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: हनुमान बाग में बह रही राम राज्याभिषेक कथा की रसधार

बमबम यादव

Fri, Nov 10, 2023

रामनगरी में महालक्ष्मी की कुमकुम पूजा की चर्चा चहुंओर, दक्षिण परम्परा के पूजा पद्धति से हो रहा अनुष्ठान

संकट मोचन सेना अध्यक्ष महंत संजय दास के नेतृत्व में हनुमानगढ़ी के संतो का हुआ अभिनन्दन

हनुमान बाग पीठाधीश्वर महंत जगदीश दास महाराज के साथ हनुमानगढ़ी के संत

अयोध्या। रामनगरी अयोध्या के प्रतिष्ठित पीठ हनुमान बाग में दीपावली के पावन अवसर पर श्रीराम राज्याभिषेक महाकथा के चतुर्थ दिवस पर प्रातःकाल देवी पद्मावती की कुमकुम अर्चना महालक्ष्मी मंत्र से हुआ। जिसमें 10 वैदिक आचार्य अनवरत मंत्र जाप कर रहें। कर्नाटक के कृष्णा गिरि स्थित श्री पार्श्व पद्मावती शक्ति पीठ तीर्थ धाम के पीठाधीश्वर स्वामी वसंत विजय महाराज के श्रीमुख से श्रीराम राज्याभिषेक महाकथा में संत साधक गोता लगा रहें। कथा के चतुर्थ दिवस स्वामी बसंत विजय जी महाराज ने अहिल्या उद्धार जनकपुर दर्शन, धनुष भंग, और सीता राम विवाह का वर्णन किया। सीता राम विवाह को लेकर पूरे पंडाल को रंग-बिरंगे गुब्बारों और फूलों से सजाया गया था। उन्होंने कहा कि संत-महात्माओं का आगमन सदैव मंगलकारी होता है, संतों से कभी कार्य की हानि नहीं होती, अपितु उनसे कार्य की सिद्धि होती है। उन्होंने कहा कि संतों के चरणों में समस्त तीर्थों का निवास होता है, क्योंकि संत के चरण तीर्थों में घूमते-रहते हैं, वो सभी जगह जाते हैं, इसलिए जब कभी भी संत आएं तो उनके चरणों को धो लेना चाहिए, क्योंकि उनके चरणों में सारे तीर्थों का स्पर्श पहले से ही विद्यमान रहता है। इसीलिए संतों को तीर्थंकर कहा जाता है। स्वामी वसंत विजय जी ने कहा कि तीर्थ तभी तीर्थ बनता है जब वहां संतों के चरण पड़ जाते हैं, अगर तीर्थों में संत ना जाएं, केवल सामान्य लोग ही जाएं तो वो तीर्थ, तीर्थ नहीं होता। भागवत में गंगाजी की महिमा का वर्णन है, जिसमें गंगाजी कहती हैं मेरे अंदर बडे़-बड़े संत महात्माओं के डुबकी लगाने से लाखों लोगों को पवित्र करने का सामर्थ्य पैदा हो जाता है। इसीलिए आज भी कुंभ में संत-महात्माओं पहले शाही स्नान इसलिए करते हैं, ताकि संतो के नहाने से उस गंगा में लाखों लोगों को पवित्र करने का सामर्थ्य पैदा हो जाए। ये भागवत शास्त्र में लिखा प्रमाण है। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में वर्णित है कि जिसके घर के दरवाजे पर संतों के चरण नहीं धोये जाते हों और संतों के चरण के धोने से वहां की जमीन ना भीगती हो, द्वार पर संतों का चरण प्रक्षालन नहीं होता है वो घर शमशान के समान है। संत महात्मा और विद्वान पुरूषों का सबसे बड़ा सम्मान विनम्रतापूर्वक उनको प्रमाण करना ही उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान है। प्रमाण से बड़ा कोई सम्मान नहीं होता। लेकिन वो प्रणाम बनावटी नहीं यथार्थ हो। नमस्कार पद की न्याय शास्त्र में व्याख्या है कि जिसको हम प्रणाम कर रहे हैं उसके सामने मेरा अपकर्ष और जिसको प्रणाम कर रहे हैं उसका उत्कर्ष। हमारी गतिविधि, क्रिया के द्वारा परिलक्षित हो। उसका नाम नमस्कार है। ये नमस्कार प्रणाम ये अंजली मुद्रा इतनी अद्भुत मुद्रा है, जिसके लिए शास्त्रो में कहा गया है कि ये मुद्रा ऐसी विलक्षण मुद्रा है कि एक क्षण में देवता को प्रसन्न कर देती है, लेकिन वो सच्चे मन से हो।
आज की कथा में हनुमानगढ़ी के संत महंत शामिल हुए। कथा में अपने विचार रखते हुए संकट मोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजय दास ने कहा कि वास्तविक स्वरूप को लोग समझें, वैदिक विद्वान जब बैठकर वेदध्वनि व पुराण का पारायण करते हैं, भगवान का मंत्रों द्वारा हवन होता है, एक दिव्य संदेश पूरी दुनिया को सनातन का संदेश जाता है। पूरे विश्व में सनातन धर्म एक धर्म ऐसा है जो अपने लिए नहीं जीता, बल्कि सारे विश्व के प्राणी मात्र की कल्याण की कामना करता है। ऐसा विस्तृत व व्यापक धर्म दुनिया में कहीं नहीं है। हम जितनी भी क्रिया करते हैं वा जग के कल्याण के लिए करते हैं।
इस मौके पर हनुमान बाग पीठाधीश्वर महंत जगदीश दास, निर्वाणी अनि अखाड़ा के महंत मुरली दास, प्राचार्य डा महेश दास, महंत सत्यदेव दास, महंत बलराम दास, राजेश पहलवान, वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास ने अपने विचार रखें। इस महाउत्सव को हनुमान बाग के महंत जगदीश दास महाराज का सानिध्य प्राप्त हो रहा है। इस मौके पर मंदिर के व्यवस्थापक सुनील दास, रोहित शास्त्री, नितेश शास्त्री सहित दक्षिण व देश के अन्य प्रदेशों से सौकड़ों भक्त इस महाउत्सव में शामिल हुए।

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