नंद घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की जयकारे से गूंजा श्रीकरूणानिधान भवन : पीठाधीश्वर श्रीमहंत रामजी दास जी की अध्यक्षता एवं अधिकारी महंत रामनारायण दास के संयोजन में मनाई गई श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
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Mon, Sep 7, 2026
नंद घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की जयकारे से गूंजा श्रीकरूणानिधान भवन
पीठाधीश्वर श्रीमहंत रामजी दास महाराज की अध्यक्षता एवं अधिकारी महंत रामनारायण दास महाराज के संयोजन में मनाई गई श्रीकृष्ण जन्माष्टमी
अयोध्या। रामनगरी की प्रसिद्ध पीठ श्रीकरूणानिधान भवन रामकोट में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी हर्षोल्लास पूर्वक मनाई गई। जन्माष्टमी महोत्सव को श्रीकरूणानिधान भवन के वर्तमान पीठाधीश्वर श्रीमहंत रामजी दास महाराज ने अपनी सानिध्यता एवं अधिकारी महंत रामनारायण दास महाराज ने संयोजन प्रदान किया। सुबह सर्वप्रथम मंदिर के गर्भगृह में विराजमान भगवान श्रीकृष्ण, राम-जानकी समेत अन्य देवी-देवताओं का वैदिक मंत्रोच्चारण से अभिषेक-पूजन किया गया। उसके बाद भगवान को नया वस्त्र धारण कराया। फिर दिव्य श्रृंगार कर विविध पकवानों का भोग लगा। तत्पश्चात पूजन-अर्चन कर भव्य आरती उतारी। मध्यरात्रि 12 बजे भादो कृष्ण पक्ष उदया अष्टमी तिथि एवं रोहिणी नक्षत्र में घंटे, घड़ियारों, शंख की करतलध्वनि बीच भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य हुआ। चहुंओर भगवान श्रीकृष्ण की जय-जयकार होने लगी। पूरा मंदिर प्रांगण नंद घर आनंद भयो जय कन्हैया लाल की..। हाथी-घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की से गूंज उठा। भगवान के जन्मोत्सव की खुशी में आश्रम के श्रीमहंत ने बधाई वितरित की। साधु-संत, विद्यार्थी से लेकर भक्तजन श्रीकृष्ण जन्मोत्सव से पूरी तरह प्रफुल्लित नजर आए। कलाकारों ने अपने गायन-वादन से जन्माष्टमी उन्होंने जन्मोत्सव के विभिन्न पदों से उत्सव में चार-चांद लगा दिया। इससे भक्तजन मंत्रमुग्ध हो गए। मंदिर में पूरी रात भजन-कीर्तन बधाई का कार्यक्रम चलता रहा। रंग-बिरंगे विद्युत झालरों और रोशनी से श्रीकरूणानिधान भवन अलोकित नजर आया। अंत में सभी को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का प्रसाद वितरित किया गया। श्रीक रूणानिधान भवन के पीठाधिपति श्रीमहंत रामजी दास महाराज ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण हिंदू धर्म में भगवान विष्णु के आठवें अवतार हैं। भगवान श्रीकृष्ण इस जगत के पालनहार हैं। वह अपने भक्तों का कल्याण करते हैं। अधिकारी महंत रामनारायण दास महाराज ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने इस पृथ्वी पर धर्म की स्थापना एवं अधर्म के नाश के लिए अवतार लिया। मंदिर से जुड़े साधु-संत, विद्यार्थी और भक्तजनों ने श्रीकृष्ण जन्म महामहोत्सव में सम्मिलित होकर अपना जीवन कृतार्थ किया।
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