: राम-केवट संवाद का प्रसंग सुनकर भाव-विभोर हुए भक्त
Sat, Jan 20, 2024
निष्काम भाव से भक्ति करने वाले की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं: जगद्गुरु
मंगल भवन सुंदर धाम पीठाधीश्वर महंत रामभूषण दास कृपालु जी ने व्यासपीठ का किया पूजन
अयोध्या। हरिधाम गोपाल पीठ में चल रही संगीतमय रामकथा में राम वनवास भरत मिलाप और राम-केवट संवाद की कथा का प्रसंग व्यासपीठ से जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी महाराज ने सुनाया। रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी ने कहा कि भरत जैसा भाई इस युग में मिलना मुश्किल है। राम-केवट संवाद का प्रसंग सुनकर भक्त भाव-विभोर हो गए। उन्होंने कहा कि भगवान राम मर्यादा स्थापित करने को मानव शरीर में अवतरित हुए। पिता की आज्ञा पर वह वन चले गए। भगवान राम वन जाने के लिए गंगा घाट पर खड़े होकर केवट से नाव लाने को कहते हैं लेकिन केवट मना कर देता है और पहले पैर पखारने की बात कहता है। केवट भगवान का पैर धुले बगैर नाव में बैठाने को तैयार नहीं होता है। राम-केवट संवाद का प्रसंग सुनकर श्रोता आनंदित हो गए। उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के आदर्श समाज में आज भी कायम है। भगवान प्रेम भाव देने वाले का हमेशा कल्याण करते हैं। कहा कि भरत ने भगवान राम के वनवास जाने के बाद खड़ाऊं को सिर पर रखकर राजभोग की बजाय तपस्या की। कहा कि जीवन में भक्ति और उपासना का अलग महत्व है। निष्काम भाव से भक्ति करने वाले की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। उन्होंने कहा कि श्रीराम कथा मनोरंजन का साधन नही हैं बल्कि मन के मैल को धोकर पवित्र करने व भगवत प्राप्ति की ओर अग्रसर होने का एकमात्र माध्यम है। स्वामीजी ने कहा कि भगवान का स्वभाव है कि वह पशु पक्षियों का भी सम्मान करते हैं। उनके उपकार को भी नहीं भूलते हैं। मौजूदा दौर में मनुष्य किसी भी उपकार को नहीं मानता है। आज की कथा में व्यासपीठ का पूजन मंगल भवन सुंदर धाम पीठाधीश्वर महंत कृपालु रामभूषण दास व यजमान नरेश गर्ग, कुसुमलता गर्ग ने व्यासपीठ का पूजन किया। आये हुए संतो का विशेष अभिनन्दन कथा का संचालन कर रहें आचार्य रमेश दास शास्त्री जी ने किया। कथा की व्यवस्था में गौरव शास्त्री लगे रहें। इस मौके पर सैकड़ों संत महंत एवं राम कथा के रसिक गण उपस्थित रहे।
: भगवान श्रीलक्ष्मी नारायण का दिव्य अभिषेक, श्रृंगार, तुलसी, कमल पुष्प से हुआ अर्चन
Sat, Jan 20, 2024
प्रतिष्ठित पीठ श्री अशर्फी भवन में जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी श्रीधराचार्य महाराज के सानिध्य में मनाया जा रहा रामोत्सव
अशर्फी भवन में श्रीरामलला प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में पधारे सभी श्रद्धालु, रामभक्तों लिए भोजन, भंडारा अनवरत रूप से चल रहा
अयोध्या। श्रीरामलला प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के अब कुछ ही दिन शेष बचे हैं। लेकिन अयोध्यानगरी के मठ-मंदिरों में अभी से ही उत्सव का उल्लास छाने लगा है। चहुंओर महोत्सव का उल्लास चरम पर है। प्रतिष्ठित पीठ श्री अशर्फी भवन में जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी श्रीधराचार्य महाराज के सानिध्य में रामोत्सव मनाया जा रहा है। जहां विविध अनुष्ठान संचालित हैं। प्रातः काल अशर्फी भवन के आराध्य भगवान श्रीलक्ष्मी नारायण का दिव्य अभिषेक, श्रृंगार, तुलसी, कमल पुष्प से अर्चन महाराज श्री द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि सभी मनुष्यों को मानवता की शिक्षा देने प्रभु मनुष्य रूप में श्रीअवध धाम में अवतरित हुए। हम सभी का बड़ा सौभाग्य है कि प्रभु अपने निज मंदिर में विराजमान हो रहे हैं। इस भयंकर कलयुग में प्रभु भक्ति ही उत्तम साधन हैं। राम रक्षा स्तोत्र, विष्णु सहस्त्रनाम पाठ, श्रीराम महायज्ञ में विशेष आहुतियां प्रदान की गई। अशर्फी भवन पीठ की ओर से प्रतिदिन प्रातः 6 बजे से रात्रि पर्यंत श्रीरामलला प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में पधारे सभी श्रद्धालु, रामभक्तों लिए भोजन, भंडारा अनवरत रूप से चलाया जा रहा है। भंडारे में श्रद्धालुगण प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं
: 22 जनवरी को सनातन व हिंदू धर्म का महान पर्व : कमल भाई
Sat, Jan 20, 2024
उदासीन संगत ऋषि आश्रम रानोपाली महंत डॉ. स्वामी भरत दास महाराज के आर्शीवाद से चार हजार लोगों के रहने, खाने-पीने की गई है समुचित व्यवस्था
अयोध्या। भगवा सेना भारत गरवी गुजरात व संत सेवा समिति कर्णावती के राष्ट्रीय अध्यक्ष कमल भाई रावल ने शुक्रवार को उदासीन आश्रम रानोपाली में आयोजित प्रेसवार्ता दौरान कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र महासचिव चंपत राय, विहिप केंद्रीय मंत्री राजेन्द्र सिंह पंकज द्वारा उन्हें रामलला प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में सभी आमंत्रित साधु-संत, श्रद्धालु, भक्तगण के लिए रहने, खाने-पीने की व्यवस्था हेतु दायित्व सौंपा गया था। उदासीन संगत ऋषि आश्रम रानोपाली महंत डॉ. स्वामी भरत दास महाराज के आर्शीवाद से चार हजार लोगों के रहने, खाने-पीने की समुचित व्यवस्था की गई है। एक पैकेट में दो लड्डू, एक सरयू नदी का जल, दो कलावा, एक सुपारी, अक्षत रहेगा। इस प्रकार से प्रसाद के रूप में ऐसे 20 हजार पैकेट 20 जनवरी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को देंगे। जो प्राण प्रतिष्ठा के दिन राममंदिर परिसर में प्रसाद रूप में वितरित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि 22 जनवरी सनातन एवं हिंदू धर्म के लिए महान पर्व है। इसलिए मांस और मदिरा की सारी दुकानें उस दिन बन्द रहे। व्यसन करने वाले व्यसन न करने का संकल्प ले और इस पवित्र और ऐतिहासिक पर्व के सहभागी बनें। आने वाले दिनों में भगवा सेना भारत और गरवी गुजरात संत सेवा समागम समिति द्वारा संत सेवा भवन का निर्माण किया जाएगा, जिसमें साधु- संतों, श्रद्धालु, भक्तगणों को रहने खाने-पीने की व्यवस्था की जायेगी। गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान से जो अयोध्या आ गया है। उसे रहने एवं खाने-पीने की व्यवस्था न हो। तो वह हमसे सम्पर्क कर सकते हैं। उसकी सेवा में सदैव तत्पर रहेंगे और आवास, भोजन की व्यवस्था उपलब्ध करायेंगे। 15 सौ संतों के विश्राम व भोजन की व्यवस्था हमारे तरफ से की गई। लंगर 14 जनवरी से चल रहा है। जो 23 जनवरी तक चलेगा। आमंत्रित संतों के लिए तकिया, कंबल, चद्दर की चार हजार किट राम जन्मभूमि ट्रस्ट को सौंप चुके हैं। उदासीन आश्रम प्रेसवार्ता में उदासीन आश्रम महंत डॉ. स्वामी भरत दास, उदासीन पंचायती बड़ा अखाड़ा महंत महेश्वर दास, अखाड़ा परिषद अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्र पुरी, जूना अखाड़ा हरिद्वार के महामंडलेश्वर स्वामी यतींद्रानंद गिरी, श्रीमहंत पुष्करानंद मध्य प्रदेश, सुतीक्ष्ण मुनि, स्वामी माधवानंद, धर्मदास मौजूद रहे।