: राजू दास मानसिक दिवालियापन के शिकार है: मिथलेश यादव
Thu, Aug 24, 2023
सरदार पटेल नगर वार्ड के सपा पार्षद प्रतिनिधि मिथलेश यादव सोनू ने कहा, राजू दास अपने हद में रहें
प्रशासन समाजवादियों के धैर्य की परीक्षा न ले, अमर्यादित बयान पर कार्रवाई करें
अयोध्या। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव पर हनुमानगढ़ी के संत राजू दास द्वारा दी गई अमर्यादित टिप्पणी पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है समाजवादी पार्टी के युवा नेता सरदार पटेल नगर वार्ड के पार्षद प्रतिनिधि मिथिलेश यादव उर्फ सोनू ने प्रेस से मुखातिब होते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पर जो भी टिप्पणी राजू दास ने किया है वह क्षमा योग्य नहीं है शासन प्रशासन को समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं द्वारा दिए गए ज्ञापन पर संज्ञान लेते हुए तत्काल कार्रवाई करना चाहिए अगर ऐसा नहीं हुआ तो युवाओं के नेता अखिलेश यादव के लिए युवा समाज आंदोलित होगा और तब शासन प्रशासन को यह बात समझ में आएगी की सपा के मुखिया पर अमर्यादित टिप्पणी करने वाले पर कार्रवाई न करने का अंजाम क्या होता है।
मिथलेश यादव सोनू ने कहा कि राजू दास मानसिक दिवालियापन का परिचायक है। राजनीतिक लाभ के लिए ऐसी बयानबाजी शोभा नहीं देती है। उन्होंने कहा कि समाजवादियों के लिए अखिलेश यादव उनके आइकन हैं हम सभी युवा यह कतई नहीं बर्दाश्त करेंगे की एक पढ़े लिखे शिक्षित और प्रदेश को विकास की रेलगाड़ी पर दौड़ने वाले अखिलेश यादव पर कोई भी व्यक्ति ऐसी टिप्पणी करें जो क्षमा योग्य न हो। उन्होंने कहा प्रशासन समाजवादियों के धैर्य की परीक्षा ले रहा जो बयान के 48 घंटे बीत जाने के बाद कार्रवाई नहीं कर रहा है ऐसे में हम समाजवादी लोग शांत होकर के यह देख रहे हैं कि प्रशासन क्या करता है अगर आने वाले समय में कुछ नहीं हुआ तो हम लोग अपना विरोध दर्ज कराएंगे और अपने नेता के खिलाफ एक भी शब्द अपशब्द बर्दाश्त नहीं करेंगे।
: रामनगरी में झूलनोत्सव का उल्लास चरम पर
Thu, Aug 24, 2023
मंदिर में झूलन परम्परा सैंकड़ाे वर्षाें से चली आ रही,जिसे पूर्वचार्य गुरुजनों के आशीर्वाद से आगे बढ़ाया जा रहा: महंत श्रीघर दास
अयोध्या में सावन झूला मेले की धूम, भक्तों का उमड़ा सैलाब
अयोध्या। रामनगरी अयोध्या में प्रसिद्ध सावन झूला मेले का उल्लास अब अपने चरम पर पहुंच गया है। सावन झूला मेला श्रद्धालुओं से गुलजार है। मेले के अंतिम पर्व पूर्णिमा स्नान के करीब आने के साथ ही मठ-मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ है। मठ-मंदिरों में देर रात तक चलने वाले धार्मिक व सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आकर्षण श्रद्धालुओं के सिर चढ़कर बोलने लगा है।मुख्य पर्व के नजदीक आने के साथ ही रामनगरी में जबर्दस्त उल्लास छाया है। मंदिरों में गूंज रही झूले में आज सज धजकर युगल सरकार बैठे हैं। कजरी की पंक्तियां भक्तों को बरबस अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। धर्मनगरी में शाम होते ही मंदिरों में तबले की थाप व हारमोनियम की धुनाें के बीच आयोजित कार्यक्रम श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। रसिक उपासना के मुख्य पर्व झूलनोत्सव पर मठ-मंदिरों में भगवान को हृदयरूपी पालने में बैठाकर संत-धर्माचार्य व श्रद्धालु झूला झुला रहे हैं।
रामनगरी के रामघाट स्थित श्यामा सदन मंदिर में झूलन महाेत्सव की धूम है। जहां मंदिर के पीठाधीश्वर महंत बालयोगी श्रीघर दास महाराज के संयाेजन में उत्सव मनाया जा रहा है। नगरी के नामचीन कलाकार द्वारा पद का गायन किया जा रहा है।गावे रस भरी तान गावे रस भरी तान प्यारे प्यारी को झूलावै गावे रस भरी तान।।सियजू झूल रही बगिया मे दशरथ राज कुँवर के संग।दशरथ राज कुँवर के संग ये हा दशरथ राज कुँवर के संग। चलो देखि आई सिया रघुवीर झुलनवा झूल रहे।सावन के दिन में शौक से झूला झुलाये आदि झूलन के पद्य गाकर लाेगाें काे भावविभाेर कर रहे हैं। इस अवसर पर श्यामा सदन पीठाधीश्वर महंत बालयोगी श्रीघर दास महाराज ने बताया कि मंदिर में झूलन की परम्परा सैंकड़ाे वर्षाें से चली आ रही है। जिसे पूर्वचार्य गुरुजनों के आशीर्वाद से आगे बढ़ाया जा रहा है। श्रावण तृतीया से लेकर रक्षाबंधन तक यह महोत्सव अपने चरमाेत्कर्ष पर रहता है, जिसमें संत व भक्तगण आनंदित हाेकर गाेता लगाते हैं।इसके साथ जानकी महल,दशरथ महल बड़ास्थान, मणिरामदास जी की छावनी, कौशलेश सदन, श्रीरामबल्लभाकुंज, सियाराम किला झुनकी घाट, हर्षण कुंज, विअहुति भवन, जानकीघाट बड़ास्थान, लक्ष्मण किला, कनक भवन, हनुमत निवास, विश्वविराट विजय राघव मंदिर, कालेराम मंदिर, लवकुश मंदिर सहित अन्य मठ-मंदिरों में झूलनोत्सव की धूम है।
: राम और भरत के मधुर मिलन की कथा श्रवण कर संत साधक हुए भावविभोर
Thu, Aug 24, 2023
चंद्रयान तृतीय के सफल परीक्षण हेतु लक्ष्मी नारायण भगवान का विशेष पूजन यज्ञ का हुआ अनुष्ठान
अयोध्या। प्रसिद्ध श्री अशर्फी भवन के पीठाधीश्वर जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री श्री धराचार्य जी महाराज की प्रेरणा से चंद्रयान तृतीय के सफल परीक्षण के लिए अशर्फी भवन के आराध्य प्रभु श्री लक्ष्मी नारायण भगवान का विशेष पूजन यज्ञ का अनुष्ठान मंदिर प्रांगण में संपन्न हुआ। आज पूरे विश्व की निगाह इस अभियान की सफलता के लिए टिकी हुई हैं भगवान भूत भावन भोलेनाथ के शीश पर चंद्रमा शोभा को बढ़ाते हैं चंद्र देव मन के देवता हैं और हम सभी भारतवासी अपने मन को शांत करने लिए चंद्रमा की पूजा करते हैं। श्री वेंकटेश तिरुपति बालाजी दिव्य धाम ट्रस्ट अलवर के पूज्य महंत स्वामी सुदर्शनाचार्य जी महाराज की अध्यक्षता में हवन यज्ञ का अनुष्ठान श्री माधव वेद विद्यालय श्री अनादी संस्कृत उत्तर माध्यमिक विद्यालय के समस्त आचार्य एवं वेद पाठी ब्राह्मण बटुकों के द्वारा चंद्रयान के सफल परीक्षण की कामना की गई। श्री खंडेलवाल वैश्य निष्काम सेवा समिति के भक्तों ने भी पूजा अर्चन कर भारत के वैज्ञानिकों को शुभकामना दी एवं भगवान लक्ष्मी नारायण से चंद्रयान के सफल परीक्षण की प्रार्थना अर्जी लगाई। व्यास पीठ पर विराजमान स्वामी सुदर्शनाचार्य जी महाराज ने श्रीराम कथा का श्रवण कराते हुए कहां 100 करोड़ रामायण में भगवान श्री राम जी के जीवन चरित्र का वर्णन किया गया है मर्यादा पुरुषोत्तम राम के जीवन चरित्र को अपने जीवन में उतार लेने पर जन्म-जन्मांतर के पाप कर्म नष्ट हो जाते हैं। अनेकों जन्मों से भगवान के दर्शन हेतु तपस्या कर रहे ऋषि-मुनियों को प्रभु वन में दर्शन देते हैं भरत जी अयोध्यापुरी से अपनी सेना सहित बड़े भैया राम को मनाने वन में जाते हैं इधर प्रभु भरद्वाज आश्रम पर पर्ण कुटीर में निवास कर रहे हैं वन में कुतूहल को देखकर लक्ष्मण जी पेड़ पर चढ़कर देखते हैं और अयोध्या की ध्वज पताका वाला रथ आते देखकर अत्यधिक क्रोधित हो जाते हैं और भाई राम से कहते हैं प्रभु इस कुटिल भरत के वध करने में रंच मात्र भी संदेह नहीं करना चाहिए मां केकई ने तो 14 वर्ष का वनवास ही दिया किंतु यह भरत निश्चित ही हम लोगों का वध करने के लिए यहां आ रहा है। हे पूज्य भ्राता आप आज्ञा करें मैं लक्ष्मण आज इस दुष्ट भरत को समाप्त कर दूंगा लक्ष्मण जी के वचनों को सुनकर राम जी लक्ष्मण जी को धिक्कार ते हुए कहते हैं कि हे लक्ष्मण मेरे प्राणों से प्रिय भरत को अभी तुमने जाना नहीं है आने दो भाई भरत को मैं उसे समझा कर तुम्हें अयोध्या का राजा बनवा देता हूं और भरत को अपनी सेवा में यहां वन में रख लेता हूं यह सुनकर लक्ष्मण जी रुदन करने लगे और भरत जी जैसे ही प्रभु के समीप आए प्रभु के चरणों में साष्टांग प्रणिपात करते हुए रुदन करने लगे हे। भ्राता यदि मैं कुटिल भरत पैदा ना हुआ होता तो आपको इस निर्जन वन में नहीं आना पड़ता हमारे पिता श्री की मृत्यु नहीं होती हे भ्राता मैं आपके चरणों में बारंबार साष्टांग प्रणिपात करता हूं आप अयोध्या वापस चलें और राज सिंहासन पर विराजमान हो आपके बिना अयोध्या शून्य हो गई है। प्रभु जो दंड आप मुझ दुष्ट भरत को देना चाहते हैं वह मुझे स्वीकार है। राम और भरत के मधुर मिलन की कथा श्रवण करके सभी श्रद्धालु भक्तजन रुदन करने लगे रामजी ने भरत को कई सारे तर्क दिए और अंत में आदेश दिया कि है भरत तुम मेरे इन चरण पादुका ओं को लेकर अयोध्या जाओ और अयोध्या के राज्य का निर्वहन करो 14 वर्ष व्यतीत होने के पश्चात मैं अयोध्या आऊंगा यह मेरा आदेश है। भरत जी आंखों में अश्रु लिए प्रभु की चरण पादुका ओं को अपने मस्तक पर विराजमान करके लौट आते हैं और राज सिंहासन पर प्रभु की चरण पादुका ओं को रखकर 14 वर्ष तक कठोर तप करने नंदीग्राम में वटवृक्ष के समीप अपने केशों को जटा बनाकर तपस्वी वेश धारण करके तप करने बैठ जाते हैं। प्रभु वन में ऋषि-मुनियों को दर्शन देते हुए लक्ष्मण सहित पर्ण कुटीर का निर्माण करते हैं और अपने दिवंगत पिताश्री के लिए पिंडदान करते हैं। इस भयंकर कलयुग में प्रभु राम जैसा भ्रातृत्व प्रेम हम मनुष्यों के अंदर आ जाए निश्चित हम सभी स्वस्थ प्रसन्न आनंदित जीवन व्यतीत कर सकते हैं।