: तोताद्रि स्वामी जी का रामनगरी में होगा ऐतिहासिक अभिनन्दन
Sat, Feb 4, 2023
श्रीवानमामलै नांगनेरी, तमिलनाडु के 31वें पीठाधीश्वर श्रीतोताद्रि स्वामी आज रामनगरी में
अयोध्या। विश्व के समस्त श्रीतोताद्रि मठों की प्रधानतम पीठ श्रीवानमामलै नांगनेरी, तमिलनाडु के 31वें पीठाधीश्वर श्रीतोताद्रि स्वामी शनिवार को अयोध्या आ रहे हैं। वे रामनगरी के विभीषण कुंड स्थित श्रीउत्तर तोताद्रि मठ में तीन दिनों तक प्रवास करेंगे। उत्तर तोताद्रि मठ द्वारा संचालित बालदेशिक सोपान ट्रस्ट के प्रबंधक केशव प्रपन्नाचार्य ने बताया कि स्वामी जी शनिवार को अपने सैकड़ों शिष्य-परिकरों संग यहां पहुंच रहे हैं। जो जगद्गुरु नैमिषारण्य से चलकर शाम 4 बजे पहुंचेंगे। अयोध्या पहुंचने पर श्रीतोताद्रि स्वामी का भव्य अभिनन्दन श्रीउत्तर तोताद्रि मठ पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी अनंताचार्य जी की अगुवाई में स्वागत किया जायेगा।
प्रबंधक ने बताया कि पूरे विश्व में तोताद्रि मठ की 200 से ज्यादा शाखाएं हैं। उसकी मूलगद्दी श्रीवानमामलै नांगनेरी है। यह उनकी धार्मिक यात्रा है। वह रामलला का दर्शन कर संत-धर्माचार्यों से मुलाकात करेंगे।
: राम मंदिर में शालिग्राम शिलाओं से बनेगी भगवान की मूर्ति
Thu, Feb 2, 2023
नेपाल से शालिग्राम शिला पहुंची रामनगरी, हुआ विधिवत पूजन अर्चन
राम मंदिर में भगवान राम की मूर्ति मशहूर शिल्पकार राम वनजी सुतार बनाएंगे, इससे पहले उन्होंने सरदार पटेल की सबसे ऊंची मूर्ति से लेकर शिवाजी, भगवान शिव, महाराजा रणजीत सिंह जैसे महापुरुषों की मूर्ति बना चुके
विख्यात शिल्पकार राम वी सुतार भगवान राम की प्रतिमा गढ़ेंगे
भगवान शिव से लेकर भगवान राम तक की भव्य मूर्तियों को आकार देने में सुतार का योगदान ऐतिहासिक
अयोध्या। रामनगरी अयोध्या में भगवान रामलला का भव्य मंदिर निर्माण का काम तेजी से चल रहा है। इसके साथ ही लोगों में इस बात की भी उत्सुकता है कि मंदिर में भगवान राम की प्रतिमा जो लगेगी, उसका स्वरूप कैसा होगा। मूर्ति में भगवान के बाल रूप के स्वरूप को लेकर एक्सपर्ट्स का रिसर्च जारी है। इस बीच 6 करोड़ साल पुरानी नेपाल की गंडकी नदी की शालिग्राम शिला मंगलवार को रामनगरी अयोध्या पहुंच गई। इस शिला से ही भगवान की प्रतिमा बननी है।
इस शिला से विख्यात शिल्पकार राम वी सुतार भगवान की प्रतिमा गढ़ेंगे। पवित्र शिला से भगवान की भव्य मूरत गढ़ने की जिम्मेदारी सुतार को यूं ही नहीं दी गई है। उन्होंने भारत में स्टैच्यू ऑफ यूनिटी से लेकर शिवाजी, भगवान शिव और बाबा साहेब अंबेडकर तक की मूर्तियों का शिल्प किया है।
राम वी सुतार दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति स्टैच्यू ऑफ यूनिटी बनाने वाले विश्वप्रसिद्ध शिल्पकार हैं। 98 साल के हो चुके राम वनजी सुतार महाराष्ट्र के धूलिया जिले के गोंडूर गांव में 19 फरवरी 1925 को पैदा हुए थे। श्रीराकृष्ण जोशी से कला के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा लेकर सुतार ने मुंबई के जेजे स्कूल ऑफ आर्ट में ऐडमिशन लिया। इसके बाद साल 1959 में वह दिल्ली आ गए और भारत सरकार के सूचना-प्रसारण मंत्रालय में काम करने लगे। इससे पहले वह फ्रीलांस मूर्तिकार के रूप में काम करते थे। दिल्ली के लक्ष्मीनगर में उन्होंने एक स्टूडियो खोला। 1990 से नोएडा में बस गए सुतार ने साहिबाबाद में साल 2006 में अपनी कास्टिंग फैक्ट्री स्थापित की। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि स्कूल के समय में ही उन्होंने सबसे पहले महात्मा गांधी का एक मुस्कुराता हुआ चित्र बनाया था।
महात्मा गांधी से बहुत ज्यादा प्रभावित सुतार ने भारतीय ऐतिहासिक धरोहरों को पुनर्स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। साल 1954 से 1958 के बीच उन्होंने अजंता और एलोरा की गुफाओं की कई पुरानी नक्काशियों को फिर से स्थापित करने में योगदान दिया। पत्थर की एक ही चट्टान से उन्होंने मध्य प्रदेश में चंबल स्मारक को शानदार तरीके से तराशा। साल 1959 की बात है। भाखड़ा-नांगल बांध बनाने वाले मजदूरों को सम्मानित करने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने 50 फुट के लेबर स्टैच्यू के शिल्प का काम सुतार को दिया था। यह प्रतिमा 16 जनवरी 1959 को स्थापित की गई, जो आज भी मई दिवस की प्रतिनिधि तस्वीर मानी जाती है।
सुतार ने भारत में राजनेताओं से लेकर ऐतिहासिक नायकों तक की इतनी मूर्तियों को बनाने में योगदान दिया है कि उन्हें आज का विश्वकर्मा कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। विश्वकर्मा को देवताओं का शिल्पकार माना जाता है और कहा जाता है कि शिव के निर्देश पर सोने की लंका को बनाने में उनका ही हाथ है। वैसे ही भगवान शिव से लेकर अब भगवान राम तक की भव्य मूर्तियों को आकार देने में सुतार का योगदान ऐतिहासिक हो गया है।
गुजरात में बनी दुनिया की सबसे ऊंची 182 मीटर की मूर्ति राम वी सुतार ने ही तैयार की है। दिल्ली की 10 फीट लंबी गोविंद वल्लभ पंत की कांस्य प्रतिमा, बिहार में कर्पूरी ठाकुर, अनुग्रह नारायण सिन्हा की मूर्ति, अमृतसर में महाराजा रणजीत सिंह की 21 फीट ऊंची प्रतिमा के साथ संसद के अंदर लगी महात्मा गांधी की मूर्ति को भी सुतार ने ही आकार दिया है। संयुक्त राष्ट्र के सुरक्षा परिषद के मुख्यालय पर पिछले साल महात्मा गांधी की एक प्रतिमा स्थापित की गई थी। इस प्रतिमा का शिल्प भी राम वनजी सुतार ने किया था। महात्मा गांधी की यह पहली मूर्ति है, जिसे यूएन मुख्यालय में स्थापित किया गया। रामनगरी में लता मंगेशकर को समर्पित नयाघाट पर लगी वीणा की विशाल प्रतिमा भी सुतार ने ही तैयार की है।
रामजी सुतार अयोध्या के बहुप्रतीक्षित राम मंदिर में भगवान राम की रूप प्रतिमा का शिल्प तो करेंगे ही। इसके साथ ही अयोध्या में बनने वाली दुनिया की सबसे ऊंची भगवान राम की मूर्ति को भी बनाने में वह अपने बेटे अनिल सुतार के साथ लगे हैं। इसके अलावा मुंबई में छत्रपति शिवाजी महाराज की 212 मीटर ऊंची और बाबा साहेब की 137.2 मीटर ऊंची प्रतिमा को बनाने में भी वह अपना योगदान दे रहे हैं। कर्नाटक में भगवान शिव की 46.6 मीटर ऊंची मूर्ति को भी सुतार ही तैयार कर रहे हैं।
राम वी सुतार को उनकी कलात्मक शिल्प साधना को सम्मानित करते हुए साल 1999 में तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने पद्मश्री से अलंकृत किया था। इसके अलावा उन्हें पद्म भूषण पुरस्कार और टैगोर कल्चरल अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया है। सुतार बॉम्बे आर्ट्स सोसाइटी की ओर से 3 पुरस्कारों से सम्मानित हुए हैं। इसके अलावा साहित्य कला परिषद नई दिल्ली की ओर से भी उन्हें पुरस्कार और सम्मान प्राप्त है।
: सुरसर मंदिर में ठाकुर का जन्मोत्सव व रंगोत्सव भव्य और ऐतिहासिक होगा: प्रियनाथ
Thu, Feb 2, 2023
अंतरराष्ट्रीय धार्मिक संगठन अखिल भारत जयगुरू संप्रदाय एवं ओमकारनाथ मिशन की तत्वावधान में रामनगरी के सुरसर मंदिर में रंगोत्सव की तैयार शुरु
अयोध्या। राजाधिराज अनंत श्रीश्री ठाकुर सीतारामदास ओंकारनाथ देव जी के उत्तराधिकारी एवं वर्तमान में सम्प्रदाय के सर्वाधीष और प्रमुख आचार्य श्रीश्री किंकर विठ्ठल रामानुज जी महाराज के सानिध्य में ठाकुर का जन्मोत्सव व रंगोत्सव भव्य और ऐतिहासिक मनाने की तैयारी की जा रही है। रामनगरी अयोध्या के प्रसिद्ध पीठ सुरसर मंदिर में अंतरराष्ट्रीय धार्मिक संगठन अखिल भारत जयगुरू संप्रदाय एवं ओमकारनाथ मिशन की तत्वावधान में बसंत पंचमी से ही रंगोत्सव की तैयारी मंदिर में शुरु हो जाती है। पूरे सुरसर मंदिर को विशेष तरीक़े से सजाया गया है। मंदिर में रंगोत्सव की ही धूमधाम से मनाया जाएगा।
इस विशेष अवसर पर एक अखिल भारतीय पारंपरिक धर्म सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है जिसमे देश के विभिन्न क्षेत्र, प्रदेश के संत, महात्मा, लेखक और बुद्धिजीवी वर्ग ठाकुर जी के पावन जन्मदिवस पर उपस्थित होंगे। देश और विदेश के पारंपरिक धर्म के सबसे अच्छे और सबसे सम्मानित सन्तो द्वारा महाराज जी का सम्मान और अभिवादन किया जाएगा और साथ ही सभी संत श्रीश्री ठाकुर के प्रति अपनी आदरांजलि प्रस्तुत करेंगे। उसी के अंतर्गत भविष्य के पारंपरिक धर्म के मार्ग की एक रूपरेखा तैयार की जाएगी। इस विशेष कार्यक्रम के अलावा अन्य कई कार्यक्रम भी आयोजित किए जायेंगे। कार्यक्रम की तैयारी अखिल भारतीय जयगुरु सम्प्रदाय ट्रस्ट से जुड़े महासचिव प्रियनाथ चट्टोपाध्याय व इंद्राणी चट्टोपाध्याय कर रहें है। इस उत्सव में रामनगरी समेत पूरे भारत से विशिष्ट संत धर्माचार्यों का अभिनन्दन होगा साथ ही कथा प्रवचन व विशाल भंडारा होगा।