: लड़ेंगे नही लड़ाएंगे चुनाव, क्यों कि जनप्रतिनिधियों से नही खुश है जनता: बृजभूषण
Sun, Jun 5, 2022
सरयू तट पर साधु संत व हजारों समर्थकों के साथ मनाया सीएम योगी आदित्यनाथ का 51 वां जन्मदिन, 5100 किलों लड्डू का केक हुआ वितरण
हनुमानगढ़ी का दर्शन पूजन कर श्रीमहंत ज्ञानदास महाराज का लिया आशीर्वाद, नागा साधुओं ने सांसद का किया अभिनन्दन
अयोध्या। रामनगरी की सियासत में आखिर क्यों कैसरगंज के सांसद बृजभूषण शरण सिंह का नाम सामने आने लगा है। जिसकी बड़ी वजह आज खुद सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने बताया कि अयोध्या के साधु संत व यहां के मूल निवासी भी स्थानीय जनप्रतिनिधियों से खुश नहीं है। इसलिए अब वह अयोध्या के लोगो के दुख में शामिल होने के साथ उनकी लड़ाई लड़ने का दावा कर रहे हैं।
राम नगरी अयोध्या में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का 51 वां जन्मदिन बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान पूरी अयोध्या भगवामय दिखी। सांसद बृजभूषण शरण सिंह के नेतृत्व में आज अयोध्या की हर गलियों में भगवा पगड़ी बांधे जय श्री राम का नारा लगाते लोग दिखे। पूरी अयोध्या में बृजभूषण शरण सिंह के सियासी ताकत का लोहा मानते हुए लोग कहे कि नेता बृजभूषण शरण के साथ आमजनता है साधु संत है। अयोध्या के सैकड़ों की संख्या साधु संतों के साथ हजारों की संख्या में पहुंचे समर्थकों के बीच कैसरगंज सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने सीएम योगी के जन्मदिन पर अयोजित कार्यक्रम के दौरान अयोध्या के संतो को साक्षी मानकर चुनाव न लड़ने का फैसला बताया है। लेकिन किसी योग्य व्यक्ति के लड़ाने के दावे से अयोध्या की सियासत में हड़कंप मचा दिया है। आखिरकार अयोध्या के चुनाव में सांसद बृजभूषण शरण सिंह के होने की बात अब सत्य साबित होने लगी है। अयोध्या में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि अब अगला कदम होगा कि अभी कुछ साधु संतों व मंदिर छूट गए हैं। उसने से मुलाकात करेंगे। जिसके बाद नगर के सभी धर्म व जाति के लोगो के साथ बैठूंगा। कहा कि मुझे अयोध्या में कुछ दिक्कतें दिखाई दे रही है। जिससे अयोध्यावासी बहुत परेशान हैं। क्या समस्या है वह नही बताया जा सकता है लेकिन यहां के लोग अयोध्यावासी होने की सजा पा रहे हैं। इसलिए पहले साधु संत महात्माओं के साथ बैठूंगा। उनकी राय लूंगा और फिर सभी समाज के व व्यापारियों के साथ उनकी समस्या को समझूंगा फिर सीएम योगी व पीएम मोदी से मुलाकात कर अयोध्या के लोगो का दर्द भी बताऊंगा। वहीं कहा कि अयोध्या के सांसद हो या विधायक हो या मेयर उनका उत्तरदायित्व अयोध्या की जनता के प्रति होना चाहिए। न की किसी व्यक्ति विशेष के प्रति यह बात सभी समझ रहे हैं। इनको समझना चाहिए कि किसी व्यक्ति की कृपा से नही बल्कि जनता के कृपा से बनते है।सांसद बृजभूषण शरण सिंह जब हनुमानगढ़ी दर्शन करने पहुंचे तो वहां नागा साधुओं ने सांसद जी का अभिनन्दन जोरदार तरीकें से किया। ढोल नगाड़ों के बीच स्वागत से बृजभूषण शरण सिंह गदगद हो उठे और बोले ये मेरा अपना घर ही है। मेरी पूरी जिंदगी हनुमानगढ़ी की है। आज जो भी कुछ हूँ यही से हूँ। यह स्वागत संकट मोचन सेना के तरफ से किया गया था। दर्शन पूजन के बाद सांसद बृजभूषण शरण सिंह गद्दीनशीन श्रीमहंत प्रेमदास जी महाराज व श्रीमहंत ज्ञानदास महाराज का आशीर्वाद लिया। इस मौके पर महंत मुरली दास, संकट मोचन सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महंत संजयदास, महंत बलराम दास, चौबृजी मंदिर के पीठाधीश्वर महंत बृजमोहन दास, महंत माधव दास, महंत सत्यदेव दास, महंत इन्द्रदेव दास, पुजारी हेमंत दास, महंत मुकेश दास,अंकित दास अभय दास, अनिल दास सहित बड़ी संख्या में साधु संत व आमजन मौजूद रहें।
: गीष्म कालीन में आराध्य को फूल की झांकी शीतलता प्रदान करती है:आदित्य
Sat, Jun 4, 2022
फूलों के बंगले में विराजें दुल्हा सरकार, जानकी महल ट्रस्ट में सजा भव्य फूल बंगला झांकी
मनोहारी झांकी में वृंदावन, कोलकाता व लखनऊ समेत अन्य कई राज्यों से आये फूलों का किया गया उपयोग
अयोध्या। रामनगरी के सिद्धपीठों में शुमार श्री जानकी महल ट्रस्ट में भव्य फूल बंगले की झांकी का दिव्य आयोजन किया गया। फूल बंगले में विराजें दुल्हा सरकार की छवि बड़ी ही मनोहारी लग रही थी। विभिन्न पद गायन से युगल सरकार की मनोहारी छवि का आनंद संत साधक लगा रहे थे। पूरा मंदिर परिसर भक्ति में सराबोर दिख रहा था। जेष्ठ के भीषण गर्मी में जहां मनुष्य और पशु पक्षी परेशान है वहीं रामनगरी अयोध्या के विभिन्न मंदिरों में जीव स्वरूप मानकर की जाने वाली भगवान की सेवा व पूजा की कड़ी में उन्हें इस भीषण गर्मी से राहत दिलाने के लिए भव्य फूल बगंला की झांकी का आयोजन किया गया। इस भव्य व मनोहारी फूल बंगला की झांकी में उपयोग किये गए फूल वृंदावन, कोलकाता व लखनऊ समेत कई राज्यों से आये थे। आरकेटक, गेंदा, नीबू कलर, गेंदा आरेंज कलर, ग्लाइट, मुंगेरा, राजबेल, रजनीगंधा, टाटा गुलाब के हजारों फूलों से भगवान का भव्य श्रृंगार किया गया। रंग बिरंगे फूलों से पूरे मंदिर को भव्य रुप से सजाया गया। इस भव्य कार्यक्रम के संयोजक ट्रस्टी समाजसेवी आदित्य सुल्तानिया ने इतना भव्य स्वरूप दिया कि अयोध्या वासियों का दिल जीत लिया।
समाजसेवी आदित्य सुल्तानिया ने बताया कि भव्य फूल बंगला झांकी से अयोध्या वासियों को खुशी मिलती है। इस कार्यक्रम में रामनगरी के सभी संत धर्माचार्य सहित साधक शामिल होते है। समाजसेवी आदित्य सुल्तानिया ने बताया कि भगवान के श्री चरणों का आनंद लेने के लिए हम फूल बंगला झांकी सजाते है। गीष्म कालीन में आराध्य को फूल की झांकी शीतलता प्रदान करती है।
: सीताराम विवाहोत्सव के साथ रामलला सदन देवस्थान में महोत्सव का हुआ समापन
Sat, Jun 4, 2022
दक्षिण से उत्तर के संबंध को जोड़ने का सेतु बनेगा रामलला सदन
राम लला सदन में नामकरण संस्कार किया जाना होता है बेहद शुभ
करीब तीन सौ वर्ष प्राचीन है रामलला सदन, मंदिर का दक्षिण भारत की पारम्परिक शैली में निर्माण कराया गया
अयोध्या। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की नगरी अयोध्या के रामकोट स्थित श्री राम जन्मभूमि से चंद कदम दूरी पर स्थित दक्षिण भारतीय शैली से बने श्री रामलला देवस्थानम में मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव में सीताराम विवाहोत्सव बड़े ही धूमधाम से मनाया गया इसी के साथ भव्य मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का समापन भी हो गया।
अयोध्या में प्रभु श्री राम के मंदिर के साथ-साथ अब मंदिर और मूर्तियों के शहर अयोध्या में आकर्षण का केंद्र होगा रामलला सदन देवस्थान होगा। जिसको रामलला के नामकरण स्थल के रूप में देवस्थान माना जाता है। जो भगवान रामलला के गर्भगृह से सटा हुआ है। प्राचीन मान्यता है कि त्रेता युग में भगवान श्री राम समेत उनके तीनों भाइयों का नामकरण रामलला सदन में हुआ था। जहां पर भगवान वशिष्ठ ने प्रभु राम के साथ उनके तीनों भाइयों का नामकरण किया था। उसकी तमाम कथाएं पुराणों में भी मिलती हैं। राजा दशरथ के महल से ईशान कोण पर स्थित भगवान रामलला की जन्मस्थली से चंद कदम की दूरी पर यह स्थान है। धार्मिक मान्यता के अनुसार आज भी लोग इस स्थल पर अपने परिवार में जन्म लेने वाले नवजात के नामकरण करने के लिए यहां आते हैं। लोगों का मानना है कि राम लला सदन में नामकरण संस्कार किए जाना बेहद शुभ होता है। 5 दिवसीय महोत्सव में दक्षिण भारत से आये वैदिक आचार्यों ने पूरे रीति रिवाज से दक्षिण परम्परा में पूजन अर्चन कराया। महोत्सव रामनगरी के चर्चा का विषय रहा। रामनगरी के विशिष्ट संतो का सम्मान रामलला सेवा सदन के पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी डा राघवाचार्य जी ने किया।
रामलला सदन के जीर्णोद्धारक जगदगुरु स्वामी राघवाचार्य महाराज ने बताया कि यह स्थान करीब तीन सौ वर्ष प्राचीन है। इस मंदिर का दक्षिण भारत की पारम्परिक शैली में निर्माण कराया गया है।उसी परम्परा में उपासना भी होती है। इसके कारण मंदिर में प्रतिष्ठित होने वाले भगवान राम-लक्ष्मण व सीताजी समेत रामानुजीय परम्परा के आचार्यों की मूर्तियां भी महाबलीपुरम में ही निर्मित हैं। मंदिर के अचल विग्रह शालिग्राम शिला से निर्मित हैं।मंदिर में भगवान के प्राण प्रतिष्ठा के साथ गरुण स्तम्भ व गोपुरम का भी पूजन किया गया।
रामलला सेवा सदन के पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य डा राघवाचार्य बताते हैं कि महर्षि बाल्मीकि ने अपनी बाल्मीकि रामायण में भी इसका जिक्र किया है। जिसमें वर्णित है कि भगवान राम के चारों भाइयों का नामकरण इसी जगह पर हुआ था।इसीलिए इस पूरी जगह को रामलला सदन के नाम से जाना जाता है। डा राघवाचार्य ने कहा कि भगवान श्री राम,भरत,शत्रुघ्न समेत लक्ष्मण का नामकरण संस्कार गुरुदेव वशिष्ठ ने यहीं पर किया था। महोत्सव में आये संत धर्माचार्य का अभिनन्दन जगदगुरु रामानुजाचार्य स्वामी राघवाचार्य जी महाराज व महोत्सव के मुख्य यजमान गोविंद कुमार लोहिया ने किया। कार्यक्रम की देखरेख में गुड्डू मिश्रा, रमेश मिश्रा सिब्बू,राघवेंद्र मिश्रा अप्पू, विनोद जी, मनोज जी,प्रमोद सहित स्वामीजी के शिष्य परिकर लगे रहें।