: दुल्हा सरकार के विवाह महोत्सव के लिए सजा जानकी महल
Sat, Nov 23, 2024
दुल्हा सरकार के विवाह महोत्सव के लिए सजा जानकी महलसीताराम विवाह महोत्सव में मिथिलांचल से उत्सव में सराबोर होगा श्री जानकी महल ट्रस्टसीता-राम विवाहोत्सव हमारे लिए अतीत का घटनाक्रम ही नहीं, बल्कि जीवन में प्रतिपल प्रेरित होने का दिव्य सूत्र है: आदित्य सुल्तानिया6 दिसंबर मारवाड़ी ठाट बाट से अगहन पंचमी पर निकलेगी दुल्हा सरकार की बारातदुल्हा सरकार संग बरातियों के सेवा में बनारस की चाट,कलकत्ता की चाय टोस्ट व कानपुर के दूध का लुफ्त उठायेंगेदुल्हा सरकार व किशोरी जी का होगा विशेष श्रृंगार, सोने के आभूषण के मध्य चमकेंगे युगल सरकारजानकी महल ट्रस्ट में हजारों लोगों को वस्त,कंबल, राशन व ऊनी कपड़े किया जायेगा वितरणबनारस की शहनाई व राजस्थान की पगड़ी के साथ करीब आधा दर्जन बग्घियों व 3 बैंडबाजे के साथ दिल्ली की लाइटिंग की अद्वितीय व्यवस्था की गई हैअयोध्या। राम जन्म भूमि में भगवान रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद पहली बार श्रीराम विवाह का उत्सव धूमधाम से मनाने की तैयारी है। राम नगरी के अलग-अलग मंदिरों से 6 दिसंबर को राम बारात निकाली जाएगी। विवाह पंचमी का मुहूर्त 6 दिसंबर को ही पड़ रहा है, अयोध्या के लिए यह तिथि बेहद खास मानी जाती है. मठ मंदिरों में यह उत्सव मनाया जाएगा. अयोध्या के संत-महंत दशरथ, जनक और महर्षि की भूमिका में नजर आएंगे।श्रीसीता-राम विवाहोत्सव का मुख्य उत्सव 6 दिसंबर को है। उत्सव की तैयारी चरम की ओर उन्मुख है। रामनगरी के चुनिंदा मंदिरों में राम विवाहोत्सव पूरे भाव-चाव से मनाया जाता है। रामनगरी के श्री जानकी महल ट्रस्ट में मिथिला पद्धति से विवाहोत्सव मनाया जाता है। यहां पर भगवान राम को दुल्हा सरकार और किशोरी जी को बेटी माना जाता है। श्री जानकी महल ट्रस्ट का सीताराम विवाहोत्सव देखने के लिए दूर दूर से लोग आते है। यहां की विवाहोत्सव सुप्रसिद्ध है। जो अपने आप में अद्वितीय है। रामनगरी के कनक भवन, लक्ष्मणकिला, हनुमान बाग, दशरथ राजमहल बड़ा स्थान रसमोद कुंज रंग महल विअहुती भवन आदि का विवाहोत्सव देखने के लिए लोग आतुर रहते है।जानकी महल ट्रस्ट में सीता के बिना श्रीराम की कल्पना तक नहीं की जाती है और ऐसे में श्रीराम एवं सीता के मिलन के महापर्व पर यहां उत्सव का चरम परिलक्षित होता है।
इस बार यह उत्सव और भी खास होने जा रहा है। दिल्ली की मशहूर रामलीला जो प्राण प्रतिष्ठा के समय रामलला के सम्मुख लीला कर चुकी है। वही लीला इस बार राम विवाह में जानकी महल की शोभा बढ़ायेगी। दुल्हा सरकार व किशोरी जी के लिए ट्रस्ट ने जयपुर के रुकमण ज्वेलर्स से विशेष आभूषण बनवायें है जो विवाह उत्सव पर युगल सरकार को समर्पित किया जायेगा।
वर पक्ष व वधू पक्ष मिलाकर करीब 1 हजार लोगो के लिए खानेपीने की विशेष व्यवस्था ट्रस्ट ने कराई है। बनारस की मशहूर चाट जो उघोगपति अंबानी परिवार के विवाह की सेवा दे चुके है बनारस की काशी चाट भंडार इस बार भगवान राम की बारातियों की सेवा में शामिल होगा साथ ही कलकत्ता का चाय टोस्ट व कानपुर की दूध सभी का सभी लोग लुफ्त उठायेंगे। वर पक्ष की अगुवाई दिल्ली के मुरारी लाल अग्रवाल करेंगे तो वधू पक्ष जानकी महल ट्रस्ट दुल्हा सरकार व बारातियों की सेवा करेगा।
तो वही करीब हजार लोगों को वस्त्र, कंबल, राशन व ऊनी कपड़े भेंट किये जायेंगे।विवाहोत्सव का केंद्र जानकीमहल ट्रस्ट तैयारियों के साथ ही उत्सव के आगोश में डूबता जा रहा है। यहां उत्सव का आगाज 3 दिसंबर मंगलवार की प्रथम बेला में रामार्चा महायज्ञ एवं सायं रामलीला की प्रस्तुति तथा गणेश पूजन से शुरु हो गया। बुधवार को फुलवारी सायं विवाहगीत एवं रामलीला की प्रस्तुति संयोजित है। जानकीमहल में राम विवाहोत्सव की रस्म किस प्रामाणिकता से मनायी जाती है। इसे हल्दात तिलक मेंहदी बिनौरी नेग न्यौछावरी नेग घुड़चढ़ी बरात प्रस्थान वैवाहिक कार्यक्रम और विवाहोत्सव के अगले दिन छप्पन भोग तथा कुंवर कलेवा के आयोजनों से समझा जा सकता है। उत्सव को लेकर निमंत्रण पत्रिका छापी है जो विशिष्ट लोगों को वितरण की जा रही है। जिसमें स्वागताकांक्षी श्री जानकी महल ट्रस्ट एवं भक्त गण है। जानकीमहल के ट्रस्टी समाजसेवी आदित्य सुल्तानिया के अनुसार सीता-राम विवाह हमारे लिए अतीत का घटनाक्रम ही नहीं बल्कि जीवन में प्रतिपल प्रेरित होने का दिव्य सूत्र है और इस आयोजन में हम कोई कसर नहीं छोड़े रखना चाहते। राम विवाहोत्सव के दौरान जानकीमहल में फुलवारी की प्रस्तुति आकर्षण की सबब होती है। जानकीमहल के मुख्य आगार के सम्मुख स्थापित मनोहारी फुलवारी को जनकपुर की उस फुलवारी के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। जहां त्रेता में श्रीराम और सीता का पहली बार आमना-सामना हुआ था। इस मौके पर रामनगरी के प्रतिनिधि चुनिंदा संत धर्माचार्य भी आमंत्रित होते हैं जो श्रीराम के प्रसंग का आस्वाद ही नहीं लेते बल्कि अपनी वेश-भूषा और ध्यानियों जैसी भाव-भंगिमा से श्रीराम के गुरु तथा संरक्षक-मार्गदर्शक के रूप में ऋषि विश्वामित्र की याद भी दिलाते हैं।जानकी महल के ट्रस्टी आदित्य सुल्तानियां बताते हैं कि यह स्थान किशोरी जी का मायका माना जाता है। राम जी को दूल्हा और किशोरी जी को बेटी मानकर वर्ष में एक बार जानकी महल की दहलीज विग्रह को पार कराया जाता है। बता दें कि गणेश भगवान को न्योता भेजकर विवाह उत्सव शुरू हो गया है।कार्यक्रम को सफल बनाने में ट्रस्टी दिलीप सुल्तानिया, नीता सुल्तानिया, अरुण सुल्तानिया समेत पूरा जानकी महल परिवार लगा हुआ है।
: शिद्दत से शिरोधार्य हुए स्वामी युगलानन्यशरण
Sat, Nov 23, 2024
शिद्दत से शिरोधार्य हुए स्वामी युगलानन्यशरण144वीं पुण्य तिथि पर संतों ने पुष्पांजलि अर्पित कर किया नमनश्रीरामभक्ति की मधुरशाखा के अनमोल रत्न है स्वामी युगलानन्य शरण: महंत मैथिलीरमण शरणअयोध्या। श्रीराम भक्ति की रसिकधारा की आचार्य पीठ लक्ष्मण किला के संस्थापक स्वामी युगलानन्य शरण को उनकी 144वीं पुण्यतिथि पर समारोहपूर्वक याद किया गया। न केवल साधना बल्कि अपनी विद्वता के चलते श्रीरामभक्ति की मधुरशाखा के अनमोल रत्न बने आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला के संस्थापक स्वामी युगलानन्य शरण को उनकी 144वीं पुण्यतिथि पर उनकी तपोस्थली आचार्य पीठ श्रीलक्ष्मण किला में समारोहपूर्वक श्रद्धांजलि दी गई।रामनगरी की प्रधानतम पीठों में शुमार श्री लक्ष्मण किला के संस्थापक व राम भक्ति धारा के संत शिरोमणि आचार्य श्री स्वामी युगलानन्यशरण जी महराज को आज धर्म नगरी अयोध्या के संतो महन्तो व शिष्य गणों ने नमन करते हुये श्रद्धा सुमन अर्पित किया।
ज्ञातव्य है कि श्रीराम भक्ति की रसिक शाखा के सिद्ध संत स्वामी युगलानन्य शरण की तपस्या से प्रभावित होकर तत्कालीन अंग्रेज सरकार द्वारा उन्हें श्रीअवध के सरयूतट स्थित लक्ष्मणकिला स्नानघाट के पास 52 बीघे भूमि उपहार में दी गई। उन्होंने काशी में अध्ययन कर चित्रकूट में तपस्या की और साधना के लिए श्री अवध को चुना। तत्कालीन सिद्ध संत जीवाराम से बाल्यावस्था में मिली दीक्षा के अनुसार श्रीसीताराम की अनन्य साधना की। लक्ष्मण किला के महंत मैथिलीरमण शरण ने बताया कि अयोध्यापति राजा मानसिंह व वशिष्ठावतार उमापति महाराज स्वामी युगलानन्य के अनन्य रहे। मिथिला की प्राण श्री किशोरी हैं और उनके के प्राण श्रीराम हैं के भाव को ध्यान में रखते हुए स्वामी युगलानन्य शरण ने लक्ष्य की प्राप्ति की। मात्र 59 वर्ष की अवस्था में साकेतवास से पूर्व महाराज श्री ने 95 ग्रंथ रचकर वैष्णव संप्रदाय को जो अमूल्य निधि भेंट किया।
किलाधीश महन्त मैथिली रमण शरण महराज ने बताया कि आचार्य श्री का 144वीं पुण्य तिथि पर आज प्रातः स्वामी जी द्वारा रचित ग्रंथों नामकांति, रूपकांति, लीलाकांति व धामकांति का का सामूहिक पाठ किया गया। किलाधीश महन्त मैथिली रमण शरण ने बताया कि अगहन कृष्ण सप्तमी यानी आज अचार्य श्री को रामनगरी के संतो महन्तो ने नमन किया। आये हुये अतिथियों का स्वागत परम्परागत तरीके से हनुमान निवास मंदिर के महन्त मिथिलेश नन्दनी शरण व किला के युवा संत सूर्य प्रकाश शरण ने किया। इस अवसर पर हनुमत सदन के महन्त अवध किशोर शरण, जगद्गुरु स्वामी रामदिनेशाचार्य, जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी विद्या भास्कर जी, महंत अवध बिहारी दास, महंत गौरीशंकर दास, महंत जनार्दन दास, महंत मनीष दास, महंत रामजी शरण, महंत परशुराम दास, महंत रामकुमार दास, महंत अवधेश दास, महंत सीताराम दास त्यागी, महंत जयरामदास, महामंडलेश्वर आशुतोष दास, महापौर गिरीश पति त्रिपाठी, महंत छोटू शरण, एमबी दास,रामनन्दन शरण सहित बड़ी संख्या में संत महन्त व भक्तगण मौजूद रहे।
: राम राज्याभिषेक के साथ रामचरित मानस पाठ का हुआ भव्य समापन
Sat, Nov 23, 2024
राम राज्याभिषेक के साथ रामचरित मानस पाठ का हुआ भव्य समापन
हनुमत निवास मंदिर में त्रिदिवसीय संगीतमय रामचरित मानस पाठ का छाया रहा उल्लास, चहुओर मानस की संगीतमय चौपाईयों की रही गूंजअयोध्या। अयोध्या के मां सरयू तट के करीब प्रसिद्ध पीठ हनुमत निवास में राम चरितमानस की संगीतमय चौपाईयों से गूंज रहा हैं। त्रिदिवसीय संगीतमय श्रीराम चरित मानस का मधुर पाठ का भव्य समापन हो गया। इसे राम भक्तों की एक टीम कर रही थी। यह टीम 50 साल से इस क्षेत्र में न केवल सक्रिय है बल्कि अपनी श्रद्धा और समर्पण के चलते बेहद लोकप्रिय भी है। इसे मां अमृता नंद मानस परिवार के नाम से जाना जाता है।रामनगरी अयोध्या का प्रसिद्ध पीठ हनुमत निवास मंदिर में त्रिदिवसीय संगीतमय रामचरित मानस पाठ में भव्य राम राज्याभिषेक के साथ समापन हो गया। मंदिर में मानस की पंक्तियां गूंज रही हैं। त्रिदिवसीय पाठ को लेकर पूरे मंदिर को फूलों से सजाया गया था। चारों तरह संगीतमय पाठ ने लोगों को मंत्रमुग्ध कर रहा था। हनुमत निवास पीठाधीश्वर महंत मिथिलेश नंदनी शरण की अध्यक्षता में हो रहे मानस पाठ का आयोजन मुरादाबाद के सीएल गुप्ता परिवार कर रहा है। यह भव्य महोत्सव आचार्य पीठ श्रीलक्ष्मणकिला के महंत मैथलीरमण शरण महाराज के पावन सानिध्य में हो रहा है। मां अमृतानंद मानस परिवार की टीम संगीतमय पाठ कर रही है। इस संगीतमय पाठ टीम का नेतृत्व कर रहें योगेश भसीन कहते है कि मानस ऐसा सागर है जिसमें जितना डूबोगे उतना ही आनंद व मधुर होगा। स्वामी विज्ञानानन्द जी महाराज, पं. योगेश शर्मा, मनोज मिश्र और राजेश ठाकुर जी के समूह द्वारा किया जा रहा है। श्रीमती शिखा गुप्ता एवं राघव गुप्ता के संकल्प तथा सीएल गुप्ता परिवार के सद्भाव से यह अनवरत क्रम एक दशक से अधिक समय से प्रचलित है। हनुमत निवास के महंत प्रख्यात साहित्यकार मिथलेश नन्दनी शरण महाराज ने बताया कि आज शुक्रवार को मानस के राम राज्याभिषेक का दिव्य पाठ किया गया।इस मौके पर हनुमत निवास के बड़े महंत सियाकिशोरी शरण, आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला के महंत मैथली रमण शरण, महंत रामकुमार दास, हनुमत सदन के महंत अवधकिशोर शरण,महंत राम लोचन शरण,पुजारी रमेश दास सहित बड़ी संख्या में संत साधक व भक्त गण मौजूद रहे।