: छयलवा को दैहो चुनि-चुनि गारी…
Fri, Dec 10, 2021
सिद्धपीठ श्री रामवल्लभा कुंज में धूमधाम से मनाया गया रामकलेवा
अयोध्या। छयलवा को दैहो चुनि-चुनि गारी, छप्पन भोग छत्तीसों व्यंजन, आनी धरी मणि थारी.. लुटि न जावें अवध नगर को सिगरी कन्या कुमारी, जेवत लालन मृदु मुसुकावत, सिया अली बलिहारी..’ मधुर गालियों की यह बौछार किसी और नहीं बल्कि अपने ही उपास्य को वह रसिकोपासक संत-साधक कर रहे थे जो प्रतिदिन उन्हें ही भजते और स्वयं के साथ लोक कल्याण की भी कामना करते हैं। अवसर था कुंवर कलेवा का। श्रीसीताराम विवाह महोत्सव के अवसर पर अवध नगरी वर पक्ष का प्रतिनिधित्व करते हुए भी जनकपुरवासियों के ही रंग में रंगी नजर आई और दास परम्परा के अनुगामी संत भी सखी परम्परा में ही पगे दिखाई दिए।
यही कारण है कि मधुर उपासना के निर्धारित स्थानों के अतिरिक्त भी वैष्णव नगरी के अधिकांश मंदिरों में कुंवर कलेवा का आयोजन किया गया। वहीं मानसकार गोस्वामी तुलसी दास की भावना के अनुरुप ही संत-महंत भी ‘पुनि जेवनार भई बहु भांति, पठए जनक बोलाए बाराती..’ का अनुसरण करते हुए युगल सरकार को विविध व्यंजनो का रसास्वादन कराने में पीछे नहीं रहे। सिद्धपीठ श्री रामवल्लभा कुंज के श्रीमहंत रामशंकर दास वेंदाती जी महाराज के सानिध्य व मंदिर के यशश्वी अधिकारी पूज्य राजकुमार दास जी महाराज के निर्देशन में कुंवर कलेवा का पूरी भव्यता से आयोजन किया गया। इस अवसर पर मंदिर के आंगन में युगल सरकार के विग्रह की प्रतिष्ठा कर उनकी पूजा-अर्चना की गई और आचार्य प्रणीत पदों का गायन हुआ।
सिद्धपीठ श्री रामवल्लभा कुंज में अधिकारी पूज्य प्रमुख स्वामी अधिकारी राज कुमार दास ने बताया कि अयोध्या में वैदिक विधि द्वारा विवाह उत्सव सम्पन हुआ और आज सुबह से कलेवा का कार्यक्रम किया गया। जिसमे विभिन्न प्रकार के व्यंजनों से भगवान को भोग लगाया गया। अयोध्या में वैदिक विधि व लौकिक विधि द्वारा विवाह उत्सव हुआ और इसी क्रम में आज सुबह से कलेवा का कार्यक्रम किया गया।इस कार्यक्रम में कई प्रान्तों से श्रद्धालु आज अयोध्या आए है। तथा बताया कि भगवान को हम लोग कुछ नहीं दे सकते हैं। वो तो सबका भरन पोषण करते हैं। लेकिन आज यह कार्य एक उपासना के रूप में हम लोग करते हैं। इसी क्रम में कलेवा का कार्यक्रम किया गया।और हजारों श्रद्धालु इस महोत्सव के दौरान झूमते रहे।
: श्रीजानकी महल ट्रस्ट में दुल्हा दुल्हिन सरकार को लगा छप्पन भोग,धूमधाम से मना रामकलेवा
Fri, Dec 10, 2021
मिथिला पद्धति से भगवान श्रीराम को दुल्हा सरकार व किशोरी जी को बेटी के रुप में पूजन करतें है
अयोध्या। रामनगरी में पिछले पांच दिनों से चल रहे राम विवाह महोत्सव में आज आखरी दिन कलेवा का कार्यक्रम किया गया। जिसमे भगवान राम और तीनो भाइयो को उपहार देकर विदाई के समय गाली देकर विदा किए जाने का कार्यक्रम किया गया। भगवान की जनक पूरी से विदाई के लिए महिलाएं भगवान राम के अचर धराई किया गया जिसमें दूरदराज से अयोध्या पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान राम सभी भाइयो को विभिन्न प्रकार के उपहार दिया गया। इसके साथ ही विदाई कार्यक्रम के दौरान भगवान के भजनों पर श्रद्धालुु झूमते नाचते रहे।
श्रीजानकी महल ट्रस्ट में मिथिला पद्धति से भगवान श्रीराम को दुल्हा सरकार व किशोरी जी को बेटी के रुप में पूजन करतें है। महल के ट्रस्टी समाजसेवी आदित्य सुल्तानिया कहते है कि हमारे यहां से साल मे एक ही बार दुल्हा सरकार के रुप में भगवान श्रीराम रथ पर सवार होकर मंदिर से निकलते है उसके बाद भगवान के विग्रह का भव्य विवाह प्रधान मंदिर में होता है। उन्होंने बताया कि विवाह महोत्सव का समापन छप्पन भोग कुवर कलेवा के साथ होता है जिसमें भगवान के स्वरुपों को कलेवा कराया जाता है व युगल सरकार को छप्पन भोग लगता है। इस अवसर पर ट्रस्टी दिलीप सुल्तानिया नीता सुल्तानिया अरुण सुल्तानिया नरेश पोद्दार सहित जानकीमहल परिवार मौजूद रहे।
: प्रसिद्ध पीठ श्री रंग महल में धूमधाम से मनाया गया रामकलेवा
Fri, Dec 10, 2021
रंगमहल के संस्थापक स्वामी सरयू सखी महाराज की परम्पराओं को पुष्पित और पल्लवित कर रहे महंत रामशरण दास जी
पूरे रस्मोरिवाज के साथ मनाया गया सीताराम विवाह महोत्सव
अयोध्या। वैष्णव नगरी अयोध्या में उपासना की दो अलग-अलग शाखाएं हैं। इन शाखाओं में दास परम्परा और सख्य परम्परा शामिल है। मिथिला धाम से अपना रिश्ता जोड़ने वाले मधुरोपासक कहलाते हैं और सख्य भाव से राम व सीता के रूप में दूल्हा-दुलहिन सरकार की उपासना करते हैं। इन दोनों ही परम्पराओं के उपासक संत रामानंद सम्प्रदाय के प्रथम आचार्य के रूप में देवी सीता जी को ही स्वीकारते हैं। गुरु वंदना में सीतानाथ समारम्भाम् रामानंदार्य मध्यमाम अस्मादचार्य पर्यन्ताम वंदे श्रीगुरु परम्पराम् इसी श्लोक का वाचन किया जाता है।
फिर भी दास परम्परा के उपासक राजा राम व हनुमान जी की उपासना दास यानी कि सेवक भाव से करते हैं। इसके समानान्तर सख्य भाव के उपासक सखी भाव की गुप्त उपासना करते हैं। इन संतों की मान्यता है कि जनकपुर में विवाह के बाद भगवान दुलहिन सरकार के साथ दूल्हा सरकार के रूप में ही विराजते हैं। यही कारण है कि ये उपासक श्रीरामचरित मानस के पारायण के दौरान विवाह प्रसंग तक का ही पारायण करते हैं। पूजन-अर्चन के दौरान सिर पर पल्लू रखकर त्रिरयोचित भाव से ही आराध्य को रिझाते हुए उनसे अनुनय-विनयपूर्वक प्रत्येक क्रिया करते हैं।
रामनगरी में पिछले पांच दिनों से चल रहे राम विवाह महोत्सव में आज आखरी दिन कलेवा का कार्यक्रम किया गया। जिसमे भगवान राम और तीनो भाइयो को उपहार देकर विदाई के समय गाली देकर विदा किए जाने का कार्यक्रम किया गया। भगवान की जनक पूरी से विदाई के लिए महिलाएं भगवान राम के अचर धराई किया गया जिसमें दूरदराज से अयोध्या पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान राम सभी भाइयो को विभिन्न प्रकार के उपहार दिया गया। इसके साथ ही विदाई कार्यक्रम के दौरान भगवान के भजनों पर श्रद्धालुु झूमते नाचते रहे।
इस परम्परा को पुष्पित और पल्लवित करने का श्रेय लक्ष्मण किला के संस्थापक आचार्य स्वामी युगलानन्य शरण महाराज को दिया जाता है। इस परम्परा के अनेक संत हुए जिनमें रंगमहल के संस्थापक स्वामी सरयू सखी महाराज जी भी प्रमुख रुप से रहे। अपनी परम्पराओं का निर्वहन आज भी रंग महल के पीठाधीश्वर महंत रामशरण दास महाराज जी कर रहे है। रंग महल मंदिर में महंत रामशरण दास जी महाराज के पावन सानिध्य में कुवर कलेवा मनाया गया। इस महोत्सव की देखरेख व व्यवस्था पुजारी साकेत जी व राहुल जी ने किया।वधू पक्ष से मीना वर्मा पत्नी इंद्र बहादुर वर्मा गोरखपुर, पनमती देवी पत्नी स्वर्गीय गजाधर वर्मा , लीलावती देवी पत्नी सत्यानंद वर्मा , संतोषी वर्मा पत्नी प्रभाकर वर्मा, सुमन वर्मा पत्नी राकेश वर्मा , रेखा वर्मा पत्नी राधारमण वर्मा , प्रीति वर्मा पत्नी सागर वर्मा ,रितु वर्मा पत्नी रजत वर्मा, आकाश वर्मा, राहुल वर्मा, सोहन वर्मा, प्रिंस वर्मा रहें।