: संतों की मणिमाला में एक थे महंत जानकी शरण: महन्त राजीव लोचन शरण
Tue, Dec 13, 2022
सद्गुरु बधाई भवन मन्दिर के पूर्वाचार्य की 20 वी पुण्यतिथि शिद्दत से मनाई गई
अयोध्या। स्वर्गद्वार स्थित सिद्धपीठ श्री सद्गुरु बधाई भवन मन्दिर के पूर्वाचार्य साकेतवासी महंत जानकी शरण महराज की 20 वी पुण्यतिथि पर अयोध्या के संतों महंतों ने श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि श्री महाराज जी अयोध्या के संतों की मणिमाला में एक थे और हमेशा प्रभु की सेवा और गांव सेवा संत सेवा अतिथि सेवा में लीन रहते थे। सेवा को ही ईश्वर प्राप्ति का रास्ता मानते थे। श्रद्धांजलि सभा के अवसर पर मंदिर के वर्तमान महन्त राजीव लोचन शरण महाराज ने कहा कि स्वामी जानकी शरण अद्वितीय संत रहे। साथ ही धार्मिक विद्वान के साथ ही सभी भक्तों को सद मार्ग प्रदान किया। वे सदैव ही साधु संत समाज को नई दिशा प्रदान किए। हम सभी को उनके बताए हुए पद चिन्हों पर चलना चाहिए। इसके अलावा अयोध्या के प्रमुख धर्म आचार्यों ने भी उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके व्यक्तित्व कृतित्व पर वृहद रूप से प्रकाश डालें। इस दौरान हजारों की संख्या में विराट साधु संत समाज का विशाल भंडारा हुआ। जिसमें आए समस्त संतों को मंदिर के परमार्थी गौ संतसेवी महन्त राजीवलोचन शरण जी महाराज ने अंग वस्त्र भेंटकर स्वागत सम्मान किया श्रद्धांजलि सभा में मणिराम दास छावनी के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास , जगतगुरु राम दिनेशाचार्य,लक्ष्मण किला के महंत मैथिली रमण शरण,बावन मंदिर के महंत वैदेही बल्लभ शरण, राम वल्लभाकुंज के अधिकारी राजकुमार दास, मंगल भवन के महंत कृपालु राम भूषण दास जी महाराज , श्रीराम आश्रम के महंत जयराम दास,महंत जनमेजय शरण, महंत अवधेश कुमार दास, महंत रामकुमार दास, नागा राम लखन दास सहित हजारों संत महंत उपस्थित होकर श्री महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित की।
: महंत नारायणाचारी शिद्द्त से हुए शिरोधार्य
Mon, Dec 12, 2022
79वीं जयंती पर आचारी मंदिर में संत धर्माचार्यों ने श्रद्धांजलि दी
राममंदिर आंदोलन में जिन चुनिंदा संतों ने भूमिका निभाई उनमें महंत नारायणाचारी अग्रिम पंक्ति में रहे: जगद्गुरु
गुरुदेव भगवान की स्मृतियां सदैव अक्षुण्ण रहेगी: महंत विवेक आचारी
अयोध्या। रामनगरी की प्राचीनतम व पौराणिक पीठ आचारी मंदिर के पूर्वाचार्य राम मंदिर आन्दोलन में बढ़ चढ़ कर भाग लेने वाले महंत नारायणाचारी जी महाराज की 79वीं जयंती रविवार को बहुत धूमधाम से मनाई गई है। इस अवसर पर संत-धर्माचार्यों ने उन्हें याद करते किया। रसिक पीठाधीश्वर महंत जन्मेजय शरण ने कहा कि महंत नारायणाचारी जी महाराज का राममंदिर के आंदोलन में उनका योगदान कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।
जगद्गुरु रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य ने कहा कि राममंदिर आंदोलन के दौरान जिन चुनिंदा संतों ने अहम भूमिका निभाई थी उनमें महंत नारायणाचारी जी महाराज अग्रिम पंक्ति में शामिल रहे। उनके जैसे संतों ने ही मंदिर आंदोलन को धार दी थी।
महंत विवेक आचारी ने कहा कि पूज्य गुरुदेव भगवान की स्मृतियां सदैव अक्षुण्ण रहेगी। उनके द्वारा स्थापित परंपराओं का सम्यक निर्वहन ही हमारी प्रतिबद्धता है।जयंती समारोह आचारी मंदिर के महंत विवेक आचारी के संयोजन में हुआ।
आयें हुए अतिथियों का स्वागत कौस्तुभमणि आचारी व बादल आचारी ने किया।
जयंती समारोह में मुख्य रुप से रसिक पीठाधीश्वर महंत जन्मेजय शरण, जगद्गुरू रामानन्दाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के प्रवक्ता महंत गौरीशंकर दास,तुलसीदास जी की छावनी के महंत जनार्दन दास,महंत अर्जुन दास, महंत रामजीशरण, महंत परशुराम दास, हनुमानगढ़ी के सरपंच महंत रामकुमार दास, महंत शशिकांत दास, महंत दिलीप दास शास्त्री, महंत मनीष दास, राजगोपाल मंदिर के डा शरद जी, नागा रामलखन दास सहित बड़ी संख्या में संत महंत व मंदिर से जुड़े शिष्य परिकर मौजूद रहे।
: भारतीय संस्कृति और आस्था का प्रतीक है श्री राम जन्मभूमि मंदिर: रामदिनेशाचार्य
Mon, Dec 12, 2022
नन्दीग्राम भरत कुंड में श्रीराम कथा के तृतीय दिवस पर मनाया गया श्री रामजन्मोत्सव, चारों तरह छाया उल्लास
दशरथ राजमहल बड़ा स्थान के पीठाधीश्वर बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य जी महाराज की अध्यक्षता में हो रही रामकथा
अयोध्या। श्रीरामजन्मभूमि पर भव्य राममंदिर निर्माण बड़े ही जोर शोर से चल रहा है। इसकी खुशी श्रीराम कथा महोत्सव से बयां हो रही है। अयोध्या के नन्दीग्राम भरत कुंड के श्रीराम जानकी मंदिर में भव्य श्रीरामकथा का आयोजन हो रहा है। जिसमें जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी हर्याचार्य जी के शिष्य जगद्गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशाचार्य के मुखारविंद श्रीराम कथा की अमृत वर्षा हो रही है। कथा के तृतीय दिवस में आज राम जन्म महोत्सव मनाया गया। रामानंदाचार्य जी ने कहा कि लोक कल्याण के लिए होता है भगवान श्रीराम का जन्म। जहां सभी वेद वेदांत के परे परमात्मा कौशल्या पुत्र बनकर आते हैं निश्चित रूप से यह सनातन परंपरा के गौरव है। उन्होंने कहा कि अयोध्या की पावन भूमि में निश्चित रूप से यह गौरव का क्षण है जब भारतीय संस्कृति और आस्था के प्रतीक श्री राम जन्मभूमि मंदिर का दिव्य भव्य मंदिर बन रहा है। ऐसे समय में राम जन्मोत्सव मनाना बड़े सौभाग्य का विषय है।कथाव्यास ने कहा कि जब धारा पर दुष्टों का अत्याचार बढ़ जाता है परमात्मा को प्राप्त करने के लिए भक्त अपने सारे संबंधों की रस्सी बनाकर भगवान के चरणाविंद से बांध देता है बांध कर खींच लेता है तो भगवान अपने आप को रोक नहीं पाते और अवतार ग्रहण कर लेते हैं।
कथा की अध्यक्षता करते हुए दशरथ राजमहल बड़ा स्थान के पीठाधीश्वर बिंदुगाद्याचार्य स्वामी देवेंद्रप्रसादाचार्य जी महाराज ने कहा कि जगत कल्याण जगत का उद्धार और जगत में के ऊपर कृपा करने के लिए अयोध्या के इस पावन भूमि को और गौरव प्रदान करने के लिए साक्षात परमात्मा भगवान श्री राम के रूप में अवतरित हुए और सारा समाज परमात्मा के अवतरित होने से आनंदित उल्लासित अपने आप को सौभाग्यशाली मानने लगा। वह ब्रह्म जो बड़े-बड़े ज्ञानी महानी ध्यानी के ज्ञान गम में से परे होता है लेकिन जब कोई भक्ति मयी कौशल्या और बैराग्य रूपी दशरथ उस परमात्मा को प्राप्त करना चाहते हैं तब वह अवतार धारण करके पुत्र बनकर आ जाता है।
महोत्सव के संयोजक बिंदुगाद्याचार्य के कृपापात्र शिष्य मंगल भवन पीठाधीश्वर महंत कृपालु रामभूषण दास जी ने आये हुए अतिथियों का स्वागत अभिनन्दन किये।
व्यवस्थापक में गौरव दास शास्त्री शिवेंद्र दास शास्त्री रहे।आज की कथा में तुलसीदास जी की छावनी के महंत जनार्दन दास जी महाराज, वैदेही भवन के महंत रामजीशरण जी महाराज, डा उद्धव शरण जी महाराज, रामकृष्ण मंदिर के महंत महामंडलेश्वर गणेशानंद जी महाराज,महंत राममिलन दास, महंत अतुलित दास सहित सैकड़ों संत महंत एवं राम कथा के रसिक गण उपस्थित रहे।