: श्रीमद्भागवत कथा मृत्यु को महोत्सव बनाने की कथा है: रामानुजाचार्य
Sat, Aug 26, 2023
प्रसिद्ध पीठ श्री रामलला सदन देवस्थानम में धूमधाम से श्रीमद् भागवत कथा व भगवान का पवित्रोत्सव का हुआ शुभारंभ
अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की पावन नगरी अयोध्या के रामकोट स्थित प्रसिद्ध पीठ श्री रामलला सदन देवस्थानम में धूमधाम से श्रीमद् भागवत कथा व भगवान का पवित्रोत्सव का भव्य आयोजन शुरु हुआ। व्यासपीठ से श्रीमद् भागवत कथा की अमृत वर्षा रामलला सदन देवस्थानम पीठाधीश्वर जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी श्री डा राघवाचार्य जी महाराज कर रहें है। कथा के प्रथम दिवस रामानुजाचार्य जी ने कहा कि श्रीमद्भागवत की कथा शरणागति की कथा है शरणागति का अर्थ है भगवान के चरणों में समर्पित हो जाना और भगवान के चरणों में समर्पित होने के लिए सबसे बड़ी बात है अपने आप का परित्याग कर देना। उन्होंने कहा कि जब आप अपने अहम का परित्याग करके भगवान के शरण आप होते हैं तब एक समर्थ गुरु सुखदेव जी महाराज जैसा प्रगट हो करके आपके जीवन के उन तमाम झंझावात को खत्म करके आपके जीवन में भक्ति की ज्योति जला देता है। स्वामीजी ने कहा कि गुरु की शरणागति जीवन में मृत्यु के बंधन को काटकर मोक्ष की ओर आपके मार्ग को प्रशस्त करती है। श्रीमद्भागवत की कथा मृत्यु को महोत्सव बनाने की कथा है। इस अवसर पर रामलला सदन देवस्थानम से जुड़े संत साधक व शिष्य परिकर मौजूद रहें।
: स्वामी माधवाचार्य जी महाराज को संतों ने किया नमन
Fri, Aug 25, 2023
हमारे देश की आन बान शान तिरंगा आज चंद्रमा पर लहरा रहा है हम सभी भारत वासियों के लिए यह गर्व की बात: रामानुजाचार्य
अयोध्या। प्रसिद्ध पीठ अशर्फी भवन के पूर्व पीठाधीश्वर बैकुंठवासी जगतगुरु श्री स्वामी माधवाचार्य जी महाराज की पुण्यतिथि के अवसर पर वर्तमान पीठाधीश्वर स्वामी श्री धराचार्य जी महाराज ने पूज्य गुरुदेव का चरण पूजन वंदन किया। इस अवसर पर वेद विद्यालय संस्कृत विद्यालय के सभी आचार्य और वेद पाठी ब्राह्मण बटुकों ने वेद पाठ श्री विष्णु सहस्त्रनाम आलवन्दार स्तोत्र का सामूहिक पाठ किया। मध्यान में बृहद भंडारे का आयोजन हुआ। खंडेलवाल वैश्य निष्काम सेवा समिति द्वारा आयोजित नव दिवसीय श्री राम कथा ज्ञान महायज्ञ के सप्तम दिवस में स्वामी श्री धराचार्य जी महाराज ने श्रीराम कथा का श्रवण कराते हुए कहां चंद्रयान तृतीया की सफलता के लिए देश के सभी वैज्ञानिकों को शुभकामनाएं दी। महाराज जी ने कहा भगवान श्री हरि की कृपा से आज हम सब भारतवासियों के लिए बहुत ही हर्ष का दिन है हमारे देश की आन बान शान तिरंगा आज चंद्रमा पर लहरा रहा है हम सभी भारत वासियों के लिए यह गर्व की बात है। कथा के क्रम को आगे बढ़ते हुए कहा प्रभु मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के वन जाने से श्री अयोध्या भी संसार बन गई और मुक्त जीव भरत जी जब संसार रूपी अयोध्या को छोड़कर राम जी को मनाने वन में जाते हैं तो मार्ग में सभी ऋषि मुनि देवता भरत जी के स्वागत सत्कार में उपस्थित होते हैं। आज इस भयंकर कलयुग में भगवान राम और भरत जैसा भ्रातृत्व प्रेम यदि हमारे जीवन में आ जाए तो निश्चित ही हम भी परमपिता परमात्मा को प्राप्त कर सकते हैं। अनेकों जन्मों से भगवान के दर्शन हेतु तपस्या कर रहे ऋषि-मुनियों को प्रभु वन में दर्शन देते हैं। प्रभु श्री राम सुतीक्षण ऋषि के आश्रम पर जाते हैं प्रभु भक्ति में लीन सुतीक्षण ऋषि के गुणों का बखान सीता लक्ष्मण को सुनाते हैं। प्रभु श्री राम वन में सभी ऋषि-मुनियों को कृतार्थ करते हुए अगस्त्य ऋषि के आश्रम में प्रवेश करते हैं परम तेजस्वी तपस्वी अगस्त ऋषि का दर्शन पाकर प्रभु कृतज्ञता ज्ञापित करते हैं। बिन हरीकृपा मिले नहीं सनता सद्गुरु और संतों की कृपा हम जीवो पर यदि हो जाए तो हम परमपिता परमात्मा को प्राप्त कर सकते हैं। प्रभु राम लक्ष्मण जी को परण कुटीर बनाने की आज्ञा देते हैं लक्ष्मण जी अपने विवेक का प्रयोग करते हुए रमणीय स्थान पर दिव्य कुटीर का निर्माण करते हैं प्रभु श्री राम लक्ष्मण जी द्वारा निर्मित पर्ण कुटीर में प्रवेश करते हैं प्रसन्न होकर प्रभु भ्राता लक्ष्मण को अपने गले से लगा लेते हैं। गीदधराज जटायु से से प्रभु का मिलन होता है जटायु पूर्व से ही अयोध्या से संबंध की बात बताते हैं प्रभु जटायु को अपने संरक्षक के रूप में स्थान देते हैं कुटिल भाव से शूर्पणखा प्रभु राम के समीप आती हैं और अपने पति के रूप में प्राप्त करने हेतु प्रार्थना करती है। मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम शूर्पणखा को समझाते हुए कहते हैं देवी मेरा अवतार मर्यादा पुरुषोत्तम है मैं पहले से ही विवाहित हूं अतः मैं आपकी इस इच्छा को पूर्ण नहीं कर सकता। क्रोधित होकर शूर्पणखा विकराल रूप धारण करके मां सीता को खाने दौड़ती हैं प्रभु लक्ष्मण जी की ओर इशारा किए लक्ष्मण जी ने दुष्ट शूर्पणखा के नाक और कान काट लिए शूर्पणखा रोते बिलखते अपने भाई खर दूषण को प्रभु के रूप सौंदर्य का वर्णन सुनाती है यही तो प्रभु की महानता है राक्षसी होते हुए भी शूर्पणखा अपने भाइयों को बताते हुए कहती है कि दो पुरुष वन में आए हैं सुकुमार हैं कोमल हैं। उनके साथ एक सुंदर नारी है उसे लेने के लिए मैं उनके पास गई थी तो मेरा यह हाल कर दिया। खर दूषण 14 हजार राक्षसी सेना के साथ प्रभु के साथ घनघोर युद्ध करते हैं। देखते ही देखते प्रभु सभी का वध कर देते हैं और ऋषि-मुनियों को कृतार्थ करते हुए राक्षस जाति के विनाश का संकल्प लेते हैं। राम जी के जीवन चरित्र को सुनकर खंडेलवाल वैश्य निष्काम सेवा समिति के सभी भक्तगण आनंदित हो रहे हैं।
: दशरथ राजमहल बड़ा स्थान के संस्थापक की मनाई गयी जयंती
Thu, Aug 24, 2023
संत, धर्माचार्यों ने अर्पित की पुष्पांजलि
अयोध्या। चक्रवर्ती महाराज दशरथ जी का राजमहल ,बड़ा स्थान, बड़ी जगह, बाबा राम प्रसादाचार्य का अखाड़ा आदि नामों से सुविख्यात स्थान के संस्थापक किशोरी जी के अनन्य भक्त,विंदु संप्रदाय के सूत्रधार स्वामी राम प्रसादाचार्य महाराज की जयंती समारोह पूर्वक मनाई गई। वर्तमान गौ, संत, परमार्थ सेवी विंदुगद्याचार्य स्वामी देवेन्द्र प्रसादाचार्य महाराज की अध्यक्षता एवम पावन सानिध्य में वृहद भंडारे का आयोजन किया गया। इसके पूर्व समागत संत,महतो, धर्माचार्यो ने बाबा राम प्रसादाचार्य महाराज की जयंती पर उनकी दिव्य प्रतिमा पर पुष्पहार,पुष्प अर्पण कर पुष्पांजलि अर्पित की। इस अवसर पर जय प्रकाश चतुर्वेदी द्वारा विरचित पुस्तक राम प्रसाद चरितावाली, का संत, महंत, धर्माचार्यों ने विमोचन किया। इस अवसर के साक्षी बने मिथिला पीठाधीश्वर जगत गुरु स्वामी विष्णु देवा चार्य महाराज, रसिकाचार्य जनमेजय शरण महाराज,जगत गुरु स्वामी श्रीराम दिनेशाचार्य, महंत रामजी दास, महंत राम शरण दास रंग महल, महंत मैथिली रमण शरण लक्ष्मण किला, महंत अवधेश दास बड़ा भक्त माल, महंत शशि कांत दास, महंत वैदेही वल्लभ शरण बावनजी का मंदिर, महंत भानु दास, महंत अवध बिहारी दास, महंत राजीव लोचन शरण, संत मिथिला बिहारी दास, महंत राम शरण दास रामायणी, महंत राम शंकर दास, विष्णु प्रसाद नायक शास्त्री , सूर्य नारायण दास वैदिक मखौड़ा धाम, सहित अन्य संत, महंत एवम बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए।विंदु गद्याचार्य महाराज के कृपापात्र शिष्य मंगल भवन पीठाधीश्वर महंत राम भूषण दास कृपालु महाराज द्वारा सभी समागत संत,महंत,विप्र एवम अतिथि गणों को दक्षिणा भेट विदाई प्रदान कर सम्मानित किया गया।