: एमएलसी चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल, पुलिस पर प्रधानों को उठाने का आरोप
Fri, Apr 8, 2022
एमएलसी चुनाव को प्रभावित करने के लिए भाजपा सरकारी मशीनरी का पूरा इस्तेमाल कर रही: आनंद सेन
अयोध्या। फैजाबाद-अंबेडकरनगर एमएलसी चुनाव में निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस पर शनिवार को मतदान से पहले जिले के दो ब्लाकों के प्रधानों को उठाने का गंभीर आरोप लगा है। हालांकि इस मामले में पुलिस की ओर से कोई जवाब नहीं आया है।
पूर्व मंत्री आनंदसेन यादव ने शुक्रवार को आरोप लगाया है कि एमएलसी चुनाव को प्रभावित करने के लिए भाजपा सरकारी मशीनरी का पूरा इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया है कि रूदौली ब्लाक के प्रधान संघ अध्यक्ष गनौली प्रधान बलभद्र और मवई ब्लाक के अइथर प्रधान बबलू यादव को इलाकाई पुलिस अकारण उठा ले गई है। पूर्व विधायक ने कहा कि दोनों प्रधानों के परिवारों ने उन्हें इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया लेकिन कोई सकारात्मक कार्रवाई सामने नहीं आई है। पूर्व विधायक ने कहा कि यह दो प्रधान तो उदाहरण मात्र हैं, जिले भर में सपा समर्थित मतदाताओं को डराने धमकाने का दौर चल रहा है। श्री सेन ने कहा कि एमएलसी चुनाव में पराजय के भय से भाजपा सरकार खुलकर सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग कर रही है। जिसके चलते मतदान की निष्पक्षता पर प्रश्न खड़ा हो गया है। उन्होंने कहा एमएलसी चुनाव में सपा प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित है और इसी खौफ से फैजाबाद अम्बेडकरनगर दोनों जिलों में सपा समर्थित मतदाताओं का उत्पीड़न किया जा रहा है।
: जीवन के उत्थान हेतु जरूरी है विचारों का शुद्ध होना: हरिओम तिवारी
Thu, Apr 7, 2022
श्री जानकी महल ट्रस्ट में राघवचरणानुरागी हरिओम तिवारी के श्रीमुख से बह रही श्रीराम कथा की रसधार,राम नाम की रसधार पर झूम उठे भक्तगण
अयोध्या। तीर्थ नगरी अयोध्या के जानकी महल स्थित चल रही पंच दिवसीय कथा में आये हुये श्रद्धालु राम-नाम की महिमा सुनकर बरबस ही झूम उठे। कथा व्यास जिले के प्रसिद्ध समाजसेवी हरिओम तिवारी ने कहा कि, यदि हम अपने जीवन में हर प्रकार से उत्थान चाहते हैं। तो उसके लिये सबसे ज्यादा जरूरी है हमारे विचारों का शुद्ध होना। उन्होंने ने कहा कि हमारा मन, नश्वर शरीर का घर होता है, औऱ ये बात किसी से भी छुपी नहीं है कि जहाँ शुद्धता होती हैं वहाँ देवताओं का स्वयं निवास होता है। तथा हर वो स्थान पवित्र होता है जहाँ राम-नाम का गुणगान होता है। उनके अनुसार जिस प्रकार भौतिक शरीर को स्वस्थ रखने के लिये अच्छे खान- पान की जरूरत होती है, ठीक उसी प्रकार आत्मा को शुद्ध रखने के लिये जरूरी होता है, अच्छे लोगों का सानिध्य प्राप्त करना, जिससे स्वतः ही हमारे अंदर लोगों के कल्याण हेतु अच्छे भाव उत्पन्न हो सकें। समाजसेवी ने लोगों से सनातन धर्म का ज्यादा से ज्यादा प्रचार व प्रसार करने की अपील की।
इस अवसर पर शिवओम तिवारी, संदीप तिवारी,प्रदीप दुबे, प्रदीप पाण्डेय, नरेश पोतदार, आदित्य सुल्तानिया, सहित सैकङो भक्तगण उपस्थित रहे
: जिसका धैर्य और संतोष खो जाता है, वह लुट जाता है: इन्द्रदेवजी सरस्वती
Thu, Apr 7, 2022
क्रांतिकारी युगप्रवर्तक यज्ञपीठाधीश्वर विद्यावाचस्पति ने कहा, मनुष्य का कल्याण कलेक्टर या प्रधानमंत्री बनने से नहीं होगा, मनुष्य का कल्याण तब होगा जब वह शिष्य बन जाएगा
रामकथा में उमड़ा भक्तों का भारी हुजूम
श्रीमहंत धर्म दास का अभिनन्दन करते स्वामीजी
अयोध्या। गौ सेवार्थ श्री राम कथा एवं पारायण के अवसर पर आज क्रांतिकारी युगप्रवर्तक यज्ञपीठाधीश्वर विद्यावाचस्पति संत इन्द्रदेवजी सरस्वती जी महाराज के मुखारविंद से सरयू रूपी श्री राम कथा की रसधारा प्रवाह का षष्ठम दिवस था। आज की कथा में निर्वाणी अखाड़ा के श्रीमहंत धर्मदास महाराज पहुंचे। इन्द्रदेवजी सरस्वती जी ने अयोध्या में विराजमान सभी तीर्थों को नमन करते हुए आज की कथा का प्रारंभ किया। साथ ही कथा के यजमान परिवार बड़गुजर का भी धन्यवाद किया।
आपको विदित हो कि कनक महल में 6 अप्रैल को आयोजित विगत सन्त महासम्मेलन में 50 की संख्या में महंत और अनेकों संतों का परम मंगल आगमन हुआ था।आज की कथा में सन्त इन्द्रदेवजी सरस्वती जी महाराज ने बताया कि 80% जनता तुलसीदास जी की रामायण सुनते हैं। सन्तों के दर्शन करने, राम जी के चरणों का ध्यान करने से जटिल कलंक भी मिट जाता है जिसका धैर्य और संतोष खो जाता है, वह लुट जाता है।
महाराज जी ने कहा कि उन्हें 600-700 वर्षों पूर्व के अनुभव हैं।आगे पूज्य चरण बताते हैं कि जिसने पिछले जन्म में दान-पुण्य न किया कभी उसे इस जन्म में भी कोई मिलेगा। जो बच्चा बाल्यकाल में 5 वर्ष से 25 वर्ष के बीच ब्राह्मण वर्ण अर्थात गुरुकुल में जीवन व्यतीत कर लेता है, उसे आगे जाकर अपने वर्ण के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ता। बड़े कठिन वचनों में कहना पड़ता है कि विद्वान भी आपस में एक दूसरे को पीठ-पीछे अपशब्द कहते हैं। किसी भी यज्ञ में ब्रह्मा और अध्वर्यु अर्थात नाई/शूद्र बराबरी से उपस्थित होता है, तो दोनों में अंतर क्यों है, ऐसा श्री संत जी ने प्रश्न किया।कोई शिष्य बिना सन्ध्या के, बिना यज्ञ किये जो जल भी नहीं पीता, वह समस्त धातुओं का स्वामी बन जाता है। ब्राह्मणों के समस्त सिद्धांतों के उचित पालन का सदा आदेश करनेवाले एवं समाज को भारतीय संस्कृति की अलख जगाने वाले संत इन्द्रदेवजी सरस्वती जी ने कहा कि रामायण इस बात का प्रमाण है कि प्रभु श्री राम त्रिकाल सन्ध्या करते थे। राम जी जब अयोध्या में भगवान बनकर लौटे हैं अपने गुरु आश्रम से, तब दीपक लगाए गए थे। भिक्षाटन करने से बच्चे की इच्छा मर जाती है, तभी वे विद्यार्थी बन पाते हैं। जिसे सुख की भूख हो उसे विद्या नहीं आती। भाग्यशाली होते हैं वो विद्यार्थी जिनकी विदाई गुरु आश्रम से होती है।उन्होंने कहा कि मनुष्य का कल्याण कलेक्टर या प्रधानमंत्री बनने से नहीं होगा, मनुष्य का कल्याण तब होगा जब वह शिष्य बन जाएगा। जब वह गुरु आज्ञा में चलता है।जो खोटा सिक्का गुरु के यहां नहीं चल सकता, वह कहीं और नहीं चल सकता। एक केवल यज्ञ का भी नियम पकड़ लो तो आपका तेज, ओज आदि सब प्राप्त हो जाता है। माता-पिता और गुरु चेतन देवता हैं।आपके द्वारा थाली में भोग लगाना आधा-अधूरा भोग है, यज्ञ में आहुति डालकर असल भोग लगाना चाहिए, क्योंकि "अग्नि देवानां मुखं"।
स्वामीजी ने कहा कि विवाह में साधुओं का पधारना बहुत आवश्यक है, चाहे कुछ लोग कम हो जाएं। आयुध का प्रयोग करने से पहले, भगवान का ध्यान कर लेना चाहिए। आज की कथा में जानकी मैया का स्वयंवर हुआ।
बताते चलें कि कथा तो सब जगह होती है और कथावाचक भी सभी होते हैं, परन्तु यह अद्भुत दरबार है। यहाँ कथा से पूर्व प्रातःकालीन सभा तथा कथा के पश्चात संध्या बेला में संत इन्द्रदेवजी सरस्वती जी महाराज जी के श्रीचरणों में बैठकर समस्त भक्तवृंद दर्शन ले रहे हैं, गुरु-दीक्षा प्राप्त कर रहे हैं एवं जो जीवन से त्रस्त और परेशान हैं, वे अपने जीवन में आनेवाली समस्त भौतिक, आध्यात्मिक, मानसिक समस्याओं का समाधान पा रहे हैं। उक्त कथा का प्रतिदिन दोपहर में 1 से 4 बजे तक संस्कार चैनल पर लाइव प्रसारण हो रहा है। साथ ही यह सूचना भी जारी की गई कि 10 अप्रैल को आयोजित श्री राम कृपा महायज्ञ में सभी अपनी निश्चित दक्षिणा प्रदान कर सम्मिलित हो सकते हैं ।