: रामचरित मानस सनातन धर्म का मूल ग्रंथ है व अयोध्या धाम सनातन धर्म का मूल स्थान है: रामेश्वर बापू
Mon, Jun 2, 2025
रामचरित मानस सनातन धर्म का मूल ग्रंथ है व अयोध्या धाम सनातन धर्म का मूल स्थान है: रामेश्वर बापूकहा, मोबाइल ऊपर जितनी उंगलियां फिरती है इतनी उंगलियां जो माला में फिर जाए तो जीवन धन्य बन जाएअयाेध्या। भगवान राम की जन्मभूमि अयोध्या धाम में अमृतमयी श्रीरामकथा के प्रारंभ में सुप्रसिद्ध कथाव्यास रामेश्वर बापू हरियाणवी गुजरात ने बताया कि रामचरित मानस सनातन धर्म का मूल ग्रंथ है और अयोध्या धाम सनातन धर्म का मूल स्थान है। सनातन धर्म शाश्वत है उसकाे कोई तोड़ नहीं सकता है। लेकिन अब सभी देशवासियों को जागृत होने की जरूरत है। सनातन जितना बचेगा, उतनी हमारी भारतीय संस्कृति हिंदुत्व और बचेगा। द्वितीय दिवस की कथा में रामेश्वर बापू ने राम नाम की महिमा गाया। राम से राम का नाम बड़ा है बहुत प्यारा है नाम सबको तैरता है और नाम का महिमा गाया जिस नाम से भगवान शिव प्रतिदिन राम नाम का गुण गाते हैं। राम नाम मंत्र नहीं कहा महामंत्र है और महामंत्र में इतनी ताकत है कि निर्जीव को संजीव करते हैं। रामेश्वर बापू ने कहा राम नाम महामंत्र से कई लोग पतित पावन हुए। राम नाम का महामंत्र की महिमा बहुत है। जिसका जिसका निरंतर भगवान शिव नाम स्मरण करते हैं। बाद में रामेश्वर बापू ने कथा को आगे भगवान शिव प्रथम चरित्र का गान किया और शिव के साथ सती का चरित्र गाया था। शिव चरित्र गाते हुए बापू ने बताया कि शिव विश्वास है और सती श्रद्धा है। शिव चरित्र और सती को प्रजापति दक्ष के यज्ञ में जाकर शरीर का त्याग करना पड़ा और दूसरे जन्म में पार्वती के रूप में सती हिमालय के वहां जन्मी। मोबाइल ऊपर जितनी उंगलियां फिरती है। इतनी उंगलियां जो माला में फिर जाए। तो जीवन धन्य बन जाए।जीवन में कभी भी कष्ट आए। तो केवल भगवान का स्मरण करना राम नाम को पुकार करना। विवाद से अहंकार बढ़ता है, संवाद से समाप्त हो जाता है। रामेश्वर बापू राम का नाम महिमावंत है। सभी विधाओं में केवल और केवल हरि नाम ही श्रेष्ठ है। नाम महिमा के गान के साथ बापू ने अपनी वाणी और सत्र को विराम दिया। इससे पहले यजमानगणाें ने व्यासपीठ का पूजन-अर्चन कर दिव्य आरती उतारी। इस कथा गुजरात से करीब 5 सौ भक्त अयोध्या धाम आये है कथा का आनंद ले रहें। यह महोत्सव जानकी घाट स्थित राधामोहन कुंज में हो रहा है।
द्वितीय दिवस की कथा विश्राम पर प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में भक्तजनों ने अमृतमयी श्रीरामकथा का रसपान कर अपना जीवन धन्य बनाया और पुण्य के भागीदार बने।
: अयोध्या धाम हमारा मान सम्मान व स्वाभिमान है: बृजभूषण शरण
Sun, Jun 1, 2025
अयोध्या धाम हमारा मान सम्मान व स्वाभिमान है: बृजभूषण शरणबृजभूषण शरण सिंह का हनुमान किला में हुआ जोरदार स्वागतकैसरगंज के पूर्व सांसद ने महंत परशुराम दास का लिया आशीर्वादअयोध्या। पास्को एक्ट से बाइज्जत बरी होने के बाद अखिल भारतीय कुश्ती संघ निवर्तमान अध्यक्ष पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का लगातार रामनगरी अयोध्या में स्वागत सम्मान हो रहा है। अयोध्या धाम के संत पास्को एक्ट से बाइज्जत बरी होने के बाद बहुत खुश नजर आ रहें है। रविवार को सायंकाल संकट मोचन हनुमान किला में भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह का सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया। जिसमें नेताजी के ऊपर पुष्प वर्षा की गई साथ ही फूलों का हार व साफा बांधकर स्वागत किया गया। यह आयोजन संकट मोचन हनुमान किला के महंत परशुराम दास जी के संयोजन में किया। अपने स्वागत से अभिभूत होकर पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि अयोध्या धाम हमारा मान सम्मान व स्वाभिमान है। अयोध्या वासियों का इतना प्यार दुलार ही मेरी ताकत है। मेरे व मेरे परिवार के ऊपर पूज्य संतों का आशीर्वाद हमेशा रहा है। हनुमानजी महाराज की बड़ी कृपा है। उन्होंने कहा कि जो भी लोग मेरा बुरा करना चाहते है उनका बुरा स्वयं हनुमानजी करते है। उन्होंने कहा कि पूरे देश में मुझे जितना जन समर्थन मिला है। उतना आज तक किसी को नहीं मिला। देश के अंदर करोड़ों की संख्या में हमारे समर्थक हैं। एक तो मैं कभी घबराया और विचलित नही हुआ। मुझे बजरंगबली व अपने अयोध्या पर पूरा विश्वास था। पास्को एक्ट से बाइज्जत बरी करने के लिए न्याय पालिका का बहुत आभार है। पूर्व सांसद ने एक बार फिर अपनी बात को दोहराते हुए कहते है कि देश के अंदर तीन धाराओं महिला उत्पीड़न, दहेज और पास्को एक्ट का बहुत बड़े पैमाने पर दुरूपयोग हो रहा है। सरकार को इस पर जरूर विचार करना चाहिए। सम्मान समारोह के संयोजक संकट मोचन हनुमान किल के महंत परशुराम दास ने कहा कि पूर्व सांसद जी हमेशा संतों का सम्मान करते है। भगवान की बड़ी कृपा है इनके ऊपर। महंत परशुराम दास ने एक बार फिर पास्को एक्ट से बाइज्जत बरी होने पर असत्य पर सत्य की जीत बताई। उन्होंने कहा कि न्याय पालिका पर हम लोगों व सनातन धर्मावलंबियों को पूरा भरोसा था कि एक दिन पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह बाइज्जत बरी होंगे। हनुमान जी कृपा साक्षात उनके ऊपर है। न्याय पालिका ने स्वत उनको बाइज्जत बरी किया। इस कार्यक्रम में महंत अयोध्या दास, महंत रामदास जी, महंत विजयराम दास, छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष राजमणि सिंह , अरुण सिंह लश्करी मंदिर,वासु सूर्यवंशी, छात्रनेता आयुष सिंह कुंदन ,प्रखर सिंह, सचिन सिंह ,सोनू सरदार, कृष्णा सिंह पत्रकार, प्रियेश दास पार्षद रामकोट, बृजभूषण शरण सिंह के प्रभारी नीलेश सिंह, अयोध्या प्रभारी महेन्द्र त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहें।
: श्रीअवध धाम सप्तपुरियाें में मस्तक है:रामेश्वर बापू
Sun, Jun 1, 2025
श्रीअवध धाम सप्तपुरियाें में मस्तक है:रामेश्वर बापूकहा, प्रभु श्रीराम ने पूरे देश-दुनिया काे मानवता का पाठ पढ़ाया और मानवता का संदेश दियाराधामाेहन कुंज जानकीघाट में दीप प्रज्वलन संग नव दिवसीय श्रीरामकथा का हुआ भव्य शुभारंभअयाेध्या। अयोध्याधाम के राधामाेहन कुंज जानकीघाट में रविवार को दीप प्रज्वलन संग नव दिवसीय श्रीरामकथा का भव्य शुभारंभ हुआ। व्यासपीठ पर विराजमान सुप्रसिद्ध कथाव्यास रामेश्वर बापू हरियाणवी गुजरात ने अमृतमयी श्रीरामकथा के प्रथम दिवस भक्तजनों को रसास्वादन कराते हुए कहा कि यह पावन पुनीत श्रीअवध धाम है। जिसे सप्तपुरियाें में मस्तक कहा गया है। यह साताें पुरी में मस्तक के समान है। अवध धाम की बड़ी ही महिमा है। जहां मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम ने अवतार लेकर सबका कल्याण किया। प्रभु श्रीराम ने पूरे देश-दुनिया काे मानवता का पाठ पढ़ाया और मानवता का संदेश दिया। भगवान श्रीराम जैसा कोई नही है। आज सारा संसार उनका गुणगान करता है। उन्होंने सबकाे मर्यादित जीवन जीना सिखाया। हम सब परम साैभाग्यशाली है। जाे हम सबकाे अयोध्या धाम जैसी इस पवित्र धरा पर सत्संग लाभ व श्रीरामकथा का दिव्य आनंद प्राप्त हो रहा है। जैसा की शास्त्राें में अवध धाम की महिमा गाई गई है। अयोध्या नाम ही अपने आप में भगवान ब्रह्मा, विष्णु, महेश का स्वरूप है। केवल अयोध्या नाम लेने मात्र से ही तीनाें देवताओं के नाम लेने का फल मिल जाता है। साठ हजार वर्षों तक गंगा तट पर रहकर भजन-साधना करने का जाे फल है। वह फल केवल अयोध्यापुरी के दर्शन करने मात्र से ही मिल जाता है। अयाेध्यापुरी की महिमा काे बढ़ाने के लिए भगवान के नेत्रों से नेत्रजा सरयू मैया प्रकट हुई हैं। जिनके बारे में कहा गया है कि- काेटि कल्प काशी बसे, मथुरा कल्प हजार। एक निमिष सरयू बसे, तुले न तुलसीदास। ऐसी मां सरयू, अयोध्या धाम और हमारे प्रभु श्रीराम की महिमा है। अब ताे आनंद ही नही, महा आनंद का अवसर हम सबकाे मिला है। जब श्रीरामजन्मभूमि पर हमारे श्रीरामलला विराजित हुए हैं। भक्ताें के हृदय का वह आनंद, ब्रह्मानंद में परिवर्तित हाे रहा है। नित्य प्रति अनेकानेक भक्त श्रीधाम अवध में पधार रहे और बड़े भाव से श्रीरामलला का दर्शन कर रहे हैं। इससे पहले श्रीरामकथा के यजमानगणाें ने व्यासपीठ का पूजन-अर्चन कर दिव्य आरती उतारी। अंत में प्रथम दिवस की कथा विश्राम पर प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में भक्तजन अमृतमयी श्रीरामकथा का रसपान कर अपना जीवन कृतार्थ कर रहे थे। वहीं इससे पहले सुबह संकटमोचन हनुमान मंदिर से गाजे-बाजे संग भव्य पाेथी एवं कलशयात्रा निकाली गई। जाे रामनगरी के मुख्यमार्गों से हाेते हुए अपने गंतव्य काे वापस लाैटी। जहां वैदिक मंत्राेच्चारण के बीच सभी 51 कलशाें काे विधि-विधान पूर्वक स्थापित किया गया।