Wednesday 6th of May 2026

ब्रेकिंग

हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर भक्तों की सेवा में जुटे महंत संजय दास ने ORS व जूस का वितरण; श्रद्धा और भक्ति से सराबोर दिखी

बंगाल ने पहली बार खुलकर ली सांस, श्रेय अमित शाह को: बृजभूषण शरण सिंह

पीएम मोदी-गृहमंत्री अमित शाह की रणनीति व सुनील बंसल के क्रियान्वयन से हुई बंगाल विजय: ऋषिकेश 

श्रद्धालुओं के साथ हर किसी आमजन को हनुमानजी महाराज का दिव्य प्रसाद भोजन के रुप मे उपलब्ध करा रहें महंत बलराम दास

संतों के सानिध्य में 6 दिवसीय आयोजन सम्पन्न, कथा व रासलीला ने भक्तों को किया भावविभोर

सुचना

Welcome to the DNA Live, for Advertisement call +91-9838302000

: भगवान श्रीराम से स्वार्थ और परमार्थ दोनो की प्राप्ति होती है: राधेश्याम

बमबम यादव

Wed, Apr 17, 2024

मणि रामदास जी की छावनी में व्यासपीठ से रामकथा की मीमांसा कर रहें प्रख्यात कथावाचक आचार्य राधेश्याम शास्त्री

अयाेध्या। रामजन्म महाेत्सव के पावन अवसर पर मणिराम दास छावनी फूलों से सजी है। मंदिर में 51 वैदिक आचार्य नवाह परायण पाठ कर रहे है। मंदिर में व्यासपीठ से कथा की अमृत वर्षा प्रख्यात कथावाचक आचार्य राधेश्याम शास्त्री जी कर रहें है।आचार्य राधेश्याम शास्त्री ने कहा कि श्रीराम के गुणों के द्वारा जगत का मंगल होता है। संसार में किसी धनाढ्य ब्यक्ति से सांसारिक स्वार्थ की,तथा किसी बीतराग संत से परमार्थ की प्राप्ति हो सकती है,किन्तु एक भगवान राम के गुण ही ऐसे हैं,जिन से स्वार्थ और परमार्थ दोनो की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि गोस्वामी जी के 12 ग्रंथों में  रामचरित मानस और विनय पत्रिका इन दो ग्रंथो को सर्वोपरि कहा जाता है।इन दोनों में  सबसे बड़ा अन्तर यह है कि रामायण में भगवान के गुणों की प्रधानता है। विनय पत्रिका में गोस्वामीजी ने अपने दोषों का वर्णन किया है। किसी ने तुलसीदास से पूछा कि दोषों की माला ही रह गयी है,प्रभु को पहनाने के लिए?उन्होंने जबाब दिया कि,इस संदर्भ में आप भरतजी का वाक्य याद कर लीजिये,जो वे रामजी से कहते हैं “कृपा भलाई रावरी नाथ कीन्ह भल मोर।दूषन भे भूषन सरिस। यानी,महाराज अगर हम अपने गुणों को धारण करें तो वे गुण भी दूषण बन जाते हैं, और आप अगर हमारे दोषों को स्वीकार कर लें, तो आपके पास पहुँच कर ए दूषण भी भूषण हो जाते हैं।व्यासपीठ से कथा की मीमांसा करते हुए शास्त्री जी ने कहा कि भरत और सुग्रीव किस दृष्टि में एक समान हैं? यह भगवान की कौन सी दृष्टि है?यह आश्चर्य जनक है।  तुलसीदास जी चतुर थे,तुरन्त भगवान से बोले महाराज जब आपको खरे और खोटे की परख ही नहीं है,तो मेरी समझ में आ गया कि तुलसीदास जैसा खोटा सिक्का भी यहीं चल सकता है। शास्त्री जी ने कहा कि भगवान ने प्रश्न किया ,क्या तुम यह खोटेपन का ब्यापार बढ़ाना चाहते हो?गोस्वामी जी ने कहा,प्रभु मुझे आपके सुग्रीव के संबंध में ब्यक्त किये गये बिचार से विश्वास हो गया कि अगर छोटे सिक्के का ब्यापार करना हो तो उसे संसार में करने के स्थान पर आपके पास ही करना श्रेयस्कर होगा।क्योंकि संसार के लोग उसे बाजार में इधर उधर चलाते रहेंगे।

Tags :

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें