Wednesday 6th of May 2026

ब्रेकिंग

हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर भक्तों की सेवा में जुटे महंत संजय दास ने ORS व जूस का वितरण; श्रद्धा और भक्ति से सराबोर दिखी

बंगाल ने पहली बार खुलकर ली सांस, श्रेय अमित शाह को: बृजभूषण शरण सिंह

पीएम मोदी-गृहमंत्री अमित शाह की रणनीति व सुनील बंसल के क्रियान्वयन से हुई बंगाल विजय: ऋषिकेश 

श्रद्धालुओं के साथ हर किसी आमजन को हनुमानजी महाराज का दिव्य प्रसाद भोजन के रुप मे उपलब्ध करा रहें महंत बलराम दास

संतों के सानिध्य में 6 दिवसीय आयोजन सम्पन्न, कथा व रासलीला ने भक्तों को किया भावविभोर

सुचना

Welcome to the DNA Live, for Advertisement call +91-9838302000

: शिद्दत से शिरोधार्य हुए स्वामी युगलानन्यशरण

बमबम यादव

Sat, Nov 23, 2024
शिद्दत से शिरोधार्य हुए स्वामी युगलानन्यशरण 144वीं पुण्य तिथि पर संतों ने पुष्पांजलि अर्पित कर किया नमन श्रीरामभक्ति की मधुरशाखा के अनमोल रत्‍‌न है स्वामी युगलानन्य शरण: महंत मैथिलीरमण शरण अयोध्या। श्रीराम भक्ति की रसिकधारा की आचार्य पीठ लक्ष्मण किला के संस्थापक स्वामी युगलानन्य शरण को उनकी 144वीं पुण्यतिथि पर समारोहपूर्वक याद किया गया। न केवल साधना बल्कि अपनी विद्वता के चलते श्रीरामभक्ति की मधुरशाखा के अनमोल रत्‍‌न बने आचार्य पीठ श्री लक्ष्मणकिला के संस्थापक स्वामी युगलानन्य शरण को उनकी 144वीं पुण्यतिथि पर उनकी तपोस्थली आचार्य पीठ श्रीलक्ष्मण किला में समारोहपूर्वक श्रद्धांजलि दी गई।रामनगरी की प्रधानतम पीठों में शुमार श्री लक्ष्मण किला के संस्थापक व राम भक्ति धारा के संत शिरोमणि आचार्य श्री स्वामी युगलानन्यशरण जी महराज को आज धर्म नगरी अयोध्या के संतो महन्तो व शिष्य गणों ने नमन करते हुये श्रद्धा सुमन अर्पित किया। ज्ञातव्य है कि श्रीराम भक्ति की रसिक शाखा के सिद्ध संत स्वामी युगलानन्य शरण की तपस्या से प्रभावित होकर तत्कालीन अंग्रेज सरकार द्वारा उन्हें श्रीअवध के सरयूतट स्थित लक्ष्मणकिला स्नानघाट के पास 52 बीघे भूमि उपहार में दी गई। उन्होंने काशी में अध्ययन कर चित्रकूट में तपस्या की और साधना के लिए श्री अवध को चुना। तत्कालीन सिद्ध संत जीवाराम से बाल्यावस्था में मिली दीक्षा के अनुसार श्रीसीताराम की अनन्य साधना की। लक्ष्मण किला के महंत मैथिलीरमण शरण ने बताया कि अयोध्यापति राजा मानसिंह व वशिष्ठावतार उमापति महाराज स्वामी युगलानन्य के अनन्य रहे। मिथिला की प्राण श्री किशोरी हैं और उनके के प्राण श्रीराम हैं के भाव को ध्यान में रखते हुए स्वामी युगलानन्य शरण ने लक्ष्य की प्राप्ति की। मात्र 59 वर्ष की अवस्था में साकेतवास से पूर्व महाराज श्री ने 95 ग्रंथ रचकर वैष्णव संप्रदाय को जो अमूल्य निधि भेंट किया। किलाधीश महन्त मैथिली रमण शरण महराज ने बताया कि आचार्य श्री का 144वीं पुण्य तिथि पर आज प्रातः स्वामी जी द्वारा रचित ग्रंथों नामकांति, रूपकांति, लीलाकांति व धामकांति का का सामूहिक पाठ किया गया। किलाधीश महन्त मैथिली रमण शरण ने बताया कि अगहन कृष्ण सप्तमी यानी आज अचार्य श्री को रामनगरी के संतो महन्तो ने नमन किया। आये हुये अतिथियों का स्वागत परम्परागत तरीके से हनुमान निवास मंदिर के महन्त मिथिलेश नन्दनी शरण व किला के युवा संत सूर्य प्रकाश शरण ने किया। इस अवसर पर हनुमत सदन के महन्त अवध किशोर शरण, जगद्गुरु स्वामी रामदिनेशाचार्य, जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी विद्या भास्कर जी, महंत अवध बिहारी दास, महंत गौरीशंकर दास, महंत जनार्दन दास, महंत मनीष दास, महंत रामजी शरण, महंत परशुराम दास, महंत रामकुमार दास, महंत अवधेश दास, महंत सीताराम दास त्यागी, महंत जयरामदास, महामंडलेश्वर आशुतोष दास, महापौर गिरीश पति त्रिपाठी, महंत छोटू शरण, एमबी दास,रामनन्दन शरण सहित बड़ी संख्या में संत महन्त व भक्तगण मौजूद रहे।

Tags :

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें