: श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव का हुआ विश्राम
Wed, May 29, 2024
श्रीधाम वृंदावन के स्वामी रामप्रपन्नाचार्य महाराज ने सप्त दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा की रसमयी वर्षा से संत साधकों ने लगाया गोता
अयोध्या। रामनगरी के प्रसिद्ध पीठ श्री हनुमान बाग में चल रहें श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव का समापन आज समारोह पूर्वक किया गया। महोत्सव के समापन सत्र पर व्यासपीठ से कथा की अमृत वर्षा करते हुए आचार्य कुटी श्रीधाम वृंदावन के स्वामी रामप्रपन्नाचार्य महाराज ने कहा कि गिरिराज भगवान का पूजन करके इंद्र का मान मर्दन किया भगवान ने। भगवान अपने भक्तो का सब कुछ सहन कर सकते है पर अपने भक्तो का अभिमान सहन नही कर सकते। देवों के राजा को अभिमान हो गया की हम सबसे बड़े देव है सब मेरी ही पूजा करे ब्रजबाशी कार्तिक शुक्ल पक्ष प्रतिपदा को इंद्र का पूजन करते है। ब्रजबाशियों से भगवान ने कहा आज से इंद्रयज्ञ नही हम लोग अपने गोवर्धन का पूजन करे। मानो प्रभु चाहते की प्रकृति का पूजन होना चाहिए इस लिए इसलिए सभी ने गोवर्धन का पूजन किया। आगे कथा में स्वामी जी ने रास लीला का दिव्य वर्णन जिसमे महारास में एक लाख गोपियों के बीच में अकेले गोबिंद ने रास किया। जिसको काम विजय लीला भी कहते है और अपने मामा कंस का वध कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि के दिन किया था। यही वजह है कि इस तिथि को कंस वध के तौर पर भी जाना जाता है। कृष्ण जी के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक मामा कंस का वध भी है। रामप्रपन्नाचार्य महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन लीलाओं से भरा हुआ है। उनके जन्म से लेकर अंतिम वक्त तक सभी कुछ उनकी लीला ही नजर आती है। कृष्ण जी का जन्म भी विकट परिस्थितियों में हुआ था जिसकी वजह दुष्ट मामा कंस ही था। एक भविष्यवाणी की वजह से राजा कंस अपने ही भांजे श्रीकृष्ण को मारना चाहता था, इसके लिए उसने कई प्रयास भी किए लेकिन आखिर में उसका अंत भगवान श्रीकृष्ण के हाथों से ही हुआ। गोबिंद का माता रुक्मणि जी के साथ गोविंद का विवाह संपन्न हुआ। महोत्सव की अध्यक्षता हनुमान बाग पीठाधीश्वर महंत जगदीश दास महाराज कर रहें व देखरेख सुनील दास व रोहित शास्त्री कर रहें। कथा में रामनगरी के विशिष्ट संतों का समागम नित्य हो रहा। कथा श्रवण करने आए सभी संतो महंतों का अभिनन्दन स्वामी रामप्रपन्नाचार्य महाराज के भक्तों ने स्वागत किया। कथा में कमलेश सुषमा बसेड़िया, नितिन आरती बसेड़िया, सनत, सनातन बसेड़िया, कटारे परिवार, दीक्षित परिवार, शर्मा परिवार उपाध्याय परिवार, श्रोती परिवार, रेडियेंट परिवार व मारुतिनंदन परिवार विशेष रूप से मौजूद रहें।
: बिना गुरु कृपा व संतो के सन्निधि के भक्ती मार्ग की प्राप्ती संभव नहीं है: रामानुजाचार्य
Wed, May 29, 2024
अशर्फी भवन के माधव भवन में हो रही श्रीमद् भागवत कथा की अमृत वर्षा
अयोध्या। अशर्फी भवन के माधव भवन में दौसा राजस्थान के भक्तों द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस में व्यासपीठ पर विराजमान जगतगुरु रामानुजाचार्य स्वामी श्री धराचार्य जी महाराज ने कथा का विस्तार करते हुए कहा 5 वर्षीय अबोध बालक ध्रुव की तरह अविरल भक्ति जब साधक के मन में व्याप्त हो जाती है तब वह साधक भगवान को प्राप्त करता है। पापी अजामिल की कथा का श्रवण कराते हुए जगद्गुरु जी ने कहा जन्म से ही पाप कर्म में लीन अजामिल प्रभु भक्ति में लीन संत जनों की कृपा पाकर के भगवान के धाम को प्राप्त करता है। बिना गुरु कृपा व संतो के सन्निधि के भक्ती मार्ग की प्राप्ती संभव नहीं है। भी वेद वेदांत का परिपक्व फल है श्रीमद् भागवत कथा मनुष्य जन्म को प्राप्त करके प्रभु के बताए हुए मार्ग का अनुसरण करके सभी साधक भक्तजन सभी सुखों को प्राप्त कर सकते हैं। हिरण्यकश्यप में घोर तप किया ब्रह्मा जी से वरदान भी प्राप्त किया लेकिन साधक भक्तों के मन में यदि अभिमान व्याप्त हो जाता है तो वह साधक भक्त भी भक्ति मार्ग से अलग हो जाता है और पाप कर्म में लीन हो जाता है हिरण्यकशिपु के पुत्र बालक प्रहलाद मां के गर्भ में ही देवर्षि नारद से नवधा भक्ति का श्रवण करने के प्रभाव से अनेकों यातनाएं पिता से पाकर भी भक्ति मार्ग को नहीं छोड़ते हैं। प्रह्लाद जी की दृढ़ भक्ति को देख कर भगवान भक्त प्रहलाद को बचाने नरसिंह रूप धारण करके दुष्ट हिरण्यकशिपु का वध करते हैं। सुखदेव जी महाराज से कथा का श्रवण करके राजेंद्र परीक्षित जी का विश्वास और भी दृढ़ हो गया सभी भक्तजन कथा श्रवण कर आनंदित हो रहे हैं।
: ज्येष्ठ के पहले मंगल पर श्रद्धालुओं से पटी रामनगरी, हनुमानगढ़ी पर हुआ प्रसाद वितरण
Wed, May 29, 2024
श्रद्धालुओं के साथ हर किसी आमजन को हनुमानजी महाराज का दिव्य प्रसाद भोजन के रुप मे उपलब्ध करा रहें महंत बलराम दास
अयोध्या। ज्येष्ठ का पहला मंगलवार है। जिसको लेकर सुबह से ही लाखों की संख्या में अयोध्या पहुंचे श्रद्धालुओं ने सरयू में स्नान कर हनुमानगढ़ी पर दर्शन पूजन कर रहे है। तो वही इस दौरान हनुमानगढ़ी परिसर में पहुंचे श्रद्धालु हर तरफ बैठे और हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे हैं तो परिक्रमा करते हुए हनुमान चालीसा का पाठ कर रहे हैं। और पर्व को लेकर अयोध्या की सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दिया गया है। हनुमान गढ़ी मंदिर परिसर में भी बड़ी संख्या पुलिस बल के जवान तैनात हैं। तो वही अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए रूट डायवर्जन भी लागू किया गया है। हनुमानगढ़ी के प्रवेश द्धार पर विशाल पंडाल लगाकर भक्तों को प्रसाद वितरण कर पुण्य कमाया गया। भंडारे की शुरुआत हनुमान जी के पूजन के साथ शुरु हुआ।ज्येष्ठ के बड़े मंगल होने के कारण लाखों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। श्री हनुमानगढ़ी के बड़े पहलवान के नाम से सुविख्यात हिंद केसरी बाबा हरिशंकर दास जी महाराज के कृपापात्र शिष्य महंत बलराम दास ने बताया कि हमारे पूज्य गुरुदेव के आशीर्वाद से हम सब ये भंडारा चला रहे है। सुबह से लेकर देर शाम तक चलने वाले इस भंडारे में भक्तों प्रसाद ग्रहण कराया जा रहा साथ ही फल व पानी की बोलत भी दिया जा रहा। महंत बलराम दास कहते है कि आज हनुमान जी की आराधना के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। वहीं ज्येष्ठ मास में पड़ने वाले प्रत्येक मंगलवार को बड़ा मंगल कहा जाता है। धर्म शास्त्रों के अनुसार, ज्येष्ठ माह में पड़ने वाले बड़े मंगल पर विधि विधान से पवन पुत्र हनुमान की पूजा करने से व्यक्ति को प्रत्येक कष्ट और बाधा से मुक्ति मिलती है। ज्येष्ठ मास में पड़ने वाले ये मंगलवार काफी खास माने जाते हैं। यह भंडारा हर वर्ष ज्येष्ठ के बड़े मंगलवार को होता है।इस मौके पर कामधेनु आश्रम के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर महंत आशुतोष दास, पुजारी अनिल दास, सरवन दास, अभय शुक्ला सहित महंत बलराम दास के शिष्य परिकर मौजूद रहें।