: बिना श्रद्धा के कोई राम कथा का आनंद नहीं ले सकता: रामदिनेशाचार्य
Sat, May 7, 2022
राम महल वैदेही मंदिर में भव्य श्रीराम कथा महोत्सव का हुआ शुभारंभ
अयोध्या। श्रद्धा का उदय बहुत ही बिरले लोगों के जीवन में होता है। जिनके जीवन में श्रद्धा नहीं है वह कितना भी बुद्धिमान क्यों न हो राम कथा का आनंद रस ग्रहण नहीं कर सकता। उक्त बातें श्रीराम कथा महोत्सव में जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी महाराज ने कही। जगद्गुरु रामानन्दाचार्य जी के श्रीमुख से राम महल वैदेही मंदिर में आज से भव्य श्रीराम कथा महोत्सव का समारोह पूर्वक शुभारंभ हुआ।व्यासपीठ से कथा का महात्म्य बताते हुए रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य जी ने कहा कि सतीजी दक्ष पुत्री हैं। वे भगवान शिव से विवाह होने पर भी रामकथा का आनंद नहीं ले पाती हैं। उन्होंने सुना ही नहीं क्योंकि उनके हृदय में श्रद्धा वृत्ति की जगह संशय या भ्रम था। सती जब अगले जन्म में राजा हिमांचल के घर में जन्म लेती हैं तो दीर्घकाल की तपस्या के पश्चात भगवान शिव को पुन: पति के रूप में प्राप्त करती हैं। तब रामकथा की जो अद्भुत रसधारा संसार के समक्ष बहती है, उससे भगवती उमा स्वयं धन्य हुईं संसार के जीव आज भी धन्य हो रहे हैं।
स्वामी रामदिनेशाचार्य जी ने कहा कि परमार्थ की प्राप्ति के लिए सनातन धर्म में अनगिनत मार्ग हैं पर प्रमुख रूप से मानस में ज्ञान भक्ति और कर्म की चर्चा की गई है। सभी मार्गों में श्रद्धा की आवश्यकता है। ज्ञान मार्ग की साधना उत्तर कांड में की गई है। उसमें गाय को श्रद्धा का प्रतीक बताया गया है। कथा व्यास का पूजन यजमान ने किया। महोत्सव का संचालन आचार्य रमेश दास शास्त्री व व्यवस्थापक में गौरव दास शास्त्री शिवेंद्र दास शास्त्री रहे।
: राम देश की एकता के प्रतीक हैं: गोपालकृष्णमाचार्य
Sat, May 7, 2022
सिद्धपीठ श्री हनुमान बाग में चतुर्विशाति कुण्डात्मक महा साम्राज्य पटृभिषेक नवाह्रिक महायज्ञ महोत्सव का उल्लास चरम पर
अयोध्या। रामनगरी अयोध्या के प्रसिद्ध पीठ श्री हनुमान बाग में चतुर्विशाति कुण्डात्मक महा साम्राज्य पटृभिषेक नवाह्रिक महायज्ञ महोत्सव के पांचवें दिन उमड़ा भक्तों का भारी हुजूम। मंदिर के चारों तरफ वाल्मीकीय रामायण पाठ के श्लोक गूज रहें थे। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में व्यासपीठ से श्रीमद्वाल्मीकीय रामायण कथा की अमृत वर्षा तेलूगु भाषा में गोपालकृष्णमाचार्य जी महाराज कर रहे है। जिसका हिंदी में व्याख्यान हनुमान बाग के आचार्य कर रहे है।गोपालकृष्णमाचार्य जी ने कहा कि राम तो प्रत्येक प्राणी में रमा हुआ है, राम चेतना और सजीवता का प्रमाण है। भारतीय समाज में मर्यादा, आदर्श, विनय, विवेक, लोकतांत्रिक मूल्यों और संयम का नाम राम है। असीम ताकत अहंकार को जन्म देती है। लेकिन अपार शक्ति के बावजूद राम संयमित हैं। वे सामाजिक हैं, लोकतांत्रिक हैं। वे मानवीय करुणा जानते हैं। वे मानते हैं पर हित सरिस धरम नहीं भाई। राम देश की एकता के प्रतीक हैं। गोपालकृष्णमाचार्य जी ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम समसामयिक है।भारतीय जनमानस के रोम-रोम में बसे श्रीराम की महिमा अपरंपार है।
जीवन की धन्यता भौतिक पदार्थों के संग्रहण में नहीं अपितु सुविचारों एवं सद्गुणों के संचयन में निहित है। जिसके पास जितने श्रेष्ठ एवं पारमार्थिक विचार हैं वह उतना ही सम्पन्न प्राणी है। उन्होंने कहा कि आज समाज में अशांति कोई पशु या जानवर नहीं फैला रहा, बल्कि अपने स्वरूप से अनभिज्ञ भौतिक पदार्थ की दौड़ में लगा मनुष्य ही फैला रहा है। दूसरों को शांत करने से पहले खुद शांत होना होगा। शांति व आनंद का स्रोत केवल ईश्वर है जो भक्ति द्वारा प्राप्त किया जा सकता है।
स्वामीजी ने कहा कि मनुष्य के अन्तःकरण में जो गुणों के बीज हैं, वे सत्संग और कुसंग के कारण अंकुरित होते हैं। अगर कुसंग के जल की वर्षा हो जाय तो अन्तःकरण में छिपे हुए दुर्गुण सामने आ जाते हैं। व्यक्ति को कुसंग से बचना चाहिए, इसका तात्पर्य यह है कि अगर वर्षा ही नहीं होगी तो अंकुर भीतर से कैसे फूटेगा ? अतएव यदि हम उन सहयोगियों के, जो हमारे दुर्गुणों को, हमारी दुर्बलताओं को बढ़ा दिया करते हैं, सन्निकट नहीं जावेंगे तो भले ही हमारे जीवन में दुर्गुणों के संस्कार विद्यमान हों, वे उभर नहीं पावेंगे। मानवीय जीवन के सद्गुणों के अंकुरित होने के लिए जिस जल की अपेक्षा है, वह है सत्संग का जल।कथा से पूर्व यजमान लक्ष्मी न्यायापति जी ने व्यासपीठ का पूजन किया। कार्यक्रम के प्रथम सत्र में 3 यज्ञशाला में 51 वैदिक आचार्य हवन कुंड में आहुतियां डाल रहे। तो वही 108 आचार्य वाल्मीकीय पारायण पाठ कर कार्यक्रम की शोभा बढ़ा रहें है। यह आयोजन श्री वेंकाटाचार्य वैदिक संस्थान के तत्वावधान में हो रहा है। कार्यक्रम हनुमान बाग सेवा संस्थान के सानिध्य में सम्पादित हो रहा है।इस महाउत्सव को हनुमान बाग के महंत जगदीश दास महाराज का सानिध्य प्राप्त हो रहा है। इस मौके पर मंदिर के व्यवस्थापक सुनील दास, रोहित शास्त्री, नितेश शास्त्री सहित दक्षिण से हजारों भक्त इस महाउत्सव में शामिल हुए।
: संत ओमदास का हुआ उपनयन संस्कार बने पुजारी: संजय दास
Thu, May 5, 2022
लवकुश मंदिर में संकटमोचन के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजय दास ने अपने शिष्य ओमदास को बनाया मंदिर का पुजारी
अयोध्या। रामनगरी के रामकोट स्थित लवकुश आश्रम में आज संत ओमदास दास का उपनयन संस्कार पूरे विधि विधान से हुआ। यह कार्यक्रम संकटमोचन के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजय दास के अध्यक्षता में हुआ। महंत संजय दास ने अपने शिष्य संत ओमदास को लवकुश आश्रम का पुजारी नियुक्त किया। जिससे ठाकुर जी की पूजा राग भोग अच्छे से चलती रहें। कार्यक्रम का संयोजन मंदिर के महंत रामकेवल दास ने किया। कार्यक्रम का समापन भंडारे के साथ हुआ। जिसमें महंत माधव दास, महंत रामप्रसाद दास, महंत अजीत दास, महंत बलराम दास, महंत सत्यदेव दास, महंत रामदास, लल्लू महंत, पुजारी हेमंत दास, अभिषेक दास, अभय दास, रामायण अंकित दास, समाजसेवी शिवम श्रीवास्तव सहित बड़ी संख्या में संत साधक मौजूद रहे।