रद्धांजलि
Sat, Oct 14, 2023
श्रीरामाश्रम के संस्थापक महंत प्रभूदास शास्त्री महाराज काे तीसरी पुण्यतिथि पर श्रद्धापूर्वक याद किया गया
अयोध्या। अयाेध्याधाम में रामकाेट स्थित प्रसिद्ध पीठ श्रीरामाश्रम के संस्थापक महंत प्रभूदास शास्त्री महाराज काे तीसरी पुण्यतिथि पर श्रद्धापूर्वक याद किया गया। शुक्रवार को मंदिर प्रांगण में एक श्रद्धांजलि सभा आयाेजित हुई। सभा में रामनगरी के विशिष्ट संत-महंत एवं धर्माचार्यों ने पूर्वाचार्य के चित्रपट पर पुष्पांजलि अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी। संताें ने उनके कृतित्व और व्यक्तित्व पर प्रकाश भी डाला। इस अवसर पर श्रीरामाश्रम के वर्तमान पीठाधीश्वर महंत जयराम दास वेदांती महाराज ने कहा कि उनके गुरूदेव संत और गाै सेवी रहे। वह विलक्षण प्रतिभा के धनी संत थे। उनकी गणना विद्वान संताें में हाेती थी। विद्वता में उन्हें महारथ हासिल था। उन्होंने अयोध्यानगरी में एक आश्रम की स्थापना कर उसका कार्यभार संभाला। आजीवन मठ की उत्तराेत्तर समृद्धि लगे रहे। मंदिर का सर्वांगीण विकास किया। जहां गाै, संत, विद्यार्थी एवं अतिथि सुचार रूप से चल रही है। गुरूदेव के पदचिंहाें पर चलकर मठ के विकास में कृत-संकल्पित हूं। उनकी देन है कि आज मंदिर की गणना अयाेध्याधाम के प्रमुखतम पीठाें में हाेती है। मठ में सभी उत्सव, समैया, त्याैहार परंपरागत रूप से मनाया जा रहा है। महाेत्सव में मंदिर से जुड़े हुए शिष्य-परिकर, अनुयायी सम्मिलित होकर जीवन सफल बनाते हैं। इससे पहले मंदिर के गर्भगृह में विराजमान भगवान मैथिलीरमण राम का भाेग,आरती-पूजन हुआ। उसके पश्चात साकेतवासी महंत के चित्रपट पर पूजन-अर्चन किया गया। श्रीरामाश्रम पीठाधीश्वर महंत जयराम दास वेदांती ने पधारे हुए संत-महंत, धर्माचार्यों का स्वागत-सम्मान किया। पुण्यतिथि पर दशरथ महल के विंदुगाद्याचार्य महंत देवेंद्र प्रसादाचार्य, मणिरामदास छावनी उत्तराधिकारी महंत कमलनयन दास, लक्ष्मणकिला धीश महंत मैथिलीरमण शरण, रामवल्लभाकुंज अधिकारी राजकुमार दास, महंत रामानंद दास, रसिक पीठाधीश्वर महंत जन्मेजय शरण, महंत करूणानिधान शरण, महंत अवधेश दास, महंत राममिलन शरण, महंत गणेशानंद दास, महंत महेश दास, महंत उद्धव शरण, महंत विष्णु दास, महंत रामेश्वर दास, महंत डॉ. ममता शास्त्री, महंत रामानुज शरण, स्वामी छविरामदास, महंत सीताराम दास, महंत वीरेंद्र दास, महंत अर्जुन दास, महंत गिरीश दास, महंत संतोष दास, महंत राजेंद्र दास, महंत बलराम दास, महंत जनार्दन दास, महंत रामनरेश शरण, महंत गंगा दास, स्वामी गयाशरण, संतदास, प्रियेश दास, रामायणी गाेवर्धन दास आदि संत-महंताें ने पूर्वाचार्य काे श्रद्धासुमन अर्पित किया।