: नाका हनुमानगढ़ी में रघुपति लड्डू प्रसादम् काउन्टर खुला
Thu, Sep 1, 2022
पौराणिक पीठ हनुमानगढ़ी नाका में शुद्ध गाय घी का चढेगा प्रसाद
अयोध्या। गणेश चतुर्थी की पावन बेला में बुद्धवार की रात्रि में अयोध्या के प्रसिद्ध सिद्ध पौराणिक पीठ हनुमानगढ़ी नाका मंदिर में अयोध्या प्रमण्डल के आयुक्त नवदीप रिनवा ने रघुपति लड्डू का श्रीगणेश किया। रघुपति लड्डू तिरूपति के कुशल कारीगरों द्वारा अयोध्या के अमावा राम मंदिर में
बनाया जाता है। अपनी पूर्ण शुद्धता एवं बेजोड़ स्वाद के कारण यह पिछले एक साल में भक्तों के बीच काफी लोकप्रिय हो गया है।किन्तु श्रीरामजन्मभूमि के पास अमावा राम मंदिर के होने कारण वहां तक लोगो का पहुँच पाना मुश्किल होता था। अतः अयोध्या के बाहर रघुपति लड्डू प्रसाद के सुलभ होने की जरूरत महसूस की जा रही थी।
सिद्ध पौराणिक पीठ हनुमानगढ़ी नाका के महंत श्री रामदास महाराज जो हर चीज में शुद्धता एवं सात्विकता
के समर्थक है। अतः वे इसके लिए आगे आए और उन्होनें अपने मंदिर में शुद्ध गाय घी का प्रसाद चढे, इस भावना से प्रेरित होकर अमावा मंदिर ट्रस्ट निखिल भारतीय तीर्थ विकास समिति को रघुपति लड्डू प्रसादम् का काउन्टर खोलने का स्थान दिया और आयुक्त नवदीप रिनवा ने इसका उद्घाटन किया। अपने स्वागत भाषण में महंत रामदास महाराज ने किशोर कुणाल और उनके द्वारा संचालित पटना के मंदिरों एवं अस्पतालों की भूरि भूरि प्रशंसा की तथा यह कहा की उनके मंदिर में शुद्ध गाय घी का बना रघुपति प्रसाद चढेगा। आयुक्त नवदीप रिनवा ने बताया कि हाल ही में रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के स्थायी ट्रस्टी के परासरन के साथ अमावा मंदिर गए थे और वहां उन्होने देखा कि राम रसोई में बहुत सारे लोग भोजन कर रहे थे। अमावा मंदिर ट्रस्ट के सचिव किशोर कुणाल ने बताया कि अमावा मंदिर ट्रस्ट के संस्थापक सदस्यों में के. परासरन तथा रामायण सीरियल के निर्माता निर्देशक स्व रामानन्दसागर तथा सुप्रीम कोर्ट के अवकाश प्राप्त न्यायधीश के वेंकटस्वामी थे। उन्होनें यह भी बताया कि रघुपति लड्डू की यात्रा कैसे पटना पहुँची और वहां से अयोध्या में आगमन हुआ। पटना हनुमान मंदिर में महीने में औसतन सवा लाख किलो लड्डू बिकता है और उसकी बचत से अयोध्या में राम रसोई चलती है, जिसमें औसतन प्रतिदिन ढाई हजार व्यक्ति निःशुल्क भोजन करते है। श्री रामवल्लभाकुंज के अधिकारी राजकुमार दास ने भी अमावा मंदिर के सत्कार्यो एवं रघुपति लड्डू की प्रशंसा की। मंच का संचालन अमावा मंदिर के ट्रस्टी धनुष वीर सिंह ने किया। धन्यवाद ज्ञापन अतुल सिंह ने किया। इस अवसर पर बहुत वरिष्ठ प्रशासनिक एवं पुलिस पदाधिकारी तथा शहर के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
: सनातन सभ्यता और प्रकृति की आध्यात्मिकता को समर्पित हनुमान बाग
Thu, Sep 1, 2022
हनुमान बाग मंदिर गौसेवा, भजनानंदी सन्तसेवा, ब्राह्मण सेवा एवं आश्रम संचालन सम्पूर्ण विश्व में सनातन ध्वजा को लहरा रहा
महान्त जगदीशदास महाराज इस परम्परा में एक अद्भुत प्रतिभा के परिचायक सिद्ध हुए
अयोध्या। हनुमान बाग रामनगरी के प्रतिष्ठित मंदिरों में शुमार है। वर्तमान परम्परावाहक म. श्रीजगदीशदासजी महाराज उक्त विरासत को समेटे हुए गौसेवा, भजनानंदी सन्तसेवा, ब्राह्मण सेवा एवं आश्रम संचालन से सम्पूर्ण विश्व में सनातन ध्वजा लहरा रहे हैं। भजनानन्दी सन्तो में महान्त श्री जयरामदासजी महाराज भगवान श्रीरामनाम का स्मरण करते हुए श्रीहनुमत् आराधना में अपने जीवन को समर्पित करते हुए महान्त श्रीरामगोपालदास जी महाराज को उत्तराधिकारी बनाते हुए इस साधना परम्परा को आगे बढ़ाया। ईश्वरीय शक्ति ही इनकी परमनिधि एवं श्रीराम एवं श्रीहनुमान का भजन ही इनकी आराधना एवं रामनाम परमनिधि को संजोते हुए समाज के हित के लिए बिखेरते रहे। भजनानन्दी सन्त श्री महान्त श्रीरामगोपालदास जी महाराज के परमकृपापात्र महान्त जगदीशदासजी महाराज इस परम्परा में एक अद्भुत प्रतिभा के परिचायक सिद्ध हुए। कहा जाता है कि प्रतिभा किसी का मोहताज नहीं होता सुगन्ध बिखरने वाला पुष्प सहज ही सनातन सभ्यता और प्रकृति की आध्यात्मिकता को स्वयंमेव समर्पित हो जाता है। परमार्थ परायण जीवन के निमित्त महाराज श्री ने भव्य कथामण्डप पूजागृह आवास गौशाला का निर्माण श्रीहनुमानबाग सेवा संस्थान के तत्त्वावधान में कराया। श्रीमहाराज जी के विनम्र स्वभाव एवं लोक कल्याणभद्र भावना को दृष्टिगत रखते हुए भारत ही नहीं वरन् विदेशों के हनुमत भक्त भी महाराज श्री के अनुयायी बनकर दरिद्रनारायण और अयोध्याधाम की सेवा करने लगे। महाराज श्री ने अयोध्या में संस्कृत के पठन-पाठन की महती आवश्यकता समझकर भोजन प्रसाद सहित छात्रावास एवं शिक्षण संस्थान का निर्माण कराया। जहाँ सैकड़ों संस्कृतनिष्ठ वेदपाठी अध्ययन कर सनातन समाज की सेवा में समर्पित होंगे ऐसा विश्वास है। अभ्यागत भक्तों में जरूरतमन्दों के लिए महाराज ने आधुनिक आवास का निर्माण कराया गया है। जिसमें भोजन प्रसाद स्नान ध्यान के दिव्य प्रबन्ध हैं।सेवा साधना उच्चस्तरीय मानव कल्याण प्रद भावना ही महाराज जी का संकल्प है।
बिप्र धेनु सुर संत हित लीन्ह मनुज अवतार।
निज इच्छा निर्मित तनु माया गुन गो पार। की भावना से ओतप्रोत अष्टयाम सेवा निरंतर हनुमान बाग में हो रही है। यहां भक्तों, संतो विद्यार्थियों सभी के लिए अलग-अलग भोजन हुआ रहने की व्यवस्था है। श्रीमहंत जगदीश दास महाराज सभी संतों की दंडवत प्रणाम करते हुए कहते है सभी महापुरुषों की कृपा बनी रहें। महाराज जी के अनुसार दूसरे को सुखी बनाये रखने में ही अपना सुख है। साहस एवं सकल्प के बल पर महाराज श्रीनिरन्तर आध्यात्मिक अवदान प्राप्त कर श्रेष्ठता की सूची में सन्तश्रेष्ठ के रूप में सुविख्यात हैं। मुख्य परम्पराओं में कार्तिक चतुर्दशी को मनाया जाता है। जिसमें हनुमानजन्म महोत्सव श्रीअन्नकूट महोत्सव श्रीराम विवाह महोत्सव एवं पूर्वाचार्यों से सम्बन्धित भण्डारा आदि है। प्रतिदिन हजारो अभ्यागतों को भोजनप्रसाद से सेवा कर पुण्य लाभ किया जाता है। श्रीहनुमानजी श्रीराम श्री शिव परिवार के लिए वस्त्र आदि आते हैं। मन्दिर के दिव्य प्रतिमा की विशेषता यह है कि मात्र दर्शन से ही सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। मन को बहुत शान्ति प्राप्त होती है। मंदिर के व्यवस्था देखरेख में पुजारी योगेश दास, सुनील दास, रोहित शास्त्री सहित पूरा हनुमान बाग लगा रहता है।
: महंत जयराम दास महाराज को संतों ने किया नमन
Sun, Aug 28, 2022
लवकुश मंदिर के पूर्वाचार्य की 20 वीं पर संत धर्माचार्यों ने कृतित्व-व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला
अयाेध्या। श्रीरामजन्मभूमि दर्शन मार्ग पर स्थित प्रसिद्ध लवकुश मंदिर के पूर्वाचार्य महंत जयराम दास महाराज के 20 वीं पुण्यतिथि के अवसर पर श्रद्धांजलि अर्पित की। शनिवार को लव-कुश मंदिर के वर्तमान महंत रामकेवल दास के संयोजन में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। जिसमें अयाेध्यानगरी के संत-महंताें ने उनकी प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। साथ ही उनके कृतित्व-व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। महंत रामकेवल दास महाराज ने कहा कि उनके गुरूदेव भजनानंदी संत थे और उनका व्यक्तित्व बहुत सरल था। यही कारण था कि रामनगरी के संत-महंत उनका आदरपूर्वक सम्मान करते थे। उन्हाेंने आश्रम का सर्वांगीण विकास किया। मैं भी गुरूदेव के बतलाए हुए मार्ग पर चलकर मंदिर के उत्तराेत्तर विकास में कृत-संकल्पित हूं।
रामकेवल दास ने बताया कि पुण्यतिथि कार्यक्रम के क्रम में सर्वप्रथम प्रात:काल साकेतवासी महंत की प्रतिमा पर पंचामृत से अभिषेक हुआ। तत्पश्चात नवीन वस्त्र धारण कराकर आरती-पूजन किया गया। उसके बाद संत-महंत और भक्तगणाें ने प्रसाद ग्रहण किया। पुण्यतिथि महोत्सव में हनुमानगढ़ी के सिर्फ श्री महंत ज्ञान दास जी महाराज के उत्तराधिकारी संकट मोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजय दास के नेतृत्व में मनाया गया। भगवान की पूजन अर्चन राम केवल दास के शिष्य संत रामदास ने किया।अंत में वर्तमान महंत ने आए हुए संताें एवं अतिथियाें का स्वागत-सत्कार किया। पुण्यतिथि के अवसर पर जगतगुरू स्वामी रामानन्दाचार्य रामदिनेशाचार्य, हनुमानगढ़ी के शीर्ष श्रीमहंत ज्ञानदास महाराज के उत्तराधिकारी संकट मोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजय दास, हनुमानगढ़ी के वरिष्ठ पुजारी हेमंत दास ,कनक महल महंत सीताराम दास महात्यागी, महंत नंदराम दास, महंत अजीत दास, रामकचेहरी महंत शशिकांत दास, पत्थर मंदिर महंत मनीष दास, महंत माधवदास रामायणी, डॉ. महेश दास, महंत रामकुमार दास, प्रेममूर्ति कृष्णकांत दास, कृष्णकुमार जयपुरिया खलीलाबाद, महंत शिवराम दास, नागा रामलखन दास, पार्षद पुजारी रमेश दास, ओम दास, संतदास आदि उपस्थित रहे।